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  "type": "article",
  "title": "100 अरब डॉलर के भारी हस्तक्षेप के बाद भी जापानी येन पस्त, USD/JPY का 160 के स्तर पर फिर से दबाव",
  "summary": "जापान और अमेरिका की साझा मुद्रा खरीद के बावजूद जापानी येन की मजबूती ज्यादा समय नहीं टिक सकी। 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 1996 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों के बीच USD/JPY का रुझान मजबूत बना हुआ है।",
  "content": "एशियाई कारोबार के दौरान 160.00 के महत्वपूर्ण स्तर को छूने के बाद जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY जोड़ी 158.50 के पास कारोबार कर रही है। बैंक ऑफ जापान और अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से किए गए भारी भरकम मुद्रा हस्तक्षेप का असर बाजार पर बहुत कम समय के लिए ही देखा जा रहा है। पिछले छह हफ्तों के दौरान टोक्यो और वॉशिंगटन द्वारा लगभग 100 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां बेचने के बावजूद मुद्रा बाजार में येन की कमजोरी लगातार बनी हुई है। मौद्रिक नीति में अंतर और राजकोषीय विस्तार की वजह से जापानी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होने के बाद भी येन को वो मजबूती नहीं मिल पा रही है जिसकी उम्मीद निवेशक कर रहे थे।\n\nअरबों डॉलर की मुद्रा खरीद और घटता हस्तक्षेप प्रभाव\nलगभग छह सप्ताह पहले जापानी वित्त मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वर्ष 1998 के बाद पहली बार मिलकर येन की खरीद का एक बड़ा अभियान चलाया था। इस विदेशी मुद्रा कार्रवाई में जापानी अधिकारियों ने गुरुवार को करीब 60 अरब डॉलर और शुक्रवार को 25 अरब डॉलर की येन खरीदारी की थी। इसके बाद आने वाले सोमवार को एक और किश्त जारी की गई, जबकि अमेरिकी पक्ष ने भी 5 अरब से 10 अरब डॉलर के बीच योगदान दिया। इस संयुक्त प्रयास के बल पर USD/JPY मुद्रा जोड़ी 164.00 के ऊपरी स्तर से तेजी से गिरकर 155.25 के निचले स्तर पर आ गई थी।\n\nइस प्रकार जापान को 100 अरब डॉलर से अधिक के अपने बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करके महज 9 येन की बढ़त हासिल हुई थी। हालांकि पांच हफ्ते बीतते-बीतते यह पूरी बढ़त बाजार में बह गई और विनिमय दर एक बार फिर 160.00 के पार पहुंच गई। दिलचस्प बात यह रही कि हाल ही में बुधवार को हुई 2 येन की गिरावट के लिए जापान को कोई रकम खर्च नहीं करनी पड़ी। यह गिरावट जापान के वित्त मंत्री और अमेरिकी वित्त मंत्री की बैठक के उस ब्योरे के बाद आई, जिसमें दोनों देशों ने विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित उतार-चढ़ाव की जरूरत पर सहमति व्यक्त की थी। इससे स्पष्ट होता है कि बाजार अब किसी विशेष मूल्य स्तर के बजाय केंद्रीय बैंक के रुख और गति की सीमा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।\n\n3 प्रतिशत तक पहुंची बॉन्ड यील्ड फिर भी येन बेअसर\nजापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड इस हफ्ते बढ़कर 3 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 1996 के बाद से दर्ज किया गया उच्चतम स्तर है। पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार, बॉन्ड यील्ड में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से जापानी मुद्रा को भारी मजबूती मिलनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि बॉन्ड यील्ड में यह तेजी सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों से नहीं, बल्कि सरकार के बड़े राजकोषीय विस्तार कार्यक्रम और उसके कारण बढ़ने वाले ऋण भुगतान के खर्चों की वजह से आई है।\n\nबॉन्ड बाजार के निवेशक वर्तमान में सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले नए बॉन्ड की आपूर्ति को ध्यान में रखकर कीमतें तय कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विदेशी मुद्रा बाजार के निवेशक भी इसी आपूर्ति संरचना का आकलन कर रहे हैं, परंतु वे इस निष्कर्ष पर पहुंच रहे हैं कि यह वृद्धि येन के स्वास्थ्य के लिए नकारात्मक है। जब तक राजकोषीय घाटे और ऋण का दबाव बना रहेगा, तब तक ऊंची यील्ड भी येन को दीर्घकालिक सहारा देने में विफल साबित होगी।