कच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलीं पश्चिम एशिया में कूटनीतिक वार्ताओं और आपूर्ति चिंताओं के बीच डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल चार दिनों की लगातार कमजोरी से उबरकर 92.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बिकवाली के भारी दबाव के बाद कच्चे तेल के दामों में ठहराव देखने को मिला है। लगातार चार कारोबारी सत्रों तक फिसलने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के भाव मंगलवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान संभलते नजर आए और यह 92.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। बाजार विशेषज्ञ इस हल्की तेजी को तकनीकी सुधार के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य और आपूर्ति तंत्र में आ रहे बदलाव अभी भी कीमतों पर दबाव बना रहे हैं। पश्चिम एशिया में कूटनीतिक पहल और आपूर्ति की स्थिति पश्चिम एशिया के अशांत माहौल में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को समाप्त करने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयासों में तेजी आई है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की आगामी बैठकों से यह उम्मीद बंधी है कि ऊर्जा आपूर्ति में होने वाले बड़े व्यवधानों को टाला जा सकेगा। क्षेत्र में युद्ध के कारण नष्ट हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर का एक कोष स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया है। इस प्रकार की शांति वार्ताओं और वित्तीय पैकेजों से व्यापारियों के बीच ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की चिंता कुछ हद तक कम हुई है। समुद्री मार्गों से होने वाले तेल प्रवाह की बात करें तो सऊदी अरब ने होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए अपनी आपूर्ति की गति तेज बनाए रखी है। पिछले छह दिनों के दौरान इस प्रमुख जलमार्ग से 2.9 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चे तेल की निकासी दर्ज की गई। सप्ताहांत के दौरान उपग्रह से प्राप्त चित्रों के अनुसार सऊदी अरब के खाड़ी निर्यात टर्मिनलों पर विशालकाय सुपरटैंकरों की कुल क्षमता 14 मिलियन बैरल तक पहुंच गई थी। बंदरगाहों पर टैंकरों की इतनी बड़ी संख्या जून के बाद से पहली बार देखी गई है, जो तेल निकासी की भारी मात्रा को दर्शाती है। यमन से हमलों की खबरें और भू-राजनीतिक जोखिम राजनयिक वार्ताओं और राहत भरे संकेतों के समानांतर जमीनी स्तर पर सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रियाद और यानबू स्थित सऊदी अरामको के एक संयंत्र पर हमलों को अंजाम देने का दावा किया है। इसके साथ ही हूती लड़ाकों ने सऊदी समर्थित सैन्य बलों को लाल सागर के तटीय इलाकों तक पहुंचने से रोकने के लिए अपने सैन्य अभियानों को और आक्रामक बना दिया है। इस तरह की घटनाएं ऊर्जा बाजारों में समय-समय पर घबराहट और अस्थिरता पैदा करती रहती हैं। वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल के वायदा बाजार में सट्टेबाजी की स्थिति में भारी फेरबदल हुआ है। टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार हालिया तेजी ने अधिक सट्टेबाजों को आकर्षित तो किया था और शुद्ध सट्टा खरीदारी हाल के हफ्तों में बढ़ रही थी। हालांकि बैंक का यह भी आकलन है कि व्यवस्थित एल्गो ट्रेडिंग करने वाले सीटीए कारोबारी अब डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट दोनों में अपनी हाल में खरीदी गई लांग पोजीशन को तेजी से कम कर रहे हैं। संस्थागत और तकनीकी ट्रेडर्स का यह सतर्क रुख दिखाता है कि बाजार में किसी भी समय मुनाफावसूली हावी हो सकती है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की बुनियादी संरचना वैश्विक कमोडिटी बाजारों में कारोबार होने वाले प्रमुख तेल प्रकारों में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ यह दुनिया के तीन सबसे बड़े बेंचमार्क में शामिल है। अपने कम घनत्व और सल्फर की बेहद अल्प मात्रा के कारण इसे बाजार में हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। कम सल्फर होने की वजह से रिफाइनरियों में इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों का शोधन करना तकनीकी रूप से काफी आसान और किफायती माना जाता है। यह कच्चा