पूर्वोत्तर राज्यों के विकास कार्यों के लिए 42.63 करोड़ रुपये का आवंटन, 14 योजनाएं पूरी पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) ने सितंबर 2026 में पूर्वोत्तर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए 42.63 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जबकि 45.48 करोड़ रुपये की 14 अहम बुनियादी ढांचा योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास कार्यों की गति तेज करने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) ने सितंबर 2026 के दौरान 42.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इस स्वीकृत राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में चल रही कल्याणकारी योजनाओं को दिया गया है, जबकि शेष राशि क्षेत्रीय तकनीकी संस्थानों, कौशल विकास एजेंसियों और क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों को आबंटित की गई है। इस वित्तीय सहयोग के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, कृषि और पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। कुल जारी किए गए फंड में से 35.21 करोड़ रुपये आठों पूर्वोत्तर राज्यों की विभिन्न राज्यस्तरीय परियोजनाओं के लिए तय किए गए हैं। इसके अलावा 7.42 करोड़ रुपये क्षेत्रीय स्तर के संस्थानों और एजेंसियों को दिए गए हैं, ताकि वे आधुनिक तकनीक, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण के कार्यों को आगे बढ़ा सकें। राज्यों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी नगालैंड के खाते में आई है, जिसे कुल 11.92 करोड़ रुपये मिले हैं। नगालैंड को मिली यह राशि मुख्य रूप से क्लस्टर-आधारित कॉफी वैल्यू चेन डेवलपमेंट परियोजना और चाखेसांग जनजाति के लिए फुटसेरोमी गांव में कल्चरल एक्टिविटी कॉम्प्लेक्स के निर्माण पर खर्च की जा रही है। पूर्वोत्तर राज्यों को आवंटित की गई राशि का विवरण मिजोरम को विकास कार्यों के लिए 6.29 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है। इस राशि का उपयोग चम्फाई के बेथेल वेंग में निर्माणाधीन सभागार, वांगछिया में सांस्कृतिक पर्यटन बुनियादी ढांचे, मिजो अदरक की खेती, आईटी-आधारित खनिज मानचित्रण और सियाहा जिले में सामुदायिक अवसंरचना के विकास में किया जाएगा। असम को कुल 4.42 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसका इस्तेमाल कोकराझार स्थित बिनेश्वर ब्रह्मा इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र छात्रावासों के निर्माण और तिनसुकिया में सिंगफो समुदाय से जुड़ी कल्याणकारी पहलों के लिए किया जा रहा है। सिक्किम को 4.17 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं, जो शहरों में सीसीटीवी निगरानी प्रणाली स्थापित करने और रेनॉक के सरकारी डिग्री कॉलेज में बहुउद्देश्यीय हॉल के निर्माण में लगाए जाएंगे। अरुणाचल प्रदेश के लिए 3.40 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिससे यिंगकियोंग के जिला अस्पताल में नर्सिंग हॉस्टल, दिबांग घाटी में अचेसो पर्यटन परिसर और जीरो सिग्नेचर व्यू पॉइंट का विकास कार्य होगा। इसके साथ ही त्रिपुरा और मणिपुर को भी उनकी चल रही योजनाओं की ताजा किस्तें प्रदान की गई हैं। त्रिपुरा में जनजातीय युवाओं के लिए मॉडल हाट, खुमुलवंग इको-पार्क का उन्नयन और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। मणिपुर में इस आबंटन से औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण, जनजातीय अनुसंधान संस्थान में संग्रहालय-सह-पुस्तकालय का निर्माण और नदी कचरा संग्रहण इकाइयां स्थापित करने का काम आगे बढ़ाया जाएगा। क्षेत्रीय संस्थानों और तकनीकी केंद्रों को मिला सहयोग क्षेत्रीय स्तर के निकायों के लिए निर्धारित 7.42 करोड़ रुपये में से उत्तर पूर्व केन एंड बैम्बू डेवलपमेंट काउंसिल (एनईसीबीडीसी) को बांस कारीगर क्लस्टर विकसित करने के लिए 2.88 