# कच्चे तेल में नरमी के बीच $91 से नीचे फिसला डब्ल्यूटीआई, अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरान ने दी होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी

> एशियाई कारोबारी सत्र में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फिसलकर 90.80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी पाबंदियों के जवाब में रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सीमित करने की दो टूक चेतावनी दी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/wti-kachche-tela-men-narami-ke-bicha-91-se-niche-phisala-us-pratibndhon-para-iran-ne-di-hormuz-jaladamarumadhya-bnda-karane-ki-che-37483 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, डब्ल्यूटीआई, होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिका ईरान तनाव, ओपेक, ऊर्जा बाजार, बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी डॉलर

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के भाव पिछले कारोबारी सत्र की हल्की बढ़त के बाद दबाव में आ गए हैं। गुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान अमेरिकी मानक कच्चा तेल फिसलकर लगभग 90.80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक बातचीत की प्रगति को लेकर बनी लगातार अनिश्चितता के कारण कीमतों में कभी भी तेज उछाल आने की संभावना बनी हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी नई घोषणाओं ने ऊर्जा बाजार के रुख को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

## ईरान की तल्ख चेतावनी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भाषण देते हुए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि तेहरान किसी भी प्रकार की धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने अपने देश के आर्थिक विकास के लिए परमाणु तकनीक हासिल करने के संप्रभु अधिकार को दोहराया। इसके साथ ही मसूद पेजेशकियन ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि जब तक ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध और आर्थिक नाकेबंदी लागू रहेगी, तब तक उनका देश रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगाए रखेगा। दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री गलियारे से होती है, जिससे यह बयान बाजार में आपूर्ति के बड़े जोखिम का संकेत दे रहा है।

## डीजल निर्यात और रणनीतिक पाइपलाइनों पर बदलते फैसले
अमेरिका के भीतर ऊर्जा की उपलब्धता और घरेलू चिंताओं को देखते हुए अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने एक नई रणनीति की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन घरेलू रिफाइनरियों के साथ मिलकर डीजल के निर्यात में स्वैच्छिक कटौती पर काम कर रहा है, ताकि विदेशों में ईंधन भेजने पर किसी औपचारिक पूर्ण प्रतिबंध के बिना घरेलू जरूरतों को संभाला जा सके। ठीक इसी समय ऊर्जा क्षेत्र में अन्य प्रमुख देशों से जुड़े समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं। सऊदी अरब अपनी बेहद अहम पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल का निर्यात दोबारा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उधर, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ऊर्जा ठिकानों पर संभावित युद्धविराम को लेकर हाल ही में हुई चर्चाओं का ब्योरा साझा किया है।

## सट्टेबाजी और सुर्खियों पर टिकी बाजार की चाल
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में आने वाली हर राजनयिक या समझौते से जुड़ी खबर को लेकर व्यापारी बेहद सतर्कता बरत रहे हैं। टीडी सिक्योरिटीज के रणनीतिकारों का मानना है कि जब तक जमीन पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखती, तब तक किसी भी संभावित समझौते की सुर्खियों पर गहरा संशय बना रहेगा। उन्होंने आगाह किया कि कच्चे तेल के वायदा सौदों में सट्टेबाजी की स्थिति काफी बढ़ चुकी है। सट्टेबाजी का स्तर ऊंचा होने की वजह से बाजार रोजाना आने वाली खबरों के उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गया है। ऐसी स्थिति में कीमतों का मौजूदा ठहराव केवल बुनियादी मांग और आपूर्ति पर नहीं, बल्कि बाजार की अस्थिर धारणाओं के प्रभाव में ज्यादा आ रहा है।

## डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल: गुणवत्ता और वैश्विक मानक का आधार
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खरीदे और बेचे जाने वाले कच्चे तेल की प्रमुख किस्मों में शामिल है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ मिलकर डब्ल्यूटीआई दुनिया के तीन सबसे बड़े तेल मानकों का निर्माण करता है। उद्योग जगत में डब्ल्यूटीआई को हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है, क्योंकि इसमें घनत्व कम होता है और सल्फर की मात्रा भी काफी कम पाई जाती है। अपनी इस रासायनिक बनावट के कारण इसे बेहद उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसे रिफाइनरियों में गैसोलीन और डीजल जैसे ईंधनों में आसानी से ढाला जा सकता है। यह कच्चा तेल पूरी तरह से अमेरिका में निकाला जाता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे विश्व के पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है। वैश्विक वित्तीय जगत और मीडिया में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दर तय करने के लिए डब्ल्यूटीआई के मूल्य का व्यापक स्तर पर हवाला दिया जाता है।

