{
  "type": "article",
  "title": "मेघालय के इस कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में बुनियादी सुविधाओं का अकाल, डॉक्टर और स्पेशलिस्ट भी नहीं",
  "summary": "नारतियांग विधानसभा क्षेत्र के नामडोंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में एक भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं है और यहां ऑपरेशन थिएटर तथा बेहतर सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नदारद हैं।",
  "content": "मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले में स्थित नामडोंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर अपनी बदहाली के कारण गंभीर संकट से जूझ रहा है। इस चिकित्सा संस्थान की जिम्मेदारी केवल चार एमबीबीएस डॉक्टरों के कंधों पर है, जो पूरे क्षेत्र के स्वास्थ्य तंत्र को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, मरीजों की भारी भीड़ और सुविधाओं के अभाव के चलते यहां की व्यवस्थाएं लगातार दबाव में काम कर रही हैं।\n\nस्पेशलिस्ट डॉक्टरों और ऑपरेशन थिएटर का गंभीर अभाव\n\nइस अस्पताल में मेडिसिन, सर्जरी, गाइनोकोलॉजी या पीडियाट्रिक्स जैसे किसी भी विभाग का कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर नियुक्त नहीं है, जबकि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए इन सभी की जरूरत होती है। डॉक्टरों की कमी के अलावा अस्पताल का ढांचा भी बेहद कमजोर है। भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों के अनुसार इस श्रेणी के केंद्र में कम से कम 30 बेड होने चाहिए, लेकिन यहां केवल 15 बेड ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा यहां कोई ऑपरेशन थिएटर भी नहीं है, जिसके कारण परिसर में किसी भी प्रकार की सर्जिकल देखभाल संभव नहीं हो पाती है.\n\nडायग्नोस्टिक सेवाएं और स्टाफ की भारी किल्लत\n\nअस्पताल की मेडिकल जांच से जुड़ी सुविधाएं भी काफी नाकाफी साबित हो रही हैं। यहां लगाई गई एक्स-रे मशीन को अभी तक चालू नहीं किया गया है और अल्ट्रासोनोग्राफी की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिलती है। इसके अलावा सपोर्ट स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है क्योंकि पूरे केंद्र में केवल एक फार्मासिस्ट, तीन लैबोरेटरी टेक्नीशियन और एक एलडीए ही तैनात हैं। कुछ श्रेणियों के तहत अनिवार्य माने जाने वाले काउंसलर का पद भी यहां खाली पड़ा है और न ही यहां कोई लेडी हेल्थ विज़िटर्स मौजूद है.\n\nखराब सड़कें और पड़ोसी राज्य के मरीजों का बोझ\n\nअस्पताल तक पहुंचना भी मरीजों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। केंद्र तक जाने वाली सड़क की हालत बेहद खराब है, जिससे हर यात्रा कठिन हो जाती है। आपातकालीन स्थिति में समय पर इलाज की जरूरत पड़ने वाली गर्भवती महिलाओं को इस समस्या का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है। मंगलवार को अस्पताल पहुंचे एक मरीज ने भी यहां के बदहाल रास्ते पर हैरानी जताई। इस केंद्र पर केवल मेघालय के लोग ही निर्भर नहीं हैं, बल्कि पड़ोसी राज्य असम के मरीज भी इलाज के लिए यहीं आते हैं। इस अस्पताल में औसतन 70 से 200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं.\n\nप्रशासनिक चुनौतियां और डॉक्टरों का संघर्ष\n\nनामडोंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के प्रभारी डॉक्टर रिमिकी गस्सा ने बताया कि फिलहाल यहां 15 बेड इसलिए हैं क्योंकि एक फर्स्ट रेफरल यूनिट का निर्माण कार्य चल रहा है। पिछले दो सालों के दौरान आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता वाले लगभग 40 मरीजों को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जा चुका है। डॉक्टर रिमिकी गस्सा ने स्वीकार किया कि कम स्टाफ और स्पेशलिस्ट की अनुपस्थिति से काम प्रभावित होता है, लेकिन किसी तरह प्रबंधन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर यहां आने वाले थे, लेकिन उन्होंने इसके बजाय एनईआईजीआरआईएचएमएस में सीनियर रेजिडेंसी ज्वाइन कर ली। केंद्र के पास एक एम्बुलेंस जरूर है, लेकिन समय-समय पर दवाइयां खत्म हो जाती हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। यह पूरा स्वास्थ्य केंद्र नारतियांग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व मेघालय के उपमुख्यमंत्री स्निआवभलाँग धर करते हैं.\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे तौर पर आम नागरिकों और मरीजों के स्वास्थ्य अधिकारों तथा चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच से जुड़ी हुई है।\n\n• भारत में: देश के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और उपकरणों की कमी को दूर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर त्वरित सुधार की कितनी आवश्यकता है।\n\n• मेघालय में: नारतियांग और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों तथा असम के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले मरीजों को आपातकालीन स्थिति में इलाज के लिए दूरदराज के बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। खराब सड़कों और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nस्वास्थ्य केंद्र की यह बदहाली बुनियादी ढांचे के विकास में देरी और प्रशासनिक प्राथमिकताओं की कमी के कारण पैदा हुई है।\n\n• डॉक्टरों की नियुक्ति का अभाव: स्वीकृत पदों के बावजूद स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का यहां न टिक पाना और वैकल्पिक संस्थानों में चले जाना स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करता है।\n\n• अधूरा निर्माण कार्य: फर्स्ट रेफरल यूनिट का निर्माण कार्य लंबे समय से जारी रहने के कारण बेड की संख्या और बुनियादी चिकित्सा क्षमता सीमित बनी हुई है।\n\n• भौगोलिक और प्रशासनिक उपेक्षा: पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में सड़कों के रख-रखाव में देरी तथा जरूरी मेडिकल उपकरणों को चालू करने में प्रशासनिक विलंब इस संकट को और गहराता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नामडोंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर कहां स्थित है?\nयह स्वास्थ्य केंद्र मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले के नारतियांग विधानसभा क्षेत्र में स्थित है।\n\n2. इस अस्पताल में कितने एमबीबीएस डॉक्टर तैनात हैं?\nयहां वर्तमान में केवल चार एमबीबीएस डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।\n\n3. अस्पताल में कुल कितने बेड की क्षमता है?\nभारतीय जन स्वास्थ्य मानकों के अनुसार 30 बेड होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में यहां केवल 15 बेड ही उपलब्ध हैं।\n\n4. इस केंद्र के प्रभारी अधिकारी कौन हैं?\nडॉक्टर रिमिकी गस्सा इस कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के प्रभारी हैं।\n\n5. नारतियांग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कौन करता है?\nइस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मेघालय के उपमुख्यमंत्री स्निआवभलाँग धर करते हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/meghalaya/namdong-community-health-center-in-meghalaya-struggles-without-specialists-operation-theatre-and-proper-roads-52262",
  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-10-27",
  "tags": [
    "मेघालय स्वास्थ्य",
    "नारतियांग",
    "वेस्ट जयंतिया हिल्स",
    "कम्युनिटी हेल्थ सेंटर",
    "स्वास्थ्य सेवाएं"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}