उमियम झील को कचरे से बचाने के लिए मौडुन के ग्रामीणों और ग्रीन-टेक फाउंडेशन ने वाह लाप-न्गोर में चलाया सफाई अभियान मेघालय में उमियम जलाशय को प्रदूषण से बचाने के मकसद से स्थानीय ग्रामीणों और ग्रीन-टेक फाउंडेशन ने वाह लाप-न्गोर में कचरा हटाने का बड़ा अभियान शुरू किया है। मेघालय की मशहूर उमियम झील में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर एक बड़ा जमीनी प्रयास शुरू हुआ है। ग्रीन-टेक फाउंडेशन और मौडुन गांव के निवासियों ने मिलकर वाह लाप-न्गोर में एक व्यापक सफाई अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य मकसद उस कचरे और गाद को उमियम जलाशय तक पहुंचने से पहले ही रोकना था, जो नदियों के जरिए लगातार बहकर आ रहा है। नदियों से बहकर आने वाले कचरे पर सीधा प्रहार यह सफाई अभियान खास तौर पर उस संवेदनशील हिस्से पर केंद्रित था, जहां वाह उमख्राह और वाह उमशिर्पी नदियों से बहकर आने वाला कचरा उमियम झील की दिशा में आगे बढ़ता है। शिलॉन्ग शहर और आसपास के इलाकों से बहने वाली इन नदियों का दूषित पानी और ठोस कचरा इस प्राकृतिक जलाशय के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और संस्था के कार्यकर्ताओं ने मिलकर पानी की धारा में फंसे कचरे को बाहर निकाला ताकि जलाशय की जलधारा स्वच्छ बनी रह सके। सिर्फ अस्थायी सफाई से नहीं सुधरेंगे हालात ग्रीन-टेक फाउंडेशन के अध्यक्ष एच बंसीवडोर नोंगलांग ने उमियम झील की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए साफ कहा कि कभी-कभार चलाए जाने वाले सफाई अभियानों से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। उनका कहना था कि जलस्रोतों के प्रदूषण और भारी मात्रा में गाद जमा होने की जड़ तक पहुंचना बेहद जरूरी है। नोंगलांग ने कहा, “हम उमियम झील की स्थिति को इस तरह लगातार बिगड़ते हुए चुपचाप नहीं देख सकते।” वार्षिक गाद का भारी दबाव और पनबिजली परियोजना पर खतरा अनुमानों के अनुसार, हर साल 40,000 क्यूबिक मीटर से भी अधिक गाद और तलछट उमियम जलाशय के भीतर जमा हो रही है। इतनी भारी मात्रा में गाद का आना जलाशय के जलभराव की क्षमता को लगातार कम कर रहा है, जिससे इसकी दीर्घकालिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि उमियम झील मेघालय के 172 मेगावाट के उमियम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के संचालन के लिए बेहद अहम जलस्रोत है। यदि जलाशय में गाद की मात्रा इसी गति से बढ़ती रही, तो बिजली उत्पादन की क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। दीर्घकालिक समाधान और साझा प्रयास का आह्वान झील के संरक्षण के लिए संस्था ने केवल सतह की सफाई के बजाय एक समग्र कार्ययोजना की मांग उठाई है। इसमें कचरे को उसके मूल स्रोत पर ही रोकना, दोनों प्रमुख नदियों का पुनरुद्धार करना, व्यापक स्तर पर पौधारोपण करना और तलछट का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना शामिल है। ग्रीन-टेक फाउंडेशन ने राज्य सरकार, स्थानीय समुदायों, तकनीकी विशेषज्ञों और पर्यावरण संगठनों से अपील की है कि वे एक साथ मिलकर एक समन्वित जीर्णोद्धार कार्यक्रम तैयार करें, ताकि केवल एक बार के आयोजनों के बजाय निरंतर प्रयासों से उमियम को बचाया जा सके। इसका आप पर असर इस सफाई अभियान और जलाशय बहाली की मांग का सीधा असर क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा और जल पर्यावरण पर पड़ता है। • भारत में: संवेदनशील पूर्वोत्तर क्षेत्रों में प्रमुख जलाशयों का संरक्षण राष्ट्रीय जल और नवीकरणीय ऊर्जा प्राथमिकताओं से जुड़ा हुआ है। जलस्रोतों में गाद जमा