पश्चिम एशिया में गहराते तनाव के बीच कच्चे तेल में सीमित हलचल, तकनीकी स्तरों पर टिकी ट्रेडर्स की नजर मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद डब्ल्यूटीआई क्रूड सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, जहां प्रमुख तकनीकी बाधाओं के पार जाने पर ही नई तेजी की संभावना बनेगी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में मध्य पूर्व के बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अमेरिकी बेंचमार्क कच्चे तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान कोई बड़ी आक्रामक तेजी देखने को नहीं मिली। तेल के खरीदार इस समय बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार सीमित दायरे में कंसोलिडेट हो रहा है। हालिया कारोबारी गतिविधियों में 94.65 डॉलर के साप्ताहिक निचले स्तर से मामूली सुधार दर्ज करने के बाद भी बाजार रक्षात्मक मुद्रा में बना हुआ है। दिन के कारोबार में तेल की कीमतें लगभग 0.20% की गिरावट के साथ 96.35 डॉलर के आसपास दर्ज की गईं, हालांकि यह स्तर 20 मई के बाद से बने सबसे ऊंचे दायरे के बेहद करीब बना हुआ है। तकनीकी स्तर और फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट का गणित चार्ट पर तकनीकी संरचना अभी भी हाल के स्थापित अपट्रेंड के विस्तार का समर्थन कर रही है, लेकिन नए खरीदार अभी भी स्पष्ट पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं। कीमतों के लिए सबसे बड़ी तात्कालिक चुनौती 78.6% फाइबोनैचि स्तर पर बनी हुई है, जो 98.55 डॉलर पर स्थित है। जब तक तेल इस बाधा के ऊपर मजबूती से नहीं टिकता, तब तक नई लंबी तेजी का रास्ता साफ होना मुश्किल नजर आ रहा है। इस स्तर को पार करने के बाद बाजार की नजर हालिया चक्र के उच्चतम स्तर 107.11 डॉलर पर टिकेगी, जिसके टूटने से बुल्स को नई ऊर्जा मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर, यदि बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो नीचे की तरफ पहला मजबूत समर्थन 61.8% फाइबोनैचि स्तर यानी 91.82 डॉलर पर मौजूद है। इसके बाद 50% रिट्रेसमेंट स्तर 87.10 डॉलर पर आता है, जिसके ठीक नीचे 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए 85.24 डॉलर के करीब स्थित है। अगर गिरावट और गहरी होती है, तो 38.2% रिट्रेसमेंट स्तर 82.38 डॉलर का दायरा सामने आ सकता है। ताजा मार्केट डेटा और वर्तमान तकनीकी संकेतक लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, क्रूड ऑयल फ्यूचर्स का भाव 100.30 डॉलर पर दर्ज किया गया, जो पिछले बंद भाव 101.91 डॉलर की तुलना में 1.58% की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के मुकाबले 0.88 गुना रहा। वर्तमान तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 64 के स्तर पर है, जो मजबूत स्थिति में है। एमएसीडी 5.12 पर बना हुआ है, जबकि सिग्नल लाइन 4.34 पर है, जिससे 0.78 का बुलिश हिस्टोग्राम दिखता है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 94.81 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 89.11 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 79.29 डॉलर पर है। 50-दिवसीय एसएमए 86.40 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 80.68 डॉलर पर दर्ज है, जहां 50 ईएमए का 200 ईएमए के ऊपर बना रहना एक दीर्घकालिक अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस का संकेत देता है। 20-अवधि के बॉलिंजर बैंड्स 77.45 डॉलर से 108.23 डॉलर के बीच फैले हैं और मिडिल बैंड 92.84 डॉलर पर है। 14-दिवसीय एडीएक्स 34 पर ट्रेंडिंग गति दर्शा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 72 और सिग्नल लाइन 78 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 4.27 डॉलर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव और स्टॉप-लॉस बफर को रेखांकित करता है। कारोबारी सत्र के लिए मुख्य पिवट 100.99 डॉलर पर है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस आर1 102.79 डॉलर और दूसरा आर2 105.28 डॉलर पर है, जबकि पहला सपोर्ट एस1 98.50 डॉलर और दूसरा एस2 96.70 डॉलर पर स्थित है। 