# मेघालय की प्रस्तावित कृषि नीति 2026 में वीपीपी युवा विंग ने रखी न्यूनतम समर्थन मूल्य और स्थानीय रोजगार गारंटी की मांग

> वॉइस ऑफ द पीपल्स पार्टी की युवा शाखा ने राज्य के कृषि मंत्री को ज्ञापन भेजकर बाजार सुधार, 80 प्रतिशत स्थानीय रोजगार आरक्षण और फसल सुरक्षा के ठोस उपाय जोड़ने का आग्रह किया है।

**Type:** article · **Category:** मेघालय · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-ki-prastavita-krishi-niti-2026-men-vpp-yuva-vinga-ne-rakhi-nyunatama-samarthana-mulya-aura-sthaniya-rojagara-garnti-ki-m-40378 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेघालय, कृषि नीति 2026, वीपीपी युवा विंग, न्यूनतम समर्थन मूल्य, किसान उत्पादक संगठन, कृषि बाजार सुधार

मेघालय सरकार द्वारा हाल ही में सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी की गई राज्य कृषि नीति 2026 के मसौदे में बड़े नीतिगत बदलावों की मांग उठने लगी है। वॉइस ऑफ द पीपल्स पार्टी (वीपीपी) की राज्य युवा विंग ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री टिमोथी डी. शिरा को एक विस्तृत सुझाव पत्र सौंपकर उपज के भंडारण, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कोल्ड चेन नेटवर्क और ग्रामीण रोजगार से जुड़े कड़े सुरक्षा उपाय शामिल करने की अपील की है। संगठन का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय वास्तविक रूप से किसानों की आय बढ़ाने के लिए विपणन तंत्र में बिचौलियों पर लगाम कसना बेहद जरूरी है।

 

## कृषि नीति 2026 के मसौदे की पृष्ठभूमि और चुनौतियां

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 13 सितंबर को मेघालय की पहली राज्य कृषि नीति का 61 पन्नों का मसौदा जनता की राय के लिए पेश किया था। इस मसौदे का केंद्रीय लक्ष्य कृषि क्षेत्र की प्राथमिकताओं को उपज की मात्रा बढ़ाने से बदलकर किसानों की शुद्ध आय में इजाफा करने पर केंद्रित करना है। राज्य सरकार के इस दस्तावेज में पूर्वोत्तर राज्य की खेती-किसानी से जुड़ी कई गंभीर ढांचागत कमजोरियों की पहचान की गई है, जिनमें कमजोर बाजार व्यवस्था, बिचौलियों पर अत्यधिक निर्भरता, छोटी और बिखरी हुई जोत, सिंचाई के अपर्याप्त साधन, कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की कमी और मूल्य संवर्धन के सीमित अवसर शामिल हैं।

इन बाधाओं को दूर करने के लिए मसौदा नीति में 15 सूत्रीय कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इस रणनीति के तहत मिट्टी की सेहत सुधारने, सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने, जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन, यंत्रीकरण, रणनीतिक फसलों के चयन, कोल्ड चेन नेटवर्क के विकास, निर्यात प्रोत्साहन, आधुनिक तकनीक के प्रयोग और जलवायु अनुकूल पद्धतियों पर जोर दिया गया है। इसी प्रस्तावित रूपरेखा के मद्देनजर 30 सितंबर को वीपीपी की युवा इकाई ने अपने आधिकारिक सुझाव सरकार को प्रेषित किए।

 

## बिचौलियों पर नियमन और कोल्ड स्टोरेज पर सब्सिडी की सिफारिश

युवा विंग द्वारा सौंपे गए पत्र में सबसे प्रमुख मांग प्रत्येक जिले में सौर ऊर्जा से संचालित कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की रखी गई है। खराब होने वाली जल्दी सड़ने वाली फसलों का कारोबार करने वाले किसान उत्पादक संगठनों को इन कोल्ड स्टोरेज की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत तक की सरकारी सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही, मेघालय राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एमएसएएमबी) के तहत सभी बिचौलियों, विपणन एजेंटों और एग्रीगेटर्स के अनिवार्य लाइसेंसिंग और कड़े नियमन की वकालत की गई है।

