# शिलांग पथराव में यात्रियों को बचाने वाले बस चालक और कंडक्टर को मेघालय सरकार ने किया सम्मानित

> शिलांग में 19 अगस्त को बस पर हुए पथराव के दौरान सूझबूझ दिखाकर यात्रियों की जान बचाने वाले चालक और कंडक्टर को मेघालय सरकार ने 10-10 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया।

**Type:** article · **Category:** मेघालय · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/meghalaya/shillong-patharava-men-yatriyon-ko-bachane-vale-basa-chalaka-aura-kndaktara-ko-meghalaya-sarakara-ne-kiya-sammanita-20118 · **Language:** Hindi
**Tags:** शिलांग, मेघालय, बस चालक सम्मान, सार्वजनिक परिवहन, सड़क सुरक्षा, फुलमूनवेल लिंगदोह

शिलांग में एक हिंसक घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले दो सार्वजनिक परिवहन कर्मियों को मेघालय सरकार ने सम्मानित किया है। राज्य के शहरी मामलों के विभाग ने बस चालक फुलमूनवेल लिंगदोह और कंडक्टर बनमनभा मारवीन की त्वरित सूझबूझ और अदम्य साहस के लिए उन्हें 10-10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

## उपद्रव के बीच सूझबूझ का परिचय
यह मामला 19 अगस्त की शाम लगभग 6 बजे का है, जब _का बोस जंग गी_ नाम की एक इलेक्ट्रिक बस एयर फोर्स से आईआईएम की ओर जा रही थी। जैसे ही बस नोंगमेनसोंग इलाके के वाहकदियात पहुंची, वहां केएसयू द्वारा निकाली जा रही एक काले झंडे वाली बाइक रैली से उसका सामना हो गया। इसी दौरान कुछ उपद्रवियों ने अचानक बस पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे वाहन का अगला शीशा टूट गया और सवारियों की जान पर बन आई।

## यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाए त्वरित कदम
अचानक पैदा हुए खतरे को देखते हुए कंडक्टर बनमनभा मारवीन ने तुरंत सभी यात्रियों को झुककर नीचे छिपने का निर्देश दिया। वहीं दूसरी ओर चालक फुलमूनवेल लिंगदोह ने विपरीत परिस्थितियों में अपना संतुलन नहीं खोया। उन्होंने बस पर नियंत्रण बनाए रखा और वाहन को सुरक्षित रूप से उपद्रव वाले क्षेत्र से बाहर निकाल लिया। चालक और कंडक्टर की इस सूझबूझ के चलते बस में सवार किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई।

## शासकीय सम्मान और भावी प्रशिक्षण की योजना
आपातकालीन परिस्थिति में कर्मचारियों के इस अनुकरणीय आचरण की सराहना करते हुए शहरी मामलों के विभाग की सचिव वानरिलिन एएम बूथ ने कहा कि संकट के समय चालक और कंडक्टर ने खुद की परवाह किए बिना यात्रियों की जान बचाई। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन पर हमला किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार अपने कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी है।

इस अभिनंदन समारोह में उप सचिव सलोनी वर्मा, मुडा सचिव सैनप्यनियर एस सीमलीह और शहरी मामलों के निदेशक पी. क्र. बोरो ने भी दोनों कर्मियों के अदम्य साहस की सराहना की। सीमलीह ने जानकारी दी कि रैली को देखते हुए उस मार्ग पर पहले ही बसों की आवाजाही कम कर दी गई थी। उन्होंने भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के सहयोग से चालक दल को विशेष प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव भी रखा।

## चालक और कंडक्टर ने साझा किया अनुभव
उस डरावने मंजर को याद करते हुए चालक फुलमूनवेल लिंगदोह ने बताया कि बाइक सवारों को रास्ता देने के लिए उन्होंने बस की रफ्तार धीमी की थी, लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए। उन्होंने तुरंत यात्रियों को नीचे झुकने को कहा और बस को सुरक्षित स्थान पर ले गए। वहीं कंडक्टर बनमनभा मारवीन ने कहा कि पथराव के बाद भी वे शांत रहे और उनका पूरा ध्यान बस रुकने तक हर यात्री को सुरक्षित रखने पर ही केंद्रित था।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** सार्वजनिक परिवहन कर्मचारियों द्वारा आपात स्थितियों में दिखाई गई सतर्कता और साहस अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल पेश करता है।
- **मेघालय में:** इस घटना के बाद सार्वजनिक बसों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चालकों और कंडक्टरों को विशेष आपातकालीन प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. मेघालय सरकार ने बस चालक और कंडक्टर को क्यों सम्मानित किया?
19 अगस्त को शिलांग में एक बस पर हुए पथराव के दौरान यात्रियों को सुरक्षित बचाने और सूझबूझ दिखाने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।

### 2. सम्मानित होने वाले चालक और कंडक्टर के नाम क्या हैं?
चालक का नाम फुलमूनवेल लिंगदोह और कंडक्टर का नाम बनमनभा मारवीन है।

### 3. चालक और कंडक्टर को पुरस्कार में क्या मिला?
मेघालय सरकार के शहरी मामलों के विभाग ने दोनों कर्मियों को 10,000-10,000 रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

### 4. घटना के समय बस किस मार्ग पर चल रही थी?
इलेक्ट्रिक बस 'का बोस जंग गी' एयर फोर्स से आईआईएम की ओर जा रही थी जब वाहकदियात, नोंगमेनसोंग में उस पर पथराव हुआ।

## प्रेरणा और सबक
**प्रेरणा और सबक:**

- **खुद से पहले दूसरों की सुरक्षा:** संकट के पलों में अपनी जान की चिंता किए बिना दूसरों की रक्षा करना सच्चे कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण है।
- **दबाव में धैर्य और शांति:** विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय शांत रहकर त्वरित और सही निर्णय लेना बड़ी जान-माल की हानि को टाल सकता है।
- **कर्तव्य का सम्मान:** ईमानदारी और बहादुरी से किए गए कार्य को हमेशा समाज और प्रशासन का प्रोत्साहन मिलता है।

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