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  "type": "article",
  "title": "मेघालय के तूरा पीक के पास करंट लगने से हूलॉक गिब्बन की मौत, बिजली विभाग पर उठे सवाल",
  "summary": "तूरा पीक के पास बिजली के खुले तारों की चपेट में आने से एक दुर्लभ हूलॉक गिब्बन की मौत हो गई है। स्थानीय निवासियों और वन्यजीव प्रेमियों ने मेघालय एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।",
  "content": "मेघालय के गारो हिल्स क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है जहाँ तूरा पीक के पास बिजली के एक जीवंत ऊपरहेड तार के संपर्क में आने से पश्चिमी हूलॉक गिब्बन की मौत हो गई। यह लुप्तप्राय प्राइमेट अपनी प्राकृतिक आवास और जैव विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुर्घटना के बाद से स्थानीय लोगों और वन्यजीव संरक्षकों में भारी रोष व्याप्त है और मेघालय एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर तीखी आलोचना की जा रही है।\n\nलंबे समय से की जा रही थी तारों को बदलने की मांग\nपर्यावरणविदों और क्षेत्रीय निवासियों की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, तूरा पीक और उसके आसपास के इलाकों में नंगे हाई-टेंशन तारों को इंसुलेटेड केबल से बदलने के लिए साल 2021 से लगातार अपील की जा रही थी। इस सिलसिले में तूरा के डीएफओ वाइल्डलाइफ, तूरा म्युनिसिपल बोर्ड और गंड्रक, अडिंगग्रे तथा अपर चंद्रमारी गांवों के ग्रामीणों की तरफ से कई बार लिखित अनुरोध भेजे जा चुके थे। इसके बावजूद विद्युत विभाग की ओर से इन संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षात्मक उपाय करने के मामले में उदासीनता बरती गई, जिसका परिणाम अब इस बेकसूर वन्यजीव की जान जाने के रूप में सामने आया है।\n\nगिब्बन परिवार को पहुंचा भारी नुकसान\nसामने आई जानकारी के मुताबिक, इस ताजा घटना ने हूलॉक गिब्बन के उस परिवार की सुरक्षा पर गंभीर संकट ला खड़ा किया है, जिसे पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगातार त्रासदियों का सामना करना पड़ा है। जारी बयान में दावा किया गया है कि साल 2023 में गंड्रक डारे क्षेत्र में एक मादा हूलॉक गिब्बन की भी इसी तरह करंट लगने से जान चली गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इसी एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो चुकी है, जिसके कारण इस समूह की कुल संख्या कभी सात हुआ करती थी जो अब घटकर महज दो या तीन के करीब ही रह गई है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाए गए तो इस क्षेत्र से इस दुर्लभ प्रजाति का पूरी तरह सफाया हो सकता है।\n\nअन्य वन्यजीवों की मौतों से भी जुड़े हैं मामले\nयह समस्या केवल गिब्बन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले भी बिजली के खुले और झूलते तारों की वजह से अन्य वन्यजीवों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। बयान में आरोप लगाया गया है कि दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स में ग्यारह केवी के झूलते हुए बिजली तारों के संपर्क में आने से हाथियों की भी मौत हो चुकी है। इस वर्ष की शुरुआत में भी डीएफओ वाइल्डलाइफ द्वारा मेघालय एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड को पत्र भेजकर खुले हुए बिजली के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।\n\nकड़ी कार्रवाई और सात दिन में रिपोर्ट की मांग\nताजा हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने तूरा पीक तथा तूरा शहर के बाहरी इलाकों में तुरंत सभी खुले तारों को एरियल बंडल या इंसुलेटेड केबल्स से रिप्लेस करने की मांग उठाई है। इसके अलावा, गिब्बन की इस दर्दनाक मौत के लिए बिजली अधिनियम की धारा तिरेपन सहित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत जवाबदेही तय किए जाने की पुरजोर मांग की गई है। आंदोलनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस पूरे मामले पर एक एक्शन टेकन रिपोर्ट अगले सात दिनों के भीतर सार्वजनिक की जानी चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर उस पुरानी बहस को ताजा कर दिया है जहाँ मानवीय बस्तियां और वन्यजीवों के प्राकृतिक ठिकाने आपस में टकराते हैं, जिससे बेकसूर जीवों की जान पर लगातार खतरा मंडराता रहता है।\n\nइसका आप पर असर\nतूरा और आसपास के क्षेत्रों में बिजली के खुले तारों की वजह से हुई इस दुर्घटना का स्थानीय पारिस्थितिकी और वन्यजीव सुरक्षा पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• भारत में: वन्यजीव और मानव बस्तियों के मिलन स्थल वाले क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा की आवश्यकता बढ़ गई है। ऐसे संवेदनशील जोन में खुले तारों के कारण जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है।\n• मेघालय में: तूरा पीक और गारो हिल्स के स्थानीय निवासियों तथा वन्यजीव प्रेमियों पर इसका सीधा मानसिक और सामाजिक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि एक ही गिब्बन परिवार के लगभग सभी सदस्य इस लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं। प्रशासन पर स्थानीय स्तर पर इंसुलेटेड केबल लगवाने का भारी दबाव बन गया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह दुखद घटना वर्षों से प्रशासनिक उदासीनता और बिजली विभाग द्वारा सुरक्षा उपायों की अनदेखी के कारण घटी है।\n\n• खुले और असुरक्षित तार: तूरा पीक और आसपास के जंगलों में लंबे समय से नंगे हाई-टेंशन और ग्यारह केवी के तार बिना इंसुलेशन के लटके हुए थे।\n• चेतावनी की अनदेखी: डीएफओ वाइल्डलाइफ, म्युनिसिपल बोर्ड और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा साल 2021 से लगातार पत्र भेजने और याद दिलाने के बावजूद MeECL ने बुनियादी ढांचे को नहीं बदला।\n• आवास का अतिव्यापन: मानव बस्तियों और जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास क्षेत्रों के आपस में मिलने के कारण वन्यजीव लगातार इन जानलेवा बिजली लाइनों के संपर्क में आ रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तूरा पीक के पास किस वन्यजीव की मौत हुई है?\nतूरा पीक के पास बिजली का करंट लगने से एक पश्चिमी हूलॉक गिब्बन की मौत हो गई है।\n\n2. इस घटना के लिए किस विभाग को जिम्मेदार ठहराया गया है?\nस्थानीय निवासियों और वन्यजीव प्रेमियों ने मेघालय एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी MeECL को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।\n\n3. नंगे तारों को बदलने की मांग कब से की जा रही थी?\nतूरा पीक और आसपास के क्षेत्रों में नंगे तारों को बदलने की मांग साल 2021 से लगातार की जा रही थी।\n\n4. इसी गिब्बन परिवार के कितने सदस्यों की पहले मौत हो चुकी है?\nपिछले कुछ वर्षों में इसी एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो चुकी है, जिससे यह समूह घटकर दो-तीन सदस्यों का रह गया है।\n\n5. वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने क्या प्रमुख मांगें रखी हैं?\nकार्यकर्ताओं ने तुरंत नंगे तारों को इंसुलेटेड केबल से बदलने, बिजली अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जिम्मेदारी तय करने तथा सात दिन में रिपोर्ट मांगने की मांग की है।",
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  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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    "मेघालय वन्यजीव",
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