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  "title": "नोंगस्टोइन स्टाफ नर्स भर्ती विवाद: वीपीपी ने एमडीसी के हस्तक्षेप को ठहराया सही, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग",
  "summary": "नोंगस्टोइन में स्टाफ नर्स भर्ती साक्षात्कार में एमडीसी के हस्तक्षेप के बाद वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि जिला प्रशासन ने अनाधिकृत प्रवेश की निंदा की है।",
  "content": "मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले में मदर एंड चाइल्ड हेल्थ अस्पताल के लिए चल रही स्टाफ नर्स भर्ती प्रक्रिया को लेकर सियासी और प्रशासनिक खींचतान तेज हो गई है। वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी यानी वीपीपी ने अपने नोंगस्टोइन एमडीसी डॉ जूरिस्टमैन इयावफनियाव के उस कदम का पुरजोर बचाव किया है, जिसके तहत उन्होंने 29 सितंबर को पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ इंटरव्यू हॉल में पहुंचकर प्रक्रिया को रुकवा दिया था। पार्टी का कहना है कि यह कदम भर्ती में कथित धांधली और अनियमितताओं की अनसुलझी शिकायतों के विरोध में उठाया गया, क्योंकि प्रशासन ने पहले दी गई चेतावनियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी।\n\nप्रशासन को 17 सितंबर को ही दी गई थी अनियमितताओं की जानकारी\nबुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में वीपीपी ने स्पष्ट किया कि 29 सितंबर की यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई थी। पार्टी का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों और धांधली के आरोपों से वेस्ट खासी हिल्स के डिप्टी कमिश्नर को 17 सितंबर को ही लिखित रूप से अवगत करा दिया गया था। पार्टी नेताओं के अनुसार जब प्रशासन ने उन गंभीर चिंताओं का समय रहते कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकाला और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इंटरव्यू शुरू कर दिए, तो एमडीसी और पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रक्रिया रोकने के लिए भौतिक रूप से हस्तक्षेप करने पर मजबूर होना पड़ा।\n\nवीपीपी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि वह युवाओं को मिलने वाले रोजगार या योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के खिलाफ बिल्कुल नहीं है। संगठन का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को निष्पक्ष और समान अवसर मिले। पार्टी ने कहा कि सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता हर हाल में संदेह से परे होनी चाहिए और सार्वजनिक पदों पर चयन पैसे, व्यक्तिगत संबंधों या किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से प्रभावित नहीं होना चाहिए। वीपीपी ने इस पूरे मामले को केवल एक साक्षात्कार में बाधा डालने की घटना के रूप में पेश करने पर भी कड़ा एतराज जताया और कहा कि प्रशासन को मूल आरोपों की तह तक जाना चाहिए।\n\nवीपीपी ने प्रशासन के समक्ष रखीं चार प्रमुख मांगें\nभर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए वीपीपी ने प्रशासन के सामने चार स्पष्ट शर्तें रखी हैं\n\n• पारदर्शी और निष्पक्ष जांच: स्टाफ नर्स भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी हर छोटी-बड़ी शिकायत और अनियमितता के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।\n• सबूतों और ऑडियो रिकॉर्डिंग की पुष्टि: शिकायतों के समर्थन में सौंपे गए ऑडियो टेप और अन्य संबंधित दस्तावेजों का उचित सत्यापन किया जाए।\n• 17 सितंबर के ज्ञापन की समीक्षा: डिप्टी कमिश्नर के समक्ष 17 सितंबर को पेश की गई आपत्तियों और चिंताओं की प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत समीक्षा हो।\n• भरोसा बहाली तक प्रक्रिया पर रोक: जब तक सभी आरोपों की पूरी जांच नहीं हो जाती और अभ्यर्थियों व आम जनता का विश्वास बहाल नहीं होता, तब तक भर्ती को आगे न बढ़ाया जाए।\n\nजिला प्रशासन का रुख: अनाधिकृत प्रवेश और बाधा डालने की निंदा\nवीपीपी का यह कड़ा बयान वेस्ट खासी हिल्स जिला प्रशासन द्वारा 29 सितंबर को जारी उस प्रेस नोट के बाद आया है, जिसमें इंटरव्यू में हुए व्यवधान की कड़ी निंदा की गई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नोंगस्टोइन स्थित मदर एंड चाइल्ड हेल्थ अस्पताल में संविदा के आधार पर स्टाफ नर्सों का चयन पूरी तरह से तय नियमों और औपचारिक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, 21 सितंबर को नोंगस्टोइन कॉलेज में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद डिस्ट्रिक्ट मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर ने 24 सितंबर को परिणाम जारी करते हुए कुल 60 सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया था।\n\nप्रशासन ने बताया कि इंटरव्यू का आयोजन 29 और 30 सितंबर को डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के कॉन्फ्रेंस रूम में एक विधिवत गठित चयन बोर्ड के समक्ष निर्धारित था। 29 सितंबर को पहले दिन जब बोर्ड उम्मीदवारों का साक्षात्कार ले रहा था, उसी दौरान एमडीसी बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के अचानक हॉल में दाखिल हो गए। आरोप है कि उन्होंने बोर्ड के सदस्यों पर अभ्यर्थियों के सामने ऊंची आवाज में बात की और कार्यवाही को बाधित किया, जिससे कमरे में मौजूद उम्मीदवारों और बोर्ड के सदस्यों को भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद एमडीसी को डिप्टी कमिश्नर के कक्ष में ले जाया गया, जहां उन्होंने मौखिक रूप से आरोप लगाए, जिनमें से कुछ बातें मीडिया में भी सामने आई हैं।