# मेघालय सरकार का MTET नियम पर बड़ा स्पष्टीकरण, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

> मेघालय सरकार ने स्पष्ट किया है कि सेवारत शिक्षकों के लिए एमटीईटी पास करना राज्य की नीति नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। सरकार ने यह बयान वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी की चिंताओं के जवाब में दिया है।

**Type:** article · **Category:** मेघालय · **Published:** 2026-08-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-government-defends-mtet-mandate-cites-supreme-court-ruling-21822 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेघालय, एमटीईटी, सुप्रीम कोर्ट, शिक्षा विभाग, टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट, शिलोंग

शिलोंग में मेघालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कुछ सेवारत शिक्षकों के लिए एमटीईटी यानी मेघालय टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट पास करना अनिवार्य किया जाना किसी स्थानीय नीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह देश की शीर्ष अदालत के एक निर्देश के तहत लागू किया गया है।

 

## वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी के विरोध पर प्रतिक्रिया

हाल ही में वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी यानी VPP ने शिक्षकों को कथित रूप से परेशान किए जाने और टेट के नियमों को पिछली तारीख से लागू किए जाने को लेकर तीखा विरोध जताया था। पार्टी ने पुरानी मांग दोहराते हुए कहा था कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों पर परीक्षा पास करने का दबाव तुरंत रोका जाए और मेघालय प्राइवेट कॉलेजेज प्रमोशन एंड रेगुलेशन एक्ट, 2025 को पूरी तरह वापस लिया जाए। इन तमाम राजनीतिक और सामाजिक आपत्तियों के बीच सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ न्यायिक निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।

 

## केंद्रीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का आधार

प्रशासन की ओर से बताया गया कि टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट किसी राज्य विशेष का नियम नहीं है, बल्कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत एक केंद्रीय कानून है। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि 1 सितंबर 2025 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस शर्त को पूरी तरह से बाध्यकारी बना दिया है। इस न्यायिक निर्देश के मुताबिक, कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले वे सभी सेवारत शिक्षक जिनके पास सेवा के पांच साल या उससे अधिक का समय बचा है, उन्हें आगामी 31 अगस्त 2028 तक टेट परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। इसके विपरीत, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम बची है, उन्हें अपनी नौकरी जारी रखने के लिए इस परीक्षा को पास करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

 

## कानूनी विकल्प और प्रशासनिक तैयारियां

इस पूरे मामले पर आगे कदम उठाते हुए मेघालय सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है। इसके अलावा, फैसले के पिछले प्रभावों को चुनौती देते हुए सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। इसी तरह का कदम उठाते हुए मेघालय एसएसए स्कूल्स एसोसिएशन ने भी अदालत में अलग से पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। अनुभवी और वरिष्ठ शिक्षकों के भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार का प्रयास है कि एमटीईटी का आयोजन बार-बार और नियमित रूप से किया जाए, जिससे किसी भी शिक्षक की नौकरी पर कोई संकट न आए। शिक्षा विभाग ने प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने वाले सभी শিক্ষকদের का एक श्रेणी-वार डेटाबेस तैयार कर लिया है, जिसमें उनकी योग्यता, शेष सेवा अवधि और प्रमोशन से जुड़े ब्योरे शामिल हैं।

 

## निजी कॉलेजों से जुड़े नए कानून पर सफाई

मेघालय प्राइवेट कॉलेजेज प्रमोशन एंड रेगुलेशन एक्ट, 2025 को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इस कानून से निजी संस्थानों के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नौकरियों या उनकी सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी। यह अधिनियम कर्मचारियों की सेवाओं और दर्जे को छीनने के बजाय वित्तीय तथा प्रशासनिक सुरक्षा के लिए एक ठोस कानूनी ढांचा तैयार करता है। इस कानून के तहत एडेड कॉलेज फंड के रखरखाव, खातों की नियमित ऑडिटिंग और सरकारी सहायता अनुदान के सही इस्तेमाल के प्रावधान शामिल किए गए हैं, ताकि कर्मचारियों के लिए आने वाला धन पूरी पारदर्शिता के साथ खर्च किया जा सके। साथ ही, अधिनियम सरकार को इन संस्थानों के कर्मचारियों के लिए लाभ से जुड़े नियम बनाने का अधिकार भी देता है, जबकि कॉलेजों को अपने सभी कर्मचारियों की योग्यता और विवरण सौंपने होंगे। विभिन्न क्षेत्रों के निजी कॉलेजों के प्रतिनिधियों और प्राचार्यों को मिलाकर कुल पांच उप-समितियां बनाई गई हैं, जो स्थापना, अनुमति, वित्त, शुल्क विनियमन, बुनियादी ढांचे और अनुपालन जैसे मुद्दों की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि हर पक्ष की बात को ध्यान में रखकर नियम तय किए जा सकें।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** देशभर में शिक्षक पात्रता परीक्षा के नियमों और केंद्रीय शिक्षा कानूनों के पालन को लेकर सेवारत शिक्षकों पर पड़ने वाले प्रशासनिक प्रभावों को यह मामला स्पष्ट करता है।

**मेघालय में:** राज्य के उन सेवारत शिक्षकों और निजी कॉलेज कर्मियों को सीधे प्रभावित करता है जिन्हें अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अपनी योग्यता साबित करने के लिए एमटीईटी पास करना होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. मेघालय में एमटीईटी परीक्षा पास करना किसके लिए अनिवार्य किया गया है?
कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले उन सेवारत शिक्षकों के लिए यह अनिवार्य है जिनके पास सेवा के पांच साल या उससे अधिक का समय बचा है।

### 2. सुप्रीम कोर्ट ने एमटीईटी पास करने की अंतिम तिथि क्या तय की है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सेवारत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टेट परीक्षा पास करनी होगी।

### 3. किन शिक्षकों को एमटीईटी पास करने से छूट दी गई है?
जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम बची है, उन्हें परीक्षा पास करने की आवश्यकता नहीं होगी।

### 4. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या कानूनी कदम उठाया है?
सरकार ने फैसले के पिछले प्रभावों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर की है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._