# इराक में यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की भारी कीमत, कार्यकर्ताओं को मिल रही हैं धमकियां

> इराक में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और उत्पीड़न के मामलों में न्याय पाना बेहद मुश्किल है, जहां कार्यकर्ताओं को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और कानून भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** मध्य पूर्व · **Published:** 2026-10-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/middle-east/death-threats-and-isolation-the-cost-of-fighting-sexual-violence-in-iraq-47272 · **Language:** Hindi
**Tags:** इराक, महिला अधिकार, यौन हिंसा, सारा जासिम, मानवाधिकार, बगदाद, अपराध

इराक की सड़कों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान के साथ चलना किसी चुनौती से कम नहीं है। सारा जासिम नामक महिला अधिकार कार्यकर्ता इंस्टाग्राम के जरिए उन घटनाओं को उजागर करती हैं, जहां पुरुष राह चलती महिलाओं पर भद्दे कमेंट करते हैं या अशील हरकतें करते हैं। वह मानती हैं कि आज के दौर में कैमरा ही सबसे बड़ा हथियार है, जिसके माध्यम से उत्पीड़न के सबूत जुटाए जा सकते हैं। उनके द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो के आधार पर पुलिसकर्मी तक की गिरफ्तारी संभव हो सकी, जिस पर स्कूली छात्रनियों को परेशान करने का आरोप था। हालांकि यह कदम उठाना बेहद जोखिम भरा है, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें जान से मारने और एसिड से हमला करने की धमकियां मिल रही हैं।

इन गंभीर खतरों के बीच सारा जासिम ने अपने घर से बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया है और अपना अधिकांश समय अपने कुत्ते के साथ बिताने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि उन पर सार्वजनिक रूप से अशिष्टता फैलाने का झूठा आरोप लगाया जाता है, क्योंकि वह उस समाज में महिलाओं को बोलने के लिए प्रेरित करती हैं जो हमेशा से उन्हें चुप देखना चाहता है। इराक के मौजूदा दंड कानूनों में उत्पीड़न और जेंडर आधारित हिंसा जैसे शब्दों का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है, जिसके कारण दोषियों को सजा दिलाना और भी कठिन हो जाता है। संयुक्त राष्ट्र महिला भेदभाव समिति ने मई में अपनी एक रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि इराक में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा बहुत बड़े पैमाने पर होती है लेकिन इसके आंकड़े सामने नहीं आते।

कानूनी प्रणाली की कमियों के चलते कई महिलाओं को न्याय मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो जाती है। इराक में अमोल नामक एक महिला अपने पूर्व पति के खिलाफ पिछले पांच वर्षों से अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रही है। अमोल का आरोप है कि उस व्यक्ति ने बंदूक की नोक पर उनकी नाबालिग बेटी के साथ कई बार बलात्कार किया और धमकी दी कि शोर मचाने पर जान से मार दिया जाएगा। जब अमोल ने पुलिस में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई, तो उनकी बेटी की कलाइयों पर गहरे जख्म के निशान थे और मुंह बंद रखने के लिए जबर्दस्ती की गई थी। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट और डीएनए साक्ष्य भी इस कुकृत्य की गवाही देते हैं, लेकिन आरोपी व्यक्ति फिलहाल कानून की पकड़ से बाहर चल रहा है और फरार है।

न्याय पाने की इस लंबी और कठिन राह में अमोल को अपनों का साथ भी नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने इस मामले से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया और उनके पास महंगे वकीलों की फीस चुकाने के पैसे भी नहीं थे। इराक में घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए आश्रय गृहों की भारी कमी है, हालांकि जो थोड़े बहुत शेल्टर होम मौजूद थे, उन्हें यानार मोहम्मद द्वारा सह-संस्थापित संगठन ने तैयार किया था। पिछले मार्च में बगदाद में उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने यानार मोहम्मद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के विशेषज्ञों ने अप्रैल में अपनी रिपोर्ट में यह बताया था कि यानार मोहम्मद को लगातार धमकियां मिल रही थीं और चरमपंथी धार्मिक मिलिशिया से उन्हें खतरा था।

इराक में महिलाओं के अधिकारों के लिए लंबे समय से आवाज उठा रही हन्ना एडवर का कहना है कि उनकी हत्या के ठीक दो दिन पहले ही उन्होंने यानार मोहम्मद से मुलाकात की थी। हन्ना एडवर खुद भी लगातार मिल रही धमकियों के साए में जी रही हैं और उनका मानना है कि देश में महिलाओं के लिए न तो कोई कानून है, न सुरक्षा और न ही न्याय। इराकी ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के प्रमुख मुस्तफा सादून का कहना है कि मुख्य समस्या यह नहीं है कि महिलाएं चुप रहती हैं, बल्कि यह है कि जब वे अपनी आवाज उठाती हैं तो कोई भी संस्था उनकी बात सुनने को तैयार नहीं होती। एक पीड़िता को न्याय के रास्ते में सबसे पहले अपने परिवार, फिर पुलिस स्टेशन और अंत में अदालत से जूझना पड़ता है।

