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  "type": "article",
  "title": "मेघालय में विधायकों के पाला बदलने के बाद यूडीपी ने तोड़ा एमडीए-2 सरकार से नाता",
  "summary": "लगातार विधायकों के दल बदलने के कारण संख्या बल घटने पर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी ने मेघालय की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार से अलग होने का फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष के मंत्रिमंडल से हटने के साथ ही संगठन ने एनपीपी के स्वतंत्र बहुमत का हवाला देकर यह कदम उठाया।",
  "content": "मेघालय की क्षेत्रीय राजनीति में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी ने सत्तारूढ़ मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस यानी एमडीए-2 सरकार से अपना गठबंधन समाप्त करने की औपचारिक घोषणा कर दी है। नेशनल पीपल्स पार्टी के नेतृत्व वाले इस शासन से अलग होने का निर्णय तब सामने आया जब पार्टी के लगभग सभी विधायकों ने पिछले कुछ महीनों में दूसरे दलों का दामन थाम लिया। विधायकों के भारी पलायन के बाद पार्टी के पास विधानसभा में महज एक ही जनप्रतिनिधि बचा है।\n\nबैठक में गठबंधन छोड़ने और मंत्री पद से इस्तीफे पर लगी मुहर\nयूडीपी ईस्ट खासी हिल्स जिला अध्यक्ष और सोहरा एमडीसी टिटोस्टारवेल चाइन ने संवाददाताओं को जानकारी दी कि मंगलवार को विभिन्न जिलों के पार्टी पदाधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का जायजा लेने के बाद गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह के राज्य मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देने के मसले पर भी विस्तार से चर्चा हुई और उस पर सहमति बनी।\n\nएनपीपी के पास अपने बूते बहुमत का आंकड़ा\nगठबंधन छोड़ने के फैसले के पीछे के तर्कों को स्पष्ट करते हुए पार्टी नेतृत्व ने कहा कि मौजूदा दौर में सत्ताधारी मोर्चे में बने रहने का कोई ठोस राजनीतिक औचित्य नहीं बचा था। 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में नेशनल पीपल्स पार्टी के पास वर्तमान में 36 विधायकों का मजबूत समर्थन उपलब्ध है। जब मुख्य सत्तारूढ़ दल के पास सरकार चलाने के लिए जरूरी संख्या से अधिक विधायक पहले से मौजूद हैं, तो सहयोगी के रूप में औपचारिक मौजूदगी बनाए रखना अर्थहीन हो गया था।\n\n12 से सिमटकर सिर्फ एक विधायक पर अटकी यूडीपी\nविधानसभा के शुरुआती दौर में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 12 विधायक हुआ करते थे, जिससे वह राज्य में एक प्रभावशाली क्षेत्रीय ताकत थी। इस राजनीतिक ताकत को उस वक्त गहरा झटका लगा जब सितंबर में पार्टी के आठ विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद पिछले महीने तीन अन्य विधायकों ने एनपीपी में शामिल होने की राह चुनी। इन सिलसिलेवार दल-बदल की घटनाओं के चलते पार्टी के पास सदन में केवल पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ही अकेले विधायक के रूप में रह गए हैं, जिससे राज्य की सक्रिय राजनीति में पार्टी का दायरा काफी सिमट गया है।\n\nमुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने नकारे थे खरीद-फरोख्त के आरोप\nइस पूरे राजनीतिक फेरबदल के बीच मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने एनपीपी के बढ़ते संख्या बल का बचाव किया था। उन्होंने विधायकों की खरीद-फरोख्त अथवा तोड़फोड़ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि दूसरे दलों से आए जनप्रतिनिधियों ने अपनी मर्जी और निजी राजनीतिक प्राथमिकताओं के तहत सत्तारूढ़ दल में शामिल होने का फैसला किया था।\n\nइसका आप पर असर\nमेघालय सरकार के गठबंधन में बदलाव से राज्य के राजनीतिक समीकरण और क्षेत्रीय दलों के प्रभाव पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• पूर्वोत्तर और राष्ट्रीय स्तर पर: क्षेत्रीय दलों के कमजोर होने और बड़े राष्ट्रीय अथवा क्षेत्रीय दलों में विधायकों के विलय से स्थानीय राजनीतिक संतुलन पर प्रभाव पड़ता है। इससे क्षेत्रीय मुद्दों को विधानसभा में स्वतंत्र रूप से उठाने वाले दलों की शक्ति सीमित हो सकती है।