शिलांग में 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना दिवस का भव्य समारोह मेघालय लोक भवन में मंगलवार को आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश भर के 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस मनाया गया। इस मौके पर राज्यपाल सी एच विजयशंकर ने समावेशी विकास और एकजुटता पर जोर दिया। शिलांग स्थित मेघालय लोक भवन में मंगलवार को एक विशेष समारोह आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों की ऐतिहासिक यात्रा और विविधता का उत्सव मनाना था। इस आयोजन के दौरान 16 अलग-अलग राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना दिवस को एक साझा मंच पर सम्मानित किया गया। समारोह में राष्ट्र निर्माण के भीतर सभी क्षेत्रों की विशिष्ट भूमिका और साझी सांस्कृतिक विरासत पर विशेष प्रकाश डाला गया। राष्ट्रीय यात्रा और जन आकांक्षाओं का सम्मान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेघालय के राज्यपाल सी एच विजयशंकर ने प्रत्येक प्रांत के अस्तित्व में आने के ऐतिहासिक महत्व की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश का गठन देश की प्रगतिशील यात्रा में एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव को दर्शाता है, जिसे वहां के नागरिकों की उम्मीदों और पीढ़ियों की मेहनत ने आकार दिया है। राज्यपाल ने इस बात पर खास बल दिया कि विकास की रफ्तार ऐसी होनी चाहिए जिसका सीधा फायदा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने रेखांकित किया कि बुनियादी ढांचे के विस्तार, ग्रामीण जनता के कल्याण, बेहतर रोजगार निर्माण, सुलभ चिकित्सा सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर लगातार ध्यान केंद्रित किया जाना जरूरी है। उनके अनुसार जब तक प्रत्येक क्षेत्र आगे नहीं बढ़ेगा, तब तक पूरे देश का समग्र विकास संभव नहीं हो सकता। उन्होंने विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी क्षेत्रों के बीच मजबूत सहयोग और साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता बताई। आर्थिक योगदान और समृद्ध परंपराओं की झलक समारोह के दौरान तमिलनाडु के राज्यपाल का एक विशेष वीडियो संदेश भी प्रस्तुत किया गया। अपने वक्तव्य में उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि राष्ट्रीय जीडीपी में तमिलनाडु का योगदान लगभग 9.4 प्रतिशत है। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि बीते वर्ष जीएसटी संग्रह के मामले में तमिलनाडु देश का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता राज्य रहा। इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह को देश की विविध कला शैलियों से परिचित कराया। मंच पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु की समृद्ध लोक परंपराओं, नृत्यों और संगीत की शानदार प्रस्तुतियां दी गईं। समारोह में शामिल सभी क्षेत्र इस बड़े आयोजन में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना दिवस को शामिल किया गया, उनमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु शामिल रहे। इसके अलावा केंद्र शासित क्षेत्रों के तौर पर दिल्ली, चंडीगढ़, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लद्दाख तथा जम्मू और कश्मीर के स्थापना दिवस का भी इस साझा उत्सव में औपचारिक रूप से सम्मान किया गया। इसका आप पर असर इस तरह के आयोजनों से विभिन्न प्रांतों के बीच प्रशासनिक समन्वय और सांस्कृतिक संवाद को गति मिलती है। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान से देश की विविधता और एकता को मजबूती मिलती है। नागरिकों और संस्थाओं के बीच साझा विकास प्राथमिकताओं को लेकर समझ बेहतर होती है। • मेघालय में: पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस प्रकार के राष्ट्रीय समारोहों के आयोजन से स्थानीय जनता को अन्य राज्यों की कला और अर्थव्यवस्था को करीब से जानने का मौका मिलता है। इसके साथ ही शिलांग जैसे प्रमुख प्रशासनिक केंद्र की राष्ट्रीय पहचान और सशक्त होती है। • नागरिकों और कलाकारों के लिए: विभिन्न प्रांतों के लोक कलाकारों को अपनी पारंपरिक विरासत नए मंचों पर प्रदर्शित करने का सुअवसर प्राप्त होता है। इससे पर्यटन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक सहयोग के नए रास्ते भी खुलते हैं। • आर्थिक परिप्रेक्ष्य: राज्यों के बीच वित्तीय योगदान और जीएसटी जैसे विषयों पर संवाद से विकास योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ती है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और जन कल्याण पर होने वाले खर्च की अहमियत समझ आती है। ऐसा क्यों हुआ यह समारोह भारत के संघीय ढांचे के तहत राज्यों की पहचान और उनके ऐतिहासिक गठन को एक साथ रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। • स्थापना दिवसों का ऐतिहासिक संयोग: कई भारतीय राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों का पुनर्गठन या गठन वर्ष के समान समय के आसपास हुआ था। इसी वजह से एक साझा कार्यक्रम के जरिए कई क्षेत्रों के इतिहास का स्मरण किया गया। • सहकारी संघवाद को बढ़ावा: केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए राजभवनों में अन्य राज्यों के स्थापना दिवस मनाने की पहल की गई है। यह कदम विभिन्न प्रांतों के निवासियों के बीच आत्मीयता बढ़ाने के लिए उठाया गया। • सांस्कृतिक संवाद की आवश्यकता: भौगोलिक दूरी कम करने और विविधता का सम्मान करने के लिए पारंपरिक कलाओं का सीधा प्रदर्शन कराया गया। इससे पूर्वोत्तर और शेष भारत के बीच सांस्कृतिक संबंध और प्रगाढ़ होते हैं। सवाल-जवाब 1. मेघालय में यह सांस्कृतिक कार्यक्रम कहां और कब आयोजित हुआ? यह कार्यक्रम मंगलवार को शिलांग स्थित मेघालय लोक भवन में आयोजित किया गया। 2. इस समारोह में कितने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस मनाया गया? इस आयोजन के तहत कुल 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना दिवस को सम्मानित किया गया। 3. मेघालय के राज्यपाल सी एच विजयशंकर ने अपने संबोधन में किस बात पर जोर दिया? उन्होंने कहा कि विकास का लाभ सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व ग्रामीण कल्याण पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है। 4. तमिलनाडु के राज्यपाल के वीडियो संदेश में किस आर्थिक आंकड़े का जिक्र किया गया? उनके संदेश में बताया गया कि तमिलनाडु राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 9.4 प्रतिशत योगदान देता है और वह देश का दूसरा सबसे बड़ा जीएसटी दाता रहा। 5. कार्यक्रम में किन राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं? मंच पर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु तथा जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक प्रस्तुतियां दी गईं। https://trendkia.com/meghalaya/shillong-men-16-rajyon-aura-kendra-shasita-pradeshon-ke-sthapana-divasa-ka-bhavya-samaroha-56438 TrendKia — Har trend, sabse pehle.