\n\nकानूनी कार्रवाई की तैयारी और उम्मीदवारों को सतर्क रहने की सलाह\nप्रशासन ने इंटरव्यू स्थल पर बिना अनुमति घुसने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि चयन बोर्ड को किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र रूप से काम करने का पूरा अधिकार है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद या रुतबे पर हो, भर्ती स्थल पर अनधिकृत रूप से प्रवेश नहीं कर सकता और न ही सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य पालन से रोक सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस पूरी घटना की कानूनी जांच की जा रही है और कानून के मुताबिक उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।\n\nअनियमितता के आरोपों पर प्रशासन ने कहा कि यदि किसी के पास पैसे मांगने या किसी अन्य गलत तरीके के ठोस सबूत हैं, तो वे अपनी शिकायत लिखित रूप में पूरे विवरण के साथ डिप्टी कमिश्नर को सौंपें। प्रत्येक शिकायत की गहराई से जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन ने दोहराया कि चयन पूरी तरह से लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में मिले अंकों की मेरिट पर आधारित है और इसके लिए किसी भी स्तर पर पैसे का कोई प्रावधान नहीं है। उम्मीदवारों को दलालों या चयन कराने का झूठा दावा करने वालों से सावधान रहने की हिदायत दी गई है। प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील की ताकि अस्पताल जल्द शुरू हो सके और क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।\n\nइसका आप पर असर\nनोंगस्टोइन में स्टाफ नर्स भर्ती में विवाद और इंटरव्यू रुकने से स्थानीय अस्पताल के संचालन और 60 शॉर्टलिस्ट अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• भारत में: सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर नागरिकों की संवेदनशीलता लगातार बढ़ रही है। इस तरह के विवाद अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को भी भर्ती प्रक्रियाओं में सतर्क रहने और अनियमितता दिखने पर लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रेरणा देते हैं।\n• मेघालय में: नोंगस्टोइन के मदर एंड चाइल्ड हेल्थ अस्पताल में 60 शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के साक्षात्कार में देरी से स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत टल सकती है। स्थानीय युवाओं और आवेदकों को प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि चयन केवल मेरिट पर होगा, इसलिए वे किसी दलाल के झांसे में न आएं और अवैध मांग की तुरंत शिकायत करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू चरण में कथित अनियमितताओं की शिकायत पर राजनीतिक हस्तक्षेप किया गया। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की कमी और पूर्व शिकायतों के समाधान न होने के कारण यह गतिरोध बढ़ा।\n\n• पूर्व शिकायत पर समाधान का अभाव: वीपीपी ने 17 सितंबर को ही डिप्टी कमिश्नर के सामने भर्ती में अनियमितताओं की चिंताएं रखी थीं। जब इन सवालों को सुलझाए बिना 29 सितंबर को इंटरव्यू शुरू कर दिए गए, तो पार्टी नेताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रक्रिया रुकवा दी।\n• ऑडियो रिकॉर्डिंग और धांधली के आरोप: शिकायतकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और पैसों की मांग के संबंध में कथित ऑडियो सबूत पेश किए हैं। इन अनसुलझे आरोपों ने अभ्यर्थियों और स्थानीय संगठनों में अविश्वास पैदा किया।\n• प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन: जिला प्रशासन के अनुसार इंटरव्यू बोर्ड के समक्ष बिना अनुमति प्रवेश करना और अधिकारियों के काम में दखल देना कानूनन गलत है। इसी कारण प्रशासन ने घटना की निंदा करते हुए कानूनी कार्रवाई की जांच शुरू की है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नोंगस्टोइन स्टाफ नर्स भर्ती इंटरव्यू में किसने हस्तक्षेप किया?\nवीपीपी के नोंगस्टोइन एमडीसी डॉ जूरिस्टमैन इयावफनियाव और पार्टी सदस्यों ने 29 सितंबर को इंटरव्यू हॉल में जाकर प्रक्रिया को रुकवाया।\n\n2. वीपीपी ने इंटरव्यू रोकने की क्या वजह बताई है?\nपार्टी का कहना है कि भर्ती में कथित अनियमितताओं की शिकायत 17 सितंबर को ही प्रशासन से की गई थी, लेकिन बिना समाधान इंटरव्यू कराने पर उन्हें हस्तक्षेप करना पड़ा।\n\n3. यह भर्ती किस अस्पताल और पद के लिए हो रही है?\nयह भर्ती नोंगस्टोइन स्थित मदर एंड चाइल्ड हेल्थ अस्पताल में संविदा के आधार पर स्टाफ नर्स के पदों के लिए आयोजित की जा रही है।\n\n4. प्रशासन ने एमडीसी के इस कदम पर क्या रुख अपनाया है?\nप्रशासन ने अनाधिकृत प्रवेश और चयन बोर्ड के काम में बाधा डालने की निंदा की है और मामले में कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की बात कही है।\n\n5. इस भर्ती परीक्षा में कितने अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट हुए थे?\n21 सितंबर को आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर कुल 60 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था।\n\n6. वीपीपी की मुख्य मांगें क्या हैं?\nपार्टी ने भर्ती की पारदर्शी जांच, ऑडियो सबूतों के सत्यापन, 17 सितंबर के ज्ञापन की समीक्षा और भरोसा बहाल होने तक प्रक्रिया रोकने की मांग की है।",
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  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-09-30",
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