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  "type": "article",
  "title": "मेघालय में मतदाता सूची संशोधन की समय-सीमा दो हफ्ते बढ़ी, सुनवाई के बाद 384 वोटर अयोग्य घोषित",
  "summary": "चुनाव आयोग ने शिलोंग और राज्य के अन्य हिस्सों में हाल की अशांति को देखते हुए मेघालय में विशेष गहन संशोधन (SIR) की समय-सीमा बढ़ा दी है। अब तक 2 लाख से अधिक सुनवाइयां पूरी हो चुकी हैं, जिनमें 384 मतदाता अयोग्य पाए गए हैं।",
  "content": "मेघालय में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) कार्यक्रम की समय-सीमा को चुनाव आयोग ने दो सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया है। शिलोंग और राज्य के कई इलाकों में हाल ही में हुई अशांति के कारण उपजे व्यवधानों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि मतदाताओं को अपने दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर मिल सके। इस संशोधन प्रक्रिया के तहत अब तक हुई गहन जांच और सुनवाइयों के दौरान कुल 384 मतदाताओं को अयोग्य पाया गया है। चुनाव प्राधिकारी राज्य भर में मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।\n\nसंशोधन की नई तिथियां और समय-सीमा विस्तार\nचुनाव आयोग द्वारा जारी संशोधित शेड्यूल के अनुसार, दावों और आपत्तियों को दाखिल करने की अंतिम तिथि को 4 सितंबर से बढ़ाकर अब 18 सितंबर कर दिया गया है। इसके साथ ही, प्राप्त दावों और आपत्तियों के निस्तारण और सुनवाई की प्रक्रिया को 17 अक्टूबर तक जारी रखा जाएगा। पहले अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 7 अक्टूबर तय की गई थी, जिसे अब टालकर 21 अक्टूबर कर दिया गया है। इस समय-सीमा विस्तार से उन नागरिकों को राहत मिलेगी जो अशांति या परिवहन की कठिनाइयों के कारण समय पर अपने दस्तावेज जमा नहीं कर सके थे।\n\nसुनवाई के आंकड़े और अयोग्य मतदाताओं की स्थिति\nमेघालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) बी.डी.आर. तिवारी ने प्रगति की समीक्षा करते हुए जानकारी दी कि मंगलवार तक राज्य में 2,08,870 सुनवाइयां सफलतापूर्वक संपन्न की जा चुकी हैं। यह आंकड़ा संशोधन प्रक्रिया के दौरान जारी किए गए कुल 6,51,735 नोटिसों का 32.05 प्रतिशत है। इन सुनवाइयों और दस्तावेजों की बारीक पड़ताल के बाद अब तक 384 electors अयोग्य पाए गए हैं। बी.डी.आर. तिवारी ने स्पष्ट किया कि किसी मतदाता को नोटिस जारी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि उसका नाम मतदाता सूची से स्वतः ही हटा दिया जाएगा। नोटिस केवल विसंगतियों को स्पष्ट करने और आवश्यक सहायक दस्तावेज पेश करने का एक अवसर प्रदान करता है, और नाम हटाने की कार्रवाई केवल निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही की जाती है।\n\nड्राफ्ट वोटर लिस्ट और नोटिसों का वर्गीकरण\nआयोग द्वारा 5 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल के अनुसार राज्य में कुल 21,69,243 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से 6,51,735 मतदाताओं के लिए नोटिस तैयार किए गए हैं। नोटिस प्राप्त करने वाले मामलों में दो मुख्य श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें लगभग 2.22 लाख मामले 'नो-मैपिंग' श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जबकि 4,28,949 मामले मैपिंग विसंगतियों से जुड़े हुए हैं। तैयार किए गए कुल नोटिसों में से 6,20,730 नोटिस सफलतापूर्वक वितरित किए जा चुके हैं और उनका विवरण प्रणाली में अपडेट कर दिया गया है, जबकि 31,005 नोटिस अभी वितरित किए जाने बाकी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उन सभी लोगों से आग्रह किया है जिनका नाम ड्राफ्ट रोल में दर्ज नहीं है, वे बिना किसी देरी के फॉर्म 6 भरकर अपना नाम शामिल कराने का आवेदन करें।\n\nआवेदन पत्र की स्थिति और आवश्यक दस्तावेजों के नियम\nनाम शामिल कराने, सुधार और आपत्तियों के लिए चुनाव विभाग को अब तक कुल 12,951 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इनमें नया नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 के तहत 6,804 आवेदन मिले हैं। नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म 7 के 738 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि फॉर्म 8 के तहत कुल 5,409 आवेदन आए हैं। फॉर्म 8 के आवेदनों में से 982 मामले निवास स्थान में बदलाव से संबंधित हैं और 4,427 मामले प्रविष्टियों में सुधार से जुड़े हैं। नागरिक अपने आवेदन ऑनलाइन इलेक्शन पोर्टल या ECINET ऐप के जरिए जमा कर सकते हैं, अथवा अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की सहायता ले सकते हैं। दस्तावेजों के संबंध में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 'नो-मैपिंग' श्रेणी के मतदाताओं को आयोग की सूची में शामिल सभी दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है, केवल एक निर्धारित सहायक दस्तावेज ही पर्याप्त है। हालांकि, यदि कोई मतदाता आधार कार्ड जमा करता है, तो उसे आधार के साथ स्वीकृत सूची में से एक अतिरिक्त दस्तावेज भी प्रस्तुत करना होगा। स्वीकृत दस्तावेजों में जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, सरकारी पहचान पत्र और परिवार रजिस्टर की प्रति शामिल हैं। बिहार जैसे उन राज्यों से मेघालय आए नागरिक, जहां SIR की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, वे 2025 की बिहार मतदाता सूची के उद्धरण का उपयोग सहायक प्रमाण के रूप में कर सकते हैं।