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  "type": "article",
  "title": "एनआईआरएफ रैंकिंग में एनआईटी मेघालय ने बरकरार रखा दबदबा, देश के शीर्ष 100 इंजीनियरिंग संस्थानों में 83वें स्थान पर",
  "summary": "एनआईआरएफ 2025 में एनआईटी मेघालय ने देश के शीर्ष 100 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 83वां स्थान हासिल किया है। सेमीकंडक्टर रिसर्च, वैश्विक रैंकिंग और मजबूत स्कॉलरशिप व्यवस्था के बल पर संस्थान ने अपनी स्थिति मजबूत की है।",
  "content": "राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2025 के इंजीनियरिंग संवर्ग में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) मेघालय ने शीर्ष 100 संस्थानों के भीतर अपनी स्थिति बरकरार रखते हुए 83वां स्थान हासिल किया है। सोहरा स्थित स्थायी परिसर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान संस्थान के अकादमिक मामलों के डीन प्रो. अनुप दंडपात ने यह आधिकारिक जानकारी साझा की। पिछले साढ़े तीन वर्षों में संस्थान के अकादमिक स्तर, अनुसंधान कार्यों और उद्योग जगत से समन्वय में लगातार प्रगति दर्ज की गई है, जिसका श्रेय संस्थान के निदेशक प्रो. पिनाकेश्वर महंता के नेतृत्व को दिया गया है। करीब दो साल पहले सोहरा के स्थायी परिसर में कामकाज स्थानांतरित होने के बाद इन सभी गतिविधियों में विशेष तेजी आई है।\n\nवैश्विक स्तर पर भी दर्ज कराई मौजूदगी\nराष्ट्रीय फलक पर सफलता हासिल करने के अलावा संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा तालिकाओं में भी स्थान बनाया है। टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में संस्थान को 1,200 से 1,400 के बैंड में रखा गया है। इसके साथ ही एशिया स्तर की उच्च शिक्षण तालिकाओं में भी संस्थान शामिल है, जहां THE एशिया रैंकिंग में यह 501 से 600 बैंड में और क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 791 से 800 बैंड के बीच दर्ज किया गया है।\n\nसेमीकंडक्टर चिप निर्माण और संकाय की उपलब्धियां\nसंस्थान में शिक्षण और अत्याधुनिक तकनीकी नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्राध्यापक दंडपात के अनुसार, केंद्र सरकार के सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान ने स्वदेशी तकनीक के जरिए दो सेमीकंडक्टर चिप तैयार किए हैं। इसके अलावा 12 अन्य सेमीकंडक्टर चिप्स को फैब्रिकेशन की प्रक्रिया के लिए भेजा जा चुका है।\n\nसंस्थान के कई प्राध्यापक अपने शोध कार्यों और साइटेशन के आधार पर दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत शोधकर्ताओं की सूची में स्थान रखते हैं। इसके अलावा यहां के संकाय सदस्यों को फुलब्राइट तथा इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप भी प्राप्त हो चुकी हैं।\n\nइंटर्नशिप, प्लेसमेंट और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में प्रदर्शन\nराष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू किए गए सुधारों के अनुसार, बीटेक के विद्यार्थियों को तीसरे वर्ष के बाद लंबी अवधि की औद्योगिक इंटर्नशिप करने की अनुमति दी गई है। इस नई व्यवस्था का लाभ उठाकर स्थानीय शोधार्थियों सहित कई विद्यार्थियों ने विदेशों में भी इंटर्नशिप प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। इस कार्यक्रम के शुरू होने के बाद से विद्यार्थियों के प्लेसमेंट और वेतन पैकेज में स्पष्ट रूप से सुधार दर्ज किया गया है।\n\nप्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के मोर्चे पर भी विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पिछले साल मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एक पूर्व छात्र ने गेट (GATE) परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर तीसरी रैंक हासिल की थी।\n\nदाखिले, नए पाठ्यक्रम और उद्योग के साथ समन्वय\nपूर्वोत्तर क्षेत्र में शिक्षकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संस्थान को 2027-28 सत्र से एक एकीकृत बीएससी-बीएड कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है। हाल ही में संपन्न हुए प्रवेश चक्र में बीटेक, एमएससी और एमसीए पाठ्यक्रमों की शत-प्रतिशत सीटें भर गईं, जबकि एमटेक की 75 से 80 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश हुआ, जिसे क्षेत्र के एनआईटी संस्थानों के बीच काफी मजबूत आंकड़ा माना जा रहा है।\n\nपरास्नातक पाठ्यक्रमों को रोजगार बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए संस्थान ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न एनआईटी के निदेशकों, डीन और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन भी आयोजित किया था ताकि अकादमिक प्रशिक्षण को व्यावहारिक मांग से सीधे जोड़ा जा सके।