शिलांग रैली हिंसा पर मेघालय हाईकोर्ट सख्त, केवल चार केएसयू नेताओं की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल शिलांग में बाइक रैली के दौरान हुई तोड़फोड़ और हिंसा मामले में मेघालय हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने सिर्फ चार केएसयू नेताओं की गिरफ्तारी पर असंतोष जताते हुए 7 सितंबर तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। शिलांग में आयोजित एक बाइक रैली के दौरान भड़की हिंसा और बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़ के मामले में मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि घटना में बड़ी संख्या में उपद्रवियों के शामिल होने के आरोपों के बावजूद अब तक केवल चार खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) नेताओं को ही गिरफ्तार किया गया है। चीफ जस्टिस तेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की पीठ ने एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि हिंसा में शामिल सभी उपद्रवियों की पहचान कर उनकी सटीक भूमिका तय की जाए। जांच के दायरे और गति पर हाईकोर्ट के तीखे सवाल बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने जांच की सुस्त रफ्तार और उसके सीमित दायरे पर चिंता प्रकट की। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नागरिकों पर हमला करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। पुलिस ने पीठ को सूचित किया कि इस पूरी घटना के संबंध में विभिन्न थानों में कुल 22 एफआईआर दर्ज की गई हैं। हालांकि, गिरफ्तारियां केवल चार लोगों तक सीमित रहने पर अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और सभी दोषियों के खिलाफ समान रूप से कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। 22 एफआईआर और जुटाये जा रहे तकनीकी साक्ष्य मामले की प्रगति की जानकारी देते हुए पुलिस ने अदालत को बताया कि दर्ज 22 मामलों में से 4 एफआईआर शिलांग सदर थाने में, 9 रिंजाह में, 7 मावलाई में तथा 1-1 एफआईआर लैतमुखराह और लुमडिंगजरी पुलिस स्टेशनों में दर्ज की गई हैं। घटना से जुड़े दो वाहनों को भी जब्त किया गया है। इसके अलावा, जांच टीम 8 मोबाइल फोन से मिले डेटा का विश्लेषण कर रही है और 27 अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हिंसा में शामिल अन्य चेहरों की पहचान की जा सके। निवारक उपायों में चूक और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन द्वारा रैली के लिए तय की गई शर्तों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि क्या जुलूस शुरू होने के स्थान से ही इसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी और क्या हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त निवारक कदम उठाए गए थे। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि हमले और संपत्ति के नुकसान की खबरों पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्या थी। इसके साथ ही, पीठ ने भीड़ हिंसा की रोकथाम और जांच से जुड़े तहसीन एस पूनावाला बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर भी स्पष्टीकरण मांगा। 7 सितंबर को शीर्ष पुलिस अधिकारियों की अदालत में पेशी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने विशेष जांच टीम (SIT) का पर्यवेक्षण कर रहे पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को अदालत की टिप्पणियों को ध्यान में रखकर जांच को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने निर्देश दिया है कि 7 सितंबर को आईजीपी, ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक (SP), तथा शिलांग सदर और लुमडिंगजरी थानों के प्रभारी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर हों। अधिकारियों को उस दिन जांच की पूरी प्रगति का ब्योरा देते हुए एक व्यापक स्टेटस रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। इसका आप पर असर यह अदालती कार्रवाई मेघालय में कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ हिंसा पर पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। • भारत में: यह मामला देश भर में भीड़ हिंसा की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (तहसीन पूनावाला केस) के सख्ती से पालन का एक मिसाल पेश करता है। सार्वजनिक रैलियों में होने वाली हिंसा के मामलों में पुलिस जवाबदेही पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। • शिलांग और मेघालय में: स्थानीय निवासियों के लिए व्यापारिक गतिविधियों, सार्वजनिक परिवहन और दैनिक सुरक्षा में सुधार होगा क्योंकि हाईकोर्ट उपद्रवियों पर नकेल कस रहा है। पुलिस प्रशासन को अब 7 सितंबर से पहले सभी दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में देनी होगी। सवाल-जवाब 1. मेघालय हाईकोर्ट ने किस बात पर सवाल उठाया है? अदालत ने सवाल किया है कि शिलांग बाइक रैली हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के बावजूद केवल चार केएसयू नेताओं को ही क्यों गिरफ्तार किया गया है। 2. इस मामले की सुनवाई कौन सी बेंच कर रही है? इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस तेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की खंडपीठ कर रही है। 3. घटना के संबंध में कुल कितनी एफआईआर दर्ज की गई हैं? विभिन्न पुलिस स्टेशनों में कुल 22 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें शिलांग सदर में 4, रिंजाह में 9, मावलाई में 7 और लैतमुखराह व लुमडिंगजरी में 1-1 मामला शामिल है। 4. अदालत ने पुलिस अधिकारियों को कब पेश होने का निर्देश दिया है? हाईकोर्ट ने एसआईटी का पर्यवेक्षण कर रहे आईजीपी, ईस्ट खासी हिल्स के एसपी और संबंधित थाना प्रभारियों को 7 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। https://trendkia.com/meghalaya/shillong-raili-hinsa-para-meghalaya-high-court-sakhta-kevala-chara-ksu-netaon-ki-giraphtari-para-uthae-savala-26964 TrendKia — Har trend, sabse pehle.