\n\nसितंबर की केंद्रीय बैंक बैठकें और ब्याज दर का अंतर\nकैरी ट्रेड और मुद्रा विनिमय दरों को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक 18 सितंबर को होने वाला बैंक ऑफ जापान का नीतिगत निर्णय है। बैंक ऑफ जापान के गवर्नर ने पहले ही संकेत दिए हैं कि बढ़ती महंगाई के जोखिमों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। जापान में आयातित मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ रही है, जिसे वैश्विक ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव से और बढ़ावा मिल रहा है। इसके अतिरिक्त वॉशिंगटन की ओर से भी जापान पर मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने का दबाव लगातार बनाया जा रहा है।\n\nदूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 16 सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग दो-तिहाई संभावना जताई जा रही है। यदि बैंक ऑफ जापान अपनी ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर भी देता है, तब भी अमेरिकी और जापानी ब्याज दरों के बीच 2.5 प्रतिशत से अधिक का भारी अंतर बना रहेगा। यही व्यापक ब्याज दर अंतर डॉलर को येन की तुलना में अधिक आकर्षक बनाए रखता है और निवेशकों को येन बेचकर डॉलर खरीदने के लिए प्रेरित करता है।\n\nशुक्रवार के रोजगार आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख\nअमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े मुद्रा बाजार की अगली दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होंगे। शुक्रवार को 12:30 GMT पर जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट के तहत 58,000 नई नौकरियों का अनुमान व्यक्त किया गया है, जबकि पिछले महीने 23,000 नौकरियों का नुकसान दर्ज किया गया था। इसके साथ ही बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत रहने और औसत प्रति घंटा कमाई में 0.3 प्रतिशत मासिक वृद्धि का अनुमान है।\n\nयदि रोजगार के ये आंकड़े अनुमान से अधिक मजबूत आते हैं, तो USD/JPY की जोड़ी बैंक ऑफ जापान की बैठक से दो हफ्ते पहले ही फिर से 160.00 के स्तर पर पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति जापानी अधिकारियों को नीतिगत बैठक से पहले ही हस्तक्षेप करने पर मजबूर कर सकती है। इसके अलावा, गुरुवार को 12:30 GMT और 19:00 GMT पर दो अमेरिकी फेडरल रिजर्व अधिकारियों का संबोधन होना है, जिनके बयान अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।\n\nतकनीकी विश्लेषण: रेजिस्टेंस और सपोर्ट के प्रमुख स्तर\nतकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो USD/JPY के लिए 160.00 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर रहा है। यह स्तर 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के बहुत करीब है और यही वह दायरा भी है जहां जापानी अधिकारी मौखिक हस्तक्षेप शुरू कर देते हैं। इस स्तर के ऊपर 160.50 पहला साफ रेजिस्टेंस स्तर है, जबकि जुलाई के अंत में देखा गया 164.00 का उच्चतम स्तर अंतिम मुख्य तकनीकी बाधा बना हुआ है।\n\nसपोर्ट स्तरों की बात करें तो 158.50 का क्षेत्र एक मजबूत आधार प्रदान कर रहा है, जिसने बुधवार के रीटेस्ट को सफलतापूर्वक संभाला। इसके ठीक नीचे 158.00 का स्तर मौजूद है। यदि बाजार में कोई वास्तविक ट्रेंड बदलाव होना है, तो उसे 157.50 के पास स्थित 200-दिवसीय EMA को नीचे की ओर तोड़ना होगा। वहीं, पिछले हस्तक्षेप के दौरान बना 155.25 का निचला स्तर वर्तमान ट्रेडिंग सीमा से काफी नीचे स्थित है।\n\nजब तक USD/JPY 158.50 के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार का रुख तेजी का बना हुआ है। हालांकि स्टैकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) 87 के पास होने से अल्पकालिक ओवरबॉट स्थिति का संकेत मिलता है। फिर भी, दोनों देशों के बीच ब्याज दरों का व्यापक अंतर इस तेजी को बनाए हुए है। जब तक दैनिक कैंडल 158.00 के नीचे बंद नहीं होती, तब तक इस मुद्रा जोड़ी में बड़ी गिरावट की संभावना कम ही दिखाई देती है।\n\nजापानी येन की मूलभूत विशेषताएं और safe-haven स्थिति\nजापानी येन दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में से एक है। इसका मूल्य मुख्य रूप से जापान के आर्थिक प्रदर्शन, बैंक ऑफ जापान की नीतियों, अमेरिकी और जापानी बॉन्ड यील्ड के अंतर और वैश्विक बाजार जोखिम की भावना से तय होता है। बैंक ऑफ जापान के मुख्य जनादेशों में मुद्रा नियंत्रण शामिल है, इसलिए इसके कदम येन की दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।