मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी-ईरान संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सऊदी अरब में ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों के बावजूद एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान गुरुवार को वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल की कीमत घटकर लगभग 93.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करती हुई नजर आई। इस गिरावट से पहले पिछले तीन दिनों तक लगातार कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिला था। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच गहराते संघर्ष के कारण मध्य क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं लगातार बनी हुई हैं, जिससे कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव मौजूदा भू-राजनीतिक हालात इस बात का संकेत दे रहे हैं कि इस विवाद का कोई भी नजदीकी समाधान निकलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। ईरान ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया है कि वह किसी भी भीषण संघर्ष का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। देश ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया है और साथ ही कड़ी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना की ओर से ईरानी क्षेत्रों पर हमले जारी रखे जाते हैं, तो उनके द्वारा हमलों की तीव्रता और अधिक बढ़ा दी जाएगी। चुनावी माहौल और अमेरिकी दृष्टिकोण दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले पर अपनी भविष्यवाणी साझा करते हुए अनुमान जताया है कि यह संघर्ष नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद भी लंबे समय तक जारी रहने की पूरी संभावना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चुनावों से पहले पेट्रोल की कीमतों में किसी भी बड़ी राहत की उम्मीद करना बेमानी होगा और निकट भविष्य में इस तनाव के कम होने के आसार बेहद सीमित नजर आते हैं। पिछले एक महीने के शांत दौर के बाद पिछले हफ्ते से दोनों देशों के बीच शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में बेहद तेजी से इजाफा हुआ है। सऊदी अरब के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले यह भू-राजनीतिक संकट उस समय और अधिक व्यापक हो गया जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के कई प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाकर हमले किए गए। इन सुनियोजित हमलों के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर इस क्षेत्र में कुछ ऊर्जा गतिविधियों और परिचालन को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जोखिम को लगातार बढ़ा रही हैं। बाजार विशेषज्ञों की राय और तेल की विशेषताएं टीडी सिक्योरिटीज के रणनीतिकारों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनावों में किसी भी प्रकार की नरमी के संकेत न मिलने के कारण क्रूड की कीमतों में ऊपर की ओर दबाव लगातार बना हुआ है। उनका यह भी कहना है कि बातचीत के रास्ते अपनाने के बजाय सीमित हमलों और आर्थिक शिकंजे को तरजीह दिए जाने के कारण ऊर्जा बाजार में कड़ाई का रुख बरकरार है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल का एक प्रमुख प्रकार है। इसे ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ तीन मुख्य बेंचमार्क में गिना जाता है। इसकी कम घनत्व और कम सल्फर मात्रा के कारण इसे क्रमशः हल्का और मीठा तेल कहा जाता है, जो रिफाइनिंग के लिहाज से बेहद उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है। इसे संयुक्त राज्य अमेरिका से निकाला जाता है और कुशिंग हब के माध्यम से वितरित किया जाता है। मूल्य को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक वैश्विक स्तर पर किसी भी अन्य संपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें भी मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों पर टिकी होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि का बढ़ना मांग में इजाफा करता है, जबकि कमजोर आर्थिक वृद्धि मांग को गिरा सकती है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। ओपेक देशों के निर्णय भी इस दिशा में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर भी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि तेल का कारोबार मुख्य तौर पर डॉलर में ही किया जाता है, जिससे डॉलर के कमजोर होने पर तेल सस्ता हो सकता है। इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक की भूमिका अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और ऊर्जा सूचना एजेंसी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट भी कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। इन्वेंट्री के आंकड़े घटने से बढ़ी हुई मांग का पता चलता है, जबकि बढ़े हुए आंकड़े आपूर्ति में वृद्धि दर्शाते हैं। ओपेक संगठन जो कि 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, साल में दो बार बैठक करके उत्पादन कोटा तय करता है। इसके अलावा रूस जैसे दस अन्य गैर-ओपेक देशों को मिलाकर ओपेक प्लस का गठन किया गया है, जिनके फैसले बाजार की दिशा तय करते हैं। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर परिवहन लागत, पेट्रोल-डीजल के दामों और आम उपभोक्ता के दैनिक खर्चों पर पड़ता है। • भारत में: देश में आयातित कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव होने से ईंधन की खुदरा कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिससे लॉजिस्टिक्स और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की ढुलाई महंगी हो सकती है। • वैश्विक स्तर पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका से उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है और वैश्विक महंगाई पर दबाव बन सकता है। • निवेशकों के लिए: ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शेयरों और कमोडिटी बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों को अत्यधिक उतार-चढ़ाव और जोखिम भरे माहौल का सामना करना पड़ सकता है। • परिवहन क्षेत्र: विमानन कंपनियों और परिवहन से जुड़े व्यवसायों को ईंधन की बढ़ती लागत के कारण अपने किराए में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल के बाजार में यह अस्थिरता मुख्य रूप से मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों के कारण उत्पन्न हुई है। • भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव तथा हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों ने वैश्विक आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। • सैनिक और आर्थिक संघर्ष: ईरान द्वारा अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का विरोध करने और संघर्ष को और तीव्र करने की चेतावनी ने स्थिति को अधिक गंभीर बना दिया है। • आपूर्ति और मांग का संतुलन: प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन कोटा तय करने के तरीकों और साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़ों में उतार-चढ़ाव ने बाजार की अनिश्चितता को बढ़ाया है। • राजनीतिक बयानबाजी: अमेरिकी नेतृत्व द्वारा संघर्ष के लंबे समय तक खिंचने के अनुमान ने बाजार में तुरंत किसी राहत की संभावना को खारिज कर दिया है। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल का वर्तमान कारोबारी स्तर क्या है? एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल लगभग 93.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। 2. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है? नौसैनिक नाकेबंदी, सैन्य हमलों और क्षेत्र में लगातार बढ़ रही शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। 3. सऊदी अरब में ऊर्जा सुविधाओं पर किसने हमला किया था? सऊदी अरब के ऊर्जा संयंत्रों पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा हमले किए गए थे। 4. टीडी सिक्योरिटीज के रणनीतिकारों का क्या मानना है? उनका मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम न होने के कारण क्रूड की कीमतें ऊपर की ओर दबाव बनाए हुए हैं। 5. डब्ल्यूटीआई क्रूड की मुख्य विशेषताएं क्या हैं? इसे इसकी कम घनत्व और सल्फर मात्रा के कारण हल्का और मीठा तेल माना जाता है जो आसानी से रिफाइन होता है। 6. ओपेक संगठन का क्या कार्य है? ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है जो अपनी बैठकों में उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। https://trendkia.com/market/wti-oil-prices-decline-amid-escalating-us-iran-tensions-and-supply-disruption-risks-30600 TrendKia — Har trend, sabse pehle.