समीरा जैसी कई अन्य महिलाएं भी इस टूटी हुई न्याय व्यवस्था का शिकार हैं, जिन्हें सार्वजनिक परिवहन और सड़कों पर लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। समीरा ने बताया कि एक बार सार्वजनिक वाहन में यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने उनके सामने मोबाइल पर अशील वीडियो चलाया और एक अन्य घटना में कार सवार व्यक्ति ने उनका पीछा किया था। जब उन्होंने सड़क पर तैनात पुलिसकर्मियों से मदद मांगी, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें इस मामले में कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है। इन तमाम घटनाओं के बावजूद समीरा अपनी मां को इस बारे में नहीं बतातीं, क्योंकि उन्हें डर है कि परिवार वाले उनकी सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें घर से बाहर निकलने पर ही रोक लगा देंगे।

इराक के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता मुक्दाद मिरी ने पुलिसकर्मियों पर लगे उत्पीड़न के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि ऐसे मामले बहुत कम सामने आते हैं और दोषी पाए जाने वाले कर्मियों को दस साल तक की सजा के साथ सेवा से बर्खास्त किया जाता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि समाज, रीति-रिवाजों और परंपराओं के दबाव के कारण बहुत से मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। इस साल की शुरुआत से अब तक पुलिस को यौन हिंसा की लगभग 300 शिकायतें मिली हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हैं। हन्ना एडवर का मानना है कि सद्दाम हुसैन की सरकार गिरने के इतने साल बाद भी देश में महिलाओं के अधिकार आगे बढ़ने के बजाय पीछे जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वे और सारा जासिम हार मानने को तैयार नहीं हैं।

## इसका आप पर असर
यह समाचार इराक में महिलाओं की सुरक्षा, मानवाधिकारों और कानूनी सुधारों की दिशा में गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

- **भारत में:** यह घटना सीधे तौर पर भारतीय पाठकों को प्रभावित नहीं करती है, लेकिन यह महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और पुलिस व्यवस्था की भूमिका पर वैश्विक स्तर पर सोचने के लिए मजबूर करती है।
- **इराक में:** इराक की महिलाओं और पीड़ित परिवारों के लिए यह स्थिति न्याय पाने की कठिन राह और सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ संघर्ष की वास्तविकता को दर्शाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
इराक में यौन हिंसा और कार्यकर्ताओं पर हमलों के पीछे गहरे सामाजिक पूर्वाग्रह, कानूनी कमियां और चरमपंथी धमकियां मुख्य कारण हैं।

- **कानूनों का अभाव:** इराकी दंड संहिता में उत्पीड़न और जेंडर आधारित हिंसा जैसे शब्दों का स्पष्ट रूप से अपराधीकरण नहीं किया गया है।
- **सामाजिक मान्यताएं:** समाज और परंपराओं के दबाव के कारण अधिकांश पीड़ित मामले दर्ज नहीं करा पाती हैं और परिवार के दवाब में चुप रहती हैं।
- **चरमपंथी खतरे:** महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को धार्मिक और चरमपंथी मिलिशिया संगठनों से लगातार धमकियां मिलती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. इराक में कार्यकर्ता सारा जासिम क्या कदम उठाती हैं?
सारा जासिम इंस्टाग्राम पर महिलाओं के उत्पीड़न के वीडियो पोस्ट करती हैं ताकि सबूत जुटाए जा सकें और दोषियों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया जा सके।

### 2. इराक में यौन हिंसा के मामलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र की समिति ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र समिति ने मई में अपनी रिपोर्ट में कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा व्यापक और कम रिपोर्ट होने वाली समस्या है, तथा भेदभावपूर्ण कानूनों को रद्द करने की मांग की।

### 3. अमोल नामक महिला की कानूनी लड़ाई क्या है?
अमोल अपने पूर्व पति के खिलाफ पिछले पांच वर्षों से अदालत में संघर्ष कर रही है, जिस पर उसने अपनी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया है।

### 4. यानार मोहम्मद कौन थीं?
यानार मोहम्मद एक जानी-मानी महिला अधिकार कार्यकर्ता थीं, जिनके सह-संस्थापित संगठन ने इराक में महिलाओं के लिए आश्रय गृह बनाए थे। उनकी पिछले साल हत्या कर दी गई थी।

### 5. इराक के आंतरिक मंत्रालय ने उत्पीड़न के मामलों पर क्या कहा?
मंत्रालय के प्रवक्ता मुक्दाद मिरी ने स्वीकार किया कि इस साल पुलिस को लगभग 300 शिकायतें मिली हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े सामाजिक और पारंपरिक कारणों से काफी अधिक हैं।

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