मेघालय में रविवार को बैंक खोलने के निर्देश का कॉमसो ने किया विरोध, फैसला वापस लेने की मांग 27 सितंबर को सरकारी और ग्रामीण बैंकों को खुला रखने के वित्त मंत्रालय के फैसले पर मेघालय में नागरिक संगठन कॉमसो ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय धार्मिक और सामाजिक परंपराओं की अनदेखी करता है। वित्त मंत्रालय द्वारा 27 सितंबर यानी रविवार के दिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को खुला रखने के निर्देश के बाद मेघालय में विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। यह आदेश 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के मद्देनजर जारी किया गया था, ताकि वित्तीय सेवाओं में किसी तरह का व्यवधान न आए। हालांकि, राज्य के प्रमुख नागरिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गेनाइजेशन्स (कॉमसो) ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अधिकारियों से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संगठन के महासचिव बालकारिन सीएच मारक की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि रविवार को बैंक खोलने का आदेश राज्य के लोगों की धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं पर चोट करता है। प्रशासनिक सुविधा और धार्मिक परंपरा का टकराव कॉमसो ने माना कि निर्बाध बैंकिंग सेवाएं बनाए रखना सरकार की एक जायज प्रशासनिक चिंता हो सकती है, लेकिन सिर्फ प्रशासनिक सुविधा के लिए किसी राज्य की धार्मिक और सामाजिक वास्तविकताओं को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए। मेघालय में रविवार का दिन पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना, प्रार्थना, पारिवारिक मेल-मिलाप और विश्राम के लिए समर्पित रहता है। संगठन ने सवाल उठाया कि राज्य-विशिष्ट परिस्थितियों पर परामर्श किए बिना बैंक कर्मियों को इस पवित्र दिन पर काम करने के लिए मजबूर करना पूरी तरह अनुचित है। बयान में रेखांकित किया गया कि मेघालय केवल किसी राष्ट्रीय प्रशासनिक ढांचे का एक साधारण भौगोलिक हिस्सा भर नहीं है, बल्कि इस राज्य की अपनी विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है, जिसे नीतियां लागू करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए। रविवार के बजाय सुझाए गए व्यावहारिक विकल्प संगठन ने यह तर्क भी दिया कि बैंक कर्मियों को रविवार को काम पर बुलाने के बजाय अन्य व्यावहारिक विकल्पों पर काम किया जा सकता था। हड़ताल अवधि से पहले बैंकिंग घंटों को बढ़ाना, एटीएम और डिजिटल लेनदेन सेवाओं को मजबूत करना और सीमित आपातकालीन व्यवस्थाएं तैयार करना जैसे उपाय लागू किए जा सकते थे, जिससे आम जनता को असुविधा भी न होती और रविवार की महत्ता भी बनी रहती। कॉमसो ने जोर देकर कहा कि बैंक ग्राहकों की सुविधा को कर्मचारियों और बहुसंख्यक आबादी की जायज धार्मिक और सामाजिक भावनाओं की कीमत पर प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। हितधारकों से परामर्श और भविष्य की चेतावनी कॉमसो ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और मेघालय सरकार से मांग की है कि वे इस फैसले की राज्य में प्रासंगिकता की तुरंत समीक्षा करें। संगठन ने कहा कि जब कोई निर्णय लोगों के धार्मिक और सामाजिक जीवन में गहराई से जुड़ी प्रथाओं को सीधे प्रभावित करता है, तो अधिकारियों की यह बुनियादी जिम्मेदारी बनती है कि वे लोगों की बात सुनें, संवाद करें और संवेदनशील रुख अपनाएं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि चिंताओं को दूर किए बिना इस फैसले को जबरन आगे बढ़ाया गया, तो वह समय आने पर उचित कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। इसका आप पर असर मेघालय में 27 