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  "type": "article",
  "title": "शिलॉन्ग के मेडिकल कॉलेज में आर्थिक संकट, अभिभावकों ने मांगी सरकार से मदद",
  "summary": "शिलॉन्ग के पी.ए. संगमा इंटरनेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीआईएमसी) में 2026 बैच के एमबीबीएस छात्रों के अभिभावकों ने मेघालय सरकार से आर्थिक मदद मांगी है, क्योंकि कॉलेज की बैंक किस्तें अटकने और स्टाफ की सैलरी में देरी होने की बात सामने आई है।",
  "content": "शिलॉन्ग की पी.ए. संगमा इंटरनेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीआईएमसी) में 2026 बैच की एमबीबीएस सीटें राज्य कोटे से हासिल करने वाले छात्रों के अभिभावकों ने मेघालय सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा है कि कॉलेज की आर्थिक तंगी उनके बच्चों की पढ़ाई और क्लिनिकल ट्रेनिंग पर भारी पड़ सकती है।\n\nस्वास्थ्य विभाग को भेजा ज्ञापन\nअभिभावकों ने अपनी चिंताएं मेघालय सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में आयुक्त एवं सचिव डॉ. जोराम बेदा को भेजे एक ज्ञापन में दर्ज कराई हैं। उन्होंने लिखा कि दाखिले की प्रक्रिया के दौरान वे खुद पीआईएमसी परिसर गए थे, जहां उन्होंने सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल, क्लिनिकल विभागों, हॉस्टल भवनों और अन्य शैक्षणिक व स्वास्थ्य ढांचे पर चल रहा निर्माण कार्य अपनी आंखों से देखा।\n\nचांसलर से मुलाकात में सामने आई असली तस्वीर\nउसी दौरे पर कॉलेज के चांसलर और वरिष्ठ अधिकारियों से हुई बातचीत में अभिभावकों को अंदाजा हुआ कि संस्थान किस कदर गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अपने ढांचे को पूरा करने तथा चालू रखने के लिए उसे बाहरी मदद की कितनी सख्त जरूरत है। अस्पताल के वार्ड से लेकर विशेष विभागों तक, यही सुविधाएं मेडिकल डिग्री के लिए जरूरी हाथों-हाथ क्लिनिकल ट्रेनिंग की रीढ़ हैं, और इनके निर्माण में देरी सीधे छात्रों की ट्रेनिंग की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है।\n\nबैंक किस्तें अटकीं, वेतन में देरी\nज्ञापन के मुताबिक पीआईएमसी ने अपने कैंपस के विकास में बड़ी रकम खर्च की है और इसके लिए बैंकों से भारी कर्ज के साथ-साथ कई और वित्तीय जिम्मेदारियां भी ले रखी हैं। अभिभावकों का कहना है कि यही कर्ज अब कॉलेज पर भारी पड़ रहा है, कई महीनों से बैंक की किस्तें चुकाने में दिक्कत आ रही है और स्टाफ की सैलरी देने में भी देरी हो रही है।\n\nइसके बावजूद अभिभावकों ने साफ किया कि वे पीआईएमसी को मेघालय और पूरे नॉर्थईस्ट के छात्रों के लिए एक ऐसा मेडिकल कॉलेज बनाने के मकसद के साथ हैं, जो अच्छी पढ़ाई, एडवांस क्लिनिकल एक्सपोजर और आधुनिक अस्पताल सुविधाएं मुहैया कराए। उनकी चिंता सिर्फ इतनी है कि पैसों की यह किल्लत कहीं दाखिले के वक्त किए गए वही वादे अधूरे न छोड़ दे।\n\nहमें बस अपने बच्चों के भविष्य की फिक्र है\nज्ञापन में अभिभावकों ने लिखा, \"हमारी पहली चिंता अपने बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, क्लिनिकल ट्रेनिंग और भविष्य को लेकर है।\" उन्होंने बताया कि उनके बच्चे एक आधुनिक और पूरी तरह सुसज्जित कैंपस में पढ़ाई की उम्मीद लेकर पीआईएमसी में दाखिल हुए थे, और अपील की कि मौजूदा आर्थिक संकट की वजह से न तो पढ़ाई प्रभावित हो, न क्लिनिकल ट्रेनिंग रुके और न ही जरूरी सुविधाओं तक पहुंच में कोई कमी आए।\n\nसरकार से क्या मांग रखी\nपढ़ाई बचाने के अलावा अभिभावकों ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि कॉलेज की आर्थिक मुश्किलों का ठीकरा छात्रों या उनके परिवारों पर न फूटे, यानी उन्हें पहले से तय फीस के ऊपर कोई अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े। उन्होंने मेघालय सरकार से अपील की कि पीआईएमसी को इतनी वित्तीय मदद दी जाए कि वह अपनी तात्कालिक देनदारियां चुका सके, बचा हुआ निर्माण कार्य पूरा कर सके और मेडिकल शिक्षा व क्लिनिकल ट्रेनिंग का स्तर बनाए रख सके। ज्ञापन में उस वित्तीय सहायता का भी हवाला दिया गया, जो शुरुआत में पीआईएमसी को देने की बात कही गई थी, और मांग की गई कि उसे बिना देरी जारी किया जाए।