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  "title": "मेघालय के पारंपरिक हथकरघा और एरी सिल्क को वैश्विक मंच पर पहुंचाएगी केंद्र सरकार",
  "summary": "केंद्रीय कपड़ा एवं विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने कहा है कि सरकार मेघालय के पारंपरिक उत्पादों और जीआई टैग प्राप्त एरी सिल्क को विदेशी खरीदारों तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठा रही है।",
  "content": "मेघालय के समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। सरकार की कोशिश स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की है, ताकि उनकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए उन्हें बेहतर आर्थिक अवसर मिल सकें। इस पहल की जानकारी केंद्रीय कपड़ा और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने शिलॉन्ग में दी।\n\nएरी सिल्क और पारंपरिक शिल्प के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर\nपबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि राज्य के दस्तकारों, विशेष रूप से भौगोलिक संकेत यानी जीआई टैग हासिल कर चुके एरी सिल्क के उत्पादकों को विदेशी उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं। मेघालय की रेशम और हथकरघा परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे स्थानीय समुदाय पीढ़ी दर पीढ़ी संजोए हुए हैं। इस सांस्कृतिक धरोहर से कोई समझौता किए बिना उत्पादों के विपणन का दायरा बढ़ाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।\n\nकच्चे माल पर सब्सिडी और कौशल विकास की तैयारी\nकेंद्रीय कपड़ा मंत्रालय इस क्षेत्र को मजबूती देने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है। बुनकरों को हुनरमंद बनाने के लिए विशेष कौशल विकास और अपस्किलिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, उत्पादन लागत कम करने और निरंतर काम सुनिश्चित करने के लिए शिल्पकारों को रियायती दरों पर धागा भी उपलब्ध कराया जा रहा है।\n\nडिजिटल प्लेटफॉर्म और निर्यात से बढ़ेगी बुनकरों की पहुंच\nवैश्विक खरीदारों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का सहारा लिया जा रहा है। इसके साथ ही निर्यात प्रोत्साहन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को भी तलाशा जा रहा है, जिससे स्थानीय कारीगर अपने उत्पादों को सीधे विदेशी ग्राहकों तक बेच सकें। यह कदम घरेलू बाजार से आगे बढ़कर राज्य की पारंपरिक शिल्पकला को दुनिया भर में स्थापित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।\n\nपर्यटन क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद\nपारंपरिक उत्पादों के प्रचार-प्रसार के साथ ही केंद्रीय मंत्री ने मेघालय में पर्यटन की मजबूत संभावनाओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में मेघालय आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह विकास राज्य की अनूठी संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक कलाओं को वैश्विक पटल पर एक साथ उभारने में मददगार साबित होगा।\n\nइसका आप पर असर\nइस कदम से मेघालय के पारंपरिक शिल्पकारों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और बेहतर आमदनी का नया रास्ता मिलेगा।\n\n• भारत में: पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक शिल्पों और हथकरघा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान और निर्यात के अवसर मिलेंगे। इससे भारतीय कला-संस्कृति के वैश्विक प्रचार के साथ-साथ देश के निर्यात व्यापार को भी मजबूती मिलेगी।\n• मेघालय में: स्थानीय बुनकरों और एरी सिल्क उत्पादकों को रियायती धागा और विशेष प्रशिक्षण मिलने से उनकी उत्पादन लागत घटेगी। ई-कॉमर्स और निर्यात चैनलों के जरिए विदेशी खरीदार मिलने से उनकी घरेलू बाजार पर निर्भरता कम होगी और आय में बढ़ोतरी होगी।\n• शिल्पकारों के लिए: कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से कारीगर अपनी गुणवत्ता सुधारकर आधुनिक वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार कर सकेंगे। सरकार की सब्सिडी योजनाओं से छोटे दस्तकारों को वित्तीय राहत मिलेगी।\n• पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए: विदेशी सैलानियों की संभावित बढ़ोतरी से स्थानीय गाइड, होटल व्यवसाय और सांस्कृतिक पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपूर्वोत्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्रों को उचित वैश्विक बाजार न मिल पाने के कारण सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि स्थानीय कारीगरों की आजीविका को सहारा मिल सके।\n\n• सीमित बाजार पहुंच: मेघालय का एरी सिल्क और पारंपरिक शिल्प गुणवत्ता में अद्वितीय होने के बावजूद मुख्य रूप से स्थानीय और सीमित घरेलू बाजारों तक ही सीमित रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सीधे खरीदारों से जोड़ने की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।\n• जीआई टैग की मौजूदगी: एरी सिल्क को पहले ही भौगोलिक संकेत का दर्जा प्राप्त है, जो इसकी मौलिकता और विशिष्टता को प्रमाणित करता है। इस प्रमाणीकरण का लाभ उठाकर वैश्विक स्तर पर इसकी प्रीमियम ब्रांडिंग करना अब आसान हो गया है।\n• आर्थिक सशक्तिकरण की आवश्यकता: स्थानीय समुदायों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए उन्हें रियायती कच्चा माल और आधुनिक डिजिटल बिक्री माध्यम उपलब्ध कराना जरूरी था, ताकि वे बिचौलियों पर निर्भर न रहें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेघालय के पारंपरिक उत्पादों को लेकर सरकार की क्या योजना है?\nसरकार मेघालय के पारंपरिक हथकरघा, हस्तशिल्प और एरी सिल्क को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और वैश्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बना रही है।\n\n2. बुनकरों को मंत्रालय की तरफ से क्या सहायता दी जा रही है?\nकपड़ा मंत्रालय स्थानीय कारीगरों को कौशल विकास प्रशिक्षण दे रहा है और रियायती दरों पर धागा उपलब्ध करा रहा है।\n\n3. मेघालय के किस उत्पाद को जीआई टैग मिला हुआ है?\nमेघालय के पारंपरिक एरी सिल्क को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त है।\n\n4. मेघालय में पर्यटन को लेकर केंद्रीय मंत्री ने क्या उम्मीद जताई?\nपबित्रा मार्गेरिटा ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य की पर्यटन क्षमताओं के चलते आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।",
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  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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