वायोमिंग आर्थिक सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश की विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा 27 से 29 अगस्त तक वायोमिंग में आयोजित हो रहे सम्मेलन के दौरान फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के रुख पर दुनिया भर के बाजारों की नजरें टिकी हुई हैं। 27 से 29 अगस्त तक वायोमिंग के बेहद खूबसूरत पर्वतीय क्षेत्र जैक्सन होल में आयोजित होने वाले वार्षिक आर्थिक सम्मेलन का आधिकारिक मुख्य विषय भले ही "वित्तीय नवाचार: भुगतान और नीति के लिए निहितार्थ" रखा गया हो, लेकिन दुनिया भर के वित्तीय बाजारों, निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की नजरें मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश के संबोधन पर टिकी हुई हैं। वैश्विक वित्तीय बाजारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि केविन वॉश मुद्रास्फीति की दर, ब्याज दरों के भविष्य और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार में हाल के दिनों में देखी गई तेज उथल-पुथल पर क्या रुख अपनाते हैं और अपनी बात किस तरह से सामने रखते हैं। मई महीने में फेडरल रिजर्व की कमान संभालने के बाद से ही केविन वॉश ने मौद्रिक नीति के संचालन और संचार के पारंपरिक तरीकों से हटकर एक नई दिशा चुनी है। उनका स्पष्ट और प्राथमिक उद्देश्य वित्तीय बाजारों की अग्रिम मार्गदर्शन (फॉरवर्ड गाइडेंस) पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। केंद्रीय बैंक के शीर्ष अधिकारियों के बयानों और पूर्व-निर्धारित भाषणों के जरिए बाजार की उम्मीदों को दिशा देने के बजाय, वॉश चाहते हैं कि वास्तविक आर्थिक आंकड़े और बाजार की अपनी मूल्य खोज प्रक्रिया (प्राइस डिस्कवरी) ही ब्याज दरों की भविष्य की उम्मीदों को तय करने में मुख्य भूमिका निभाए। हालांकि, इस नई परिचालन व्यवस्था के अपने गंभीर नुकसान भी सामने आ रहे हैं। केंद्रीय बैंक की ओर से स्पष्ट और सीधे संकेतों में कमी आने के कारण निवेशकों, संस्थागत फंड प्रबंधकों और बाजार विश्लेषकों के लिए फेडरल रिजर्व के फैसले लेने के नए तरीके (रिएक्शन फंक्शन) को सही तरीके से समझना काफी कठिन हो गया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन रहा है। फेडरल रिजर्व की नीति में बदलाव और साख की बड़ी परीक्षा संचार रणनीति में आए इस मौलिक बदलाव की वजह से वायोमिंग में आयोजित हो रहे जैक्सन होल सम्मेलन को केवल अगली ब्याज दर कटौती या बढ़ोतरी के पूर्व अनुमान के रूप में नहीं, बल्कि केविन वॉश की व्यक्तिगत साख और केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो जैक्सन होल सम्मेलन से हमेशा मौद्रिक नीति में तत्काल बदलाव नहीं होते, लेकिन फेडरल रिजर्व के पूर्व अध्यक्षों ने इस महत्वपूर्ण मंच का उपयोग ऐसे दूरगामी नीतिगत संदेश देने के लिए किया है जिन्होंने वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा को गहराई से प्रभावित किया है। उदाहरण के लिए, 2010 और 2012 के सम्मेलनों में केंद्रीय बैंक के शीर्ष नेतृत्व ने इसी मंच से बड़े पैमाने पर क्वांटिटेटिव ईज़िंग (बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम) लागू करने के दरवाजे खोले थे। वहीं 2022 के सम्मेलन में, जेरोम पॉवेल ने अपने ऐतिहासिक भाषण में मुद्रास्फीति से लड़ने की केंद्रीय बैंक की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई थी, जिसके ठीक दो साल बाद मौद्रिक नीति में ढील देने के नए दौर का आगाज हुआ। केविन वॉश वायोमिंग में एक अलग मौद्रिक सोच और रणनीति के साथ पहुंच रहे हैं। जुलाई में आयोजित अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने खुलकर यह स्वीकार किया था कि उन्होंने अभी यह तय नहीं किया है कि उनका जैक्सन होल भाषण दीर्घकालिक संरचनात्मक आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित होगा या सितंबर से दिसंबर के बीच होने वाले मौद्रिक नीति निर्णयों पर पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाएगा। डॉयचे बैंक के वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि वॉश पहला विकल्प चुनते हैं, तो वे फेड द्वारा हाल ही में गठित पांच विशेष कार्य बलों या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के व्यापक आर्थिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा कर सकते हैं। वहीं, यदि वे पारंपरिक दृष्टिकोण चुनते हैं, तो वे अपनी जुलाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बची हुई अस्पष्टताओं को दूर करते हुए मुद्रास्फीति के दबाव और वित्तीय स्थितियों पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। बाजार में मतभेद और भाषण के संभावित स्वरूप इस सम्मेलन का महत्व और वित्तीय दांव इसलिए भी बहुत अधिक बढ़ गए हैं क्योंकि फेडरल रिजर्व के अगले कदम को लेकर वित्तीय बाजार दो स्पष्ट हिस्सों में बंटा हुआ है। फेडवॉच (FedWatch) टूल के आंकड़ों के अनुसार, ब्याज दर वायदा बाजार में इस बात की लगभग 38% संभावना जताई जा रही है कि केंद्रीय बैंक अपनी आगामी सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला कर सकता है। वॉश की इस नई नीति का सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि बाजारों को फेडरल रिजर्व पर कम निर्भर बनाने की उनकी कोशिश, कम से कम अल्पकाल में, मौद्रिक नीति के भावी रुख को समझने में और अधिक कठिनाई पैदा कर रही है। पारंपरिक रूप से अग्रिम मार्गदर्शन से निवेशकों को केंद्रीय बैंक के भावी फैसलों का पहले से अनुमान लगाने में मदद मिलती थी, जिससे अचानक होने वाले बाजार उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता था। लेकिन मार्गदर्शन में कटौती करने से बाजार में अनिश्चितता का जोखिम काफी बढ़ गया है। इस नई स्थिति पर डीबीएस बैंक के वरिष्ठ रणनीतिकार फिलिप वी का कहना है: "बाजार को एक सुसंगत नीतिगत ढांचे की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एक ठोस नीतिगत ढांचे के बिना, अग्रिम मार्गदर्शन को कम करना बाजार की स्वतंत्रता के बजाय अनिश्चितता का एक नया स्रोत बन सकता है। इसलिए, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि वॉश को यह बताने की तत्काल जरूरत नहीं है कि सितंबर में क्या फैसला लिया जाएगा, बल्कि उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझाना होगा कि किन आर्थिक आंकड़ों और परिस्थितियों के आधार पर फेडरल रिजर्व कोई सख्त नीतिगत कदम उठाएगा। मुद्रास्फीति का लक्ष्य और लंबे समय वाले बॉन्ड यील्ड की चुनौती केविन वॉश के सामने सबसे मुख्य परीक्षा मुद्रास्फीति को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करने की होगी। फेडरल रिजर्व का आधिकारिक मुद्रास्फीति लक्ष्य 2% का है, लेकिन महंगाई का दबाव अभी भी इतना बना हुआ है कि ब्याज दरें फिर से बढ़ाने की बहस लगातार जारी है। कई वरिष्ठ नीति निर्माताओं को चिंता है कि यदि मुद्रास्फीति लंबे समय तक 2% के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है, तो आम उपभोक्ताओं, व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों की दीर्घकालिक मुद्रास्फीति दर को लेकर उम्मीदें पूरी तरह अनियंत्रित हो सकती हैं। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषकों का मानना है कि केवल 2% के लक्ष्य को दोहराना ही अब बाजारों को शांत करने के लिए काफी नहीं होगा। फेड अध्यक्ष को यह साबित करना होगा कि केंद्रीय बैंक महंगाई पर काबू पाने के लिए पूरी तरह गंभीर है और कम हस्तक्षेप वाली नीति से देश की समग्र आर्थिक स्थिरता को कोई खतरा नहीं होगा। यदि वे यह संदेश स्पष्ट रूप से देते हैं कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है, तो इससे बाजारों में केंद्रीय बैंक की साख मजबूत होगी। इसके साथ ही, फेडरल रिजर्व अल्पकालिक ब्याज दरों को तो सीधे नियंत्रित करता है, लेकिन 10 साल, 20 साल या 30 साल के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड (ट्रेजरी) पर निवेशकों द्वारा मांगे जाने वाले अतिरिक्त रिस्क प्रीमियम (यील्ड) को वह सीधे नियंत्रित नहीं कर सकता। यदि निवेशकों को यह संदेह