तेल मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के तेल क्षेत्रों से निकाला जाता है। देश के भीतर इसका प्रमुख वितरण केंद्र कुशिंग स्थित भंडारण हब है, जिसे दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के रूप में जाना जाता है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जगत, कमोडिटी एक्सचेंजों और समाचार माध्यमों में तेल की कीमतों के आकलन के लिए इसके भाव को प्रमुख संदर्भ माना जाता है। कीमतों को तय करने वाले प्रमुख आर्थिक कारक किसी भी वित्तीय और भौतिक संपत्ति की तरह कच्चे तेल के मूल्य का निर्धारण भी मांग और आपूर्ति के मूलभूत संतुलन पर टिका होता है। वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आने पर ऊर्जा की मांग बढ़ जाती है, जिससे कीमतें चढ़ने लगती हैं, जबकि मंदी या सुस्त विकास मांग को घटाकर कीमतों को नीचे धकेलता है। इसके अतिरिक्त उत्पादक क्षेत्रों में राजनीतिक उथल-पुथल, युद्ध की विभीषिका और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को अचानक तोड़कर कीमतों में भारी उछाल ला सकते हैं। अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव का भी तेल की लागत पर सीधा संबंध होता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पेट्रोलियम सौदे मुख्य रूप से अमेरिकी मुद्रा में तय होते हैं, इसलिए डॉलर में मजबूती आने पर विदेशी खरीदारों के लिए तेल खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घट सकती है। इसके विपरीत जब डॉलर कमजोर होता है, तो गैर-अमेरिकी मुद्राओं वाले देशों के लिए तेल अधिक किफायती हो जाता है, जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। इन्वेंट्री आंकड़े और पेट्रोलियम निर्यातक संगठन तेल के बाजार में साप्ताहिक स्टॉक रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट प्रत्येक मंगलवार को और अमेरिकी ऊर्जा सूचना एजेंसी बुधवार को अपने इन्वेंट्री आंकड़े जारी करती है। ऊर्जा सूचना एजेंसी एक सरकारी संस्था होने के कारण इसके आंकड़ों को वित्तीय हलकों में अधिक विश्वसनीय माना जाता है, यद्यपि दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 75 प्रतिशत मामलों में एक-दूसरे के 1 प्रतिशत के दायरे में रहते हैं। भंडारों में गिरावट मजबूत मांग का संकेत देती है जो कीमतों को बढ़ा सकती है, जबकि स्टॉक में वृद्धि अधिशेष आपूर्ति को दर्शाकर कीमतों को गिराती है। दूसरी ओर पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन ओपेक 12 सदस्य देशों का एक समूह है, जो साल में दो बार औपचारिक बैठकें करके उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब यह समूह उत्पादन में कटौती करता है, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है और दरें ऊपर चढ़ जाती हैं। यदि ओपेक उत्पादन बढ़ाने का फैसला करता है, तो इसका विपरीत असर होता है। इस समूह के साथ जब रूस सहित दस अन्य गैर-ओपेक उत्पादक देश जुड़ते हैं, तो उसे ओपेक प्लस कहा जाता है, जिसका वैश्विक उत्पादन पर अत्यधिक प्रभाव रहता है। विदेशी मुद्रा और व्यापक वित्तीय बाजारों का रुख अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर मजबूती बनाए रखने में सफल रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर के सख्त बयानों के बावजूद व्यापारी बहुप्रतीक्षित ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और डॉलर की व्यापक मजबूती ने इस मुद्रा जोड़ी की तेजी को सीमित रखा है। जापानी येन के मोर्चे पर अमेरिकी डॉलर 157.00 के मध्य स्तर से ठीक नीचे कंसोलिडेशन में रहा। मुद्रा बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की भारी गिरावट को रोकने का काम किया है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है। हालांकि मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के इस प्रत्याशित कदम के बावजूद बैंक ऑफ जापान के नरम रवैये के कारण जापानी मुद्रा पर दबाव बना रहा। कीमती धातुओं में सोने ने एशियाई सत्र में सकारात्मक गति दोबारा हासिल की, लेकिन यह 4,400 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही रहा। तेल की घटती कीमतों ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को थोड़ा कम किया है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी आई और बिना