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  "type": "article",
  "title": "पूर्वी यरूशलम में अनरवा के आखिरी वोकेशनल कॉलेज पर इजराइल का कब्जा, यूएन ने जताई सख्त आपत्ति",
  "summary": "इजराइली सुरक्षा बलों ने पूर्वी यरूशलम स्थित कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर को जब्त कर बंद कर दिया है, जो शहर में अनरवा का आखिरी संचालित संस्थान था। इस कार्रवाई की संयुक्त राष्ट्र ने कड़ी निंदा की है।",
  "content": "ऑक्यूपाइड ईस्ट यरूशलम में मंगलवार को उस समय तनाव बेहद बढ़ गया, जब हथियारबंद इजराइली सुरक्षा बलों ने कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर पर धावा बोलकर उसे स्थायी रूप से बंद कर दिया। इस पुलिस कार्रवाई के दौरान पास के शरणार्थी शिविर में आंसू गैस के गोले भी दागे गए। यह परिसर संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (अनरवा) द्वारा शहर में संचालित किया जा रहा आखिरी सक्रिय संस्थान था। इजराइल द्वारा पारित नए कानूनों के तहत मानवीय एजेंसी के ढांचे को समाप्त करने के सिलसिले में यह सबसे ताजा और बड़ा कदम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय संपत्ति में जबरन घुसपैठ की कड़े शब्दों में निंदा की, जबकि राजनयिक प्रतिनिधियों ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैश्विक संस्था के सभी परिसरों को पूर्ण सुरक्षा और कानूनी प्रतिरक्षा हासिल है।\n\n \n\nसशस्त्र पुलिस कार्रवाई और इजराइली राजनीतिक नेतृत्व का सीधा आदेश\n इस शैक्षणिक संस्थान पर कब्जे की कार्रवाई का नेतृत्व इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने खुद किया। वह सरकारी समर्थक चैनल 14 की टीवी टीम और पुलिस टुकड़ी के साथ परिसर में दाखिल हुए। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा मंत्री ने खुद का एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह संस्थान के निदेशक की कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। उन्होंने अनरवा के निष्कासन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक कार्यकाल के दौरान राहत एजेंसी को क्षेत्र के किसी भी परिसर पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने या गतिविधियां चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।\n\n यरूशलम के कफ्र अकब क्षेत्र स्थित इस परिसर को खाली कराने का स्पष्ट निर्देश इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय से जारी हुआ था। आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई संसद द्वारा पारित कानूनों और प्रधानमंत्री के निर्देशों के तहत शुरू की गई है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इजराइल किसी भी ऐसे संगठन को अपनी सीमा में काम करने की इजाजत नहीं देगा, जिसके कर्मचारी 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में कथित तौर पर शामिल रहे हों। उन्होंने एजेंसी की गतिविधियों को रोकने के लिए सभी आवश्यक राज्य तंत्रों का उपयोग करने का संकल्प दोहराया।\n\n मंगलवार को जबरन प्रवेश के तुरंत बाद परिसर में तैनात कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया। इजराइली प्रशासनिक अधिकारियों ने संस्थान से तकनीकी उपकरण, औजार और मशीनरी हटाना शुरू कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने घोषणा की है कि जब्त किए गए इस व्यावसायिक परिसर के एक हिस्से को सरकारी स्कूल में बदलने की योजना पर काम किया जा रहा है।\n\n \n\nसात दशकों का व्यावसायिक शिक्षा इतिहास और युवा फिलिस्तीनियों पर असर\n कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर का एक समृद्ध इतिहास रहा है, जिसकी स्थापना 1952 में फिलिस्तीनी शरणार्थियों को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। पिछले सात दशकों से यह कॉलेज एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र के रूप में कार्य कर रहा था, जहां हर साल लगभग 340 युवाओं को विभिन्न तकनीकी विधाओं में प्रशिक्षित किया जाता था। संस्थान में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कार मैकेनिक, बढ़ईगीरी, इलेक्ट्रिकल काम और प्लंबिंग जैसे उपयोगी हुनर सिखाए जाते थे, जिससे वे अपना सम्मानजनक रोजगार शुरू कर सकें।