संगठन का कहना है कि कानूनी नियमन से खरीद केंद्रों पर किसानों से होने वाली अनधिकृत 'किलो कटिंग' जैसी अनुचित प्रथाओं पर पूरी तरह रोक लगेगी और काश्तकारों को उनकी उपज का पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। सीधे बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रित ग्रामीण हाट-बाजारों, संकलन केंद्रों और जिला स्तर पर सुव्यवस्थित कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया गया है।

 

## मूल्य अस्थिरता पर 72 घंटे में खरीद और सात दिन में भुगतान

फसलों की कीमतों में अचानक आने वाली भारी गिरावट से किसानों को बचाने के लिए युवा विंग ने एक स्वचालित सुरक्षा तंत्र का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत यदि किसी फसल के खुले बाजार के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 15 प्रतिशत नीचे चले जाते हैं, तो सरकार को 72 घंटे के भीतर तत्काल हस्तक्षेप कर स्वचालित खरीद शुरू करनी चाहिए। साथ ही, बेची गई उपज का पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए 7 days के भीतर सीधे किसान के बैंक खाते में जमा होना चाहिए।

पत्र में बुवाई के सीजन से पहले ही ट्रिगर कीमतों की औपचारिक घोषणा करने की सिफारिश की गई है। प्राकृतिक आपदाओं, अकाल या सूखे के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील) के लिए चावल और हरी सब्जियों की खरीद एमएसपी दरों पर करने की बात कही गई है। इसके अलावा, खराब मौसम के दौरान किसानों की नष्ट होने की कगार पर पहुंची उपयोगी उपज खरीदने के लिए गांव-गांव तक मोबाइल वैन तैनात करने और स्थानीय स्वदेशी बीजों के लिए ग्राम स्तर पर सीड बैंक बनाने व मुफ्त फसल बीमा देने का भी अनुरोध किया गया है।

 

## स्थानीय युवाओं के लिए 80 प्रतिशत आरक्षण और रोपवे मॉडल

कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के साथ स्थानीय युवाओं की भागीदारी तय करने के लिए युवा विंग ने एक विशेष रोजगार शर्त जोड़ने का सुझाव दिया है। इसके अनुसार राज्य के कृषि बुनियादी ढांचे और एग्री-हब्स में सृजित होने वाली नौकरियों में 80 प्रतिशत पद स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित किए जाने चाहिए, साथ ही निर्माण व आपूर्ति में स्थानीय सामग्री को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अतिरिक्त कृषि उपज के मूल्य संवर्धन के लिए जिला क्लस्टर स्तर पर सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का सुझाव है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को 80 प्रतिशत सब्सिडी देकर इन्हें बढ़ावा दिया जा सकता है, ताकि मूल्य संवर्धन का पूरा लाभ सीपीपीपी मॉडल के अंतर्गत मेघालय के भीतर ही बना रहे। पहाड़ी इलाकों में परिवहन की लागत 70 प्रतिशत तक घटाने के लिए कृषि अथवा गुरुत्वाकर्षण आधारित रोपवे की पायलट परियोजनाएं शुरू करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इसमें 80 प्रतिशत सब्सिडी सरकार वहन करेगी, जबकि संचालन का जिम्मा स्थानीय प्रशिक्षित युवा और रखरखाव एफपीओ संभालेंगे। वीपीपी युवा विंग के अध्यक्ष बाह मारबुड डखार और सचिव बाह नथानिएल मॉरी द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र की प्रति कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव को भी कार्रवाई हेतु भेजी गई है।

## इसका आप पर असर
मेघालय सरकार द्वारा नई कृषि नीति को अंतिम रूप देने से पूर्व राजनीतिक और नागरिक सुझावों को शामिल करने से राज्य के काश्तकारों और कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में:** पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि विपणन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए यह नीतिगत बहस एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती है। यदि यह रूपरेखा अमल में आती है, तो अन्य पर्वतीय राज्य भी स्थानीय मूल्य संवर्धन और परिवहन के वैकल्पिक साधनों को अपनी नीतियों में प्राथमिकता दे सकते हैं।
- **मेघालय में:** राज्य के किसानों को बिचौलियों की मनमानी और वजन कटाई से मुक्ति मिलने के साथ-साथ खराब होने वाली फसलों के भंडारण की सुविधा प्राप्त होगी। यदि 80 प्रतिशत स्थानीय रोजगार आरक्षण और 72 घंटे में खरीद का नियम लागू होता है, तो ग्रामीण युवाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे और फसल के गिरते दामों से सुरक्षा मिलेगी।
- **कृषक संगठनों के लिए:** किसान उत्पादक संगठनों को सोलर कोल्ड स्टोरेज और सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर 80 प्रतिशत तक का भारी वित्तीय अनुदान मिल सकता है। इससे छोटे किसान अपनी उपज को कच्चा बेचने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत कर ऊंचे दामों पर बेच सकेंगे।
- **ग्रामीण परिवहन के लिए:** सुदूर खेतों से सड़कों तक उपज लाने के लिए प्रस्तावित ग्रेविटी रोपवे परियोजना से ढुलाई खर्च में 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे पहाड़ी ढलानों पर खेती करने वाले किसानों की परिवहन लागत में बड़ी बचत होगी और उत्पाद समय पर मंडियों तक पहुंचेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम मेघालय सरकार द्वारा राज्य की पहली व्यापक कृषि नीति 2026 का 61 पन्नों का मसौदा 13 सितंबर को सार्वजनिक किए जाने के बाद सामने आया है, जिस पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए थे।

