# मेघालय के स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की शुरुआत, MPOWER के तहत 31 संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च

> मेघालय सरकार ने पूर्वी खासी हिल्स जिले के 31 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में गणित और विज्ञान की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए एक नया डिजिटल लर्निंग पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पहल के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और छात्रों को एआई-संचालित शिक्षण उपकरणों का लाभ मिलेगा।

**Type:** article · **Category:** मेघालय · **Published:** 2026-09-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-ke-skulon-men-dijitala-shiksha-ki-shuruata-mpower-ke-tahata-31-snsthanon-men-payalata-projekta-loncha-38988 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेघालय शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, MPOWER, पूर्वी खासी हिल्स, एआई शिक्षा, स्कूली शिक्षा

मेघालय सरकार ने शिक्षा के स्तर को सुधारने और छात्रों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक अभिनव कदम उठाया है। पूर्वी खासी हिल्स जिले के कुल 31 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षण की शुरुआत की जा रही है। इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से गणित और विज्ञान जैसे विषयों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन और समझ को बेहतर बनाना है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के स्कूलों को इस प्रयोग के लिए चुना गया है ताकि यह परखा जा सके कि पारंपरिक कक्षाओं में डिजिटल संसाधनों को किस प्रकार प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है।

 

## MPOWER के तहत हो रहा है संचालन

यह पूरा कार्यक्रम मेघालय प्रोग्राम फॉर एडोलसेंट वेलबीइंग, एम्पावरमेंट एंड रेजिलिएंस यानी MPOWER के अंतर्गत कार्यान्वित किया जा रहा है। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए राज्य के शिक्षा विभाग ने CK-12 लर्निंग प्लेटफॉर्म के साथ एक साझेदारी की है। इस तैयारी के हिस्से के रूप में कुल 47 शिक्षकों और चार स्कूल प्रधानाचार्य को डिजिटल शिक्षण विधियों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान शिक्षकों को इंटरएक्टिव लर्निंग सामग्री, आधुनिक डिजिटल शिक्षण उपकरणों और कक्षा के भीतर उनके व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया गया ताकि वे बच्चों को आसानी से पढ़ा सकें।

 

## एआई टूल और डिजिटल संसाधनों से लैस पढ़ाई

इस नई पहल के माध्यम से छठी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उन्नत डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इन संसाधनों में इंटरएक्टिव और एडेप्टिव लर्निंग सामग्री शामिल है, जिससे छात्रों को अपनी गति के अनुसार अध्ययन करने और अभ्यास करने की पूरी स्वतंत्रता मिलती है। इसके अलावा, इस प्लेटफॉर्म में फ्लेक्सी नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्यूटर भी शामिल किया गया है, जो विद्यार्थियों को हर चरण पर स्पष्टीकरण और व्यक्तिगत शिक्षण सहायता प्रदान करता है।

 

## शिक्षकों के लिए भी मददगार साबित होगी तकनीक

केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए भी यह तकनीक बेहद फायदेमंद साबित होने वाली है। शिक्षक एआई-आधारित टूल्स और लर्निंग डेटा का उपयोग करके कक्षा की गतिविधियों को अधिक रोचक बना सकेंगे। इसकी मदद से वे विद्यार्थियों की कमजोरियों और सीखने के अंतराल की पहचान कर सकेंगे, जिससे समय रहते उन बच्चों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की जा सकेगी। MPOWER के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संपत कुमार ने इस बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा कि तकनीक के प्रयोग से शिक्षा अधिक सुलभ और आकर्षक बनेगी, साथ ही विद्यार्थी पूरी प्रक्रिया के केंद्र में रहेंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस साझेदारी से पारंपरिक कक्षा के अनुभव को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

 

## बुनियादी ढांचा और निगरानी की व्यवस्था

राज्य का शिक्षा विभाग इन सभी 31 स्कूलों की भागीदारी का समन्वय करेगा, जबकि MPOWER की तरफ से आवश्यक सूचना और संचार प्रौद्योगिकी यानी आईसीटी बुनियादी ढांचे की व्यवस्था की जाएगी। इसमें डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा MPOWER इस पायलट प्रोजेक्ट की कड़ी निगरानी करेगा, इसके क्रियान्वयन का आकलन करेगा और समय-समय पर परिणामों की समीक्षा करेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से गणित और विज्ञान की अवधारणाओं को समझने में छात्रों को बड़ी मदद मिलेगी और शिक्षक भी डिजिटल डेटा का बेहतर उपयोग कर पाएंगे।

