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  "type": "article",
  "title": "श्री सीमेंट माइनिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ मेघालय हाईकोर्ट पहुंचा जेएसयू, आंदोलन की दी चेतावनी",
  "summary": "जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन ने मेघालय हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर श्री सीमेंट की प्रस्तावित माइनिंग परियोजना के लिए हाल ही में हुए पर्यावरण लोक सुनवाई को चुनौती दी है। यूनियन ने प्रक्रिया में धांधली और हिंसक घटनाओं का आरोप लगाया है।",
  "content": "शिलांग में स्थानीय संगठन ने प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना के खिलाफ कानूनी लड़ाई का रुख किया है। जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन ने मेघालय हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है ताकि श्री सीमेंट लिमिटेड की ओर से प्रस्तावित माइनिंग परियोजना के सिलसिले में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई को चुनौती दी जा सके। यह विवादास्पद लोक सुनवाई 31 जुलाई 2026 को लूम सिरमैन, इलाका नोंग्खलिएह में संपन्न हुई थी।\n\n \n\nहाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर\n यूनियन के एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को अदालत में जनहित याचिका दाखिल की। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई शिक्षा सचिव बोचेरू मी पोहस्नेम और महासचिव नीलकी मुखिम ने संयुक्त रूप से की। संगठन का कहना है कि उन्हें मजबूरन अदालत का रुख करना पड़ा क्योंकि राज्य प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया और न ही क्लीयरेंस प्रक्रिया पर रोक लगाई गई।\n\n \n\nअन्य मंचों पर लंबित शिकायतें और आरोप\n छात्र संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि मेघालय मानवाधिकार आयोग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष कई शिकायतें और मामले अभी भी लंबित हैं। यूनियन का तर्क है कि वे इन संस्थाओं से किसी ठोस फैसले की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन इस बीच मंजूरी की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ती रही। अपनी याचिका में संगठन ने अनिवार्य जनसुनवाई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और दावा किया है कि इस पूरी प्रक्रिया को महज़ 46 मिनट की औपचारिकता तक सीमित कर दिया गया, जिसमें स्थानीय भूस्वामियों और मूल निवासियों को भाग लेने से रोक दिया गया।\n\n \n\nहिंसा और एम्बुलेंस पर हमले के गंभीर आरोप\n याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि कार्यवाही के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमले किए गए और यूनियन की एक आपातकालीन मेडिकल एम्बुलेंस को भी निशाना बनाया गया। संगठन के मुताबिक, उनके ड्राइवर रैपबोर मुखिम को पत्थरों और गुलेलों से किए गए हमले में सिर पर गंभीर चोटें आईं। याचिका में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।\n\n \n\nपुलिस कार्रवाई पर सवाल और तीखी चेतावनी\n यूनियन का दावा है कि हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मूल निवासी युवाओं पर आंसू गैस के गोले छोड़े और कमजोर जमानत योग्य धाराओं के तहत मामले दर्ज किए। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में न्याय नहीं मिलता है, तो वे अन्य नागरिक समाज समूहों के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरू करेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़ी पर्यावरणीय जनसुनवाइयों और स्थानीय अधिकारों के मुद्दों पर इस कानूनी कदम का असर दूरगामी हो सकता है।\n\nमेघालय में: शिलांग और आसपास के इलाकों में संभावित आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों की आवाजाही और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जेएसयू ने हाईकोर्ट में क्या चुनौती दी है?\nजयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन ने श्री सीमेंट के प्रस्तावित माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए 31 जुलाई 2026 को हुई पर्यावरणीय जनसुनवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।\n\n2. यह याचिका किसने दाखिल की है?\nयह जनहित याचिका जेएसयू के केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा दायर की गई है, जिसकी अगुवाई शिक्षा सचिव बोचेरू मी पोहस्नेम और महासचिव नीलकी मुखिम ने की।\n\n3. यूनियन ने लोक सुनवाई को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?\nयूनियन का आरोप है कि जनसुनवाई को महज़ 46 मिनट की औपचारिकता बना दिया गया और स्थानीय भूस्वामियों को उसमें शामिल होने से रोक दिया गया।\n\n4. माइनिंग प्रोजेक्ट किस जगह के लिए प्रस्तावित है?\nयह प्रस्तावित माइनिंग प्रोजेक्ट लूम सिरमैन, इलाका नोंग्खलिएह में स्थित है।",
  "url": "https://trendkia.com/meghalaya/jsu-challenges-shree-cement-public-hearing-in-meghalaya-high-court-21210",
  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-08-24",
  "tags": [
    "मेघालय हाईकोर्ट",
    "श्री सीमेंट",
    "जेएसयू",
    "पर्यावरण लोक सुनवाई",
    "माइनिंग प्रोजेक्ट",
    "शिलांग"
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  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
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