मेघालय के एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग तेज, सामाजिक संगठन ने कोनराड संगमा सरकार पर लगाया निष्क्रियता का आरोप कॉन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गनाइज़ेशन्स ने एडवोकेट जनरल अमित कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री कोनराड संगमा पर कानूनी बिरादरी से किए वादे पूरे न करने का आरोप लगाया है। मेघालय में राज्य सरकार के शीर्ष कानूनी पद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कॉन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गनाइज़ेशन्स (कॉम्सो) ने राज्य के एडवोकेट जनरल अमित कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर कोनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि कानूनी बिरादरी के भारी विरोध और महाधिवक्ता कार्यालय के कामकाज पर उठ रहे सवालों के बावजूद राज्य सरकार कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही है। कानूनी बिरादरी से किए वादों पर उठे सवाल गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कॉम्सो के महासचिव बलकारिन सीएच. मारक ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा पर तीखा हमला बोला। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री ने कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को जो आश्वासन दिए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया है। सरकार की इस लगातार चुप्पी और निष्क्रियता ने प्रशासन की साख और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। संगठन के अनुसार, इस गतिरोध का सीधा असर अदालतों के सामान्य कामकाज पर पड़ रहा है, जिससे न्याय पाने की उम्मीद लेकर आने वाले आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सार्वजनिक धन के खर्च और आरटीआई पर विवाद संगठन ने महाधिवक्ता कार्यालय से जुड़े खर्चों और नियुक्तियों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। कॉम्सो ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारियों पर सरकार के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं, विशेष रूप से कानूनी प्रतिनिधित्व के बदले किए गए भुगतानों और सरकारी खर्च के ब्योरे को लेकर। संगठन ने पूछा कि मेघालय की जनता से यह क्यों छिपाया जा रहा है कि कानूनी मुकदमों और प्रतिनिधित्व पर करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन किस तरह खर्च किया जा रहा है। स्थानीय प्रतिभाओं की अनदेखी का आरोप राज्य के बाहर के व्यक्ति को इस संवैधानिक पद पर बनाए रखने के सरकारी फैसले पर भी कॉम्सो ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का तर्क है कि मेघालय में कई वरिष्ठ, योग्य और सक्षम स्थानीय वकील मौजूद हैं जो इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी बखूबी संभाल सकते हैं। इसके बावजूद बाहरी व्यक्ति को प्राथमिकता देना समझ से परे है। संगठन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य के कानूनी संस्थानों की गरिमा और सरकार की साख बचाने के बजाय एक व्यक्ति विशेष को बचाने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। संकट के लिए सरकार को ठहराया जिम्मेदार इस पूरे प्रशासनिक और न्यायिक संकट के लिए कोनराड संगमा सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कॉम्सो ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के पास इस मामले को सुलझाने का पूरा अवसर था, लेकिन उन्होंने यथास्थिति बनाए रखने और मामले पर मौन रहने का रास्ता चुना। संगठन ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को यह समझना होगा कि मेघालय सरकार का निजी दायरा नहीं है और सार्वजनिक संस्थानों को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर नहीं चलाया जा सकता। कॉम्सो का मानना है कि सरकार का यह रवैया जनता के प्रति जवाबदेही निभाने के बजाय अमित कुमार को संरक्षण देने का जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है। इसका