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  "type": "article",
  "title": "पश्चिम एशिया में तनाव और महंगे कच्चे तेल से भारतीय बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 242 अंक फिसला",
  "summary": "वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड के 107 डॉलर प्रति बैरल पार जाने और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बीच सेंसेक्स और निफ्टी छह महीने के निचले स्तर के करीब आ गए हैं।",
  "content": "घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक छह महीने के निचले स्तर के बिल्कुल करीब पहुंच गए। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की तरफ से पूंजी की निरंतर निकासी ने बाजार के दबाव को और बढ़ा दिया। दिनभर के उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद आईटी, फाइनेंस और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में जोरदार बिकवाली दर्ज की गई।\n\nसेंसेक्स और निफ्टी के साथ स्मॉलकैप में भी गिरावट\nमंगलवार के कारोबारी सत्र के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 प्रतिशत कमजोर होकर 72,529.07 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत गिरकर 22,716.20 के स्तर पर सिमट गया। यह कमजोरी केवल मुख्य बेंचमार्क सूचकांकों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार पर भी इसका गहरा असर देखा गया। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिसके परिणामस्वरूप निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 1.02 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 0.95 प्रतिशत लुढ़क गया।\n\nबाजार में आई इस कमजोरी की प्रमुख वजहें\nघरेलू बाजार में आई इस मंदी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारक जिम्मेदार रहे। पहला बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1.74 प्रतिशत चढ़कर 107.1 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। भारत अपनी कुल घरेलू खपत का अधिकांश कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा क्रूड घरेलू मुद्रास्फीति को भड़काने, देश के चालू खाता घाटे और आयात बिल में इजाफा करने तथा भारतीय कॉरपोरेट कंपनियों के परिचालन मार्जिन पर सीधा प्रहार करने की आशंका पैदा करता है। दूसरा बड़ा कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख रहा, जिन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार अपनी पूंजी निकाली, जिससे बाजार की रिकवरी की उम्मीदों पर पानी फिर गया।\n\nकिन शेयरों में रही गिरावट और किसने दर्ज की बढ़त\nसेक्टरवार स्थिति पर गौर करें तो आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के काउंटरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई। व्यक्तिगत शेयरों में टाइटन का शेयर 3.00 प्रतिशत टूटकर सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला स्टॉक बना। इसके अलावा विप्रो में 2.95 प्रतिशत, एचसीएल टेक में 2.44 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 2.06 प्रतिशत, टीसीएस में 1.85 प्रतिशत और अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.78 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.30 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 0.75 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। दूसरी तरफ विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। अडानी एंटरप्राइजेज ने 5.01 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की, जबकि अडानी पोर्ट्स 4.49 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इसके साथ ही डॉ. रेड्डीज 2.53 प्रतिशत, सन फार्मा 1.47 प्रतिशत, इंफोसिस 1.22 प्रतिशत और कोटक बैंक 1.11 प्रतिशत की मजबूती हासिल करने में कामयाब रहे।\n\nइसका आप पर असर\nकच्चे तेल में उछाल और शेयर बाजार में लगातार गिरावट का सीधा असर आम नागरिकों की वित्तीय योजना, बचत और रोज़मर्रा के खर्चों पर पड़ सकता है।\n\n• निवेशकों के पोर्टफोलियो पर असर: खुदरा निवेशकों के म्यूचुअल फंड और प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश के मूल्य में तत्काल कमी दर्ज होगी। मिडकैप और स्मॉलकैप में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट से हालिया निवेशों का रिटर्न प्रभावित हो सकता है।\n• पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड का 107.1 डॉलर प्रति बैरल पहुंचना घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ाएगा। यदि आयात लागत लंबी अवधि तक ऊंची रही तो आने वाले हफ्तों में माल ढुलाई और यात्रा खर्च महंगे हो सकते हैं।\n• महंगाई और बजट पर दबाव: तेल की बढ़ती कीमतें आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ा सकती हैं। परिवारों को अपने मासिक घरेलू बजट में अतिरिक्त प्रावधान करने की आवश्यकता पड़ सकती है।\n• विदेशी पूंजी निकासी और मुद्रा जोखिम: विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली से भारतीय रुपये पर डॉलर के मुकाबले दबाव बढ़ सकता है। इससे विदेश यात्रा, विदेशी शिक्षा और आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के बिल में बढ़ोतरी हो सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nघरेलू इक्विटी बाजारों में आई इस तेज गिरावट के मुख्य कारण पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट और उससे पैदा हुई वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता है।\n\n• कच्चे तेल में अचानक उछाल: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने का डर गहराया है, जिससे ब्रेंट क्रूड 1.74 प्रतिशत बढ़कर 107.1 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह सीधा आर्थिक जोखिम पैदा करता है।\n• विदेशी फंड्स की निरंतर बिकवाली: अंतरराष्ट्रीय जोखिमों को देखते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उभरते बाजारों से जोखिम वाली पूंजी निकाल रहे हैं। विदेशी निवेशकों का यह पैसा सुरक्षित संपत्तियों की ओर जाने से घरेलू शेयरों पर भारी बिक्री दबाव बन गया।\n• कॉरपोरेट मार्जिन पर आशंका: बैंकिंग, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कच्चे माल की ऊंची लागत और वैश्विक मंदी की चिंताएं हावी हो गई हैं। इसी वजह से टाइटन, विप्रो और टीसीएस जैसे बड़े स्टॉक्स में भारी बिकवाली हुई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंकों की गिरावट के साथ बंद हुए?\nसेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 प्रतिशत गिरकर 72,529.07 पर और निफ्टी 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत टूटकर 22,716.20 के स्तर पर बंद हुआ।\n\n2. शेयर बाजार में गिरावट के दो सबसे प्रमुख कारण क्या हैं?\nब्रेंट क्रूड का 1.74 प्रतिशत बढ़कर 107.1 डॉलर प्रति बैरल पहुंचना और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालना इसके मुख्य कारण हैं।\n\n3. स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों का प्रदर्शन कैसा रहा?\nनिफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.02 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।\n\n4. सत्र के दौरान किन शेयरों में सबसे भारी गिरावट देखने को मिली?\nटाइटन में 3.00 प्रतिशत, विप्रो में 2.95 प्रतिशत, एचसीएल टेक में 2.44 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 2.06 प्रतिशत और टीसीएस में 1.85 प्रतिशत की गिरावट रही।\n\n5. कमजोर बाजार में कौन से शेयर बढ़त हासिल करने में सफल रहे?\nअडानी एंटरप्राइजेज में 5.01 प्रतिशत, अडानी पोर्ट्स में 4.49 प्रतिशत, डॉ. रेड्डीज में 2.53 प्रतिशत, सन फार्मा में 1.47 प्रतिशत और इंफोसिस में 1.22 प्रतिशत की बढ़त रही।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-30",
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