## मांग, आपूर्ति और भू-राजनीति से तय होते हैं भाव
दुनिया की हर प्रमुख वित्तीय परिसंपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें भी बुनियादी तौर पर मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आती है, तो कल-कारखानों और परिवहन के लिए ईंधन की खपत बढ़ती है, जिससे तेल की मांग और भाव दोनों चढ़ जाते हैं। इसके विपरीत जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ती है, तो मांग घट जाती है। इसके अलावा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति में भारी व्यवधान पैदा करते हैं, जिसका सीधा असर कीमतों में उछाल के रूप में सामने आता है। ओपेक जैसे तेल उत्पादक देशों के सामूहिक निर्णय भी आपूर्ति घटाने या बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। साथ ही, चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की विनिमय दर भी इसकी कीमत को गहराई से प्रभावित करती है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग को समर्थन मिलता है, जबकि डॉलर के मजबूत होने पर तेल अपेक्षाकृत महंगा पड़ जाता है।

## इन्वेंट्री रिपोर्ट: एपीआई और ईआईए के साप्ताहिक आंकड़े
कच्चे तेल की दिशा तय करने में अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और ऊर्जा सूचना एजेंसी द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक भंडारण रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। इन्वेंट्री में होने वाले बदलाव सीधे तौर पर बाजार में आपूर्ति और मांग के उतार-चढ़ाव का आईना होते हैं। यदि इन आंकड़ों में कच्चे तेल के भंडार में गिरावट दिखती है, तो यह खपत बढ़ने का संकेत होता है, जिससे कीमतें ऊपर की ओर रुख करती हैं। इसके विपरीत भंडारों में भारी बढ़ोतरी मांग के मुकाबले अधिक आपूर्ति को दर्शाती है, जिससे कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बनता है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट हर मंगलवार को अपने आंकड़े पेश करता है, जबकि ऊर्जा सूचना एजेंसी अपने आंकड़े अगले दिन यानी बुधवार को सार्वजनिक करती है। ऐतिहासिक रूप से दोनों एजेंसियों के नतीजे लगभग एक जैसे रहते हैं और करीब 75 प्रतिशत मामलों में उनके आंकड़ों में अंतर एक प्रतिशत से भी कम होता है। चूंकि ईआईए एक सरकारी संस्था है, इसलिए वित्तीय बाजारों में इसके आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक और आधिकारिक माना जाता है।

## ओपेक और ओपेक प्लस का वैश्विक तेल पर नियंत्रण
पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन यानी ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक प्रभावशाली समूह है। यह समूह साल में दो बार होने वाली अपनी बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा सामूहिक रूप से निर्धारित करता है। ओपेक द्वारा लिया गया कोई भी फैसला डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। यदि समूह उत्पादन कोटे में कटौती करने का फैसला करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता कम हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। वहीं जब ओपेक उत्पादन बढ़ाने का कदम उठाता है, तो बाजार में आपूर्ति बढ़ जाने से तेल के भाव नरम पड़ जाते हैं। इस समूह के साथ जब रूस सहित दस अतिरिक्त गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश जुड़ते हैं, तो इस व्यापक गठबंधन को ओपेक प्लस के नाम से जाना जाता है।

## विदेशी मुद्रा, सोना और वैश्विक शेयर बाजारों में हलचल
कच्चे तेल और ब्याज दरों से जुड़े घटनाक्रमों का असर अन्य वित्तीय बाजारों पर भी साफ देखा जा रहा है। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा और अगस्त 7 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के पास कंसोलिडेट हुआ। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्चतम स्तर के पास बनी हुई है। बॉन्ड यील्ड की मजबूती और भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के शिखर पर बनाए रखा है, जिससे मुद्रा जोड़ों पर दबाव है। डॉलर और येन की जोड़ी भी तीन सप्ताह के उच्च स्तर यानी 158.35 के दायरे में रही, जहां बैंक ऑफ जापान द्वारा पिछले सप्ताह की गई दर वृद्धि के बावजूद जापानी येन में कमजोरी बनी रही। सोने की कीमतों में भी नरमी देखी गई और यह 4,300 डॉलर के नीचे संघर्ष करता रहा। बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने गैर-उपज वाली इस पीली धातु के आकर्षण को सीमित कर दिया है। उधर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऊंचे बॉन्ड यील्ड ने शेयर बाजारों की हालिया तेजी की रफ्तार को भी रोक दिया है। इस बीच बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो काफी हद तक बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप रहा।

