मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स में डॉपलर वेदर रडार प्रोजेक्ट जमीन विवाद में अटका ईस्ट खासी हिल्स में प्रस्तावित डॉपलर वेदर रडार प्रोजेक्ट जमीन के स्वामित्व विवाद में फंस गया है, जिसके बाद प्रशासन ने IMD को वैकल्पिक जगह तलाशने और पुरानी जमीन के अधिग्रहण की संभावना जांचने के निर्देश दिए हैं। मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में प्रस्तावित डॉपलर वेदर रडार की स्थापना प्रक्रिया जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी समस्या के कारण अटक गई है। इस महत्वपूर्ण परियोजना में देरी से बचने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन ने एक दोहरी रणनीति पर काम शुरू किया है, ताकि मौसम निगरानी प्रणाली को जल्द से जल्द क्रियान्वित किया जा सके। जमीन विवाद सुलझाने के लिए बनाई गई रणनीति ईस्ट खासी हिल्स के उपायुक्त अभिलाष बरनवाल ने परियोजना की समीक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस समीक्षा बैठक में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैनबोरलांग वारजरी भी शामिल थे। बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया कि IMD को चिन्हित स्थल के विकल्प के रूप में तुरंत दूसरी उपयुक्त जगह की तलाश शुरू करनी चाहिए। इसके साथ ही उपायुक्त कार्यालय की राजस्व शाखा को निर्देश दिया गया है कि वह मूल रूप से चुने गए स्थान की कानूनी पेचीदगियों की जांच करे और वहां जमीन अधिग्रहण की संभावनाओं का पता लगाए। प्रशासन की कोशिश है कि जमीन के विवाद के कारण वेदर रडार की स्थापना में बेवजह की देरी न हो। खासी-जयंतिया हिल्स में मौसम पूर्वानुमान होगा मजबूत डॉपलर वेदर रडार के चालू होने के बाद पूरे खासी-जयंतिया हिल्स क्षेत्र में मौसम पूर्वानुमान प्रणाली काफी मजबूत हो जाएगी। यह रडार सटीक और समय पर मौसम से जुड़ी जानकारी प्रदान करने में मदद करेगा, जिससे चरम मौसम की घटनाओं की अग्रिम चेतावनी आसानी से जारी की जा सकेगी। आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिहाज से भी यह तकनीक बेहद अहम साबित होगी। समय रहते सटीक जानकारी मिलने से आपातकालीन सेवाएं और स्थानीय प्रशासन आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे। मानसून के खतरों से निपटने में मिलेगी मदद मेघालय के लिए यह परियोजना बेहद संवेदनशील और जरूरी मानी जा रही है। मानसून के दौरान राज्य में भारी बारिश और मौसम संबंधी अन्य आपदाएं बार-बार आती हैं, जिससे यातायात ठप हो जाता है, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है और स्थानीय बस्तियों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। नया वेदर रडार आपदा पूर्व चेतावनियों को सटीक बनाकर जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद करेगा। इसका आप पर असर • भारत में: अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में IMD के रडार नेटवर्क के मजबूत होने से पूरे पूर्वोत्तर भारत में मौसम संबंधी आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी। • मेघालय में: रडार चालू होने के बाद ईस्ट खासी हिल्स और आसपास के निवासियों को भारी बारिश और अचानक बाढ़ जैसी आपदाओं की समय पर सटीक चेतावनी मिलेगी। सवाल-जवाब 1. ईस्ट खासी हिल्स में डॉपलर वेदर रडार की स्थापना में देरी क्यों हो रही है? रडार स्थापना के लिए सबसे पहले चुनी गई जमीन के मालिकाना हक से जुड़े विवाद के कारण इस परियोजना में देरी हो रही है। 2. जमीन की समस्या को हल करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है? प्रशासन ने IMD को एक वैकल्पिक जगह खोजने के निर्देश दिए हैं और साथ ही राजस्व शाखा को मूल जमीन के कानूनी अधिग्रहण की संभावना जांचने को कहा है। 3. परियोजना की समीक्षा बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ? बैठक की अध्यक्षता ईस्ट खासी हिल्स के उपायुक्त अभिलाष बरनवाल ने की, जिसमें IMD के अधिकारी और DDMA के CEO शैनबोरलांग वारजरी शामिल हुए। 4. डॉपलर वेदर रडार से मेघालय को क्या लाभ होगा? यह मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार करेगा, प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करेगा और खासी-जयंतिया हिल्स में मानसून की तैयारियों में मदद करेगा। https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-ke-east-khasi-hills-men-dopalara-vedara-radara-projekta-jamina-vivada-men-ataka-22337 TrendKia — Har trend, sabse pehle.