अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ऑयल में तेजी, 97 डॉलर के करीब पहुंचा भाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और खाड़ी देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं तेज हो गई हैं, जिससे निवेशक और बाजार सतर्क हो गए हैं। इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ऑयल पर पड़ा है, जिसके दाम तेजी से बढ़कर 97.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए हैं। सत्र के दौरान इसमें 2.93 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई है। तनाव में भारी बढ़ोतरी और जवाबी हमले की चेतावनी पिछले लगभग एक महीने तक स्थिति अपेक्षाकृत शांत रहने के बाद पिछले एक सप्ताह में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इस्लामिक गणराज्य इस संघर्ष को और अधिक तीव्र करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका उसके क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे पर अपने हमले जारी रखता है, तो ईरान अपने जवाबी हमलों की गति को और तेज कर देगा। समुद्री जहाजों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर बढ़ते खतरे ईंधन बाजार के लिए अब समुद्री नौवहन की सुरक्षा एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के पांच ऑयल टैंकरों को डुबोए जाने के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमले किए। दोनों पक्षों के बीच संघर्ष शुरू होने के पिछले छह महीनों में यह जहाजों पर होने वाला सबसे बड़ा हमलों का सिलसिला है। होर्मुज जलडमरूमध्य मध्य पूर्व के ऊर्जा निर्यात के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसके कारण बाजार इस क्षेत्र से तेल के प्रवाह में किसी भी प्रकार के खतरे को लेकर बेहद संवेदनशील हो गया है। इसके अलावा, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों ने भी आपूर्ति की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, जिससे कुछ स्थानों पर परिचालन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। शीघ्र शांति की उम्मीदों पर पानी और राजनीतिक बयानबाजी मौजूदा हालात को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस संघर्ष के तुरंत थमने की कोई गुंजाइश नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि यह संघर्ष नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद भी जारी रह सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि तब तक पेट्रोल की कीमतों में किसी बड़ी राहत की उम्मीद करना बेमानी होगा। इस तरह के बयानों से बाजार में यह उम्मीद पक्की हो जाती है कि निकट भविष्य में भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने का काम करते रहेंगे। अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री और एपीआई के आंकड़े अमेरिकी घरेलू मोर्चे पर आपूर्ति के आंकड़ों की बात करें तो, अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार 4 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका में क्रूड ऑयल के भंडार में 3.00 लाख बैरल की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बाजार की ओर से 13 लाख बैरल की कमी और पिछले सप्ताह दर्ज की गई 26 लाख बैरल की गिरावट की उम्मीद के मुकाबले यह निकासी काफी कम रही। अब निवेशकों की निगाहें एनर्जी इंफॉर्मेशन Administración द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक इन्वेंट्री आंकड़ों पर टिकी हुई हैं, जो इसी दिन बाद में आने वाले हैं। यदि अमेरिकी भंडार में उम्मीद से अधिक गिरावट दर्ज की जाती है, तो इससे वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ऑयल को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष ही कीमतों की दिशा तय करने वाला मुख्य कारक बना रहेगा। डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल की विशेषताएं और वैश्विक बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ऑयल एक विशेष प्रकार का कच्चा क्रूड ऑयल है जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाता है। इसका पूरा नाम वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है, जो ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ दुनिया के तीन प्रमुख प्रकार के तेलों में से एक है। इस तेल को इसके अपेक्षाकृत कम घनत्व और सल्फर की मात्रा के कारण लाइट और स्वीट कहा जाता है। इसे एक उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे आसानी से रिफाइन किया जा सकता है। इसकी उत्पत्ति अमेरिका में होती है और इसे कुशिंग हब के माध्यम से वितरित किया जाता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन क्रॉसरोड्स भी कहा जाता है। यह ऑयल मार्केट के लिए एक प्रमुख बेंचमार्क है और इसके भाव मीडिया में अक्सर प्रमुखता से उद्धृत किए जाते हैं। कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक और ओपेक की भूमिका किसी भी अन्य संपत्ति की तरह, आपूर्ति और मांग ही वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ऑयल की कीमतों के प्राथमिक चालक हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि से मांग में तेजी आ सकती है या कमजोर विकास से मांग घट सकती है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित करके कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। ओपेक, जो कि प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, कीमतों को तय करने में एक अन्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूंकि तेल का कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की कमजोरी तेल को अधिक किफायती बना सकती है और इसके विपरीत स्थिति इसे महंगा कर सकती है। इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक प्लस का प्रभाव अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक तेल इन्वेंट्री रिपोर्टें डब्ल्यूटीआई ऑयल की कीमत पर सीधा प्रभाव डालती हैं। इन्वेंट्री में उतार-चढ़ाव घटती और बढ़ती आपूर्ति तथा मांग को दर्शाता है। यदि आंकड़े भंडार में कमी दिखाते हैं, तो यह बढ़ी हुई मांग का संकेत हो सकता है, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके उलट अधिक भंडार बढ़ने से आपूर्ति में वृद्धि का पता चलता है और कीमतें नीचे आ सकती हैं। ओपेक (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) 12 तेल उत्पादक