## इसका आप पर असर
यह पायलट प्रोजेक्ट छात्रों और शिक्षकों के लिए तकनीकी शिक्षा के नए द्वार खोल रहा है।

- **भारत में:** यह पहल देश भर के अन्य राज्यों के लिए सरकारी स्कूलों में डिजिटल और एआई-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने का एक मॉडल बन सकती है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीक पहुंचाई जा सकती है।

- **मेघालय में:** पूर्वी खासी हिल्स जिले के 31 स्कूलों के छात्र और शिक्षक सीधे तौर पर इस तकनीक का लाभ उठाएंगे। छठी से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को गणित और विज्ञान बेहतर ढंग से सीखने में मदद मिलेगी।

- **शिक्षकों के लिए:** शिक्षक एआई टूल्स और लर्निंग डेटा की मदद से छात्रों की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सटीक मार्गदर्शन दे सकेंगे। इससे पारंपरिक शिक्षण विधियों में सुधार होगा।

- **छात्रों के लिए:** विद्यार्थी फ्लेक्सी जैसे एआई ट्यूटर और एडेप्टिव कंटेंट की बदौलत अपनी खुद की गति से पढ़ाई और अभ्यास कर सकेंगे। इससे विषयों की समझ अधिक गहरी होगी।

- **बुनियादी ढांचा:** MPOWER द्वारा स्कूलों को आवश्यक डिवाइस और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे डिजिटल शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पायलट प्रोजेक्ट पारंपरिक शिक्षण प्रणालियों में आधुनिक तकनीक को एकीकृत करने की आवश्यकता के कारण शुरू किया गया है।

- **सीखने के परिणामों में सुधार:** गणित और विज्ञान जैसे कठिन विषयों में छात्रों की समझ को मजबूत करने के लिए डिजिटल और एआई संसाधनों की आवश्यकता महसूस की गई थी।

- **भागीदारी और प्रशिक्षण:** राज्य के शिक्षा विभाग और MPOWER ने मिलकर CK-12 लर्निंग प्लेटफॉर्म के साथ साझीदारी की, जिसके तहत शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।

- **तकनीक का उपयोग:** कक्षाओं में एडेप्टिव लर्निंग और एआई-संचालित ट्यूटर जैसे आधुनिक उपकरणों के समावेश से शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया जा रहा है।

- **बुनियादी ढांचे का विकास:** ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों में डिजिटल गैप को पाटने के लिए आईसीटी उपकरणों और इंटरनेट कनेक्टिविटी की व्यवस्था की गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. मेघालय में डिजिटल लर्निंग पायलट प्रोजेक्ट कितने स्कूलों में शुरू किया गया है?
यह पायलट प्रोजेक्ट पूर्वी खासी हिल्स जिले के 31 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शुरू किया गया है।

### 2. इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य गणित और विज्ञान विषयों में छात्रों के सीखने के परिणामों और समझ को बेहतर बनाना है।

### 3. इस कार्यक्रम के तहत कितने शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है?
इस कार्यक्रम के तहत 47 शिक्षकों और चार स्कूल प्रधानाचार्यों को डिजिटल शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया गया है।

### 4. इस प्रोजेक्ट में किस लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है?
इस प्रोजेक्ट के लिए CK-12 लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।

### 5. इस पहल से किन कक्षाओं के छात्रों को लाभ मिलेगा?
छठी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को इस डिजिटल पहल से लाभ मिलेगा।

### 6. प्रोजेक्ट में एआई ट्यूटर का क्या नाम है?
इस प्लेटफॉर्म में फ्लेक्सी नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्यूटर शामिल है।

### 7. MPOWER के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कौन हैं?
संपत कुमार MPOWER के प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं।

### 8. स्कूलों में तकनीकी बुनियादी ढांचा कौन प्रदान कर रहा है?
MPOWER स्कूलों को डिवाइस और इंटरनेट कनेक्टिविटी सहित आईसीटी बुनियादी ढांचा प्रदान कर रहा है।

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