# शिलांग पीक रोपवे विवाद: वीपीपी ने मेघालय सरकार को दी अवमानना याचिका की चेतावनी

> मेघालय में लूम शिलांग रोपवे परियोजना को लेकर तनाव बढ़ गया है, जहाँ वीपीपी ने अदालत के आदेश के कथित उल्लंघन पर सरकारी विभागों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी है।

**Type:** article · **Category:** मेघालय · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/meghalaya/shillong-peak-ropeway-vivada-vpp-ne-meghalaya-sarakara-ko-di-avamanana-yachika-ki-chetavani-53853 · **Language:** Hindi
**Tags:** शिलांग पीक रोपवे, वीपीपी, मेघालय सरकार, केएचएडीसी, आर्डेंट मिलर बसाइयावमोइत, लूम शिलांग, मेघालय राजनीति

मेघालय में लूम शिलांग स्थित शिलांग पीक रोपवे परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध गहरा गया है। वॉयस ऑफ द पीपुल पार्टी यानी वीपीपी ने शुक्रवार को मेघालय सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस विवादित परियोजना को मौजूदा स्थान से रद्द नहीं किया गया, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी का रुख है कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी कर काम आगे बढ़ा रहा है, जो सीधे तौर पर अदालत की अवमानना का मामला बनता है।

## सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी का आरोप
वीपीपी के अध्यक्ष आर्डेंट मिलर बसाइयावमोइत ने स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी को उम्मीद थी कि सरकार स्थानीय नागरिकों की मांगों और विरोध को गंभीरता से सुनेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी लंबे समय से इस बात का इंतजार कर रही थी कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए काम रोकेगी, लेकिन राज्य प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा नजर आ रहा है।

आर्डेंट मिलर बसाइयावमोइत ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि रुख नहीं बदला, तो उनकी पार्टी परियोजना से जुड़े सभी संबंधित विभागों के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि इस कानूनी कार्रवाई में मुख्य रूप से पर्यटन विभाग निशाने पर रहेगा, जो इस परियोजना को आगे बढ़ाने में सबसे आगे है।

## पर्यटन, वन विभाग और स्थानीय नेतृत्व पर सवाल
वीपीपी प्रमुख ने सभी संबंधित सरकारी विभागों से अपील की है कि वे इस कानूनी चेतावनी को हल्के में न लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि लूम शिलांग में चल रहे निर्माण कार्य को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए और स्थानीय निवासियों की मांग के अनुरूप इस रोपवे परियोजना को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

बसाइयावमोइत ने पर्यटन विभाग के साथ-साथ वन विभाग और रियात लाबान के नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि ये सभी शीर्ष अदालत के आदेशों की अवहेलना करने के दोषी प्रतीत होते हैं। उन्होंने लाबान पिल्लुन के उन निवासियों का खुला समर्थन किया जो जॉइंट एक्शन कमेटी यानी जेएसी के बैनर तले इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वीपीपी प्रदर्शनकारियों के इस रुख के साथ मजबूती से खड़ी है कि रोपवे को ऐसी जगह बनाया जाना चाहिए जहाँ जनता को वास्तव में इस प्रकार की सुविधा की आवश्यकता हो। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय आबादी की जायज चिंताओं के प्रति सरकार की संवेदनहीनता की भी आलोचना की।

## केएचएडीसी अधिकारी पर एफआईआर को बताया बेतुका
विवाद उस समय और भड़क गया जब सरकार ने खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल यानी केएचएडीसी के प्रवर्तन अधिकारी कोरडोर सिनरेम के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। कोरडोर सिनरेम ने मादन लाबान स्थित लोअर टर्मिनल स्थल को सील कर दिया था। वीपीपी अध्यक्ष ने सरकारी अमले द्वारा दर्ज इस एफआईआर को पूरी तरह से बेतुका करार दिया।

उन्होंने कहा कि सिनरेम केवल अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन कर रहे थे और परिषद के नियमों को लागू करवा रहे थे। बसाइयावमोइत ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि पर्यटन या अन्य संबंधित विभाग में कानूनी कार्रवाई करने का साहस था, तो उन्हें सीधे स्वायत्त जिला परिषद की कार्यकारी समिति को नामजद करना चाहिए था, जिसका नेतृत्व वर्तमान में वीपीपी कर रही है।

## वन प्रबंधन कानून के प्रावधानों का हवाला
कानूनी स्थिति की व्याख्या करते हुए वीपीपी अध्यक्ष ने संबंधित विभाग को वन कानूनों का गहराई से अध्ययन करने की नसीहत दी। उन्होंने यूनाइटेड खासी जयंतिया हिल्स डिस्ट्रिक्ट मैनेजमेंट एंड कंट्रोल ऑफ फॉरेस्ट एक्ट, 1958 के वैधानिक प्रावधानों का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत रायद वनों की देखरेख और प्रबंधन रायद के प्रमुखों द्वारा स्थानीय प्रशासनिक प्रमुखों के अधीन किया जाता है। इसके अलावा, यह पूरी व्यवस्था जिला परिषद की कार्यकारी समिति द्वारा तैयार किए गए नियमों और विनियमों के दायरे में आती है। ऐसे में स्वायत्त परिषद के अधिकारों को नजरअंदाज कर किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना कानूनन गलत है।