- **नीति का सार्वजनिक परामर्श चरण:** कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने प्रस्तावित मसौदे को जनता और हितधारकों की समीक्षा के लिए उपलब्ध कराया था, ताकि इसे अंतिम रूप देने से पहले जमीनी आवश्यकताओं को शामिल किया जा सके। इसी प्रक्रिया के तहत वीपीपी की राज्य युवा शाखा ने 30 सितंबर को आधिकारिक तौर पर अपने संशोधन और मांगें सरकार को सौंपीं।
- **मौजूदा कृषि ढांचे की ढांचागत कमजोरियां:** मसौदा दस्तावेज में स्वयं यह स्वीकार किया गया है कि राज्य में बिचौलियों पर भारी निर्भरता, कोल्ड चेन और सिंचाई की भारी कमी, बिखरी हुई जोत और बाजार तक सीधी पहुंच न होना किसानों की कम आय का मुख्य कारण हैं। इन कमियों को दूर करने के लिए युवा संगठन ने केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय खरीद गारंटी और सख्त बाजार नियमन पर जोर दिया।
- **विपणन में अनुचित प्रथाओं पर अंकुश की मांग:** स्थानीय मंडियों और संग्रह केंद्रों में अनियंत्रित बिचौलियों द्वारा की जाने वाली वजन कटौती और भारी मूल्य अस्थिरता के कारण उत्पादकों को भारी घाटा उठाना पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में विपणन बोर्ड के तहत लाइसेंसिंग, एमएसपी के आधार पर आपातकालीन खरीद और त्वरित बैंक भुगतान जैसे सुरक्षा उपाय अनिवार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. मेघालय राज्य कृषि नीति 2026 का मसौदा कब सार्वजनिक किया गया था?
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा इस 61 पन्नों के नीतिगत मसौदे को 13 सितंबर को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया था।

### 2. वीपीपी युवा विंग ने कृषि मंत्री को अपने सुझाव कब सौंपे?
संगठन ने 30 सितंबर को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री टिमोथी डी. शिरा को अपना सुझाव पत्र सौंपा।

### 3. प्रस्तावित नीति में फसलों के भंडारण को लेकर क्या सिफारिश की गई है?
प्रत्येक जिले में सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने और खराब होने वाली फसलों से जुड़े एफपीओ को 80 प्रतिशत सब्सिडी देने की सिफारिश की गई है।

### 4. फसल की कीमतों में गिरावट आने पर खरीद को लेकर क्या प्रस्ताव है?
कीमतें एमएसपी से 15 प्रतिशत नीचे गिरने पर 72 घंटे के भीतर स्वचालित खरीद शुरू करने और 7 दिनों में डीबीटी भुगतान करने का प्रस्ताव है।

### 5. कृषि बुनियादी ढांचे में स्थानीय युवाओं के लिए कितने प्रतिशत आरक्षण की मांग की गई है?
कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और एग्री-हब्स में 80 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित करने का सुझाव दिया गया है।

### 6. पहाड़ी इलाकों में परिवहन लागत घटाने के लिए किस तकनीक का सुझाव दिया गया है?
खेतों से सड़कों तक उपज लाने के लिए 80 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी पर कृषि या गुरुत्वाकर्षण आधारित रोपवे शुरू करने का सुझाव है, जिससे लागत 70 प्रतिशत घट सकती है।

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