आप पर असर इस प्रशासनिक विवाद और अदालती गतिरोध का सीधा प्रभाव राज्य में न्यायिक प्रक्रियाओं और जनता के पैसों की जवाबदेही पर पड़ रहा है। • मेघालय में: इस टकराव के कारण राज्य की अदालतों का सामान्य कामकाज बाधित हो रहा है। इसके चलते तारीखों पर तारीखें मिलने से आम नागरिकों और मुकदमों में न्याय की बाट जोह रहे वादियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। • सार्वजनिक धन की पारदर्शिता: सरकार के विधिक प्रतिनिधित्व पर करोड़ों रुपये के सरकारी खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जनता के टैक्स के पैसे के उपयोग और आरटीआई के तहत सूचना न मिलने से प्रशासनिक जवाबदेही पर असर पड़ रहा है। • स्थानीय वकीलों के अवसर: राज्य के सर्वोच्च कानूनी पद पर बाहरी व्यक्ति की नियुक्ति को लेकर स्थानीय अधिवक्ताओं में नाराजगी है। इससे राज्य की स्थानीय कानूनी प्रतिभाओं की भागीदारी और उनके प्रतिनिधित्व को लेकर बहस छिड़ गई है। • सरकार की साख: मुख्यमंत्री द्वारा आश्वासन पूरा न किए जाने के आरोपों से राजनीतिक और प्रशासनिक साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भविष्य में इस गतिरोध के समाधान तक न्यायिक मामलों में सरकारी पक्ष पर दबाव बना रह सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद मेघालय के शीर्ष विधिक पद पर बाहरी व्यक्ति की तैनाती, कानूनी बिरादरी के विरोध और सरकारी खर्च की पारदर्शिता को लेकर उपजे असंतोष के कारण खड़ा हुआ है। • कानूनी बिरादरी का विरोध: राज्य के कानूनी समुदाय और वकीलों ने एडवोकेट जनरल अमित कुमार के कामकाज के तरीकों को लेकर लंबे समय से आपत्ति जताई हुई है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से यह असंतोष बढ़ गया। • करोड़ों के खर्च और आरटीआई की अनदेखी: महाधिवक्ता कार्यालय से जुड़े खर्चों और वकीलों की फीस के ब्योरे को लेकर आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी गई थीं। सरकार द्वारा उचित जानकारी सार्वजनिक न करने के कारण सामाजिक संगठनों ने इसे मुद्दा बनाया है। • स्थानीय बनाम बाहरी पदस्थापना: संगठन का तर्क है कि मेघालय में योग्य और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कमी नहीं है। इसके बावजूद राज्य के बाहर के व्यक्ति को संवैधानिक पद पर बनाए रखने से स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हुआ है। • सरकार की चुप्पी: विवाद बढ़ने के बावजूद सरकार द्वारा मामले को सुलझाने के बजाय यथास्थिति बनाए रखने से सामाजिक संगठनों को सीधे हस्तक्षेप और बयान जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सवाल-जवाब 1. कॉन्फेडरेशन ऑफ मेघालय सोशल ऑर्गनाइज़ेशन्स (कॉम्सो) ने क्या मांग रखी है? संगठन ने मेघालय के एडवोकेट जनरल अमित कुमार को तुरंत उनके पद से हटाने की मांग की है। 2. कॉम्सो ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा पर क्या आरोप लगाए हैं? संगठन ने मुख्यमंत्री पर कानूनी बिरादरी से किए गए वादों को पूरा न करने और अमित कुमार को बचाने का आरोप लगाया है। 3. एडवोकेट जनरल कार्यालय से जुड़े खर्चों पर क्या सवाल उठाए गए हैं? संगठन ने आरटीआई के तहत जानकारी छिपाने और विधिक प्रतिनिधित्व पर करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के खर्च पर सवाल खड़े किए हैं। 4. इस विवाद का आम जनता और अदालतों पर क्या असर पड़ रहा है? संगठन के अनुसार, इस गतिरोध से अदालतों का कामकाज प्रभावित हो रहा है और न्याय की उम्मीद रखने वाले आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। 5. यह बयान किसने जारी किया है? यह बयान कॉम्सो के महासचिव बलकारिन सीएच. मारक द्वारा गुरुवार को जारी किया गया। https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-ke-edavoketa-janarala-amit-kumar-ko-hatane-ki-manga-teja-samajika-sngathana-ne-conrad-sangma-sarakara-para-lagaya-nishkr-45354 TrendKia — Har trend, sabse pehle.