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  "type": "article",
  "title": "मेघालय में बिना सरकारी मदद चल रहे 700 से अधिक स्कूलों को वित्तीय सहायता देने की तैयारी, मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने की घोषणा",
  "summary": "मेघालय सरकार राज्य के 700 से ज्यादा गैर सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों को आर्थिक मदद के दायरे में लाने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों और शिक्षकों के मुद्दों पर खुलकर बात की।",
  "content": "मेघालय प्रशासन अब उन शिक्षण संस्थानों को आर्थिक मदद देने की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिन्हें वर्तमान में किसी भी तरह का सरकारी सहयोग नहीं मिल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने बुधवार को यह स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता अधिक से अधिक निजी और गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को संस्थागत सहायता तंत्र से जोड़ने की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्कूलों के संचालन को स्थायित्व प्रदान करना है।\n\n700 से अधिक शिक्षण संस्थानों को राहत देने की रूपरेखा\nशिलॉन्ग में प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल के 126वें वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग ने 700 से अधिक ऐसे माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को चिन्हित किया है, जो पूरी तरह सरकारी वित्तीय सहायता से वंचित हैं। सरकार अब एक ऐसा व्यापक मॉडल तैयार करने पर काम कर रही है जिससे पहले से सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ साथ इन वंचित संस्थानों को भी नया संबल दिया जा सके।\n\n \nकोनराड संगमा ने कहा कि वे एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिससे वर्तमान में समर्थित स्कूलों के साथ उन स्कूलों की भी मदद की जा सके जिन्हें अब तक कोई सहयोग नहीं मिला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक धन के आवंटन में पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और व्यापक वित्तीय आकलन अनिवार्य है ताकि किसी भी संस्था के साथ भेदभाव न हो।\n\nस्कूल परिसर में नई सुविधाओं का विस्तार और विशेष अनुदान\nमुख्यमंत्री ने पिंथोरुमख्राह प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल के नए उच्चतर माध्यमिक प्रभाग का उद्घाटन किया और परिसर में एक आधुनिक सभागार (ऑडिटोरियम) की आधारशिला रखी। 1897 से संचालित यह संस्थान क्षेत्र के सबसे पुराने शैक्षणिक केंद्रों में गिना जाता है, जिसने 126 वर्षों के सफर में कई चुनौतियों का सामना करते हुए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है।\n\nसंस्थान के विकास के लिए मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष (CMSDF) से सभागार निर्माण हेतु 25 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए खेल सामग्री और संगीत उपकरण खरीदने के वास्ते मुख्यमंत्री विशेष अनुदान (CMSG) से 5 लाख रुपये अलग से मंजूर किए जाएंगे। कोनराड के संगमा ने इस संबंध में सोशल मीडिया मंच X पर लिखा और संस्थान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।\n\nशिक्षा बजट और बुनियादी ढांचे में असंतुलन की चुनौती\nराज्य के शिक्षा परिदृश्य पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार इस क्षेत्र पर हर साल लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केवल बजट बढ़ा देने से शैक्षणिक परिणामों में सुधार की गारंटी नहीं मिलती। नीति निर्माण के केंद्र में छात्रों के समग्र विकास और शिक्षण गुणवत्ता को रखना सबसे आवश्यक है।\n\nउन्होंने राज्य के ढांचे में मौजूद भारी अंतर की ओर ध्यान दिलाया। मेघालय में करीब 9,000 लोअर प्राइमरी स्कूल संचालित हैं, लेकिन उनके मुकाबले उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की संख्या केवल 500 के आसपास सिमटी हुई है। बुनियादी ढांचे के इस असंतुलन के कारण दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद छात्रों को आगे की पढ़ाई जारी रखने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर बढ़ जाती है। यद्यपि राज्य में कॉलेजों की संख्या 100 का आंकड़ा पार कर चुकी है, फिर भी उच्चतर माध्यमिक स्तर पर भारी कमी को दूर करने के लिए लगातार प्रयासों की आवश्यकता है।\n\nपरीक्षा परिणामों में सुधार और व्यक्तिगत शिक्षण पर बल\nभूतकाल की समस्याओं को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने साझा किया कि एक समय राज्य में सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SSLC) परीक्षा में करीब 50 प्रतिशत छात्र अनुत्तीर्ण हो जाते थे। सरकार द्वारा शुरू किए गए 'सीएम इम्पैक्ट' (CM IMPACT) कार्यक्रम के बाद परिणामों में बड़ा सुधार देखा गया है। पिछले पांच वर्षों में जो उत्तीर्ण प्रतिशत 50 प्रतिशत के करीब अटका था, वह बढ़कर अब 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुका है।\n\nसंगमा ने शिक्षकों और प्रबंधन समितियों से आग्रह किया कि वे पारंपरिक एक समान शिक्षण पद्धति के बजाय प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत क्षमता, गति और सीखने की जरूरतों को पहचानें। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी की अपनी विशिष्ट प्रतिभा और समझ होती है, इसलिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन और बच्चों के अनुकूल शिक्षण विधियां अपनाना समय की मांग है। केवल परीक्षा परिणाम बेहतर होना ही काफी नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में विषयों की गहरी समझ विकसित होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।