{
  "type": "article",
  "title": "मेघालय विधानसभा में यूडीपी के 3 विधायकों का एनपीपी में विलय मंजूर",
  "summary": "मेघालय विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए संगमा ने यूडीपी के तीन विधायकों के नेशनल पीपुल्स पार्टी में विलय को औपचारिक मान्यता दे दी है, जिससे सदन में सत्तारूढ़ दल की संख्या 36 हो गई है।",
  "content": "मेघालय की 60 सदस्यीय विधानसभा में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए हैं, जहाँ स्पीकर थॉमस ए संगमा ने शुक्रवार को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के तीन और विधायकों के नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में विलय को औपचारिक स्वीकृति दे दी। इस फैसले के बाद विधानसभा में सत्तारूढ़ एनपीपी के विधायकों की कुल संख्या 33 से बढ़कर 36 हो गई है। वहीं दूसरी ओर, कभी 12 विधायकों वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी यूडीपी अब विधानसभा में महज एक सदस्य के प्रतिनिधित्व तक सिमट गई है।\n\nसंविधान की दसवीं अनुसूची के तहत हुआ फैसला\nतीनों विधायकों ने 17 अक्टूबर को विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क किया था और सत्तारूढ़ एनपीपी में शामिल होने के अपने औपचारिक निर्णय की जानकारी दी थी। विधायकों ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि उनका यह कदम भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत अनिवार्य दो-तिहाई सदस्यों की शर्त को पूरा करता है। कानूनी आवश्यकताओं और प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्पीकर ने तीनों विधायकों को व्यक्तिगत रूप से उनके समक्ष उपस्थित होकर पत्र की पुष्टि करने का निर्देश दिया था।\n\nविधायकों की व्यक्तिगत पेशी और अध्यक्षीय संतुष्टि\nअध्यक्ष के निर्देशानुसार तीनों विधायक 19 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और सत्तारूढ़ दल के साथ विलय के अपने इरादे की दोबारा पुष्टि की। अपने औपचारिक आदेश में स्पीकर थॉमस ए संगमा ने कहा कि वह पूरी तरह आश्वस्त हैं कि विधायकों ने अपनी मर्जी और स्वेच्छा से एनपीपी में शामिल होने का विकल्प चुना है। संतुष्टि दर्ज करने के बाद उन्होंने विलय को स्वीकार कर लिया और निर्देश दिया कि विधानसभा में इन तीनों विधायकों को अब एनपीपी सदस्यों के रूप में सीट आवंटित की जाए।\n\nयूडीपी में लगातार दूसरा बड़ा विभाजन\nयह घटनाक्रम राज्य में यूडीपी के लिए दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले स्पीकर ने 16 अक्टूबर को एक अन्य आदेश जारी किया था, जिसमें यूडीपी के आठ विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विलय को स्वीकार किया गया था। केवल कुछ ही दिनों के अंतराल में दो अलग-अलग विलय निर्णयों के कारण यूडीपी की ताकत 12 से गिरकर सीधे एक पर आ गई है, जिससे राज्य विधायिका में राजनीतिक संतुलन काफी हद तक बदल गया है।\n\nइसका आप पर असर\nइस फैसले से मेघालय की सत्ता संरचना में सत्तारूढ़ गठबंधन को निर्णायक मजबूती मिली है और विपक्षी दल का प्रभाव बेहद सीमित हो गया है।\n\n• भारत में: यह घटनाक्रम संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई विधायकों के विलय प्रावधानों के उपयोग का एक और स्पष्ट राष्ट्रीय उदाहरण पेश करता है। पूरे देश में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के भीतर विधायकों के सामूहिक पलायन पर कानूनी और विधायी नजरिया प्रभावित हो सकता है।\n• मेघालय में: सत्तारूढ़ एनपीपी की सदस्य संख्या 36 होने से राज्य सरकार को सदन में पूर्ण बहुमत और अभूतपूर्व राजनीतिक स्थिरता हासिल हुई है। वहीं प्रमुख विपक्षी दल यूडीपी के पास केवल एक विधायक बचने से विधायी बहसों में विपक्ष की आवाज काफी कमजोर पड़ेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटनाक्रम यूडीपी विधायकों द्वारा सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने के लिए सामूहिक कानूनी प्रक्रिया अपनाने और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नियमों की पुष्टि करने के बाद हुआ।\n\n• प्रत्यक्ष कारण: यूडीपी के तीन विधायकों ने स्वेच्छा से सत्तारूढ़ एनपीपी में शामिल होने के लिए 17 अक्टूबर को औपचारिक आवेदन दिया था। अध्यक्ष ने व्यक्तिगत सत्यापन के बाद उनकी सहमति को वैध पाया और आदेश पारित किया।\n• संवैधानिक प्रावधान: दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों की सहमति अनिवार्य थी। इस समूह ने पैरा 4 की अनिवार्य शर्तों को पूरा करने का दावा किया, जिसे अध्यक्ष ने सही माना।\n• पूर्व घटनाक्रम: इससे ठीक पहले 16 अक्टूबर को यूडीपी के आठ अन्य विधायकों ने बीजेपी में विलय का विकल्प चुना था। उस पूर्व विभाजन ने शेष विधायकों के लिए अगला कदम उठाने का रास्ता खोल दिया था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेघालय विधानसभा में किस दल के विधायकों का विलय हुआ है?\nयूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के तीन विधायकों का सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में विलय हुआ है।\n\n2. इस विलय को मान्यता किसने और कब दी?\nमेघालय विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए संगमा ने शुक्रवार को इस विलय को औपचारिक मान्यता प्रदान की।\n\n3. विलय के बाद एनपीपी और यूडीपी की सदस्य संख्या कितनी हो गई है?\nएनपीपी के सदस्यों की संख्या 33 से बढ़कर 36 हो गई है, जबकि 60 सदस्यीय सदन में यूडीपी के पास अब केवल एक विधायक बचा है।\n\n4. विधायकों ने किस संवैधानिक नियम के तहत विलय का दावा किया था?\nविधायकों ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत दो-तिहाई सदस्यों की आवश्यकता पूरी करने का आधार प्रस्तुत किया था।\n\n5. यूडीपी के बाकी विधायकों के साथ इससे पहले क्या हुआ था?\nस्पीकर ने 16 अक्टूबर को यूडीपी के आठ अन्य विधायकों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को मंजूरी दी थी।",
  "url": "https://trendkia.com/meghalaya/meghalaya-vidhanasabha-men-udp-ke-3-vidhayakon-ka-npp-men-vilaya-mnjura-51298",
  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-10-24",
  "tags": [
    "मेघालय विधानसभा",
    "यूडीपी",
    "एनपीपी",
    "थॉमस ए संगमा",
    "मेघालय राजनीति",
    "दल बदल",
    "दसवीं अनुसूची"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}