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं पूर्वोत्तर हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम (एनईएचएचडीसी) को हथकरघा कौशल विकास के विस्तार के लिए 2.35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। दूरदराज के स्कूलों में विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एनईसीटीएआर को एसटीईएम (STEM) प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए 1.24 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अतिरिक्त एनईडीएफआई, एनआईटी मेघालय, आईआईएम शिलांग, नेहू और एनईएसएसी जैसे प्रमुख संस्थानों को भी आवश्यक वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया है। 45.48 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाएं पूरी फंड जारी करने के साथ ही सितंबर महीने में 45.48 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 14 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सफल समापन और क्लोजर की पुष्टि भी की गई है। मेघालय में पश्चिम खासी हिल्स के मावथाद्राइशन में 4.75 करोड़ रुपये की लागत से स्कूल भवनों का निर्माण पूरा हुआ है, जबकि शिलांग के लम शात स्नगी केंचेस ट्रेस में सेंग खासी री रैद लबान का सांस्कृतिक परिसर 9.28 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुआ है। नगालैंड में कोहिमा के यासोगेई में 9.17 करोड़ रुपये का म्यूजिक एंड यूथ एक्टिविटी सेंटर और फेक गवर्नमेंट हाई स्कूल में मूलभूत सुविधाओं से युक्त 1.92 करोड़ रुपये का सभागार बनकर तैयार हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में पासीघाट स्थित जेएन कॉलेज में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से छात्राओं का हॉस्टल (जी+1) पूरा किया गया, जबकि सिक्किम में लिंबू समुदाय के लिए 4.53 करोड़ रुपये की पिछड़ी जाति योजना संपन्न हुई। असम के कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में 11.55 करोड़ रुपये के कुल एनईसी सहयोग से कृषि क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाएं पूरी हुईं। इनमें लुम्बाजोंग विकास खंड में 4.97 करोड़ रुपये, इसी खंड के सरमेन हान्से गांव में 1.97 करोड़ रुपये और पश्चिम कार्बी आंगलोंग के चिनथोंग खंड में 4.61 करोड़ रुपये की ग्रामीण विकास परियोजनाएं शामिल हैं। अन्य पूर्ण परियोजनाओं में एनईसीबीडीसी के तहत 2.10 करोड़ रुपये के सात बांस प्रसंस्करण प्रोटोटाइप प्रोसेसर और मिजोरम के 150 स्कूलों को कवर करने वाला 11.08 करोड़ रुपये का आईटी शिक्षा कार्यक्रम शामिल हैं। इसके साथ ही शिलांग के 20 संस्थानों में संचालित शी-फ्रेंडली प्रोग्राम, एवीजीसी और आईटी-आईटीईएस प्रशिक्षण का अंतर-वित्तपोषण, एआई एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर संगोष्ठी और एनएसएसएस 2026 को भी औपचारिक रूप से पूरा कर लिया गया है। यह संपूर्ण पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के तहत क्षेत्र के नागरिकों के लिए शिक्षा, कृषि, पर्यटन और रोजगार के बेहतर अवसर तैयार करने पर केंद्रित है। इसका आप पर असर इस वित्तीय आवंटन और योजनाओं के पूर्ण होने से पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी व दूरदराज के इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सीधा सुधार देखने को मिलेगा। • भारत में: सीमांत और पूर्वोत्तर राज्यों में बेहतर बुनियादी ढांचे के निर्माण से क्षेत्रीय विकास को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय कारीगरों, विद्यार्थियों और किसानों के लिए आर्थिक स्थिरता और आधुनिक अवसरों के रास्ते खुलेंगे। • पूर्वोत्तर राज्यों में: नगालैंड, मिजोरम, असम, मेघालय, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के निवासियों को नए स्कूल भवनों, छात्रावासों, सड़कों और पर्यटन सुविधाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्थानीय युवाओं को बांस क्लस्टर, हथकरघा, कॉफी