ब्याज वाली इस धातु को कुछ सहारा मिला। तीसरी तिमाही के अंतिम सप्ताहों में प्रवेश करते हुए वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जबकि सॉवरेन बॉन्ड बाजारों में तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे इस उतार-चढ़ाव और 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर का आम उपभोक्ताओं और आयात निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ता है। • भारत में: कच्चे तेल के 90 डॉलर से ऊपर बने रहने से देश के तेल आयात बिल पर दबाव बना रहेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ती हैं तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की दरों के साथ-साथ माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। • घरेलू बजट पर: ऊर्जा की ऊंची कीमतों से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के जरूरी सामान और खाद्य पदार्थों की महंगाई पर पड़ता है। उपभोक्ताओं को अपनी मासिक बचत और ईंधन खर्चों का प्रबंधन अधिक सावधानी से करना होगा। • शेयर बाजार के निवेशकों के लिए: तेल विपणन कंपनियों, पेंट और टायर निर्माताओं जैसे क्षेत्रों के मुनाफे पर महंगे कच्चे तेल का नकारात्मक असर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों में निवेश करने वाले ट्रेडर्स को तिमाही नतीजों और मार्जिन दबाव पर पैनी नजर रखनी चाहिए। • वैश्विक यात्रियों और व्यापारियों के लिए: विमानन ईंधन की लागत में उतार-चढ़ाव हवाई टिकटों की दरों को सीधे प्रभावित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और माल परिवहन के लिए बजट तय करते समय ईंधन सरचार्ज में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल में चार दिनों की मंदी रुकने और कीमतों के 92.30 डॉलर पर टिकने के पीछे कूटनीतिक वार्ताओं और लगातार बने भू-राजनीतिक सैन्य जोखिमों का मिलाजुला प्रभाव है। • राजनयिक प्रयास और आपूर्ति राहत: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक वार्ताएं और संयुक्त राष्ट्र की बैठकें आयोजित हो रही हैं। इसके साथ ही 5 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष के प्रस्ताव और सऊदी अरब द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से 2.9 मिलियन बैरल प्रति दिन के स्थिर निर्यात ने तात्कालिक आपूर्ति संकट के डर को हल्का किया है। • सैन्य तनाव और बुनियादी ढांचे पर खतरे: वार्ता प्रयासों के बावजूद यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रियाद और यानबू स्थित सऊदी अरामको संयंत्र को निशाना बनाने की सूचनाओं ने बाजार में चिंता बनाए रखी है। इसके अलावा लाल सागर तट पर सैन्य गतिविधियों ने जोखिम प्रीमियम को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया। • वायदा बाजार में तकनीकी पोजीशनिंग: संस्थागत एल्गोरिद्मिक फंड्स और व्यवस्थित सटोरियों ने हालिया रैली के बाद अपनी खरीदारी पोजीशन को आंशिक रूप से कम करना शुरू किया है। इस तकनीकी बिकवाली और मुनाफावसूली ने बाजार को नई ऊंचाई छूने से रोकते हुए मौजूदा दायरे में स्थिर किया। सवाल-जवाब 1. मंगलवार को एशियाई सत्र में डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल किस स्तर पर कारोबार कर रहा था? मंगलवार को एशियाई कारोबारी घंटों में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट चार दिनों की गिरावट रोककर 92.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। 2. सऊदी अरब ने होर्मुज जलडमरूमध्य से कितने तेल का परिवहन किया है? सऊदी अरब ने पिछले छह दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से 2.9 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चे तेल की निकासी बनाए रखी है। 3. सऊदी अरब के टर्मिनलों पर सुपरटैंकरों की कितनी क्षमता दर्ज की गई? सप्ताहांत में सऊदी अरब के निर्यात टर्मिनलों पर 14 मिलियन बैरल की संयुक्त क्षमता वाले सुपरटैंकर देखे गए, जो कम से कम जून के बाद का उच्चतम स्तर है। 4. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के मतदान से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो 31 साल का उच्च स्तर है। https://trendkia.com/market/wti-halts-four-day-slump-to-trade-near-92-30-amid-middle-east-headwinds-36082 TrendKia — Har trend, sabse pehle.