# मेघालय में सरकारी कर्मचारियों ने वेतन संशोधन की मांग उठाई, पांचवें वेतन आयोग पर अटके होने का उठाया मुद्दा

> मेघालय स्टेट गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन ने मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से मुलाकात कर नया वेतनमान लागू करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि राज्य अभी भी पांचवें वेतन आयोग के दायरे में है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

**Type:** article · **Category:** मेघालय · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-men-sarakari-karmachariyon-ne-vetana-snshodhana-ki-manga-uthai-panchaven-vetana-ayoga-para-atake-hone-ka-uthaya-mudda-32389 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेघालय, वेतन संशोधन, सरकारी कर्मचारी, कॉनराड संगमा, वेतन आयोग

शिलांग में मेघालय सरकार के कर्मचारियों ने राज्य प्रशासन के सामने अपनी वेतन वृद्धि की मांग जोरदार तरीके से रखी है। कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र सरकार जहां आगे के वेतन आयोगों की तरफ बढ़ रही है, वहीं राज्य में अभी भी पुरानी व्यवस्था यानी पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों का ही पालन किया जा रहा है। इसी वेतन विसंगति को दूर करने के लिए कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के सामने औपचारिक रूप से अपनी बात रखी है।

## मुख्यमंत्री से मुलाकात और ज्ञापन

मेघालय स्टेट गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को शिलांग में मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से मुलाकात की। इस दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए संशोधित वेतनमान को तत्काल प्रभाव से नवीनीकृत और लागू करने का आग्रह किया गया। बैठक में कर्मचारियों ने राज्य और केंद्र के वेतन ढांचे के बीच पैदा हुए भारी अंतर को समाप्त करने की वकालत की।

फेडरेशन की महासचिव बानशारी खारशांडी ने मुख्यमंत्री के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद बताया कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि देश की केंद्रीय सरकार अपने कर्मचारियों के वेतनमान में लगातार और समयबद्ध संशोधन करती आ रही है, लेकिन इसके मुकाबले मेघालय इस मामले में काफी पीछे छूट गया है। संगठन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे इस पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और राज्य के कर्मचारियों को उनका हक दिलाएं।

## वेतन संशोधन चक्र में देरी और वित्तीय नुकसान

बानशारी खारशांडी ने इस बात पर जोर दिया कि मेघालय के कर्मचारियों को पिछले कई वर्षों से वेतन संशोधन का लाभ नहीं मिला है, जिसके कारण उन्हें बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के कर्मचारियों का आखिरी वेतन संशोधन साल 2017 में लागू किया गया था, लेकिन वे साल 2006 और 2016 के तय संशोधन चक्रों का लाभ पाने से पूरी तरह वंचित रह गए।

उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि जहां केंद्र सरकार हर 10 साल के अंतराल पर नियमित रूप से अपने कर्मचारियों के वेतन में संशोधन करती है, वहीं मेघालय के कर्मचारियों को दो पूरे वेतन-संशोधन चक्रों के छूट जाने की वजह से भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ी है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई अन्य पड़ोसी राज्य पहले ही सातवें वेतन आयोग को अपना चुके हैं और अब आठवें वेतन आयोग की तरफ अग्रसर हैं, जबकि मेघालय अभी भी पांचवें वेतन आयोग की पुरानी व्यवस्था पर ही टिका हुआ है।

## मुख्यमंत्री का आश्वासन और आगे की उम्मीद

कर्मचारियों की इस लंबी सूची और मांगों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि सरकार उनकी इन मांगों का गंभीरता से परीक्षण करेगी। फेडरेशन की तरफ से यह उम्मीद जताई गई है कि अब राज्य सरकार इस गंभीर विषय को पूरी संवेदनशीलता से लेगी और कर्मचारियों के इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार करते हुए जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेगी।

## इसका आप पर असर
मेघालय के सरकारी कर्मचारियों के वेतन संशोधन की मांग से राज्य के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में:** देश भर के विभिन्न राज्यों में केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के बीच वेतन विसंगति का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है, जो अन्य क्षेत्रीय प्रशासनों पर भी अपने वेतन ढांचे की समीक्षा करने का दबाव बनाता है।

- **मेघालय में:** राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए यह सीधा वित्तीय लाभ का विषय है, क्योंकि पांचवें वेतन आयोग से आधुनिक वेतन आयोगों में जाने से उनके मासिक वेतन और भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
मेघालय में वेतन संशोधन का यह मामला कई वर्षों से लंबित वेतन आयोगों और प्रशासनिक देरी के कारण सामने आया है।

- **पुराना वेतन ढांचा:** राज्य में आखिरी बार वेतन संशोधन 2017 में लागू किया गया था, जबकि 2006 और 2016 के निर्धारित संशोधन चक्रों को लागू नहीं किया गया था।

- **पूर्वोत्तर में पिछड़ना:** पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्य पहले ही सातवें और आठवें वेतन आयोग की तरफ बढ़ चुके हैं, जबकि मेघालय अभी भी पांचवें वेतन आयोग पर अटका हुआ है।

- **केंद्रीय वृद्धि से अंतर:** केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के वेतन में हर दस साल पर नियमित संशोधन किए जाने से केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के वेतन में भारी अंतर आ गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. मेघालय में सरकारी कर्मचारियों ने किससे मुलाकात की?
कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से मुलाकात की।

### 2. कर्मचारियों ने बैठक में क्या मांग रखी?
उन्होंने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए संशोधित वेतनमान को नवीनीकृत और लागू करने की मांग का ज्ञापन सौंपा।

### 3. मेघालय में आखिरी वेतन संशोधन कब हुआ था?
मेघालय के कर्मचारियों का आखिरी वेतन संशोधन 2017 में लागू किया गया था।

### 4. कर्मचारी किस वेतन आयोग के तहत काम कर रहे हैं?
मेघालय के कर्मचारी अभी भी पांचवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत काम कर रहे हैं।

### 5. मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को क्या आश्वासन दिया?
मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने आश्वासन दिया कि सरकार कर्मचारियों की इस मांग का परीक्षण करेगी।

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