और अदरक की खेती के जरिए आय के नए साधन उपलब्ध होंगे। • विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए: 150 स्कूलों में आईटी शिक्षा कार्यक्रम और रिमोट स्कूलों में एसटीईएम प्रयोगशालाओं की स्थापना से विज्ञान व कंप्यूटर की पढ़ाई आसान होगी। इंजीनियरिंग और डिग्री कॉलेजों में नए छात्रावास बनने से दूरदराज के छात्रों को रहने की सुरक्षित सुविधा मिलेगी। • महिलाओं और युवाओं के लिए: शिलांग के 20 संस्थानों में शी-फ्रेंडली कार्यक्रम और विभिन्न कौशल विकास पहलों से महिलाओं के लिए संस्थान अधिक सुरक्षित व सुलभ बनेंगे। युवाओं को संगीत केंद्र, सामुदायिक सभागार और आईटी प्रशिक्षण के जरिए अपनी प्रतिभा निखारने का मंच मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ पूर्वोत्तर राज्यों में भौगोलिक विषमताओं और कठिन पहाड़ी रास्तों के कारण बुनियादी ढांचे के विकास में विशेष बजटीय सहायता और केंद्रीय समन्वय की आवश्यकता होती है। पूर्वोत्तर परिषद समय-समय पर किस्तों में राशि जारी कर चालू योजनाओं की प्रगति सुनिश्चित करती है और पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों की समीक्षा करती है। • नियमित विकास समीक्षा: पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के तहत एनईसी हर तिमाही और महीने में चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन और फंड उपयोग की समीक्षा करता है। सितंबर 2026 में जारी 42.63 करोड़ रुपये इसी नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया और वित्तीय आबंटन का हिस्सा हैं। • क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करना: राज्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार स्वास्थ्य, छात्रावास, कृषि प्रसंस्करण और पर्यटन से जुड़ी अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए ताजा किस्तों की जरूरत थी। नगालैंड, असम और मिजोरम जैसे राज्यों में चल रहे कार्यों को बिना रुकावट जारी रखने के लिए यह फंड दिया गया। • लक्ष्य आधारित क्लोजर: कई दीर्घकालिक परियोजनाएं अपने अंतिम चरण में थीं, जिनका निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वित्तीय और प्रशासनिक क्लोजर दर्ज किया गया। 14 परियोजनाओं के पूरा होने से 45.48 करोड़ रुपये की योजनाओं का वास्तविक लाभ अब जनता तक पहुंचेगा। सवाल-जवाब 1. पूर्वोत्तर परिषद ने सितंबर 2026 में कुल कितनी राशि जारी की? पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) ने सितंबर 2026 में पूर्वोत्तर क्षेत्र की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए कुल 42.63 करोड़ रुपये जारी किए। 2. राज्यों में सबसे अधिक फंड किस राज्य को मिला और किस काम के लिए? सबसे बड़ा हिस्सा नगालैंड को 11.92 करोड़ रुपये मिला, जो कॉफी वैल्यू चेन विकास परियोजना और फुटसेरोमी गांव में सांस्कृतिक परिसर के निर्माण के लिए है। 3. सितंबर महीने में कुल कितने करोड़ रुपये की योजनाएं पूरी हुई हैं? महीने के दौरान 45.48 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 14 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा और बंद किया गया। 4. मेघालय में कौन से प्रमुख निर्माण कार्य पूरे किए गए हैं? मेघालय में मावथाद्राइशन में 4.75 करोड़ रुपये के स्कूल भवन और शिलांग में 9.28 करोड़ रुपये का सेंग खासी री रैद लबान सांस्कृतिक परिसर पूरा हुआ है। 5. क्षेत्रीय संस्थानों को कितने करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं? क्षेत्रीय संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों के लिए 7.42 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें एनईसीबीडीसी, एनईएचएचडीसी और एनईसीटीएआर शामिल हैं। https://trendkia.com/meghalaya/northeast-rajyon-ke-vikasa-karyon-ke-lie-42-63-karora-rupaye-ka-avntana-14-yojanaen-puri-43834 TrendKia — Har trend, sabse pehle.