मेघालय में डेफिसिट शिक्षकों का अल्टीमेटम, मांगें न सुलझने पर 9 अक्टूबर से राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी मेघालय के डेफिसिट स्कूल शिक्षकों और कर्मचारियों ने डीए, एरियर, सीपीएफ योगदान और खाली पदों को भरने को लेकर सरकार को 9 अक्टूबर 2026 तक की समयसीमा दी है। समाधान न होने पर पूरे राज्य में प्रदर्शन होंगे। मेघालय के स्कूली शिक्षा तंत्र में लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों को लेकर शिक्षक संगठनों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। खासी जयंतिया डेफिसिट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (KJDSTA) और गारो हिल्स डेफिसिट स्कूल टीचर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन (GHDSTEA) ने राज्य सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 9 अक्टूबर 2026 तक उनकी लंबित मांगों का निस्तारण नहीं किया गया, तो वे पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। मुख्यमंत्री को भेजा गया संयुक्त पत्र शुक्रवार को मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा को भेजे एक साझा ज्ञापन में इन शिक्षक संगठनों ने अपनी व्यथा सामने रखी। प्रतिनिधियों ने बताया कि वे लगभग एक महीने पहले ही मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे और इसके लिए औपचारिक रूप से मिलने का समय मांगा गया था, परंतु अब तक सरकार की ओर से कोई उत्तर नहीं मिला। शिक्षक संघों का कहना है कि डेफिसिट स्कूलों के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी लगातार उपेक्षा और गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। “वर्षों से डेफिसिट स्कूल समुदाय, जो मेघालय की स्कूली शिक्षा की रीढ़ है, अत्यधिक वित्तीय दबाव और प्रशासनिक उदासीनता झेल रहा है।” महंगाई भत्ते और बकाए एरियर की मांग कर्मचारियों की मुख्य मांगों में संशोधित महंगाई भत्ता (DA) तुरंत जारी करना और उसका बकाया भुगतान करना शामिल है। संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों को वर्तमान में केवल 49 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। जबकि आधिकारिक तौर पर 1 जुलाई 2025 से इसे बढ़ाकर 51 प्रतिशत और फिर 1 जनवरी 2026 से 53 प्रतिशत किया जा चुका है। इसके अलावा, कर्मचारी जनवरी और फरवरी 2024 के दौरान देय 43 प्रतिशत डीए एरियर के तत्काल भुगतान की मांग भी कर रहे हैं। भविष्य निधि में सरकारी अंशदान का विवाद कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड (CPF) में राज्य सरकार के मिलान अंशदान का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, सरकार ने 21 नवंबर 2024 को एक आदेश जारी कर 1 जनवरी 2025 से अपने अंशदान को मासिक वेतन के 10 प्रतिशत तक बढ़ाने की स्वीकृति दी थी। इसके बावजूद कर्मचारियों को अभी भी महज 8 प्रतिशत का योगदान मिल रहा है। संगठनों की मांग है कि जनवरी 2025 से लागू होने वाली इस संशोधित 10 प्रतिशत दर को तुरंत प्रभाव से दिया जाए और पिछले महीनों का एरियर भी जारी किया जाए। रिक्त पदों की बहाली और नई योजना से छूट स्कूलों में सेवानिवृत्ति के कारण खाली पड़े डेफिसिट पदों को भरने में हो रही देरी पर भी भारी नाराजगी जताई गई है। संगठनों का कहना है कि रिक्तियां न भरे जाने से कार्यरत शिक्षकों पर काम का बोझ बेतहाशा बढ़ गया है, प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और छात्रों के शैक्षिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने डेफिसिट पे स्केल के तहत विज्ञापनों, साक्षात्कारों और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को शीघ्र हरी झंडी देने की अपील की है। साथ ही, स्वीकृत डेफिसिट पदों को स्ट्रक्चर्ड पे फ्रेमवर्क (SPF) के तहत अस्थायी पदों में बदलने के कदम का भी कड़ा विरोध किया है। इसके अतिरिक्त, दोनों संगठनों ने वर्ष 2026 में अधिसूचित की गई मेघालय नॉन-गवर्नमेंट स्कूल एंड कॉलेज एम्प्लॉइज सेंट्रलाइज्ड प्रोविडेंट फंड स्कीम से डेफिसिट कर्मचारियों को पूरी तरह अलग रखने की मांग की है। उनका तर्क है कि यह व्यवस्था डेफिसिट कर्मियों के अनुकूल नहीं है और इसके लिए बाकायदा एक अधिसूचना जारी होनी चाहिए। साथ ही, वर्ष 1969 के कानून के मुताबिक बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को उचित प्रतिनिधित्व के साथ पुनः पूर्ण वैधानिक अधिकार दिए जाएं। इसके साथ ही सीपीएफ तथा नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत कोष हस्तांतरण की प्रक्रिया को एक तय