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  "title": "मेघालय में मंत्रिमंडल फेरबदल पर बीजेपी नाराज, सनबोर शुलाई ने उठाई और मंत्री पद देने की मांग",
  "summary": "मेघालय में हालिया कैबिनेट फेरबदल और विभागों के बंटवारे पर बीजेपी ने असंतोष जताया है। पार्टी विधायक दल के नेता सनबोर शुलाई का कहना है कि गठबंधन में 10 विधायकों की संख्या के हिसाब से बीजेपी को अतिरिक्त मंत्री पद मिलने चाहिए।",
  "content": "मेघालय की सत्ताधारी मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस यानी एमडीए सरकार में हाल में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद आंतरिक असंतोष उभरकर सामने आ गया है। राज्य सरकार में काबीना मंत्री और बीजेपी विधायक दल के नेता सनबोर शुलाई ने विभागों के नए वितरण और मंत्रियों के चयन को लेकर खुली नाराजगी जाहिर की है। उनका तर्क है कि 60 सदस्यीय विधानसभा में 10 विधायकों के साथ बीजेपी गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी ताकत है, इसलिए सरकार में उसकी हिस्सेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।\n\nमंत्रिमंडल में संख्याबल के मुताबिक प्रतिनिधित्व की मांग\nएक प्रेस बयान के जरिए अपनी बात रखते हुए सनबोर शुलाई ने कहा कि विधानसभा में विधायकों की संख्या को देखते हुए बीजेपी को मंत्रिमंडल में और जगह मिलनी चाहिए थी। उन्होंने साफ किया कि यूडीपी के पूर्व अध्यक्ष और मंत्री मेटबाह लिंगदोह के इस्तीफे के बाद खाली हुए स्थान को लेकर यह मामला मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा के समक्ष भी उठाया गया था। बीजेपी नेता ने यह स्पष्ट किया कि एनपीपी के किसी भी विधायक को मंत्री बनाए जाने पर उनकी पार्टी को कोई एतराज नहीं है। हालांकि उनका कहना था कि जब नए मंत्री तय किए जा रहे हों या विभागों का आवंटन हो रहा हो, तब गठबंधन के भीतर बीजेपी की मौजूदा ताकत और भूमिका को ध्यान में रखा जाना बेहद जरूरी था।\n\nगठबंधन धर्म और पुराने सहयोग की याद\nसनबोर शुलाई ने 2023 के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि उस समय जब कई राजनीतिक दल एनपीपी के बिना सरकार बनाने की कोशिशों में लगे थे, तब बीजेपी मजबूती के साथ एनपीपी के समर्थन में खड़ी रही थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र में मौजूद बीजेपी और पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व एमडीए सरकार को लगातार हर जरूरी मदद और सहयोग मुहैया करा रहा है। इसके बावजूद राज्य स्तर पर एनपीपी नेतृत्व द्वारा बीजेपी विधायकों को दरकिनार किया जाना गठबंधन की सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता।\n\nसहयोग की भावना और केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क\nविधायकों की इस अनदेखी को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए शुलाई ने चेतावनी दी कि ऐसा रवैया सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग की भावना को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विवाद केवल मंत्री पदों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि गठबंधन के साझेदारों के बीच आपसी सम्मान, नियमित बातचीत और बेहतर समन्वय का विषय है। इसी सिलसिले में बीजेपी विधायकों ने बुधवार को पार्टी के पूर्वोत्तर सह-प्रभारी राजीव बब्बर से मुलाकात कर ताजा हालात की जानकारी दी और फेरबदल के दौरान पार्टी के साथ हुए बर्ताव पर अपनी चिंताएं साझा कीं। शुलाई ने बताया कि इस विषय पर कोई भी अंतिम कदम उठाने से पहले केंद्रीय नेतृत्व से गहन चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही पार्टी के निर्देशों के तहत वे मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं और सभी बीजेपी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री की साझा बैठक बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि बातचीत के जरिए इस गतिरोध को समय रहते सुलझाया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nमेघालय सरकार में शामिल दलों के बीच मंत्री पदों को लेकर पैदा हुआ यह गतिरोध राज्य के शासन और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकता है।\n\n• मेघालय में: सहयोगी दलों के बीच असंतोष से सरकारी विभागों के कामकाज और नीतिगत फैसलों की गति पर असर पड़ सकता है। आम नागरिकों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को सुचारू रखने के लिए इस राजनीतिक तनातनी का जल्द सुलझना जरूरी होगा।\n• भारत में: पूर्वोत्तर के राज्यों में गठबंधन सरकारों के भीतर क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के बीच शक्ति संतुलन का यह उदाहरण दिखाता है कि सहयोगियों की नाराजगी दूर करना केंद्र के लिए भी अहम रहता है। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न गठबंधनों में शामिल घटक दलों के लिए यह प्रतिनिधित्व और आंतरिक समन्वय का एक महत्वपूर्ण मामला है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमेघालय सरकार में हाल ही में मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया गया था, जिसके बाद बीजेपी ने अपनी 10 विधायकों की संख्या के आधार पर और मंत्री पदों की मांग उठाई है।\n\n• सीट खाली होना और फेरबदल: पूर्व मंत्री मेटबाह लिंगदोह के इस्तीफे के बाद रिक्त हुए पद और हालिया फेरबदल से विभागों का नए सिरे से बंटवारा हुआ। इस प्रक्रिया में बीजेपी को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व न मिलने से पार्टी के स्थानीय नेताओं में नाराजगी पैदा हुई।\n• संख्याबल की दलील: 60 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में बीजेपी के पास 10 विधायक हैं, जिसे पार्टी गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी ताकत मानती है। इसी संख्याबल के आधार पर बीजेपी विधायक दल सरकार में अपना हक और सम्मानजनक हिस्सेदारी मांग रहा है।\n• असंतोष सुलझाने की पहल: मतभेदों को बढ़ने से रोकने के लिए बीजेपी नेताओं ने केंद्रीय सह-प्रभारी से संपर्क साधा है और मुख्यमंत्री के साथ सामूहिक चर्चा की अपील की है। आने वाले दिनों में केंद्रीय नेताओं के मार्गदर्शन के बाद ही इस मसले पर आगे की बातचीत तय होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सनबोर शुलाई ने मेघालय मंत्रिमंडल में क्या मांग उठाई है?\nउन्होंने बीजेपी के 10 विधायकों के संख्याबल को देखते हुए सरकार में अतिरिक्त मंत्री पद देने और बेहतर विभाग सौंपने की मांग की है।\n\n2. यह विवाद किस घटना के बाद सामने आया?\nयह असंतोष पूर्व मंत्री मेटबाह लिंगदोह के इस्तीफे के बाद हुए हालिया मंत्रिमंडल फेरबदल और विभागों के नए वितरण के बाद सामने आया।\n\n3. मेघालय विधानसभा में बीजेपी के कुल कितने विधायक हैं?\n60 सदस्यों वाली मेघालय विधानसभा में बीजेपी के कुल 10 विधायक हैं।\n\n4. बीजेपी नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर किससे संपर्क किया है?\nबीजेपी विधायकों ने पूर्वोत्तर के सह-प्रभारी राजीव बब्बर से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी दी है और मुख्यमंत्री से भी बैठक का समय मांगा है।",
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  "publishedAt": "2026-11-04",
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