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  "title": "मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने तैयार किया मेडिकल रोडमैप, मार्च 2027 तक मेघालय में काम करने लगेंगे 700 स्वास्थ्य उप-केंद्र",
  "summary": "मेघालय सरकार राज्य के ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य नेटवर्क का विस्तार कर रही है, जहां अगले कुछ वर्षों में 200 नए उप-केंद्र जोडकर कुल संख्या 700 तक पहुंचाई जाएगी।",
  "content": "मेघालय में दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों तक प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान यह घोषणा की कि मार्च 2027 तक मेघालय में स्वास्थ्य उप-केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 700 हो जाएगी। पिछले दो वर्षों के दौरान राज्य भर में 110 से अधिक उप-केंद्रों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मार्च 2027 तक 200 और नए उप-केंद्र तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाली आबादी को उनके घर के पास ही प्राथमिक इलाज मिल सकेगा।\n\nप्रमुख अस्पतालों का उन्नयन और क्षेत्रीय परियोजनाएं\nराज्य सरकार की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजना के तहत कई महत्वपूर्ण चिकित्सा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। बजेंगडोबा, बर्नीहाट, महेंद्रगंज, रक्समग्रे और माइलियम उमथलोंग में बन रहे स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने इन सभी सुविधाओं को जनवरी 2027 तक पूरी तरह कार्यात्मक और जनसेवा में समर्पित करने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त, रेसुबेलपारा में निर्मित किए जा रहे 100 बिस्तरों वाले अस्पताल को भी जल्द से जल्द चालू करने के निर्देश जारी किए गए हैं।\n\n \nवर्तमान में मेघालय के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग 7,000 बिस्तरों की कुल क्षमता उपलब्ध है। जारी निर्माण और विस्तार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य के सरकारी अस्पतालों में 600 से अधिक नए बिस्तर जुड़ जाएंगे। इससे जिला और सामुदायिक स्तर के अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।\n\nस्वास्थ्य बजट में निवेश और गिरती शिशु-मातृ मृत्यु दर\nसमीक्षा बैठक के दौरान जारी रिपोर्ट मेघालय स्वास्थ्य रुझान: प्रगति और प्राथमिकताएं के अनुसार, राज्य सरकार ने पिछले पांच वर्षों के दौरान विभिन्न वित्तीय स्रोतों के माध्यम से चिकित्सा ढांचे के विकास में लगभग 750 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया है। इस बड़े पैमाने के निवेश के सकारात्मक परिणाम राज्य के मुख्य स्वास्थ्य सूचकांकों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।\n\nआंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच मेघालय में शिशु मृत्यु दर में लगभग 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में जहां शिशु मौतों का आंकड़ा 3,064 था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह घटकर 1,833 पर आ गया। इसी समयावधि के दौरान मातृ मृत्यु दर में भी 57 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है, जो राज्य में बेहतर प्रसव और स्वास्थ्य सेवाओं का संकेत देती है।\n\nसंस्थागत प्रसव, टीकाकरण और स्वास्थ्य बीमा में रिकॉर्ड बढ़ोतरी\nराष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6, 2023-24) के आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में संस्थागत प्रसव की दर, जो NFHS-4 में 51.4 प्रतिशत थी, बढ़कर 65.6 प्रतिशत हो गई। यह आंकड़ा वर्ष 2025-26 में और अधिक सुधरकर 79 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अस्पतालों और प्रसव केंद्रों में प्रसव होने से मां और नवजात शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।