समयसीमा में पूरा करने का आग्रह भी किया गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि 9 अक्टूबर तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो कक्षाओं और अकादमिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर की सीधी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इसका आप पर असर यदि सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच समय रहते सहमति नहीं बनी, तो राज्य के कई विद्यालयों में पठन-पाठन और परीक्षाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। • भारत में: देश भर के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए यह मामला विभिन्न राज्यों में डेफिसिट और सहायता प्राप्त संस्थानों के वेतनमान तथा अंशदान की विसंगतियों को रेखांकित करता है। राज्य सरकारों द्वारा भत्तों और पेंशन फंडों में देरी पर कर्मचारी यूनियनों की सक्रियता बढ़ सकती है। • मेघालय में: राज्य के डेफिसिट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं और परीक्षा कार्यक्रम 9 अक्टूबर 2026 के बाद बाधित होने का अंदेशा है। अभिभावकों और छात्रों को आगामी आंदोलनों के मद्देनजर शैक्षणिक कैलेंडर और स्कूल प्रशासन के दिशा-निर्देशों पर नजर रखनी चाहिए। • कर्मचारियों पर असर: डेफिसिट स्कूलों के शिक्षकों को बढ़ा हुआ डीए, बकाया एरियर और 10 प्रतिशत सीपीएफ अंशदान मिलने से वित्तीय राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त खाली पड़े पदों पर नई नियुक्तियां होने से वर्तमान कर्मियों पर काम का अत्यधिक बोझ कम हो सकेगा। • प्रशासनिक जवाबदेही: राज्य शिक्षा विभाग पर सेवानिवृत्त पदों को नियमित करने और लंबित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ेगा। सरकार को निर्धारित अंतिम तिथि से पहले संघ प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर समाधान निकालना होगा। ऐसा क्यों हुआ यह गतिरोध डेफिसिट स्कूल कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही आर्थिक शिकायतों और प्रशासनिक उपेक्षा की वजह से उत्पन्न हुआ है। सरकारी आदेशों के बावजूद स्वीकृत भत्तों और योगदान का समय पर क्रियान्वयन न होना इस असंतोष की मुख्य जड़ है। • स्वीकृत लाभों का न मिलना: सरकार द्वारा डीए दरों को 51 और 53 प्रतिशत करने के बावजूद कर्मचारियों को 49 प्रतिशत ही दिया जा रहा है। इसके साथ ही सीपीएफ अंशदान को 10 प्रतिशत करने के स्पष्ट आदेश के बाद भी जमीनी स्तर पर 8 प्रतिशत ही जमा किया जा रहा है। • संवाद का अभाव: शिक्षक संगठनों ने लगभग एक माह पूर्व मुख्यमंत्री से मिलकर इन मुद्दों को सुलझाने का समय मांगा था। सरकार की ओर से कोई उत्तर न मिलने पर शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता चुनने के लिए विवश होना पड़ा। • रिक्त पदों पर भर्ती में रुकावट: सेवानिवृत्ति से खाली हुए पदों को डेफिसिट वेतनमान के तहत न भरने और उन्हें अस्थायी अनुबंधों में बदलने के प्रयासों से शिक्षण कार्य और पद सुरक्षा दोनों संकट में आ गए हैं। सवाल-जवाब 1. मेघालय के डेफिसिट शिक्षकों ने आंदोलन की क्या अंतिम तिथि तय की है? शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार को अपनी मांगों के समाधान के लिए 9 अक्टूबर 2026 तक की अंतिम तारीख दी है। 2. इस अल्टीमेटम में कौन से प्रमुख शिक्षक संगठन शामिल हैं? यह चेतावनी खासी जयंतिया डेफिसिट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (KJDSTA) और गारो हिल्स डेफिसिट स्कूल टीचर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन (GHDSTEA) द्वारा संयुक्त रूप से दी गई है। 3. महंगाई भत्ते को लेकर शिक्षकों की मुख्य शिकायत क्या है? शिक्षकों का कहना है कि डीए 51% और 53% तय होने के बाद भी उन्हें 49% ही मिल रहा है, साथ ही जनवरी-फरवरी 2024 का 43% डीए एरियर भी बकाया है। 4. सीपीएफ योगदान में क्या विसंगति बताई गई है? नवंबर 2024 के सरकारी आदेश के तहत सीपीएफ में 10% अंशदान मिलना चाहिए था, परंतु कर्मचारियों को अब भी सिर्फ 8% का योगदान ही दिया जा रहा है। 5. रिक्त पदों को लेकर संगठनों का क्या रुख है? संगठनों ने सेवानिवृत्ति से खाली पदों पर डेफिसिट पे स्केल के तहत शीघ्र नियुक्तियां करने और इन पदों को अस्थायी पदों में बदलने की कोशिशों को रोकने की मांग की है। https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-men-dephisita-shikshakon-ka-altimetama-mangen-na-sulajhane-para-9-aktubara-se-rajyavyapi-andolana-ki-chetavani-38552 TrendKia — Har trend, sabse pehle.