# मेघालय में सूखे जैसे हालात, अक्टूबर में सामान्य से 85 फीसदी कम बरसा पानी

> मेघालय में मानसून के कमजोर रहने के बाद अक्टूबर में 85 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य के सभी 11 जिलों में भारी जल संकट और प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने का खतरा मंडरा रहा है।

**Type:** article · **Category:** मेघालय · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-men-sukhe-jaise-halata-aktubara-men-samanya-se-85-phisadi-kama-barasa-pani-55221 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेघालय, बारिश की कमी, मौसम विभाग, जल संकट, कॉनराड संगमा, जल जीवन मिशन

पहाड़ी राज्य मेघालय में बारिश की भारी किल्लत ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अक्टूबर के महीने में राज्य भर में सामान्य से 85 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे महीने में मेघालय में केवल 38.3 मिलीमीटर पानी बरसा, जबकि इस दौरान सामान्य औसत 255 मिलीमीटर का रहता है। सामान्य से इतनी बड़ी गिरावट के चलते पूरे राज्य में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो रही है।

## सभी 11 जिलों में स्थिति गंभीर
मौसम विज्ञान विभाग उन क्षेत्रों को बेहद कम बारिश यानी 'लार्ज डेफिसिएंट' की श्रेणी में रखता है, जहां 60 से 99 प्रतिशत तक की कमी होती है। अक्टूबर के दौरान मेघालय का कोई भी कोना इस सूखे से बच नहीं सका और सभी 11 जिले इसी संकटग्रस्त श्रेणी में पहुंच गए। जिलों में वर्षा की कमी 74 से 93 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई।

दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स में स्थिति सबसे ज्यादा विकट रही, जहां सामान्य के मुकाबले 93 फीसदी कम बारिश हुई। इसके बाद पूर्वी जयंतिया हिल्स और उत्तरी गारो हिल्स में 92-92 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई। पूर्वी खासी हिल्स में 91 प्रतिशत और पश्चिम गारो हिल्स में 86 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज हुई।

इसी तरह दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स और पश्चिम खासी हिल्स दोनों जिलों में 84-84 प्रतिशत की गिरावट आई। पूर्वी गारो हिल्स में 81 प्रतिशत, पश्चिम जयंतिया हिल्स में 80 प्रतिशत, जबकि री भोई और दक्षिण गारो हिल्स में 74-74 प्रतिशत तक की कमी रिकॉर्ड की गई।

## दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान भी रहा बड़ा सूखा
राज्य में बारिश का यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि पूरे मानसूनी सीजन में ही मेघालय सूखे की मार झेल रहा था। जून से सितंबर के दौरान दक्षिण पश्चिम मानसून में मेघालय को सिर्फ 1,077.1 मिलीमीटर बारिश मिली, जबकि इस मानसूनी मौसम का सामान्य औसत 2,695.3 मिलीमीटर रहता है। यानी मुख्य सीजन में ही 60 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हो चुकी थी।

मानसून के महीनों पर नजर डालें तो जुलाई में बारिश में 9 प्रतिशत की कमी थी, जो अगस्त में बढ़कर 38 प्रतिशत तक पहुंच गई। अगस्त में सामान्य रूप से 581.6 मिलीमीटर पानी बरसना चाहिए था, लेकिन राज्य में केवल 359.7 मिलीमीटर बारिश ही हो सकी। मानसून के बाद अक्टूबर में यह कमी बढ़कर 85 फीसदी तक पहुंच गई।

## प्राकृतिक झरनों और पेयजल आपूर्ति पर संकट
लगातार सूखे की वजह से राज्य में जल संकट गहराने लगा है। मेघालय में पेयजल के लिए लोग मुख्य रूप से प्राकृतिक झरनों और जलस्रोतों पर निर्भर हैं। वर्षा न होने से भूजल स्तर रिचार्ज नहीं हो पा रहा है, जिससे ये झरने तेजी से सूख रहे हैं या उनका प्रवाह बेहद कम हो गया है।

मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी पूर्व में स्वीकार किया था कि वर्षा के बदलते चक्र और जलवायु परिस्थितियों के कारण जल जीवन मिशन की कई परियोजनाओं के सामने पानी की आपूर्ति को लेकर गंभीर चुनौतियां आ रही हैं, क्योंकि उनके मुख्य जलस्रोत सूख रहे हैं।

पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग ने भी माना है कि गैर-मानसूनी महीनों में जलस्रोतों की स्थिति बेहद संवेदनशील हो जाती है। जल संकट से निपटने और जल प्रबंधन के तहत विभाग ने 70,000 से अधिक स्प्रिंगशेड्स में फैले लगभग 55,000 झरनों का नक्शा तैयार किया है। इनमें से 785 अति संवेदनशील जलस्रोतों की पहचान की गई है, जिन्हें पुनर्जीवित करने का कार्य शुरू किया जा रहा है। लगातार जारी बारिश की कमी से पूरे मेघालय में आने वाले महीनों में जल सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

## इसका आप पर असर
मेघालय में सामान्य से 85 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति और कृषि पर गंभीर संकट आ सकता है।

- **मेघालय में:** प्राकृतिक झरनों और भूजल स्तर में भारी गिरावट से गांवों और कस्बों में पीने के पानी की राशनिंग हो सकती है। स्थानीय लोग पानी के भंडारण और संरक्षण पर तुरंत ध्यान दें, क्योंकि गैर-मानसूनी महीनों में संकट बढ़ सकता है।
- **किसानों और बागवानी पर:** रबी फसलों और शीतकालीन सब्जियों की बुवाई के लिए आवश्यक नमी मिट्टी में कम हो गई है। किसानों को ड्रिप सिंचाई और पानी बचाने वाले साधनों का सहारा लेना होगा।
- **सरकारी योजनाओं पर:** जल जीवन मिशन की कई जलापूर्ति योजनाएं स्रोत सूखने से प्रभावित हो सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में पानी के नए विकल्पों या टैंकरों की आवश्यकता पड़ सकती है।
- **पर्यावरण और जलस्रोतों पर:** 785 चिन्हित संवेदनशील जलस्रोतों के संरक्षण का कार्य तेज करना होगा। स्थानीय समुदायों को पारंपरिक स्प्रिंगशेड प्रबंधन में सहयोग देने की आवश्यकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
मेघालय में अक्टूबर के दौरान पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं की असामान्य गतिविधियों के कारण बारिश में 85 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। यह स्थिति दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान से ही लगातार बनी हुई थी।

- **लगातार मानसूनी विफलता:** जून से सितंबर के मानसूनी सीजन में ही 60 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हुई थी, जिससे जमीन में नमी का स्तर पहले से बहुत कम था। दक्षिण पश्चिम मानसून के धीमे रहने से अक्टूबर में भी शुष्क परिस्थितियां बनी रहीं।
- **महीने दर महीने बिगड़ते हालात:** राज्य में जुलाई में 9 प्रतिशत की कमी थी, जो अगस्त में 38 प्रतिशत और अक्टूबर में बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई। लगातार सक्रिय मौसमी प्रणालियों के अभाव ने राज्य में वर्षा के वितरण को रोक दिया।
- **जलवायु और वर्षा चक्र में बदलाव:** पहाड़ी क्षेत्रों में बदलते जलवायु पैटर्न के कारण वर्षा के स्थानिक और सामयिक वितरण में बड़ा असंतुलन देखा जा रहा है। इसके चलते पारंपरिक मानसूनी क्षेत्रों में लंबे समय तक सूखा खिंच रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. मेघालय में अक्टूबर में कितनी बारिश की कमी दर्ज की गई?
मेघालय में अक्टूबर में सामान्य से 85 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जहां केवल 38.3 मिमी पानी बरसा जबकि सामान्य औसत 255 मिमी है।

### 2. दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान राज्य में कितना सूखा रहा?
जून से सितंबर के दौरान मेघालय में सामान्य के 2,695.3 मिमी के मुकाबले केवल 1,077.1 मिमी बारिश हुई, जिससे 60 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

### 3. किस जिले में अक्टूबर में सबसे ज्यादा बारिश की कमी रही?
दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स में सबसे अधिक 93 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि पूर्वी जयंतिया हिल्स और उत्तरी गारो हिल्स में 92-92 प्रतिशत की कमी रही।

### 4. बारिश की इस भारी कमी का पानी की आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा?
प्राकृतिक झरने और भूजल स्रोत सूखने का खतरा है, जिससे जल जीवन मिशन की नल जल योजनाएं और पेयजल आपूर्ति बाधित हो सकती हैं।

### 5. जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
विभाग ने लगभग 55,000 झरनों की मैपिंग की है और पुनर्जीवित करने के लिए 785 अति संवेदनशील जलस्रोतों की पहचान की है।

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