## इसका आप पर असर
कच्चे तेल में अस्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से भारत में ईंधन की लागत और शेयर बाजारों में निवेश प्रभावित हो सकते हैं।

- **भारत में:** कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव से देश के तेल आयात बिल और मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होती है तो परिवहन लागत और खुदरा ईंधन कीमतों पर सीधा दबाव देखने को मिल सकता है।
- **घरेलू वाहन चालकों के लिए:** अमेरिकी डीजल निर्यात में कमी और भू-राजनीतिक जोखिम ईंधन रिफाइनिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि तेल की कीमत 90.80 डॉलर के आसपास रहने से तुरंत पेट्रोल-डीजल की दरों में बदलाव की संभावना सीमित है।
- **शेयर बाजार के निवेशकों के लिए:** बढ़ती बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की ऊंची दरों ने वैश्विक शेयर बाजारों की तेजी को थाम दिया है। इक्विटी बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
- **मुद्रा और सोने के खरीदारों के लिए:** अमेरिकी डॉलर के दो महीने के शिखर पर रहने से सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। 4,300 डॉलर के नीचे सोने में कारोबार के चलते खरीदारों और ज्वेलर्स को दरों में स्थिरता का इंतजार करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कच्चे तेल की कीमतों में 91 डॉलर से नीचे की गिरावट और बढ़ते तनाव का कारण भू-राजनीतिक बयानबाजी तथा बाजार की सट्टेबाजी है। हालांकि आपूर्ति में रुकावट की चेतावनियों के बावजूद वास्तविक धरातल पर अभी तक तेल का प्रवाह बाधित नहीं हुआ है।

- **ईरान और अमेरिका का गतिरोध:** ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र में परमाणु तकनीक के अधिकार को दोहराया और अमेरिकी पाबंदियों के विरोध में होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी। इस भू-राजनीतिक बयानबाजी ने तेल बाजार में बड़ा जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है।
- **अमेरिका द्वारा डीजल निर्यात में कटौती का प्रयास:** अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिफाइनरियों के साथ स्वैच्छिक डीजल निर्यात घटाने पर काम शुरू किया है। इस कदम से निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए बिना आपूर्ति संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।
- **सऊदी अरब और यूक्रेन से जुड़े संकेत:** सऊदी अरब अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन से तेल निर्यात बहाल करने की तैयारी कर रहा है, जबकि यूक्रेन ने ऊर्जा ठिकानों पर युद्धविराम को लेकर बातचीत का खुलासा किया है। इन घटनाक्रमों ने बाजार में आपूर्ति की संभावनाओं को लेकर मिश्रित संकेत दिए हैं।
- **सट्टेबाजी और सुर्खियों पर संशय:** टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार तेल बाजार में सट्टेबाजी काफी बढ़ चुकी है जिससे कीमतें केवल खबरों के आधार पर घट-बढ़ रही हैं। व्यापारी तब तक किसी शांति या समझौते की खबर पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे जब तक ठोस परिणाम सामने न आएं।

## सवाल-जवाब

### 1. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत फिसलकर किस स्तर पर आ गई है?
गुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फिसलकर लगभग 90.80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।

### 2. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने क्या चेतावनी दी है?
मसूद पेजेशकियन ने कहा कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंध और नाकेबंदी जारी रहेगी, ईरान रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सीमित रखेगा।

### 3. अमेरिका ने डीजल निर्यात को लेकर क्या कदम उठाया है?
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के अनुसार सरकार रिफाइनरियों के साथ मिलकर डीजल के निर्यात में स्वैच्छिक कटौती पर काम कर रही है।

### 4. सऊदी अरब अपनी किस पाइपलाइन को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है?
सऊदी अरब अपनी महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल का निर्यात दोबारा शुरू करने की तैयारी में है।

### 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 6. कच्चे तेल के स्टॉक को लेकर कौन सी दो एजेंसियां रिपोर्ट जारी करती हैं?
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट हर मंगलवार को और सरकारी संस्था ऊर्जा सूचना एजेंसी बुधवार को साप्ताहिक तेल इन्वेंट्री आंकड़े जारी करती हैं।

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