\n\nछात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता का ढांचा\nसंस्थान में नामांकित 73 से 75 प्रतिशत विद्यार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग पृष्ठभूमि से आते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए व्यापक स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में लगभग 200 छात्र राष्ट्रीय और संस्थागत योजनाओं के तहत पूर्ण छात्रवृत्ति पर अध्ययन कर रहे हैं।\n\nफीस माफी के तहत दी जाने वाली राशि 1 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है, जबकि योग्य एमटेक और पीएचडी शोधार्थियों को सालाना 6.5 करोड़ रुपये से अधिक की फेलोशिप का भुगतान किया जाता है। डीन दंडपात ने कहा कि संस्थान की मंशा शिक्षा को हर वर्ग तक पहुंचाने की है, ताकि कोई भी विद्यार्थी पैसों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर न हो।\n\nइसका आप पर असर\nएनआईटी मेघालय की इस मजबूत रैंकिंग और अनुसंधान उपलब्धियों से पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों को विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा और प्लेसमेंट के बेहतर मौके मिलेंगे।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्प तलाश रहे इंजीनियरिंग उम्मीदवारों को पूर्वोत्तर में एक मजबूत और शीर्ष 100 संस्थान का विकल्प मिलता है। देश भर के विद्यार्थी यहां सेमीकंडक्टर रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय इंटर्नशिप के अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।\n• मेघालय में: राज्य और पूर्वोत्तर के स्थानीय विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में रहकर शीर्ष तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिल रही है। 2027-28 से शुरू होने वाला नया एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम क्षेत्र में गणित व विज्ञान के योग्य शिक्षकों की कमी को दूर करेगा।\n• आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए: आरक्षित वर्गों और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए फीस माफी तथा स्कॉलरशिप की पुख्ता व्यवस्था है। पात्र एमटेक और पीएचडी शोधकर्ताओं को हर साल कुल 6.5 करोड़ रुपये से अधिक की फेलोशिप दी जा रही है।\n• रोजगार और करियर में: तीसरे वर्ष के बाद लंबी इंटर्नशिप की सुविधा से छात्रों के प्लेसमेंट पैकेज और विदेश में काम करने के अवसर काफी बढ़े हैं। उद्योगों के साथ मिलकर बदले जा रहे पाठ्यक्रमों से यहां के स्नातकों को तकनीकी नौकरियों में सीधा लाभ मिल रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएनआईटी मेघालय का शीर्ष 100 में स्थान बनाए रखना सोहरा में स्थायी परिसर की स्थापना, मजबूत शैक्षणिक नेतृत्व और व्यावहारिक तकनीकी अनुसंधान पर केंद्रित नीतियों का परिणाम है।\n\n• स्थायी परिसर में स्थानांतरण: दो वर्ष पूर्व सोहरा में स्थायी परिसर में शिफ्ट होने के बाद संस्थान की अधोसंरचना, प्रयोगशालाओं और अकादमिक गतिविधियों में तेज गति आई। इससे शोधकर्ताओं और संकाय को व्यापक संसाधन उपलब्ध हो सके।\n• अनुसंधान और सेमीकंडक्टर परियोजनाएं: संस्थान ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सेमीकॉन इंडिया अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई और स्वदेशी चिप डिजाइन की। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों और साइटेशन में संकाय के शीर्ष 5 प्रतिशत में होने से स्कोर में बढ़ोतरी हुई।\n• व्यावहारिक शिक्षा नीतियां: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीसरे वर्ष के बाद छात्रों को उद्योग में लंबी इंटर्नशिप करने की छूट दी गई, जिससे प्लेसमेंट और प्रदर्शन मानकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एनआईआरएफ 2025 में एनआईटी मेघालय को कौन सी रैंक मिली है?\nसंस्थान ने एनआईआरएफ 2025 के इंजीनियरिंग संवर्ग में देशभर में 83वां स्थान हासिल किया है।\n\n2. संस्थान ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में क्या उपलब्धि हासिल की है?\nसेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत संस्थान ने दो स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप विकसित किए हैं और 12 अन्य चिप फैब्रिकेशन के लिए भेजे हैं।\n\n3. एनआईटी मेघालय में छात्रों को कितनी वित्तीय सहायता दी जाती है?\nसंस्थान में 1 करोड़ रुपये से अधिक की ट्यूशन फीस माफ की जा चुकी है और शोधार्थियों को सालाना 6.5 करोड़ रुपये से अधिक की फेलोशिप दी जाती है।\n\n4. संस्थान कौन सा नया शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है?\nपूर्वोत्तर में शिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संस्थान 2027-28 सत्र से एक एकीकृत बीएससी-बीएड कार्यक्रम शुरू करेगा।\n\n5. वैश्विक स्तर पर एनआईटी मेघालय की क्या रैंकिंग है?\nयह टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 1,200-1,400 बैंड और क्यूएस एशिया रैंकिंग में 791-800 बैंड में शामिल है।",
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  "publishedAt": "2026-11-02",
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