\n\nबच्चों के पूर्ण टीकाकरण कवरेज में भी सुधार देखा गया है, जो 63.8 प्रतिशत से बढ़कर 75.3 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने X पर लिखा कि सरकार स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के प्रयासों की निरंतर समीक्षा कर रही है। राज्य में घरेलू स्वास्थ्य बीमा कवरेज भी 34.6 प्रतिशत से उछलकर 74.9 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। सरकार का मुख्य ध्यान राज्य के हर नागरिक के करीब गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।\n\nइसका आप पर असर\nमेघालय में स्वास्थ्य उप-केंद्रों और अस्पताल बिस्तरों के इस बड़े विस्तार से राज्य के आम नागरिकों और ग्रामीण परिवारों को सीधे चिकित्सा लाभ मिलेगा।\n\n• भारत में: उत्तर-पूर्वी राज्यों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का यह सुदृढ़ीकरण राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने में योगदान देगा। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में मातृ और शिशु देखभाल मॉडल को एक नई दिशा मिलेगी।\n• मेघालय में: मार्च 2027 तक 200 नए उप-केंद्रों और 600 अतिरिक्त बिस्तरों के शुरू होने से ग्रामीण निवासियों को अपने गांव के पास ही मुफ्त और त्वरित प्राथमिक इलाज मिलेगा। प्रसव केंद्रों और एम्बुलेंस पहुंच में सुधार होने से आपातकालीन स्थितियों में समय पर इलाज संभव हो सकेगा।\n• वित्तीय सुरक्षा: राज्य में 74.9 प्रतिशत परिवारों के स्वास्थ्य बीमा से जुड़ने के कारण गंभीर बीमारियों के इलाज पर होने वाला जेब से खर्च काफी कम हो जाएगा।\n• शिशु एवं मातृ सुरक्षा: संस्थागत प्रसव 79 प्रतिशत तक पहुंचने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को जन्म के समय विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमेघालय सरकार ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और ऐतिहासिक रूप से उच्च मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में भारी निवेश का निर्णय लिया है।\n\n• प्राथमिक स्वास्थ्य पहुंच में अंतर: पहाडी और दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की कमी के कारण ग्रामीणों को बुनियादी इलाज के लिए दूर जाना पड़ता था, जिसे दूर करने के लिए उप-केंद्रों का विस्तार जरूरी था।\n• दीर्घकालिक बजट आवंटन: पिछले 5 वर्षों में 750 करोड़ रुपये का निवेश करके सरकार ने अस्पतालों के निर्माण, बिस्तरों की वृद्धि और बुनियादी चिकित्सा उपकरणों के उन्नयन को प्राथमिकता दी।\n• मृत्यु दर में कमी का लक्ष्य: शिशु और मातृ मौतों को रोकने के लिए संस्थागत प्रसव और 100 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज को बढ़ावा देना सरकार की प्रमुख नीति रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मार्च 2027 तक मेघालय में स्वास्थ्य उप-केंद्रों की कुल संख्या कितनी हो जाएगी?\nमार्च 2027 तक 200 नए केंद्रों के निर्माण के साथ मेघालय में स्वास्थ्य उप-केंद्रों की कुल संख्या 700 हो जाएगी।\n\n2. पिछले पांच वर्षों में मेघालय सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे पर कितना निवेश किया है?\nराज्य सरकार ने विभिन्न संसाधनों के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में स्वास्थ्य ढांचे पर लगभग 750 करोड़ रुपये का निवेश किया है।\n\n3. मेघालय में शिशु मृत्यु दर में कितनी गिरावट दर्ज की गई है?\nपिछले पांच वर्षों में शिशु मृत्यु दर में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2020-21 में 3,064 से घटकर 2025-26 में 1,833 रह गई है।\n\n4. जनवरी 2027 तक किन स्थानों पर स्वास्थ्य सुविधाएं चालू करने की योजना है?\nबजेंगडोबा, बर्नीहाट, महेंद्रगंज, रक्समग्रे और माइलियम उमथलोंग की स्वास्थ्य सुविधाओं को जनवरी 2027 तक चालू करने की योजना है।\n\n5. वर्ष 2025-26 में मेघालय में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत कितना हो गया है?\nवर्ष 2025-26 में संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 79 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो NFHS-4 में 51.4 प्रतिशत थी।",
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  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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