होने लगे कि फेडरल रिजर्व सरकार के कर्ज की लागत को कम रखने के लिए अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव कर रहा है, तो इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और साख को भारी नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी ओर, यदि लंबे समय वाले बॉन्ड की बढ़ती यील्ड पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो इससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और FOMC के आधिकारिक फैसलों के बिना ही वित्तीय स्थितियां सख्त हो सकती हैं। वित्तीय संस्थानों का नजरिया और अमेरिकी डॉलर पर असर जैक्सन होल सम्मेलन को लेकर बनी भारी उत्सुकता के बावजूद, कई बड़े वैश्विक बैंकों ने चेतावनी दी है कि सितंबर की बैठक के बारे में स्पष्ट नीतिगत संकेतों की उम्मीद करने वाले निवेशकों को निराशा हाथ लग सकती है। वेल्स फार्गो के विश्लेषकों का कहना है कि केविन वॉश ने अब तक अपनी अल्पकालिक नीतिगत प्रतिक्रिया को गुप्त रखा है और अपने कार्यकाल के शुरुआती कुछ महीनों में ही वे इस सफल रणनीति को बदलने वाले नहीं हैं। इसी तरह, सोसिते जेनेराली का अनुमान है कि फेड अध्यक्ष ब्याज दरों के रास्ते पर स्पष्ट संकेत देने के बजाय अपने सुधार एजेंडे और पांच कार्य बलों के काम को प्राथमिकता देंगे। दूसरी ओर, एमयूएफजी के अनुसार वॉश के पास तीन विकल्प हैं: डिजिटल फाइनेंस पर भाषण, संरचनात्मक और व्यापक आर्थिक विषयों का संतुलित मिश्रण, या एक पूरी नई मौद्रिक नीति का महत्वाकांक्षी खाका प्रस्तुत करना। एमयूएफजी का मानना है कि बीच का रास्ता सबसे अधिक संभावित है, जो बिना किसी बड़ी अनिश्चितता के बाजार को स्थिर रख सकता है। मुद्रा बाजार के दृष्टिकोण से, टीडी सिक्योरिटीज के रणनीतिकारों का कहना है कि इसका असर अमेरिकी डॉलर पर असमान हो सकता है। उनके अनुसार, अमेरिकी डॉलर के लिए गिरावट का जोखिम अधिक बना हुआ है। यदि वॉश मुद्रास्फीति पर कड़ा रुख अपनाते भी हैं, तो इससे डॉलर को केवल सीमित समर्थन मिलेगा। लेकिन यदि वे मुद्रास्फीति पर साख कायम करने में असमर्थ रहते हैं, तो इससे अमेरिकी डॉलर के मूल्यों पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, यदि वॉश का भाषण अत्यधिक सख्त (हॉकिश) रहता है तो बॉन्ड यील्ड और दर वृद्धि की उम्मीदें बढ़ेंगी; यदि भाषण नरम (डोविश) रहता है तो डॉलर कमजोर होगा और शेयर बाजार को सहारा मिलेगा; और यदि भाषण अस्पष्ट रहता है तो बाजार में अनिश्चितता और बॉन्ड रिस्क प्रीमियम बढ़ जाएगा। अमेरिकी मौद्रिक नीति का ढांचा और गैर-पारंपरिक उपाय जैक्सन होल भाषण के महत्व को गहराई से समझने के लिए अमेरिकी मौद्रिक नीति के काम करने के तरीके को जानना जरूरी है। फेडरल रिजर्व दो मुख्य उद्देश्यों के तहत काम करता है: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेड का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब महंगाई 2% के लक्ष्य से ऊपर जाने लगती है, तो फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जिससे अर्थव्यवस्था में कर्ज लेना महंगा हो जाता है। ऊंची ब्याज दरों से अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है क्योंकि विदेशी निवेशक अधिक रिटर्न की तलाश में अमेरिका में निवेश करते हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई बहुत कम हो जाती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, जिससे अमेरिकी डॉलर पर दबाव पड़ता है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) द्वारा लिए जाते हैं, जिसकी साल में आठ बैठकें होती हैं। FOMC में कुल 12 वोटिंग सदस्य होते हैं, जिनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यू यॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष और बाकी 11 क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों में से चार अध्यक्ष (जो एक साल के चक्र में बदलते रहते हैं) शामिल होते हैं। अत्यधिक संकट के समय फेड क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) जैसे अपरंपरागत तरीकों का