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  "type": "article",
  "title": "शिलांग में पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारी पर मारपीट का आरोप, पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की मांग",
  "summary": "मेघालय के एक व्यक्ति ने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी पर पूछताछ के दौरान शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। वकील के माध्यम से नोंगम्यंसोंग पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है।",
  "content": "शिलांग के एक स्थानीय निवासी ने प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर में पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान एक जांच अधिकारी द्वारा मारपीट किए जाने का दावा किया है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस थाने का दरवाजा खटखटाया गया है ताकि कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके। यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब पीड़ित को आधिकारिक समन मिलने के बाद पूछताछ के सिलसिले में पेश होना पड़ा था।\n\n \n\nसमन पर पेशी और जांच में सहयोग\n\nमिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा प्रकरण शंसलस्टोन संगमा से जुड़ा हुआ है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था जिसके तहत वह निर्धारित तिथि 27 अगस्त को पेश हुए थे। उनके कानूनी प्रतिनिधि एडवोकेट निक्सरांग सी. मारक की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में यह स्पष्ट किया गया है कि उनके मु मुवक्किल ने जांच प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह से सहयोग किया था और किसी भी स्तर पर कोई बाधा उत्पन्न नहीं की थी।\n\n \n\nमारपीट और चोटों के आरोप\n\nशिकायत पत्र में मुख्य रूप से शेखर कुमार नामक ईडी के जांच अधिकारी या आधिकारिक कर्मी पर बल प्रयोग करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। एडवोकेट निक्सरांग सी. मारक ने अपने आवेदन में बताया है कि जब पूछताछ चल रही थी तब शंसलस्टोन संगमा की तरफ से कोई भी प्रतिरोध या रुकावट नहीं डाली जा रही थी, इसलिए बल का इस्तेमाल पूरी तरह से अनावश्यक और अनुचित था। इस कथित घटना के बाद पीड़ित को अपने हाथ और बांह के हिस्से में गंभीर दर्द, सूजन और चोट का सामना करना पड़ा।\n\n \n\nअस्पताल में मेडिकल जांच\n\nघटना के तुरंत बाद पीड़ित को चिकित्सीय परीक्षण और उपचार के वास्ते सिविल अस्पताल, शिलांग ले जाया गया था। वकील ने पुलिस से आग्रह किया है कि इस पूरी घटना की जांच को आगे बढ़ाने के लिए सिविल अस्पताल से मेडिकल रिकॉर्ड, चोट की रिपोर्ट, डॉक्टर के पर्चे और अन्य संबंधित दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया जाए ताकि आरोपों की पुष्टि हो सके।\n\n \n\nसीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग\n\nशिकायत में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज को तत्काल प्रभाव से संरक्षित किया जाए ताकि कोई साक्ष्य नष्ट न हो सके। वकील के अनुसार, संबंधित कमरे, गलियारे, आने-जाने के रास्तों और आसपास के परिसरों के रिकॉर्डिंग इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकते हैं। पुलिस से यह भी अनुरोध किया गया है कि सर्वर और बैकअप डेटा सहित मूल सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए ताकि फुटेज को मिटाने, बदलने या नष्ट करने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके।\n\n \n\nअन्य कर्मचारियों की पहचान और कानूनी कार्रवाई की मांग\n\nशिकायत में यह भी मांग की गई है कि घटना के समय या उसके आसपास मौजूद अन्य ईडी अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों की पहचान कर उनसे पूछताछ की जाए। एडवोकेट निक्सरांग सी. मारक का तर्क है कि उनके मुवक्किल द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों से प्रथम दृष्ट्या भारतीय न्याय संहिता, 2023 और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत संज्ञीय अपराध बनता है। हालांकि, विशिष्ट धाराओं और अपराधों का निर्धारण करने का कार्य पुलिस के जांच अधिकारी पर छोड़ा गया है जो मेडिकल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और बयानों के आधार पर तय होगा।\n\n शिकायतकर्ता के वकील ने पुलिस से तुरंत एफआईआर दर्ज करने, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को बचाने और आरोपी अधिकारी से पूछताछ करने की अपील की है। इसके साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और शिकायत की प्राप्ति रसीद तथा एफआईआर की कॉपी देने का आग्रह भी किया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह मामला सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली, पूछताछ के दौरान नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करता है।\n\n• भारत में: यह घटना केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यशैली और पूछताछ के दौरान पारदर्शिता तथा मानवाधिकारों के पालन पर व्यापक बहस को जन्म देती है। इससे नागरिकों को पूछताछ के दौरान कानूनी सहायता और मेडिकल जांच के अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता महसूस होती है।\n\n• शिलांग में: स्थानीय नागरिकों और कानूनी बिरादरी के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि क्या राज्य में केंद्रीय एजेंसियों की कार्यवाहियों की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए। इस मामले की आगे की जांच और सीसीटीवी फुटेज के संरक्षण से स्थानीय स्तर पर प्रशासन और सुरक्षा बलों के कामकाज पर जनता की नजरें टिक गई हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह मामला किस शहर से जुड़ा है?\nयह मामला मेघालय के शिलांग शहर का है।\n\n2. शिकायतकर्ता का नाम क्या है?\nशिकायतकर्ता का नाम शंसलस्टोन संगमा है।\n\n3. किस एजेंसी और अधिकारी पर आरोप लगाया गया है?\nप्रवर्तन निदेशालय के जांच अधिकारी शेखर कुमार पर मारपीट का आरोप लगाया गया है।\n\n4. शिकायत किस पुलिस थाने में दर्ज कराई गई है?\nयह शिकायत नोंगम्यंसोंग पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए दी गई है।\n\n5. पीड़ित को किस अस्पताल में ले जाया गया था?\nचोटों के इलाज और परीक्षण के लिए पीड़ित को सिविल अस्पताल, शिलांग ले जाया गया था।\n\n6. शिकायतकर्ता के वकील का नाम क्या है?\nशिकायतकर्ता के वकील का नाम एडवोकेट निक्सरांग सी. मारक है।\n\n7. शिकायत में मुख्य रूप से क्या मांग की गई है?\nशिकायत में एफआईआर दर्ज करने, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और मेडिकल रिकॉर्ड प्राप्त करने की मांग की गई है।\n\n8. क्या इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हुई है?\nनहीं, शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।",
  "url": "https://trendkia.com/meghalaya/shilanga-men-puchhatachha-ke-daurana-ed-adhikari-para-marapita-ka-aropa-pulisa-men-fir-darja-karane-ki-manga-25245",
  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-08-31",
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    "शिलांग समाचार",
    "ईडी पूछताछ",
    "मेघालय पुलिस",
    "मारपीट का आरोप",
    "भारतीय न्याय संहिता"
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  "site": "TrendKia"
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