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  "type": "article",
  "title": "मेघालय के विलियमनगर अस्पताल में डॉक्टरों ने निकाला 15 किलो का अंडाशय का ट्यूमर",
  "summary": "विलियमनगर सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने 45 वर्षीय महिला के पेट से 15 किलोग्राम का भारी ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला। हृदय रोग से पीड़ित मरीज की यह जटिल सर्जरी एपिड्यूरल एनेस्थीसिया तकनीक के तहत की गई।",
  "content": "मेघालय के विलियमनगर सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम ने 8 सितंबर को 45 वर्ष की एक महिला के पेट से 15 किलोग्राम का अंडाशय (ओवेरियन) ट्यूमर सफलता से निकाला। इस जटिल ऑपरेशन ने जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमता को साबित किया है और राज्य के भीतर ही बड़ी तथा गंभीर बीमारियों के इलाज का एक बेहतर उदाहरण पेश किया है।\n\nमरीज की स्थिति और जटिलताएँ\nयह महिला पिछले लगभग पांच सालों से पेट में लगातार सूजन और तेज दर्द से पीड़ित थी। उनके इलाज में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे पहले से ही एक हृदय रोग (कार्डियक कंडीशन) से ग्रस्त थीं। इस कारण सर्जरी और एनेस्थीसिया दोनों के दौरान भारी जोखिम बना हुआ था। दिल की बीमारी से पीड़ित मरीज का इतने बड़े और भारी ट्यूमर के लिए ऑपरेशन करना किसी बड़े मेडिकल चमत्कार से कम नहीं था।\n\nएपिड्यूरल एनेस्थीसिया का अनूठा प्रयोग\nहृदय संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों की टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एपिड्यूरल एनेस्थीसिया तकनीक का सहारा लिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस विशेष तकनीक के तहत विलियमनगर अस्पताल में ओवेरियन ट्यूमर की यह पहली इतनी बड़ी और जटिल सर्जरी थी। इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और मुख्य सर्जन डॉ विंस मोमिन ने किया, जबकि एनेस्थेटिस्ट डॉ सेंगराक मारक ने मरीज की हृदय स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए एनेस्थीसिया का संचालन किया।\n\nइस महत्वपूर्ण सर्जरी में मेडिकल स्टाफ की भी सक्रिय भूमिका रही। ऑपरेशन थिएटर में स्टाफ नर्स यूलिन, यूजीन और दिनेया के साथ ओटी टेक्नीशियन त्रिंची ने सहयोग दिया। इसके अलावा, मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ तन्मय मोमिन ने मरीज की सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान और आईसीयू (ICU) में देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। सफल ऑपरेशन के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि मरीज की हालत अब स्थिर है और वे डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से ठीक हो रही हैं।\n\nस्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ता विश्वास\nयह सफल ऑपरेशन मेघालय के सरकारी अस्पतालों की बढ़ती परिचालन और चिकित्सा दक्षता का प्रमाण है। स्थानीय स्तर पर ऐसी जटिल सर्जरी संभव होने से अब मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों में बड़े मेडिकल केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की राहत मिलती है।\n\nइसका आप पर असर\nमेघालय के विलियमनगर अस्पताल में हुआ यह सफल ऑपरेशन दिखाता है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में किस तरह सुधार हो रहा है।\n\n• भारत में: जिला स्तर के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों और एनेस्थीसिया पद्धतियों का विस्तार हो रहा है। इससे दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बड़े ट्यूमर और जटिल बीमारियों का इलाज अपने ही जिले में मिल सकेगा।\n• मेघालय में: स्थानीय स्तर पर जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी संभव होने से मरीजों को गुवाहाटी या अन्य बड़े शहरों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का यात्रा खर्च और महंगे निजी अस्पतालों का भारी बोझ बचेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह 15 किलो का ट्यूमर मरीज के शरीर में पिछले पांच वर्षों से धीरे-धीरे विकसित हो रहा था और दिल की बीमारी की वजह से सर्जरी काफी खतरनाक थी।\n\n• देरी से पहचान: मरीज पिछले पांच सालों से पेट में दर्द और सूजन की समस्या झेल रही थीं, जिसके कारण ट्यूमर का आकार काफी विशाल हो गया।\n• हृदय रोग का जोखिम: मरीज को पहले से हृदय संबंधी समस्या थी, जिसके कारण सामान्य एनेस्थीसिया देना मरीज की जान के लिए खतरनाक साबित हो सकता था।\n• विशेषज्ञ तकनीक: डॉक्टरों की टीम ने जोखिम कम करने के लिए एपिड्यूरल एनेस्थीसिया को चुना और विभिन्न विशेषज्ञों ने मिलकर सर्जरी को सुरक्षित अंजाम दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विलियमनगर सिविल अस्पताल में निकाले गए ट्यूमर का वजन कितना था?\nडॉक्टरों की टीम ने 45 वर्षीय महिला के पेट से 15 किलोग्राम वजनी ओवेरियन ट्यूमर निकाला।\n\n2. यह सर्जरी इतनी जोखिम भरी क्यों थी?\nमरीज को ट्यूमर के साथ-साथ पहले से हृदय रोग (कार्डियक कंडीशन) भी था, जिससे एनेस्थीसिया और सर्जरी दोनों में बड़ा जोखिम था।\n\n3. इस ऑपरेशन में किस विशेष तकनीक का उपयोग किया गया?\nडॉक्टरों ने मरीज की सुरक्षा के लिए एपिड्यूरल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया, जो इस अस्पताल में इस प्रकार की पहली सर्जरी थी।\n\n4. इस मेडिकल टीम का नेतृत्व किसने किया?\nवरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ विंस मोमिन ने सर्जरी का नेतृत्व किया, जबकि एनेस्थेटिस्ट डॉ सेंगराक मारक और मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ तन्मय मोमिन भी टीम में शामिल थे।",
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  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-09-14",
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    "विलियमनगर अस्पताल",
    "ओवेरियन ट्यूमर",
    "स्वास्थ्य समाचार",
    "मेडिकल सर्जरी",
    "एपिड्यूरल एनेस्थीसिया"
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