\n\nवर्ष 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान की अति-अल्पकालिक और अत्यधिक आसान मौद्रिक नीति के कारण येन में अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले भारी गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि 2024 में इस ढीली नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने के फैसले ने येन को थोड़ी राहत जरूर दी है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक अनिश्चितता और बाजार के तनाव के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में येन का रुख करते हैं, जिससे विपरीत परिस्थितियों में इसे मजबूती मिलती है।\n\nअन्य मुद्रा जोड़ों और जिंस बाजारों का ताजा हाल\nअंतरराष्ट्रीय मुद्रा और जिंस बाजारों में भी हलचल तेज बनी हुई है। GBP/USD जोड़ी 1.3470 के चार सप्ताह के निचले स्तर को छूने के बाद रिकवर होकर सकारात्मक दायरे में लौटने का प्रयास कर रही है। वहीं EUR/USD पर मंदी का दबाव बना हुआ है और डॉलर सूचकांक में मजबूती के बीच यह 1.1580 के स्तर के पास कारोबार कर रहा है।\n\nकीमती धातुओं में सोना एक बार फिर 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के लक्ष्य की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सोने को निचले स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल और WTI क्रूड का अंतर) इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102.00 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो ईंधन बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को दर्शा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nवैश्विक मुद्रा बाजार में जापानी येन की कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और निवेश पर पड़ता है।\n\n• भारत में: विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारत का कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का आयात बिल महंगा होगा। इसके परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में ईंधन और आयातित सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी और जापानी ब्याज दरों के बीच 2.5 प्रतिशत से अधिक का अंतर बने रहने से कैरी ट्रेड करने वाले निवेशकों को डॉलर संपत्तियों में अधिक रिटर्न मिल रहा है। विदेशी मुद्रा में व्यापार करने वाले ट्रेडर्स के लिए USD/JPY में 160.00 का स्तर एक महत्वपूर्ण नीतिगत सीमा बना हुआ है।\n• जापान यात्रा और शिक्षा: येन के कमजोर रहने से जापान जाने वाले भारतीय पर्यटकों और वहां पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए स्थानीय खर्च तुलनात्मक रूप से सस्ते रहेंगे। हालांकि, वहां से भारत पैसा भेजने वालों को कम विनिमय मूल्य मिलेगा।\n• जिंस और ऊर्जा बाजार: अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग लागत बढ़ रही है, जिससे आने वाले समय में परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जापान और अमेरिका ने येन को सहारा देने के लिए कितना पैसा खर्च किया?\nजापान और अमेरिका ने लगभग छह हफ्ते पहले चलाए गए संयुक्त अभियान में 100 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार येन खरीदने में खर्च किया।\n\n2. USD/JPY के लिए कौन सा स्तर सबसे महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस बना हुआ है?\nUSD/JPY के लिए 160.00 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस है, जहां 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) स्थित है और जहां जापानी अधिकारी हस्तक्षेप की चेतावनी देते हैं।\n\n3. जापान की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड किस स्तर पर पहुंची है?\nजापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो वर्ष 1996 के बाद से दर्ज किया गया उच्चतम स्तर है।\n\n4. बैंक ऑफ जापान और फेडरल रिजर्व की अगली बैठकें कब हैं?\nअमेरिकी फेडरल रिजर्व का नीतिगत निर्णय 16 सितंबर को और बैंक ऑफ जापान का निर्णय 18 सितंबर को आने वाला है।\n\n5. शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का क्या अनुमान है?\nशुक्रवार के नॉन-फार्म पेरोल्स आंकड़े में 58,000 नई नौकरियों का अनुमान है, जबकि बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत और औसत प्रति घंटा कमाई 0.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।\n\n6. ऊंची बॉन्ड यील्ड के बाद भी जापानी येन क्यों नहीं मजबूत हो रहा है?\nबॉन्ड यील्ड में यह बढ़ोतरी सख्त मौद्रिक नीति के कारण नहीं, बल्कि सरकार के बढ़ते राजकोषीय विस्तार और ऋण भुगतान के खर्चों के कारण आई है, जिससे येन को समर्थन नहीं मिल पा रहा है।",
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  "publishedAt": "2026-09-02",
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