शिलांग तोड़फोड़ मामला: हाईकोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के छात्रों ने शुरू की शहर में सफाई शिलांग के एक होमस्टे में तोड़फोड़ करने वाले उत्तर प्रदेश के छात्रों ने मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश पर शहर में सफाई अभियान और सामुदायिक सेवा में हिस्सा लिया है। मेघालय की राजधानी शिलांग में उत्तर प्रदेश के छह छात्रों ने अदालत के निर्देशानुसार सामुदायिक सेवा के तहत एक स्थानीय सफाई अभियान में हिस्सा लिया है। मेघालय उच्च न्यायालय ने एक स्थानीय होमस्टे में तोड़फोड़ करने के मामले में इन छात्रों को यह सामाजिक कार्य करने का आदेश दिया था। कानूनी समझौता और मुआवजे का भुगतान इन छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले को तब सुलझाया गया जब उन्होंने होमस्टे के मालिक के साथ आपसी समझौता कर लिया। इस समझौते के बाद मेघालय उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया। समझौते की शर्तों के अनुसार, छात्रों ने संपत्ति के मालिक को 2.06 लाख रुपये का सामूहिक मुआवजा दिया और अपने इस अनुचित व्यवहार के लिए बिना किसी शर्त के लिखित माफीनामा भी सौंपा। इसके अतिरिक्त, अदालत ने दो छात्रों को आदेश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर होमस्टे मालिक को 25,000-25,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी करें। न्यायालय के निर्देश पर सामुदायिक सेवा की शुरुआत आर्थिक दंड के अलावा, उच्च न्यायालय ने दो छात्रों को छह दिनों की सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया था। यह सेवा 8 सितंबर को शिलांग के लाचुमियर इलाके में स्थित सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा से शुरू हुई थी। इन छात्रों ने अपनी अनिवार्य सेवा के पहले तीन दिन इस धार्मिक संस्थान में सेवा करते हुए पूरे किए। बाकी बचे तीन दिनों की सेवा के लिए, ये छात्र शुक्रवार को जीवा केयर्स के प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप नाम के एक स्थानीय नागरिक अभियान से जुड़ गए। उन्होंने शिलांग के मुख्य बाजार क्षेत्र में सफाई से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। शहर की सफाई और अगली अदालती सुनवाई प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप शहर के विभिन्न हिस्सों में नागरिक स्वच्छता के काम करता है, जिसमें कचरे के डिब्बों का रख-रखाव और फूलों के पौधों की देखभाल शामिल है। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि छात्रों द्वारा सामुदायिक सेवा को संतोषजनक ढंग से पूरा करने की पुष्टि करने वाली एक रिपोर्ट सरकारी वकील के माध्यम से अदालत में पेश की जानी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी, जिसमें अदालत के निर्देशों के पालन की समीक्षा की जाएगी। इसका आप पर असर यह अदालती आदेश पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को रोकने में मदद करेगा और जिम्मेदार नागरिक आचरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। - भारत में: यह मामला देश भर के पर्यटकों और युवाओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि सार्वजनिक या निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर भारी जुर्माना और सामुदायिक सेवा जैसी सजा मिल सकती है। इससे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा मिलेगा। - शिलांग और मेघालय में: स्थानीय प्रशासन और होमस्टे मालिकों के लिए यह आदेश एक राहत की तरह है क्योंकि इससे पर्यटन संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, स्थानीय स्वच्छता अभियानों को भी ऐसे सहयोग से बढ़ावा मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह अदालती कार्रवाई उत्तर प्रदेश के छात्रों द्वारा शिलांग के एक होमस्टे में की गई तोड़फोड़ की घटना के कारण हुई है। संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के बाद छात्रों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। - आपसी समझौता: छात्रों और होमस्टे मालिक के बीच 2.06 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनने के बाद उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी को रद्द करने का फैसला किया। - सुधारात्मक कदम: अदालत ने केवल आर्थिक जुर्माने पर ही नहीं रोका, बल्कि छात्रों में जिम्मेदारी की भावना जगाने के लिए उन्हें छह दिनों की सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया। - स्वच्छता अभियान से जुड़ाव: छात्रों को समाज के प्रति उनके नागरिक कर्तव्यों का अहसास कराने के लिए शिलांग के प्रसिद्ध सिख सेंटर और फिर 'प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप' के साथ जोड़ा गया। सवाल-जवाब 1. उत्तर प्रदेश के छात्रों को शिलांग में सामुदायिक सेवा क्यों करनी पड़ी? छात्रों ने शिलांग के एक होमस्टे में तोड़फोड़ की थी, जिसके बाद मेघालय उच्च न्यायालय ने उन्हें सजा के तौर पर सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया। 2. छात्रों को होमस्टे के मालिक को कितना मुआवजा देना पड़ा? छात्रों ने आपसी समझौते के तहत 2.06 लाख रुपये का मुआवजा दिया, और दो छात्रों को अलग से 25,000-25,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया। 3. छात्रों ने अपनी सामुदायिक सेवा कहां-कहां पूरी की? उन्होंने अपनी सेवा के पहले तीन दिन लाचुमियर के सिख सेंटर में और बाकी तीन दिन जीवा केयर्स के प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप के साथ मिलकर पूरे किए। 4. इस मामले की अगली अदालती सुनवाई कब है? मेघालय उच्च न्यायालय इस मामले में छात्रों द्वारा अदालती निर्देशों के पालन की समीक्षा के लिए 15 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा। https://trendkia.com/meghalaya/shillong-toraphora-mamala-high-court-ke-adesha-para-uttar-pradesh-ke-chhatron-ne-shuru-ki-shahara-men-saphai-31390 TrendKia — Har trend, sabse pehle.