\n\nशिक्षकों के वेतन और वित्तीय सीमाएं\nएडहॉक और समग्र शिक्षा अभियान (SSA) से जुड़े शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और उनके वेतन संशोधन के आंदोलनों पर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि सरकार वर्तमान में डेफिसिट और सहायता प्राप्त स्कूलों तथा कॉलेजों के शिक्षकों के वेतन पर प्रति वर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।\n\nऐसे में वेतन संरचना में मामूली बदलाव भी राजकोष पर भारी प्रभाव डालता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल 10 प्रतिशत के वेतन इजाफे से राज्य पर सालाना करीब 120 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जबकि 20 प्रतिशत की वृद्धि इस वित्तीय भार को 300 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा देगी। मुख्यमंत्री ने माना कि शिक्षक समाज में पूरे सम्मान के हकदार हैं और सरकार बातचीत के जरिए उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा मेघालय के भविष्य के लिए सबसे बड़ा निवेश है और सभी प्रशासनिक फैसलों का एकमात्र लक्ष्य छात्रों की आकांक्षाओं को पूरा करना होना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nमेघालय के 700 से अधिक गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों और शिक्षकों को जल्द ही वित्तीय सुरक्षा और बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।\n\n• मेघालय में: इस योजना के लागू होने से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण और बुनियादी ढांचे में सुधार संभव होगा। कक्षा 10 के बाद उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की कमी से जूझ रहे स्थानीय विद्यार्थियों के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखना सुगम हो जाएगा।\n• छात्रों और अभिभावकों के लिए: व्यक्तिगत शिक्षण विधियों और नए खेल व सांस्कृतिक संसाधनों से बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिलेगा। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के साथ साथ छात्रों में विषयों की व्यावहारिक समझ बेहतर होगी।\n• एडहॉक व एसएसए शिक्षकों के लिए: सरकार ने माना है कि शिक्षकों का सम्मान सर्वोपरि है और संवाद के जरिए वेतन संबंधी चिंताओं का व्यवहार्य समाधान तलाशा जाएगा। हालांकि बजट सीमाओं के कारण वेतन वृद्धि का फैसला चरणबद्ध तरीके से ही संभव दिखता है।\n• शिक्षा क्षेत्र के लिए: 9,000 प्राथमिक स्कूलों और केवल 500 उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के बीच का ढांचागत अंतर पाटने की दिशा में यह एक अहम कदम साबित हो सकता है। इससे राज्य भर में स्कूल ड्रॉपआउट दर में कमी आने की संभावना है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमेघालय में बड़ी संख्या में ऐसे माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल हैं जिन्हें सरकारी अनुदान नहीं मिलता, जिससे उनके संचालन और विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था।\n\n• बुनियादी ढांचे में गंभीर असंतुलन: राज्य में लगभग 9,000 लोअर प्राइमरी स्कूल मौजूद हैं लेकिन उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की संख्या महज 500 के आसपास है। इस भारी अंतर के कारण कक्षा 10 उत्तीर्ण करने के बाद छात्रों को दाखिला नहीं मिल पाता और ड्रॉपआउट बढ़ जाता है।\n• 700 से अधिक स्कूलों का वंचित होना: राज्य भर में 700 से ज्यादा सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूल बिना किसी सरकारी वित्तीय सहायता के चल रहे हैं। संसाधनों की कमी के चलते इन संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और शिक्षकों को वेतन देने में परेशानी आ रही थी।\n• शिक्षकों का निरंतर विरोध और मांगें: एडहॉक और एसएसए शिक्षक लंबे समय से वेतन वृद्धि और बेहतर सेवा शर्तों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार पहले से ही ग्रांट-इन-एड संस्थानों के वेतन पर 1,200 करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रही है, जिससे व्यापक समाधान खोजना जरूरी हो गया था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेघालय सरकार कितने स्कूलों को वित्तीय सहायता देने की योजना बना रही है?\nसरकार ने 700 से अधिक गैर सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों को चिन्हित किया है जिन्हें सहायता योजना के दायरे में लाया जाएगा।\n\n2. प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल को मुख्यमंत्री ने कितनी धनराशि स्वीकृत की?\nसभागार निर्माण के लिए 25 लाख रुपये सीएमएसडीएफ से और खेल व संगीत उपकरण के वास्ते 5 लाख रुपये सीएमएसजी से मंजूर किए गए हैं।\n\n3. मेघालय में लोअर प्राइमरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या में कितना अंतर है?\nराज्य में लगभग 9,000 लोअर प्राइमरी स्कूल हैं, जबकि उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की संख्या केवल 500 के आसपास है।\n\n4. सीएम इम्पैक्ट कार्यक्रम से एसएसएलसी परीक्षा परिणामों पर क्या असर पड़ा है?\nइस कार्यक्रम के बाद एसएसएलसी परीक्षा का उत्तीर्ण प्रतिशत पांच साल पहले के लगभग 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो गया है।\n\n5. मेघालय सरकार वर्तमान में सहायता प्राप्त स्कूलों के वेतन पर कितना खर्च करती है?\nसरकार डेफिसिट और सहायता प्राप्त स्कूलों तथा कॉलेजों के शिक्षकों के वेतन पर हर साल लगभग 1,200 करोड़ रुपये खर्च करती है।\n\n6. शिक्षकों के वेतन में 10 या 20 प्रतिशत वृद्धि का वित्तीय असर क्या होगा?\nवेतन में 10 प्रतिशत वृद्धि से सालाना 120 करोड़ रुपये और 20 प्रतिशत वृद्धि से 300 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।",
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