\n• मेघालय में शासन व्यवस्था: एनपीपी के पास 60 में से 36 विधायकों का स्पष्ट बहुमत होने के कारण सरकार की स्थिरता पर कोई खतरा नहीं है। प्रशासनिक नीतियों और कैबिनेट के कामकाज बिना किसी गठबंधन के दबाव के सीधे सत्तारूढ़ दल के नियंत्रण में चलेंगे।\n• मतदाताओं के नजरिए से: जिन विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों ने यूडीपी छोड़कर दूसरी पार्टियों का रुख किया है, वहां के स्थानीय विकास कार्यों और प्राथमिकताओं में नए दलों के अनुसार बदलाव देखने को मिल सकता है। क्षेत्रीय पार्टी के समर्थकों को अब नए राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप समन्वय बनाना होगा।\n• क्षेत्रीय दलों का भविष्य: एक समय 12 विधायकों वाली मुख्य क्षेत्रीय पार्टी का एक सीट पर सिमटना राज्य में क्षेत्रीय दलों के घटते जनाधार और उनके भविष्य की रणनीतियों के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है। आने वाले चुनावों में पार्टी को अपनी जड़ें फिर से मजबूत करने के लिए नए सिरे से काम करना होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी का सरकार से बाहर होना विधायकों के सिलसिलेवार दल-बदल और सत्तारूढ़ दल के पास पूर्ण बहुमत होने की सीधी परिणति है।\n\n• विधायकों का लगातार पलायन: पार्टी के 12 में से 8 विधायकों ने सितंबर में बीजेपी की सदस्यता ले ली थी और पिछले महीने तीन अन्य विधायक एनपीपी में शामिल हो गए। इस भारी टूट के बाद पार्टी के पास विधानसभा में संख्या बल न के बराबर रह गया।\n• एनपीपी का अपने दम पर बहुमत: 60 सदस्यीय सदन में एनपीपी के पास अकेले 36 विधायकों का समर्थन जुट चुका है। इस संख्या के कारण गठबंधन में सहयोगी के रूप में बने रहने का कोई वास्तविक प्रभाव या राजनीतिक मोल नहीं बचा था।\n• कैबिनेट से इस्तीफा और स्वतंत्र भूमिका: पार्टी प्रमुख मेटबाह लिंगदोह के मंत्री पद से हटने के बाद जिला पदाधिकारियों की बैठक में औपचारिक रूप से गठबंधन खत्म कर खुद को स्वतंत्र रखने का फैसला किया गया। आगे चलकर पार्टी संगठन को बचाए रखने के लिए अपनी अलग पहचान प्रदर्शित करना आवश्यक माना गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूडीपी ने मेघालय की एमडीए-2 सरकार से समर्थन क्यों वापस लिया?\nपार्टी के अधिकांश विधायकों के दल-बदल करने और एनपीपी के पास स्वतंत्र रूप से 36 विधायकों का बहुमत होने के कारण यूडीपी ने गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य न देखते हुए समर्थन वापस ले लिया।\n\n2. गठबंधन से हटने का फैसला किस बैठक में लिया गया?\nयह फैसला मंगलवार को विभिन्न जिलों के यूडीपी पदाधिकारियों की हुई बैठक में लिया गया, जिसकी जानकारी सोहरा एमडीसी टिटोस्टारवेल चाइन ने दी।\n\n3. विधानसभा में यूडीपी के पास कितने विधायक बचे हैं?\nशुरुआती 12 विधायकों में से 11 के दल बदलने के बाद विधानसभा में पार्टी के पास केवल एक विधायक, पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ही बचे हैं।\n\n4. यूडीपी के बागी विधायक किन पार्टियों में शामिल हुए?\nसितंबर में पार्टी के आठ विधायक बीजेपी में शामिल हुए थे, जबकि पिछले महीने तीन अन्य विधायकों ने एनपीपी का दामन थाम लिया था।\n\n5. क्या यूडीपी के हटने से मेघालय सरकार पर कोई खतरा है?\nनहीं, 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में सत्तारूढ़ एनपीपी के पास 36 विधायकों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है।\n\n6. विधायकों के पाला बदलने पर मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा का क्या रुख था?\nमुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि विधायक अपनी मर्जी से एनपीपी में शामिल हुए हैं।",
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