होने की समस्या पर समय रहते ध्यान देने से अन्य राज्यों की हाइड्रोपावर परियोजनाओं के लिए भी संरक्षण के नए मॉडल सामने आते हैं। • मेघालय में: उमियम जलाशय में पानी की क्षमता सुरक्षित रहने से राज्य की 172 मेगावाट बिजली उत्पादन व्यवस्था बिना रुकावट के चल सकेगी। यदि जलस्रोतों को साफ रखा जाता है, तो स्थानीय जल संकट का खतरा कम होगा और शिलॉन्ग तथा आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और पर्यावरण को लंबे समय तक लाभ मिलेगा। • नागरिकों और पर्यटकों के लिए: नदियों और नालों में प्लास्टिक व कचरा फेंकने से रुकने पर जलस्रोतों का प्राकृतिक स्वरूप दोबारा बहाल हो सकेगा। स्थानीय समुदायों की भागीदारी से यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में सफाई केवल कागजों पर न रहकर जमीन पर दिखे। • प्रशासनिक स्तर पर: कचरे को स्रोत पर ही छांटने और तलछट के वैज्ञानिक प्रबंधन के नियम कड़े होने की संभावना बनेगी। इससे नगर निकायों और स्थानीय पंचायतों को कचरा निस्तारण की व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाना होगा। ऐसा क्यों हुआ उमियम झील में बढ़ते प्रदूषण और गाद के कारण जलाशय की कार्यक्षमता संकट में पड़ गई है, जिसके चलते स्थानीय लोगों को आगे आना पड़ा। • सीधा कारण: वाह उमख्राह और वाह उमशिर्पी नदियां शहरी बस्तियों से भारी मात्रा में ठोस कचरा और प्लास्टिक बहाकर लाती हैं, जो वाह लाप-न्गोर से होकर सीधा उमियम झील में गिरता है। इस निरंतर प्रवाह ने जलाशय के प्रवेश द्वार को कचरे के ढेर में बदल दिया था। • अत्यधिक तलछट का जमाव: ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों के चलते हर साल 40,000 क्यूबिक मीटर से अधिक गाद जलाशय में जमा हो रही है। इस गाद की वजह से झील की वास्तविक जलभराव क्षमता साल दर साल कम होती जा रही है। • अस्थायी उपायों की नाकामी: समय-समय पर चलाए जाने वाले एक-दिवसीय सफाई अभियान केवल सतही कचरा हटा पाते हैं और प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों को बंद करने में नाकाम रहे हैं। इसी वजह से पर्यावरण संस्थाओं ने सरकार, विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों को मिलाकर एक साझा और स्थायी नीति बनाने की जरूरत बताई है। सवाल-जवाब 1. उमियम झील के लिए वाह लाप-न्गोर में सफाई अभियान किसने चलाया? यह सफाई अभियान ग्रीन-टेक फाउंडेशन और मौडुन गांव के निवासियों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। 2. इस सफाई अभियान का मुख्य लक्ष्य क्या था? इसका लक्ष्य वाह उमख्राह और वाह उमशिर्पी नदियों से बहकर आने वाले कचरे को उमियम जलाशय में पहुंचने से पहले ही रोकना था। 3. हर साल उमियम जलाशय में कितनी गाद जमा होने का अनुमान है? अनुमान के अनुसार, हर साल 40,000 क्यूबिक मीटर से भी अधिक तलछट और गाद इस जलाशय में प्रवेश करती है। 4. उमियम झील मेघालय के लिए बिजली उत्पादन के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है? यह झील राज्य की 172 मेगावाट क्षमता वाली उमियम जलविद्युत परियोजना के संचालन के लिए मुख्य जलस्रोत है। 5. ग्रीन-टेक फाउंडेशन के अध्यक्ष कौन हैं और उन्होंने क्या मांग की? फाउंडेशन के अध्यक्ष एच बंसीवडोर नोंगलांग हैं, जिन्होंने केवल अस्थायी सफाई के बजाय नदियों के पुनरुद्धार, पौधारोपण और वैज्ञानिक गाद प्रबंधन की मांग की है। https://trendkia.com/meghalaya/umiam-lake-ko-kachare-se-bachane-ke-lie-mawdun-ke-graminon-aura-green-tech-foundation-ne-wah-lap-ngor-men-chalaya-saphai-abhiyana-47432 TrendKia — Har trend, sabse pehle.