## इसका आप पर असर
इस विवाद से स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन, पर्यटन विकास और स्थानीय स्वायत्तता के अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **भारत में:** यह मामला देश भर में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय स्वायत्त परिषदों के अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रियान्वयन के बीच संतुलन को रेखांकित करता है। राज्य सरकारों और स्वायत्त निकायों के बीच ऐसे टकराव से कई राष्ट्रीय विकास परियोजनाएं कानूनी पचड़ों में फंस सकती हैं।
- **मेघालय में:** लाबान पिल्लुन और लूम शिलांग के निवासियों के लिए यह विवाद उनके इलाके की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा हुआ है। स्थानीय नागरिक प्रशासन से परियोजना को किसी अन्य जरूरतमंद इलाके में स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं, जबकि काम रुकने से निर्माण और पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हैं।
- **प्रशासनिक असर:** जिला परिषद और राज्य सरकार के विभागों के बीच तकरार बढ़ने से विकास कार्यों की स्वीकृतियों पर अनिश्चितता बढ़ गई है। अधिकारियों पर पुलिस कार्रवाई और अदालती अवमानना की धमकियों से नौकरशाही स्तर पर भी असमंजस की स्थिति बन रही है।
- **कानूनी परिणाम:** यदि वीपीपी अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करती है, तो पर्यटन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कानूनी जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है। इससे पूरी परियोजना पर दीर्घकालिक अदालती रोक लगने की संभावना बढ़ जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों की अनदेखी करने के आरोपों और स्थानीय जनजातीय परिषद के प्रशासनिक अधिकारों की अवहेलना से उत्पन्न हुआ है।

- **सीधा कारण:** लूम शिलांग में प्रस्तावित रोपवे परियोजना को स्थानीय नागरिकों और वीपीपी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने निर्णय का उल्लंघन माना गया है। राज्य प्रशासन द्वारा जनविरोध के बावजूद परियोजना को रद्द या स्थानांतरित न करने पर वीपीपी ने अवमानना याचिका की चेतावनी दी।
- **केएचएडीसी बनाम पर्यटन विभाग:** खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के प्रवर्तन अधिकारी कोरडोर सिनरेम ने मादन लाबान में लोअर टर्मिनल स्थल को सील कर दिया था। इसके जवाब में पर्यटन विभाग ने अधिकारी पर एफआईआर दर्ज करा दी, जिससे स्वायत्त परिषद और सरकार के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया।
- **वन कानून का दायरा:** यूनाइटेड खासी जयंतिया हिल्स डिस्ट्रिक्ट मैनेजमेंट एंड कंट्रोल ऑफ फॉरेस्ट एक्ट, 1958 के तहत रायद वनों पर जिला परिषद की कार्यकारी समिति और स्थानीय रायद प्रमुखों का अधिकार क्षेत्र है। परिषद के नियमों को दरकिनार कर निर्माण शुरू करने की कोशिशों ने इस गतिरोध को कानूनी रूप दे दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. शिलांग पीक रोपवे परियोजना को लेकर वीपीपी की मुख्य आपत्ति क्या है?
पार्टी का कहना है कि लूम शिलांग में इस रोपवे परियोजना को जारी रखना सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व आदेश की अवहेलना है।

### 2. वीपीपी के अध्यक्ष कौन हैं और उन्होंने क्या चेतावनी दी है?
वीपीपी के अध्यक्ष आर्डेंट मिलर बसाइयावमोइत हैं, और उन्होंने काम न रोकने पर पर्यटन विभाग सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी दी है।

### 3. प्रदर्शनकारी स्थानीय नागरिक क्या मांग कर रहे हैं?
जॉइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले लाबान पिल्लुन के निवासी मांग कर रहे हैं कि इस रोपवे परियोजना को लूम शिलांग से हटाकर किसी ऐसी जगह स्थानांतरित किया जाए जहाँ इसकी वास्तविक आवश्यकता हो।

### 4. केएचएडीसी के प्रवर्तन अधिकारी कोरडोर सिनरेम के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
कोरडोर सिनरेम ने मादन लाबान में रोपवे के लोअर टर्मिनल स्थल को सील कर दिया था, जिसके बाद सरकार ने उनके खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई।

### 5. वीपीपी ने वन कानूनों के संबंध में किस अधिनियम का उल्लेख किया?
वीपीपी ने यूनाइटेड खासी जयंतिया हिल्स डिस्ट्रिक्ट मैनेजमेंट एंड कंट्रोल ऑफ फॉरेस्ट एक्ट, 1958 का हवाला दिया, जो रायद वनों के प्रबंधन का अधिकार स्वायत्त परिषद और रायद प्रमुखों को देता है।

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