तुरा मेडिकल कॉलेज का 84 प्रतिशत निर्माण पूरा, लेकिन शिक्षकों के भारी टोटे से अटका संचालन मेघालय के तुरा मेडिकल कॉलेज का ढांचा तेजी से तैयार हो रहा है, मगर फैकल्टी की भारी कमी के कारण एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होने में देरी हो रही है। मेघालय में महत्वाकांक्षी तुरा मेडिकल कॉलेज का बुनियादी ढांचा तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है, लेकिन योग्य शैक्षणिक संकाय यानी फैकल्टी की गंभीर कमी के चलते संस्थान का संचालन लगातार टल रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से आयोजित एक समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि निर्माण कार्य काफी आगे बढ़ चुका है, फिर भी शिक्षकों की आवश्यक संख्या न जुट पाने से एमबीबीएस पाठ्यक्रम आरंभ करने की तैयारियों को झटका लग रहा है। समीक्षा बैठक में तैयारियों और चुनौतियों का आकलन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव की अध्यक्षता में बुधवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संस्थान को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों की समीक्षा करना था। इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान की नवनियुक्त निदेशक डॉ. बालदालिन लिंगदोह का औपचारिक स्वागत भी किया गया। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने संस्थान के ढांचागत विकास और वहां आने वाली प्रशासनिक रुकावटों पर विस्तार से चर्चा की। निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति और समयसीमा परियोजना की भौतिक प्रगति अब तक 84 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हालांकि, सिविल अस्पताल के तुरा परिसर में प्रस्तावित विभिन्न अस्पतालों के ब्लॉकों का निर्माण अलग-अलग चरणों में है। वहां 80 बिस्तरों वाले अस्पताल ब्लॉक का निर्माण कार्य 55 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि 150 बिस्तरों वाले अस्पताल ब्लॉक का कार्य 25 प्रतिशत के स्तर पर है। विभाग द्वारा साझा किए गए निर्माण कार्यक्रम के अनुसार, डोलडाग्रे में स्थित छात्रावास और टाइप-5 स्टाफ आवासों का निर्माण 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। शैक्षणिक ब्लॉक के निर्माण कार्य को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने की समयसीमा निर्धारित है। इसके अलावा टाइप-2, टाइप-3 और टाइप-4 श्रेणी के अन्य स्टाफ क्वार्टरों को 30 जून 2027 तक तैयार कर लिया जाएगा। सिविल अस्पताल परिसर में 80 बिस्तरों वाला ब्लॉक 31 दिसंबर 2026 तक तथा 150 बिस्तरों वाला अस्पताल ब्लॉक 30 जून 2027 तक बनकर तैयार होने की संभावना है। शिक्षकों की भारी कमी बनी सबसे बड़ी रुकावट ढांचागत प्रगति के बावजूद कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने के मार्ग में योग्य प्रोफेसरों और डॉक्टरों की अनुपलब्धता सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रही है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के नियमों के अनुसार 50 एमबीबीएस सीटों के वार्षिक प्रवेश के लिए कुल 97 फैकल्टी पदों की आवश्यकता होती है। संस्थान में इन मानकों के मुकाबले भारी रिक्तियां बनी हुई हैं। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक कॉलेज में प्रोफेसरों के पदों पर 86 प्रतिशत और एसोसिएट प्रोफेसरों के पदों पर 85 प्रतिशत की भारी कमी है। वहीं सीनियर रेजिडेंट्स के स्तर पर 52 प्रतिशत और असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर 36 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। विभाग अब तक संकाय भर्ती के लिए तीन दौर के विज्ञापन जारी कर चुका है, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके हैं। स्थानीय डॉक्टरों की तैनाती और स्वास्थ्य सेवाओं का संतुलन विभाग बीते पांच महीनों से गारो हिल्स में कार्यरत सेवारत चिकित्सकों के साथ बातचीत कर समाधान तलाशने में जुटा है। तुरा मेडिकल कॉलेज के लिए मैप किए गए कई सेवारत डॉक्टर इस समय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा विभिन्न अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से अधिकांश तैनाती वेस्ट गारो हिल्स के बाहर गारो हिल्स के अन्य क्षेत्रों में है। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि इन डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित करते समय यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि गारो हिल्स के अन्य जिलों में चल रही प्राथमिक एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। स्वास्थ्य तंत्र को बाधित किए बिना कॉलेज के लिए संकाय जुटाना विभाग के लिए दोहरी चुनौती बन चुका है। विद्यार्थियों के अवसरों का नुकसान और सरकारी रियायत बैठक में चिंता व्यक्त की गई कि मेडिकल कॉलेज के चालू न होने से प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में मेघालय के स्थानीय छात्र राज्य के भीतर सरकारी एमबीबीएस सीट हासिल करने का बड़ा मौका गंवा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने तुरा मेडिकल कॉलेज के लिए प्रति वर्ष 150 एमबीबीएस सीटों की स्वीकृति दी थी। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि न्यूनतम 50 सीटों के लिए जरूरी शिक्षकों की व्यवस्था करना भी अब तक संभव नहीं हो पाया है। विभाग ने बल देकर कहा कि इस परियोजना में लगाई गई जनता की भारी पूंजी का सीधा लाभ राज्य के युवाओं को मेडिकल सीटों के रूप में मिलना चाहिए। आयुक्त एवं सचिव ने दोहराया कि सरकार का संकल्प है कि तुरा मेडिकल कॉलेज से राज्य की जनता और छात्रों को भरपूर लाभ प्राप्त हो। इसके साथ ही निर्णय लिया गया है कि तुरा मेडिकल कॉलेज में राज्य कोटे के विद्यार्थियों से शिलांग मेडिकल कॉलेज के समान ही 33,000 रुपये वार्षिक शुल्क लिया जाएगा। स्वामित्व का ढांचा और उपस्थित अधिकारी प्रशासनिक ढांचे को स्पष्ट करते हुए यह तय किया गया है कि शिक्षण अस्पताल के रूप में इस्तेमाल होने वाला तुरा सिविल अस्पताल पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहेगा। साथ ही डोलडाग्रे में स्थापित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक ब्लॉक पर भी शत-प्रतिशत सरकारी स्वामित्व बना रहेगा। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की संयुक्त सचिव तथा मैनपावर असेसमेंट कमेटी की अध्यक्ष डॉ. रेजिना सी. मारक, एमसीएस; स्वास्थ्य सेवा निदेशक (एमआई) डॉ. लुमरिलीन एम. उमलोंग; स्वास्थ्य सेवा निदेशक (एमसीएच एवं परिवार कल्याण) डॉ. कैरोलिंडा इयांगराई; स्वास्थ्य सेवा निदेशक (चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान) डॉ. बालदालिन लिंगदोह; तुरा सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जे.बी. संगमा; तुरा एमसीएच अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी. मोमिन; और टीबी अस्पताल तुरा की जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. ननिथा आर. मारक मुख्य रूप से उपस्थित थीं। इसका आप पर असर तुरा मेडिकल कॉलेज के संचालन में आ रही देरी से राज्य के मेडिकल छात्रों और स्थानीय मरीजों को सीधे तौर पर सुविधाएं मिलने में विलंब हो रहा है। • मेघालय में: राज्य के मेडिकल अभ्यर्थियों को स्थानीय स्तर पर एमबीबीएस सीटों के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। छात्रों को अन्य राज्यों या निजी संस्थानों के महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। • तुरा और गारो हिल्स में: स्थानीय निवासियों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल कॉलेज स्तर के सुपर स्पेशियलिटी इलाज के लिए इंतजार करना होगा। साथ ही प्राथमिक केंद्रों के डॉक्टरों के तबादले से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने का खतरा बना हुआ है। • फीस और खर्च: सरकारी कोटे की सीटों पर वार्षिक शुल्क 33,000 रुपये तय रहने से आर्थिक राहत बरकरार रहेगी। संस्थान शुरू होने पर मध्यमवर्गीय छात्रों को नाममात्र शुल्क में डॉक्टर बनने का अवसर मिलेगा। • स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: सिविल अस्पताल में 80 और 150 बिस्तरों वाले नए वार्ड तैयार होने से क्षेत्रीय स्तर पर बिस्तरों की क्षमता बढ़ेगी। इससे तुरा और आसपास के इलाकों में भर्ती होने वाले मरीजों को सीधा लाभ पहुंचेगा। ऐसा क्यों हुआ तुरा मेडिकल कॉलेज का भौतिक निर्माण अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद इसका संचालन मुख्य रूप से शैक्षणिक चिकित्सकों और प्रोफेसरों की गंभीर अनुपलब्धता के कारण रुका हुआ है। • फैकल्टी की भारी कमी: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नियमों के अनुसार 50 एमबीबीएस सीटों के लिए कम से कम 97 शिक्षकों की आवश्यकता होती है। प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसरों के 85 प्रतिशत से अधिक पद खाली होने से शैक्षणिक मान्यता प्राप्त नहीं हो पा रही है। • भर्ती अभियानों में विफलता: स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीन बार भर्ती विज्ञापन निकाले जाने के बाद भी पर्याप्त योग्य अभ्यर्थी नहीं मिले हैं। दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीमित उपलब्धता इस समस्या को और बढ़ा रही है। • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर का डर: सेवारत डॉक्टरों को कॉलेज में स्थानांतरित करने से प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी होने का जोखिम है। सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को कमजोर किए बिना बीच का रास्ता तलाशने में जुटी है। सवाल-जवाब 1. तुरा मेडिकल कॉलेज की निर्माण प्रगति कितनी है? परियोजना का समग्र भौतिक निर्माण कार्य 84 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। 2. कॉलेज शुरू होने में मुख्य बाधा क्या है? योग्य प्रोफेसरों और शैक्षणिक फैकल्टी की भारी कमी के कारण कक्षाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं। 3. एनएमसी के अनुसार 50 सीटों के लिए कितने फैकल्टी पदों की जरूरत है? राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के मुताबिक 50 सीटों के वार्षिक प्रवेश के लिए 97 फैकल्टी पद आवश्यक हैं। 4. तुरा मेडिकल कॉलेज में राज्य कोटे की वार्षिक फीस कितनी होगी? राज्य कोटे के छात्रों के लिए वार्षिक शुल्क शिलांग मेडिकल कॉलेज के बराबर यानी 33,000 रुपये तय किया गया है। 5. अस्पताल के नए ब्लॉक कब तक तैयार होंगे? 80 बिस्तरों वाला ब्लॉक 31 दिसंबर 2026 तक और 150 बिस्तरों वाला ब्लॉक 30 जून 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। https://trendkia.com/meghalaya/tura-medical-college-ka-84-pratishata-nirmana-pura-lekina-shikshakon-ke-bhari-tote-se-ataka-snchalana-44996 TrendKia — Har trend, sabse pehle.