इस्तेमाल करता है, जिसमें नया डॉलर छापकर वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदे जाते हैं। इसके विपरीत क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में फेड बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने बैलेंस शीट को छोटा करता है, जिससे आमतौर पर डॉलर को मजबूती मिलती है। केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि बाजार सहभागियों के साथ स्पष्ट संवाद बना रहे और वित्तीय प्रणालियों में तरलता का स्तर स्थिर बना रहे। जैक्सन होल भाषण से पहले बाजार की ताजा स्थिति जैक्सन होल सम्मेलन से ठीक पहले वैश्विक वित्तीय बाजारों में अलग-अलग संपत्तियों का हाल देखने को मिल रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में GBP/USD की जोड़ी 1.3650 का स्तर पार करने में असमर्थ रही है और इसमें फिर से गिरावट देखी जा रही है, जिसका कारण अमेरिका में जारी जुलाई PCE महंगाई आंकड़ों और GDP संशोधनों के बाद अमेरिकी डॉलर को मिला समर्थन है। वहीं, EUR/USD की जोड़ी 1.1670 के आसपास कारोबार कर रही है। कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है और प्रति ट्रॉय औंस $4,600 का स्तर परीक्षण में है, जब यह $4,700 के उच्चतम स्तर से पीछे हटा है। क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन $78,000 के ऊपर मजबूती से टिका हुआ है और $80,000 के स्तर को पार करने की कोशिश कर रहा है। ब्लैकरॉक के टैक्स-डेफर्ड बिटकॉइन-टू-ETF स्वैप का वॉल्यूम $5 बिलियन तक पहुंच गया है। वहीं, कॉरपोरेट क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिग्गज कंपनी एनवीडिया आज अमेरिकी बाजार बंद होने के बाद अपने तिमाही नतीजे घोषित करेगी, जिसमें राजस्व $92 बिलियन से अधिक और प्रति शेयर आय (EPS) $2.09 रहने का अनुमान है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश शुक्रवार को अपना पहला जैक्सन होल भाषण देने की तैयारी कर रहे हैं, और बाजार की उम्मीदें इस बात से कहीं आगे तक फैली हुई हैं कि सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी या अपरिवर्तित रखी जाएंगी। इसका आप पर असर वैश्विक निवेशकों के लिए: फेड अध्यक्ष का संबोधन अमेरिकी डॉलर, सोने, बिटकॉइन और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों की चाल तय करेगा। भारतीय पाठकों और अर्थव्यवस्था के लिए: अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ने से रुपया कमजोर हो सकता है और घरेलू शेयर बाजार पर दबाव आ सकता है, जबकि दर कटौती की संभावना से एफपीआई (FPI) निवेश बढ़ेगा। सवाल-जवाब 1. जैक्सन होल सम्मेलन कब आयोजित हो रहा है? जैक्सन होल आर्थिक सम्मेलन 27 से 29 अगस्त तक वायोमिंग में आयोजित हो रहा है। 2. फेडरल रिजर्व के संचार को लेकर केविन वॉश का मुख्य लक्ष्य क्या है? केविन वॉश का लक्ष्य अग्रिम मार्गदर्शन (फॉरवर्ड गाइडेंस) पर बाजारों की निर्भरता को कम करना है ताकि आर्थिक आंकड़े और मूल्य खोज प्रक्रिया दर की उम्मीदों को तय कर सकें। 3. सितंबर में ब्याज दर वृद्धि की क्या संभावना जताई जा रही है? फेडवॉच टूल के अनुसार, ब्याज दर वायदा बाजार में सितंबर में दर वृद्धि की लगभग 38% संभावना जताई जा रही है। 4. पूर्व फेड अध्यक्षों ने जैक्सन होल में बाजारों को कैसे प्रभावित किया था? बेन बर्नानके ने 2010 और 2012 में क्वांटिटेटिव ईज़िंग के संकेत दिए थे, जबकि जेरोम पॉवेल ने 2022 में महंगाई से लड़ने पर जोर दिया था। 5. एनवीडिया के तिमाही नतीजों से क्या उम्मीदें हैं? वाल स्ट्रीट को उम्मीद है कि एनवीडिया $92 बिलियन से अधिक का राजस्व और $2.09 प्रति शेयर आय दर्ज करेगी। 6. संबोधन से पहले सोने और बिटकॉइन का क्या हाल है? सोना $4,700 से पीछे हटकर $4,600 के स्तर का परीक्षण कर रहा है, जबकि बिटकॉइन संस्थागत मांग के बल पर $78,000 से ऊपर बना हुआ है। https://trendkia.com/market/wyoming-arthika-sammelana-men-federal-reserve-ke-adhyaksha-kevin-warsh-ki-vishvasaniyata-ki-bari-pariksha-22582 TrendKia — Har trend, sabse pehle.