\n\n2026 बैच के भविष्य पर टिका दांव\nअभिभावकों का कहना है कि सरकार अभी कितनी तेजी से कदम उठाती है, इसी पर तय होगा कि पीआईएमसी बतौर संस्थान टिका रहता है या नहीं, और साथ ही यह भी कि 2026 बैच में दाखिला ले चुके छात्रों को वही क्लिनिकल ट्रेनिंग और करियर की बुनियाद मिलती है या नहीं, जिसकी उम्मीद लेकर वे यहां आए थे। उन्होंने पीआईएमसी को दी जाने वाली सरकारी मदद को घाटे का सौदा नहीं बल्कि मेघालय और पूरे नॉर्थईस्ट में मेडिकल शिक्षा व स्वास्थ्य ढांचे में किया गया निवेश बताया।\n\nइसका आप पर असर\nअगर मेघालय सरकार ने जल्दी कदम नहीं उठाया, तो सबसे पहले असर पीआईएमसी में पढ़ रहे छात्रों पर ही पड़ेगा, चाहे वह पढ़ाई में देरी हो, अधूरी क्लिनिकल सुविधाएं हों या अचानक फीस का बोझ।\n\n• देशभर में: यह मामला निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने से पहले सिर्फ ब्रोशर नहीं बल्कि संस्थान की आर्थिक सेहत भी जांचने की याद दिलाता है। जो कॉलेज अपनी बैंक किस्तें तक नहीं चुका पा रहा, वह तय समय पर क्लिनिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरा करने में भी पिछड़ सकता है।\n• मेघालय में: शिलॉन्ग के पीआईएमसी में दाखिला ले चुके 2026 बैच के एमबीबीएस छात्रों के लिए सरकारी मदद ही तय करेगी कि उनका हॉस्टल, सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल और क्लिनिकल विभाग समय पर तैयार होंगे या नहीं। अभिभावकों ने साफ मांग की है कि कॉलेज की कर्ज या सैलरी की दिक्कत की वजह से परिवारों पर कोई अतिरिक्त फीस न थोपी जाए।\n• स्टाफ के लिए: ज्ञापन में सैलरी में देरी का जिक्र पहले ही किया जा चुका है, समय पर फंडिंग मिलने से फैकल्टी और स्टाफ का बकाया वेतन जल्द निपट सकता है।\n• भावी छात्रों के लिए: पीआईएमसी या इस तरह के दूसरे संस्थानों में दाखिले पर विचार कर रहे लोगों को यह देखना चाहिए कि सरकार कैसे जवाब देती है, क्योंकि इससे पता चलेगा कि कॉलेज की विस्तार योजनाएं आगे भी आर्थिक रूप से टिकाऊ हैं या नहीं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पीआईएमसी क्या है और यह कहां स्थित है?\nपी.ए. संगमा इंटरनेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीआईएमसी) शिलॉन्ग, मेघालय में स्थित एक मेडिकल कॉलेज है, जहां 2026 बैच के एमबीबीएस छात्र राज्य कोटे से दाखिल हुए हैं।\n\n2. अभिभावकों ने ज्ञापन किसे भेजा?\nअभिभावकों ने यह ज्ञापन मेघालय सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में आयुक्त एवं सचिव डॉ. जोराम बेदा को भेजा है।\n\n3. कॉलेज की आर्थिक दिक्कत की मुख्य वजह क्या बताई गई है?\nज्ञापन के मुताबिक कॉलेज ने अपने ढांचे के लिए बैंकों से भारी कर्ज लिया, जिसकी किस्तें चुकाने में अब दिक्कत आ रही है और स्टाफ की सैलरी में भी देरी हो रही है।\n\n4. अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?\nअभिभावकों ने कहा है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, क्लिनिकल ट्रेनिंग और भविष्य को लेकर है।\n\n5. अभिभावक सरकार से क्या मांग रहे हैं?\nवे चाहते हैं कि सरकार पीआईएमसी को वित्तीय मदद दे ताकि कॉलेज अपनी देनदारियां चुका सके, निर्माण पूरा कर सके और छात्रों पर कोई अतिरिक्त फीस का बोझ न पड़े।\n\n6. क्या छात्रों से अतिरिक्त फीस मांगी जा रही है?\nज्ञापन में सीधे तौर पर ऐसा नहीं कहा गया, लेकिन अभिभावकों ने एहतियातन मांग की है कि कॉलेज की आर्थिक दिक्कतों की वजह से उन्हें तय फीस से ज्यादा कुछ न देना पड़े।\n\n7. इस मामले में 2026 बैच के छात्रों पर क्या असर पड़ सकता है?\nअगर सरकार समय पर मदद नहीं करती, तो इन छात्रों की क्लिनिकल ट्रेनिंग, हॉस्टल और अन्य सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे उनका करियर भी प्रभावित हो सकता है।",
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  "category": "मेघालय",
  "publishedAt": "2026-09-06",
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