सितंबर को सरकारी बैंकों के कामकाज पर नागरिक संगठन के विरोध का सीधा असर बैंक कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों पर पड़ सकता है। • मेघालय में: रविवार को पूजा और पारिवारिक आयोजनों के चलते बैंक कर्मियों के काम करने का विरोध हो रहा है। यदि प्रशासन फैसले पर अड़ा रहता है या संगठन विरोध तेज करता है, तो शाखाओं में सामान्य कामकाज बाधित हो सकता है। • भारत में: 28 से 30 सितंबर तक देशव्यापी हड़ताल की योजना के चलते पूरे देश में बैंक सेवाएं प्रभावित होने के आसार हैं। ऐसे में ग्राहकों को नकदी निकासी और जरूरी लेनदेन 27 सितंबर से पहले या डिजिटल माध्यमों से पूरे कर लेने चाहिए। • बैंक ग्राहकों के लिए: मेघालय के खाताधारकों को रविवार को शाखा जाने से पहले स्थानीय संचालन की स्थिति जांच लेनी चाहिए। हड़ताल से निपटने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर और मोबाइल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित विकल्प रहेगा। • बैंक कर्मचारियों के लिए: स्थानीय परंपराओं के समर्थन में उठाई गई मांग से बैंक कर्मियों के कार्यदिवस को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रबंधन या सरकार की तरफ से राज्य-विशिष्ट छूट पर अंतिम निर्णय आने तक अनिश्चितता रह सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब केंद्र सरकार ने आगामी तीन दिवसीय बैंक हड़ताल के दौरान ग्राहकों को राहत देने के लिए रविवार को बैंक खोलने का आदेश दिया, जिससे स्थानीय सांस्कृतिक भावनाएं आहत हुईं। • हड़ताल की पृष्ठभूमि: 28 से 30 सितंबर तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। वित्तीय कामकाज लगातार तीन दिन पूरी तरह ठप न हो, इसलिए वित्त मंत्रालय ने 27 सितंबर रविवार को बैंक खोलने का निर्देश जारी किया। • धार्मिक और सामाजिक कारण: मेघालय में बहुसंख्यक आबादी रविवार को गिरजाघरों में प्रार्थना, पारिवारिक मिलन और विश्राम के दिन के रूप में मानती है। स्थानीय स्तर पर रविवार को आधिकारिक कामकाज कराना सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। • परामर्श की कमी: कॉमसो का कहना है कि केंद्र ने राज्य सरकार या स्थानीय हितधारकों से सलाह लिए बिना पूरे देश के लिए एक समान नियम थोप दिया। पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट परंपराओं को समझे बिना ऐसा निर्णय लेने से असंतोष बढ़ा है। सवाल-जवाब 1. कॉमसो किस बात का विरोध कर रहा है? कॉमसो वित्त मंत्रालय के उस आदेश का विरोध कर रहा है जिसमें मेघालय में रविवार 27 सितंबर को सरकारी और ग्रामीण बैंकों को खुला रखने का निर्देश दिया गया है। 2. वित्त मंत्रालय ने रविवार को बैंक खोलने का निर्देश क्यों दिया था? 28 से 30 सितंबर तक होने वाली प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल के कारण वित्तीय सेवाओं को जारी रखने के लिए यह निर्देश दिया गया था। 3. मेघालय में रविवार को बैंक खोलने पर क्या आपत्ति है? मेघालय में रविवार को पारंपरिक रूप से पूजा, प्रार्थना, पारिवारिक मेल-मिलाप और विश्राम के दिन के रूप में देखा जाता है, इसलिए इसे कार्यदिवस बनाने का विरोध हो रहा है। 4. कॉमसो ने रविवार के स्थान पर क्या विकल्प सुझाए हैं? संगठन ने हड़ताल से पहले कामकाजी घंटे बढ़ाने, एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने और सीमित आपातकालीन व्यवस्थाएं करने का सुझाव दिया है। 5. यह बयान कॉमसो के किस पदाधिकारी द्वारा जारी किया गया है? यह आधिकारिक बयान कॉमसो के महासचिव बालकारिन सीएच मारक द्वारा जारी किया गया है। https://trendkia.com/meghalaya/comso-objects-to-banks-opening-on-sunday-in-meghalaya-seeks-reconsideration-37611 TrendKia — Har trend, sabse pehle.