20-दिवसीय सपोर्ट 79.62 डॉलर और रेजिस्टेंस 106.75 डॉलर के करीब है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की पहचान और वैश्विक भूमिका वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल का एक विशिष्ट ग्रेड है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ यह दुनिया के तीन प्रमुख तेल बेंचमार्क में गिना जाता है। अपनी कम घनत्व यानी कम ग्रेविटी और कम सल्फर मात्रा के कारण इसे क्रमशः हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, क्योंकि रिफाइनरियों में इससे पेट्रोल और डीजल बनाना बेहद आसान होता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका मुख्य वितरण केंद्र ओकलाहोमा का कुशिंग हब है, जिसे दुनिया के पाइपलाइनों का चौराहा भी कहा जाता है। दुनिया भर के मीडिया और वित्तीय बाजारों में डब्ल्यूटीआई की कीमतों को मानक के रूप में उद्धृत किया जाता है। कीमतों को तय करने वाले आपूर्ति और मांग के समीकरण कच्चे तेल की कीमतें अनिवार्य रूप से मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। मजबूत वैश्विक आर्थिक विकास ईंधन की खपत को बढ़ावा देता है, जिससे मांग और कीमतें ऊपर चढ़ती हैं। इसके विपरीत सुस्त आर्थिक वृद्धि मांग को घटाकर दबाव बनाती है। युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तेल की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों में अप्रत्याशित उछाल ला सकते हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई की कीमतों पर सीधा असर डालता है। चूंकि वैश्विक तेल व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए कमजोर डॉलर गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल को सस्ता बना देता है, जिससे मांग में तेजी आ सकती है, जबकि मजबूत डॉलर आयात को महंगा बना देता है। अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और ऊर्जा सूचना एजेंसी यानी ईआईए द्वारा हर हफ्ते जारी की जाने वाली इन्वेंट्री रिपोर्ट कच्चे तेल के रुझानों को काफी प्रभावित करती हैं। इन आंकड़ों में अमेरिकी भंडारों के घटने का मतलब मांग में मजबूती होता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि इन्वेंट्री में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देती है और भाव नीचे आते हैं। एपीआई का डेटा हर मंगलवार को आता है, जबकि ईआईए का आधिकारिक डेटा अगले दिन बुधवार को प्रकाशित होता है। 75% मामलों में इन दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 1% के अंतर के भीतर समान रहते हैं, हालांकि ईआईए एक सरकारी संस्था होने के कारण अधिक प्रामाणिक मानी जाती है। ओपेक और ओपेक प्लस की उत्पादन नीतियां पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन यानी ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है। इसके सदस्य साल में दो बार औपचारिक बैठकें करके उत्पादन कोटे का सामूहिक निर्धारण करते हैं। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला लेता है, तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। वहीं उत्पादन बढ़ाने का निर्णय कीमतों को नीचे धकेल देता है। इसके अलावा ओपेक प्लस में ओपेक के मूल देशों के साथ दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख राष्ट्र रूस है। मुद्रा बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की ताजा चाल वैश्विक वित्तीय बाजारों में शुक्रवार को अन्य प्रमुख संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव दर्ज किए गए। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी लगातार दूसरे दिन सकारात्मक रुख के साथ 0.7100 के ऊपर बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी ने डॉलर पर दबाव डाला, जबकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक गवर्नर बुलक के सख्त बयानों ने ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को बल दिया। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर की गिरावट को सीमित रखा। अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी ने शुक्रवार के सत्र में तेजी पकड़ते हुए 157.00 का आंकड़ा पार कर लिया। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत ब्याज दर को 1.25% तक बढ़ाने और मौद्रिक नीति बयान पेश किए जाने के बावजूद येन पर बिकवाली का भारी दबाव बना रहा, क्योंकि दर वृद्धि के पक्ष में दो असहमति के सुर भी सामने आए थे। निवेशकों की नजर अब बैंक ऑफ जापान गवर्नर उएदा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी है। जापान की लंबे समय तक रही अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तपोषित किया था, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब जब बैंक ऑफ जापान नीति को और सख्त करने की तैयारी में है, यह वित्तीय लाभ एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। कीमती धातुओं में सोना शुक्रवार की शुरुआत में 4,350 डॉलर के आसपास अपनी पिछली रिकवरी को बरकरार रखे हुए दिखा, हालांकि खरीदार अभी भी सतर्कता बरत रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के चलते डॉलर का कारोबार सुस्त रहा। सोना गुरुवार को 100-दिवसीय एसएमए के ऊपर लगभग 4,320 डॉलर पर स्थिर हुआ था, जहां दैनिक आरएसआई तटस्थ स्थिति में दिखाई दिया। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव और मध्य पूर्व के तनाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं और ईंधन की लागत पर पड़ सकता है। • भारत में प्रभाव: भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में उछाल घरेलू मुद्रास्फीति और आयात बिल को बढ़ा सकता है। कच्चे तेल के ऊंचे स्तरों पर बने रहने से आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कटौती की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। • ऊर्जा और परिवहन लागत: परिवहन कंपनियों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए परिचालन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। माल ढुलाई महंगी होने पर रोजमर्रा की खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर ऊपर की तरफ दबाव देखने को मिल सकता है। • इन्वेस्टर पोर्टफोलियो: तेल और गैस कंपनियों, पेंट निर्माताओं और एयरलाइंस के शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। निवेशकों को कमोडिटी से जुड़े सेक्टर्स में पोजीशन लेते समय स्टॉप-लॉस और सपोर्ट लेवल्स का विशेष ध्यान रखना चाहिए। • करेंसी और व्यापार घाटा: कच्चे तेल की ऊंची खरीद लागत से व्यापार घाटा बढ़ता है और भारतीय रुपये की विनिमय दर पर असर पड़ता है। रुपये की कमजोरी अन्य आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी उत्पादों को भी महंगा बना सकती है। ऐसा क्यों हुआ मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख आपूर्ति मार्गों पर मंडराते जोखिम के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें तकनीकी बाधाओं के कारण सीमित दायरे में बनी हुई हैं। वैश्विक मांग की अनिश्चितता और तकनीकी मुनाफावसूली ने बाजार की आक्रामक बढ़त को फिलहाल रोक रखा है। • भू-राजनीतिक जोखिम और आपूर्ति की चिंता: मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंकाएं बनी हुई हैं। हालांकि भौतिक आपूर्ति में तत्काल कोई बड़ा व्यवधान न होने से खरीदार आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं। • प्रमुख फाइबोनैचि तकनीकी अवरोध: तकनीकी चार्ट पर 98.55 डॉलर पर स्थित 78.6% फाइबोनैचि स्तर मजबूत प्रतिरोध के रूप में काम कर रहा है। जब तक यह स्तर स्पष्ट रूप से नहीं टूटता, तब तक संस्थागत ट्रेडर्स नई आक्रामक खरीदारी करने से झिझक रहे हैं। • केंद्रीय बैंकों की नीतियां और मजबूत डॉलर: प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतिगत दरों को सख्त बनाए रखने से आर्थिक विकास की गति सुस्त रहने की आशंका है। उच्च ब्याज दरों का माहौल औद्योगिक मांग को सीमित करता है, जिससे तेल की खपत को लेकर सावधानी बनी हुई है। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अमेरिका में उत्पादित एक हल्का और मीठा कच्चा तेल है, जिसे कम सल्फर के कारण रिफाइन करना आसान होता है। यह वैश्विक तेल व्यापार में सबसे प्रमुख मूल्य बेंचमार्क में से एक है। 2. वर्तमान में कच्चे तेल के लिए प्रमुख तकनीकी प्रतिरोध स्तर कौन से हैं? चार्ट पर तात्कालिक प्रतिरोध 78.6% फाइबोनैचि स्तर यानी 98.55 डॉलर पर स्थित है, जिसके बाद अगला बड़ा स्तर 107.11 डॉलर पर है। 3. गिरावट की स्थिति में तेल को कहां तकनीकी समर्थन प्राप्त है? नीचे की ओर पहला महत्वपूर्ण समर्थन 91.82 डॉलर पर 61.8% फाइबोनैचि स्तर पर है, जबकि इसके बाद 87.10 डॉलर और 85.24 डॉलर के स्तर अहम हैं। 4. कच्चे तेल की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर का क्या प्रभाव पड़ता है? चूंकि कच्चे तेल का वैश्विक व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है और मांग बढ़ती है, जबकि मजबूत डॉलर से तेल महंगा हो जाता है। 5. एपीआई और ईआईए इन्वेंट्री रिपोर्ट का कीमतों से क्या संबंध है? इन रिपोर्टों में तेल भंडारों में गिरावट मांग में तेजी दर्शाती है जिससे कीमतें बढ़ती हैं, जबकि इन्वेंट्री में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देकर कीमतों पर दबाव बनाती है। 6. ओपेक और ओपेक प्लस में क्या अंतर है? ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का संगठन है जो उत्पादन कोटे तय करता है, जबकि ओपेक प्लस में इन देशों के साथ रूस समेत 10 अन्य गैर-ओपेक उत्पादक देश भी शामिल हैं। https://trendkia.com/market/wti-crude-oil-holds-near-mid-96-levels-as-mideast-turmoil-tests-market-bulls-33553 TrendKia — Har trend, sabse pehle.