बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की कोशिशों के बीच मेघालय सरकार ने बढ़ाई निगरानी मेघालय ने बांग्लादेश से लगी अपनी 443 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा समीक्षा के बाद निगरानी तंत्र को मजबूत करने और सीमावर्ती ग्रामीणों को सतर्क करने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली अनधिकृत आवाजाही को रोकने के लिए मेघालय प्रशासन, राज्य पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने मिलकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। बांग्लादेश से लगती 443 किलोमीटर लंबी सीमा के संवेदनशील इलाकों की नए सिरे से समीक्षा की गई है, ताकि सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर घुसपैठ की हर गतिविधि पर तुरंत अंकुश लगाया जा सके। उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक और जमीनी निगरानी सीमा पर ताजा सुरक्षा हालात को लेकर मंगलवार को एक अहम उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग ने सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को जमीनी स्तर पर निगरानी तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान विशेष रूप से उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहां उबड़-खाबड़ भौगोलिक स्थिति और अधूरी बाड़बंदी के कारण सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना एक कठिन चुनौती बना हुआ है। तिनसोंग ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा एजेंसियों को बांग्लादेश की तरफ से मेघालय की सीमा में घुसने की कोशिशों का सामना लगभग हर रोज करना पड़ रहा है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के कारण इस जटिल सीमावर्ती क्षेत्र में चौबीसों घंटे चौकसी बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है। दुर्गम इलाके और अधूरी बाड़बंदी की चुनौती समीक्षा बैठक के दौरान ईस्ट खासी हिल्स और वेस्ट जयंतिया हिल्स के कई हिस्सों को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया। इन जिलों से गुजरने वाली सीमा के कई हिस्से ऐसे हैं जहां पहुंचना काफी मुश्किल है, जबकि कुछ अन्य हिस्सों में अब तक बाड़ लगाने का काम पूरा नहीं हो सका है। यह पूरा सीमावर्ती इलाका मुख्य रूप से घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस प्रकार की प्राकृतिक संरचना के कारण गश्ती दलों की आवाजाही, बाड़ लगाने के काम और निरंतर इलेक्ट्रॉनिक अथवा भौतिक निगरानी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से पारंपरिक सुरक्षा उपायों के साथ अतिरिक्त व्यवस्थाओं को जोड़ना अनिवार्य माना गया है। ग्रामीण रक्षा दल और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सीमा की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार अब सीमांत गांवों में रहने वाले स्थानीय समुदायों की सक्रिय मदद लेने की तैयारी कर रही है। सुरक्षा बलों को जमीनी सहयोग देने के उद्देश्य से सीमावर्ती बस्तियों में विलेज डिफेंस पार्टीज (VDP) को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। इसके साथ ही स्थानीय पारंपरिक प्रमुखों को भी निगरानी तंत्र से जोड़ा जा रहा है, ताकि सीमा के पास किसी भी संदिग्ध हलचल या अजनबी व्यक्ति की मौजूदगी की सूचना तुरंत सुरक्षा अधिकारियों तक पहुंचाई जा सके। नागरिक प्रशासन, पुलिस और BSF के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है जिससे संवेदनशील रास्तों की पहचान समय रहते की जा सके। बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र पर जोर मेघालय में अनधिकृत सीमा पार आवाजाही और घुसपैठ एक लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक व सुरक्षा चुनौती रही है। प्राकृतिक अवरोधों और बाड़ के अभाव वाले संवेदनशील रास्तों पर केवल पारंपरिक पहरेदारी के सहारे पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद मुश्किल साबित होता रहा है। इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए राज्य प्रशासन एक मजबूत बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू करने पर काम कर रहा है, जिसमें सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन और सीमावर्ती नागरिक मिलकर एक रक्षा घेरा तैयार करेंगे। तिनसोंग ने स्पष्ट किया कि जहां भौगोलिक परिस्थितियां सीमाओं की भौतिक घेराबंदी को सीमित कर देती हैं, वहां स्थानीय ग्रामीणों की सजगता सीमा को सुरक्षित रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी सख्त होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था और स्थानीय सुरक्षा मजबूत होगी। • भारत में: देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा घेरा मजबूत होने से गैर-कानूनी घुसपैठ और सीमा पार से होने वाली अवांछित गतिविधियों पर रोक लगेगी। इससे राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को व्यापक स्तर पर मजबूती मिलती है। • मेघालय में: सीमा से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को विलेज डिफेंस पार्टीज और पारंपरिक प्रधानों के जरिए सीधे सुरक्षा तंत्र से जोड़ा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों को अब किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और सीमा सुरक्षा बल को देनी होगी। • आवाजाही पर असर: ईस्ट खासी हिल्स और वेस्ट जयंतिया हिल्स जैसे दुर्गम सीमांत क्षेत्रों में गश्त बढ़ने से बिना पहचान पत्र या अनधिकृत रास्तों से आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। सीमावर्ती निवासियों को अपनी दैनिक गतिविधियों के दौरान पहचान पत्र साथ रखने की सलाह दी जा सकती है। • सामुदायिक सतर्कता: गांवों में सुरक्षा बलों और प्रशासन का संपर्क बढ़ने से स्थानीय लोगों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज होगा। इससे सीमांत इलाकों में अवैध गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ मेघालय सरकार ने बांग्लादेश सीमा पर लगभग हर दिन हो रही घुसपैठ की कोशिशों और दुर्गम इलाकों में बाड़बंदी की कमी को देखते हुए यह कदम उठाया है। • दैनिक घुसपैठ के प्रयास: सुरक्षा एजेंसियों के सामने लगभग प्रतिदिन सीमा पार से अनधिकृत प्रवेश के मामले आ रहे हैं। इस लगातार दबाव के कारण निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत करना अनिवार्य हो गया था। • कठिन भौगोलिक परिस्थितियां: सीमावर्ती इलाके घने जंगलों और पहाड़ियों से भरे हैं, जहां लगातार गश्त लगाना बेहद कठिन होता है। इस प्राकृतिक बनावट का फायदा उठाकर अनधिकृत आवाजाही की आशंका हमेशा बनी रहती है। • अधूरी बाड़बंदी: ईस्ट खासी हिल्स और वेस्ट जयंतिया हिल्स के कई हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अभी पूरी तरह बाड़ नहीं लग पाई है। इन खुले रास्तों पर नजर रखने के लिए केवल पारंपरिक बाड़ के बजाय मानव निगरानी और स्थानीय सहयोग की जरूरत पड़ी। • सुरक्षा समन्वय की आवश्यकता: सुरक्षा एजेंसियों, राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान में सुधार करना जरूरी था। इसी वजह से उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई। सवाल-जवाब 1. मेघालय ने बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था क्यों बढ़ाई है? सीमा पार से लगभग हर रोज हो रही घुसपैठ की कोशिशों और दुर्गम इलाकों में बाड़ न होने के कारण निगरानी बढ़ाई गई है। 2. मेघालय और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई कितनी है? मेघालय और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 443 किलोमीटर है। 3. सीमा पर किन दो जिलों को सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना गया है? ईस्ट खासी हिल्स और वेस्ट जयंतिया हिल्स के सीमावर्ती हिस्सों को दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। 4. सीमा निगरानी में स्थानीय ग्रामीणों को किस प्रकार शामिल किया जा रहा है? सीमांत गांवों में विलेज डिफेंस पार्टीज को सक्रिय किया गया है और पारंपरिक प्रमुखों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देने को कहा गया है। 5. इस सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की? इस उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग ने की। https://trendkia.com/meghalaya/bangladesh-sima-para-ghusapaitha-ki-koshishon-ke-bicha-meghalaya-sarakara-ne-barhai-nigarani-40365 TrendKia — Har trend, sabse pehle.