\n\nविशेष व्यवस्थाएं, अपील प्रक्रिया और राजनीतिक दलों का सहयोग\nप्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों ने भी सक्रिय सहयोग दिया है और राज्य भर में 1,814 बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की नियुक्ति की है। चुनाव प्रशासन ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और गंभीर रूप से बीमार मतदाताओं के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की है, ताकि उन्हें सुनवाई के दौरान किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त अवसर दिए जाएं। यदि कोई मतदाता इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के फैसले से असंतुष्ट रहता है, तो वह पहले अपील जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के समक्ष और दूसरी अपील मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास दाखिल कर सकता है। बी.डी.आर. तिवारी ने मंगलवार को राज्य भर के डिप्टी कमिश्नरों, DEO, ERO और सहायक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (AERO) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस पूरे अभियान की समीक्षा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मेघालय के लिए एक सटीक, पारदर्शी और समावेशी मतदाता सूची तैयार करना है।\n\nइसका आप पर असर\nइस फैसले से मेघालय के नागरिकों को अपनी मतदाता जानकारी अपडेट करने और अयोग्यता से बचने के लिए दो अतिरिक्त सप्ताह का समय मिल गया है।\n\n• भारत में: चुनावी प्रक्रियाओं में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनती है। इससे फर्जी वोटिंग रोकने और वास्तविक नागरिकों के मताधिकार को सुरक्षित करने में मदद मिलती है।\n• मेघालय में: शिलोंग और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को 18 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका मिलेगा। जिन लोगों को मैपिंग या नो-मैपिंग का नोटिस मिला है, वे अपने नजदीकी BLO या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दस्तावेज जमा कर सकते हैं।\n• वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए: बुजुर्ग और बीमार मतदाताओं के लिए विशेष सुनवाई की सुविधा दी गई है। वे घर बैठे या विशेष अवसरों का लाभ उठाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।\n• प्रवासी नागरिकों के लिए: बिहार जैसे राज्यों से मेघालय आए लोग 2025 की अपनी पुरानी वोटर लिस्ट का इस्तेमाल करके मेघालय की सूची में नाम जुड़वा सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nविशेष गहन संशोधन (SIR) की समय-सीमा बढ़ाने का मुख्य कारण शिलोंग और मेघालय के अन्य हिस्सों में हाल ही में हुई अशांति और उससे पैदा हुई प्रशासनिक बाधाएं हैं।\n\n• हालिया अशांति और व्यवधान: शिलोंग और राज्य के कुछ इलाकों में हुई अशांति के कारण परिवहन और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए थे, जिससे नागरिक समय पर अपने दस्तावेज नहीं जमा करा पा रहे थे।\n• मैपिंग विसंगतियां और नो-मैपिंग मामले: ड्राफ्ट सूची में 6.51 लाख से अधिक मतदाताओं के डेटा में विसंगतियां पाई गईं, जिनमें 2.22 लाख नो-मैपिंग और 4.28 लाख मैपिंग अंतर के मामले शामिल थे।\n• पारदर्शी प्रक्रिया का पालन: चुनाव आयोग का उद्देश्य किसी का नाम बिना निष्पक्ष सुनवाई के न हटाना है, जिसके लिए नोटिस वितरण और जवाब के लिए अधिक समय देना आवश्यक था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेघालय में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की नई अंतिम तिथि क्या है?\nदावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 18 सितंबर कर दिया गया है।\n\n2. अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किस तारीख को होगा?\nअंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 21 अक्टूबर को किया जाएगा।\n\n3. सुनवाई के दौरान अब तक कितने मतदाता अयोग्य पाए गए हैं?\n2,08,870 सुनवाइयों के बाद कुल 384 मतदाता अयोग्य पाए गए हैं।\n\n4. क्या नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम हटना निश्चित है?\nजी नहीं, नोटिस केवल विसंगति दूर करने का अवसर प्रदान करता है। नाम केवल निष्पक्ष सुनवाई और प्रक्रिया के बाद ही हटाया जा सकता है।\n\n5. अगर नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं है तो कौन सा फॉर्म भरना होगा?\nड्राफ्ट रोल में नाम न होने पर फॉर्म 6 भरकर आवेदन करना होगा।\n\n6. नो-मैपिंग श्रेणी के मतदाताओं को आधार के साथ कितने दस्तावेज देने होंगे?\nआधार कार्ड जमा करने की स्थिति में आधार के साथ स्वीकृत सूची में से एक अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य है।",
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  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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