देशों का एक ऐसा समूह है जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक कोटा कम करने का निर्णय लेता है, तो इससे आपूर्ति सीमित हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। ओपेक प्लस में दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें रूस सबसे प्रमुख है। बाजार की अन्य गतिविधियां और व्यापक आर्थिक संकेत कच्चे तेल के अलावा अन्य बाजारों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियन डॉलर शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान मिश्रित संकेतों के बीच 0.7200 के ऊपर अपनी समेकित चाल को आगे बढ़ाता हुआ दिखाई दिया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों के कारण यह मुद्रा 14 मई के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है, जिससे अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहे व्यापारियों के बीच इस मुद्रा जोड़ी में तेजी सीमित हो रही है। इसी प्रकार जापानी येन के मोर्चे पर, अमरीकी डॉलर के मुकाबले यह सात महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर बना हुआ है। सोने की चाल और अन्य परिसंपत्तियों के रुझान अमेरिकी सत्र की शुरुआत में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि अमेरिकी मौद्रिक नीति पर स्पष्ट संकेत मिलने का इंतजार कर रहे निवेशकों के बीच यह अपने पुराने दायरे में ही बना हुआ है। शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े अगले सप्ताह फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले बाजार की दिशा तय करेंगे। दूसरी ओर, रेडियम ने मजबूत तेजी का रुख बनाए रखा है और रविवार से अपनी 41 प्रतिशत की छलांग को आगे बढ़ाते हुए लगभग 9 प्रतिशत का लाभ दर्ज किया है। नए टोकन लॉन्च के बीच इस विकेंद्रीकृत एक्सचेंज पर नेटवर्क गतिविधि और वृद्धि में तेजी देखी जा रही है। बाजार जोखिम और कानूनी अस्वीकरण इन पृष्ठों पर दी गई जानकारी में भविष्य के अनुमान शामिल हैं जिनमें कई तरह के जोखिम और अनिश्चितताएं जुड़ी हुई हैं। यहां उल्लिखित बाजार और वित्तीय साधन केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं और इन्हें किसी भी तरह से इन परिसंपत्तियों में खरीदने या बेचने की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले निवेशकों को अपनी खुद की गहन रिसर्च अवश्य करनी चाहिए। किसी भी प्रकार के निवेश में पूरी पूंजी खोने का जोखिम और मानसिक तनाव शामिल होता है। निवेश से जुड़े सभी नुकसानों और लागतों की जिम्मेदारी पूरी तरह से निवेशक की अपनी होती है। इसका आप पर असर कच्चे तेल की कीमतों में आई यह तेजी सीधे तौर पर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी, परिवहन खर्च और महंगाई पर असर डालती है। • भारत में: कच्चे तेल के वैश्विक दाम बढ़ने से देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर महंगे होने का दबाव बढ़ जाता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने पर रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। • आयात और अर्थव्यवस्था: भारत अपनी कुल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ता है और राजकोषीय घाटे पर असर पड़ता है। • परिवहन और यात्रा: हवाई यात्रा के किराए और सड़क परिवहन की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम नागरिकों के मासिक बजट पर सीधा दबाव पड़ता है। • मुद्रास्फीति का दबाव: महंगे ईंधन के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिससे खुदरा महंगाई दर में उछाल आने की आशंका बनी रहती है। • निवेशकों के लिए: ऊर्जा क्षेत्र और तेल कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जबकि शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन सकता है। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी और वैश्विक बाजारों में हलचल के पीछे मुख्य रूप से मध्य पूर्व में बिगड़ते हालात और आपूर्ति से जुड़े कारक जिम्मेदार हैं। • सैन्य तनाव और संघर्ष: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित होने का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। • समुद्री मार्गों पर हमले: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जहाजों पर हुए हमलों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक स्तर पर तेल परिवहन को लेकर घबराहट फैल गई है। • राजनीतिक बयानबाजी: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा संघर्ष के लंबे खिंचने और निकट भविष्य में ईंधन की कीमतों में राहत न मिलने की चेतावनी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। • इन्वेंट्री के आंकड़े: अमेरिका में क्रूड ऑयल के भंडार में उम्मीद से कम गिरावट दर्ज होने के कारण बाजार में आपूर्ति की तंगी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। सवाल-जवाब 1. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ऑयल की कीमत में हाल ही में कितना उछाल आया है? सत्र के दौरान डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल की कीमत में 2.93% की तेजी आई और यह 97.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। 2. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव क्यों बढ़ा है? क्षेत्र में अमेरिकी हमलों और उसके जवाब में ईरानी परिसंपत्तियों तथा जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद संघर्ष काफी तेज हो गया है। 3. होर्मुज जलडमरूमध्य तेल बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? यह मध्य पूर्व से होने वाले ऊर्जा निर्यात का एक बेहद अहम मार्ग है, जहां किसी भी प्रकार के व्यवधान से वैश्विक तेल प्रवाह सीधे प्रभावित होता है। 4. अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री के ताजा आंकड़े क्या दर्शाते हैं? अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह के दौरान अमेरिकी क्रूड भंडार में 300K बैरल की गिरावट आई है, जो बाजार की उम्मीद से कम है। 5. ओपेक का तेल की कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ता है? ओपेक सदस्य देशों के उत्पादन को नियंत्रित करने के लिए कोटा तय करता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति और उसके आधार पर कीमतें तय होती हैं। https://trendkia.com/market/wti-us-oil-rebounds-toward-97-as-us-iran-conflict-escalates-31038 TrendKia — Har trend, sabse pehle.