अदन के अल-माशिक राष्ट्रपति महल पर हूती मिसाइल हमला, दो सुरक्षाकर्मियों की मौत यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में स्थित राष्ट्रपति भवन पर हूती विद्रोहियों ने पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसमें दो सुरक्षा गार्ड्स मारे गए और कई लोग घायल हो गए। यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में स्थित अल-माशिक राष्ट्रपति महल को निशाना बनाकर पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इस भीषण हमले में दो सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग जख्मी हुए हैं। यह महल देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का आधिकारिक मुख्यालय है। सूचना मंत्री मोअम्मर अल-इरियानी ने पुष्टि की है कि जिस समय यह मिसाइल हमला हुआ, उस दौरान प्रधानमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्री पूरी तरह सुरक्षित रहे और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा। हमले के पीछे के दावे और सैन्य ठिकाने हूती नियंत्रित मीडिया तंत्र ने इस सैन्य कार्रवाई को लेकर बयान जारी करते हुए कहा कि उनके लड़ाकों ने सऊदी सैन्य अधिकारियों के नेतृत्व में चलने वाले सैन्य अभियानों के मुख्यालय को सटीक रूप से निशाना बनाया है। विद्रोही समूह के अनुसार, इस हमले में राष्ट्रपति भवन परिसर के भीतर मौजूद हथियारों के गोदामों को भी तबाह किया गया है। दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था के शीर्ष नेतृत्व और प्रशासनिक प्रतिष्ठान को अस्थिर करने के मकसद से किया गया था। संघर्ष की पृष्ठभूमि और जमीनी हालात यमन की चुनी हुई वैध सरकार एक दशक से भी अधिक समय पहले राजधानी सना से बेदखल होने के बाद से अदन को अपनी अस्थायी राजधानी बनाकर कामकाज संचालित कर रही है। सना पर हूती विद्रोहियों के कब्जे के बाद से ही देश गहरे गृहयुद्ध और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के संकट से जूझ रहा है। इस संघर्ष में पड़ोसी देश सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का खुला समर्थन कर रहा है। सऊदी अरब ईरान समर्थित हूतियों के खिलाफ सरकारी सुरक्षा बलों के बड़े सैन्य अभियानों को लगातार मजबूत हवाई सुरक्षा और सैन्य सहायता मुहैया करा रहा है। सुरक्षा संकट और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव अदन में हुए इस ताजे हमले ने यमन में लंबे समय से जारी खूनी जंग के और अधिक भड़कने की आशंका बढ़ा दी है। अल-माशिक महल जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र पर मिसाइल दागने की यह क्षमता दिखाती है कि हूती विद्रोही सरकारी नियंत्रण वाले दक्षिणी हिस्सों में भी गहरा नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। यमन में रणनीतिक बुनियादी ढांचे और सत्ता के केंद्रों पर होते ऐसे हमले न केवल मानवीय संकट को गहरा रहे हैं, बल्कि लाल सागर और अरब सागर के निकटवर्ती समुद्री सुरक्षा गलियारों के लिए भी लगातार बड़ा खतरा बने हुए हैं। इसका आप पर असर यमन में राष्ट्रपति भवन पर हुआ यह भीषण हमला खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम और वैश्विक व्यापारिक लागत को बढ़ाने वाला संकेत है। • कच्चे तेल और ईंधन पर असर: लाल सागर और अदन की खाड़ी के पास हमलों की तीव्रता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं के पेट्रोल-डीजल बजट पर पड़ सकता है। • समुद्री व्यापार और माल ढुलाई: यमन के निकटवर्ती जलमार्गों में सुरक्षा जोखिम बढ़ने से मालवाहक जहाजों के बीमा प्रीमियम और ढुलाई लागत में बढ़ोतरी होती है। लंबी समुद्री यात्राओं के कारण आयातित उपभोक्ता सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम बढ़ सकते हैं। • प्रवासी सुरक्षा और सहायता: खाड़ी और मध्य पूर्व के देशों में लाखों भारतीय नागरिक काम करते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य हमलों के तेज होने से वहां रहने वाले कामगारों की सुरक्षा चिंताओं में इजाफा होता है। • कूटनीतिक और मानवीय स्थिति: सत्ता के मुख्य केंद्रों पर सीधे हमलों से शांति वार्ताओं के प्रयास कमजोर पड़ते हैं। इसके चलते युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी मानवीय सहायता पहुंचाने का काम और अधिक कठिन हो जाता है। ऐसा क्यों हुआ यह हमला यमन में एक दशक से चल रहे गृहयुद्ध और रणनीतिक नियंत्रण की रस्साकशी का सीधा नतीजा है, जिसमें सरकार और विद्रोही आमने-सामने हैं। • प्रत्यक्ष कारण: ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अदन में सरकारी शक्ति के केंद्र अल-माशिक महल को निशाना बनाकर पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हूतियों का दावा है कि वहां सऊदी सैन्य अधिकारियों का ऑपरेशनल मुख्यालय और गोला-बारूद के भंडार मौजूद थे। • पृष्ठभूमि और सत्ता संघर्ष: एक दशक से भी पहले हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को अदन से काम चलाने पर मजबूर होना पड़ा। तब से दोनों पक्ष सत्ता और प्रभाव के लिए लगातार लड़ रहे हैं। • क्षेत्रीय गठबंधन और सैन्य अभियान: सऊदी अरब यमन की वैध सरकार का समर्थन कर रहा है और हूतियों के खिलाफ सरकारी सुरक्षा बलों के बड़े जमीनी अभियान को हवाई सहायता दे रहा है। हूतियों का यह हमला उसी सऊदी समर्थित सैन्य दबाव का जवाब माना जा रहा है। सवाल-जवाब 1. यमन के राष्ट्रपति भवन पर हुए हमले में कितने लोग मारे गए? इस मिसाइल हमले में दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है और कई अन्य लोग घायल हुए हैं। 2. हमले के समय यमन के प्रधानमंत्री और मंत्रियों की क्या स्थिति थी? सूचना मंत्री मोअम्मर अल-इरियानी के अनुसार, प्रधानमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्री हमले में पूरी तरह सुरक्षित रहे। 3. हमले में किस तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया गया? अल-माशिक राष्ट्रपति महल परिसर को निशाना बनाकर पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। 4. हूती विद्रोहियों ने हमले को लेकर क्या दावा किया है? हूती नियंत्रित मीडिया का कहना है कि उन्होंने सऊदी सैन्य अधिकारियों के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान मुख्यालय और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया। 5. यमन की सरकार अदन से कामकाज क्यों संचालित कर रही है? एक दशक से भी अधिक समय पहले हूती विद्रोहियों द्वारा राजधानी सना से बेदखल किए जाने के बाद से सरकार अदन में स्थित है। 6. यमन सरकार को किस पड़ोसी देश का सैन्य समर्थन प्राप्त है? सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है और हूतियों के खिलाफ हवाई सहायता मुहैया करा रहा है। https://trendkia.com/middle-east/aden-ke-al-maashiq-rashtrapati-mahala-para-houthi-misaila-hamala-do-surakshakarmiyon-ki-mauta-47942 TrendKia — Har trend, sabse pehle.