\n\n भौगोलिक दृष्टि से यह सेंटर कलंदिया और कफ्र अकब के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। चूंकि यह स्थल इजराइल की कंक्रीट पृथक्करण दीवार के पीछे स्थित है, इसलिए पूरे पश्चिम तट के शरणार्थी शिविरों और कस्बों से आने वाले युवा आसानी से यहां तक पहुंच सकते थे। इस संस्थान के अचानक बंद होने से सैकड़ों युवाओं के पेशेवर विकास और रोजगार पाने के रास्ते बंद हो गए हैं।\n\n यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने युवाओं के भविष्य पर पड़ने वाले इस प्रतिकूल प्रभाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस केंद्र को बंद करने से संकटग्रस्त युवाओं से वह व्यावसायिक शिक्षा छीन ली जाएगी, जो उन्हें आर्थिक तंगी और उच्च बेरोजगारी वाले इस क्षेत्र में आजीविका कमाने का अवसर प्रदान करती थी।\n\n \n\nकानूनी प्रतिबंध और शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की तालाबंदी\n व्यवसायिक कॉलेज की यह तालाबंदी इजराइली संसद द्वारा पिछले साल पारित किए गए कड़े कानूनों का ही परिणाम है। यह कानून अनरवा को इजराइल द्वारा अपने संप्रभु क्षेत्र माने जाने वाले किसी भी इलाके में आधिकारिक गतिविधियां चलाने या कार्यालय खोलने से पूरी तरह रोकता है। इसमें पूर्वी यरूशलम भी शामिल है, जिसे इजराइल ने 1967 के मध्य पूर्व युद्ध के दौरान जॉर्डन से छीना था और बाद में अपने क्षेत्र में मिला लिया था, हालांकि इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है।\n\n इस विधायी ढांचे के तहत इजराइली राज्य प्रशासन के सभी अंगों, सरकारी मंत्रालयों, नगर निगमों और सुरक्षा एजेंसियों को अनरवा कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार का आधिकारिक संपर्क या सहयोग रखने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासनिक संबंधों के इस पूर्ण विच्छेद ने शहर में अंतरराष्ट्रीय सहायता तंत्र के संचालन को पूरी तरह ठप कर दिया है।\n\n व्यावसायिक कॉलेज पर इस कार्रवाई से पहले प्राथमिक शिक्षा पर भी ऐसे ही प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। पिछले साल पूर्वी यरूशलम में स्थित अनरवा के छह स्कूलों के खिलाफ बंद करने के आदेश जारी किए गए थे। उस फैसले के कारण लगभग 800 फिलिस्तीनी बच्चों की प्रत्यक्ष स्कूली पढ़ाई ठप हो गई थी और उनके परिवारों को शिक्षा के अन्य विकल्प तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा था।\n\n \n\nगंभीर आरोप, संयुक्त राष्ट्र की जांच और तटस्थता पर बहस\n इस विधायी कार्रवाई की मुख्य वजह 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजराइल पर हुए सीमा पार हमलों के बाद इजराइली खुफिया एजेंसियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप हैं। उन हमलों में लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इजराइल का दावा था कि एजेंसी के कम से कम 19 कर्मचारी इन हमलों में सीधे तौर पर शामिल थे। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि गाजा में तैनात एजेंसी के 10 प्रतिशत कर्मचारियों के हमास सहित सशस्त्र समूहों से संबंध थे और मानवीय सुविधाओं का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।\n\n इन गंभीर दावों के सामने आने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने एक स्वतंत्र आंतरिक जांच शुरू की। जांच के निष्कर्षों में पाया गया कि नौ मामलों में साक्ष्य कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं, जिसके तुरंत बाद उन व्यक्तियों के सेवा अनुबंध समाप्त कर दिए गए। हालांकि, जांच आयोग ने पाया कि अन्य दावों की पुष्टि के लिए पर्याप्त या विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए थे।\n\n अनरवा नेतृत्व ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि इजराइली अधिकारियों ने सशस्त्र समूहों के साथ बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के जुड़ाव के आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या ठोस साक्ष्य साझा नहीं किए। एजेंसी ने अपनी संस्थागत तटस्थता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह अपने परिसरों के किसी भी अनधिकृत उपयोग या तटस्थता के उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा करती है।\n\n मंगलवार की पुलिस कार्रवाई के बाद अनरवा ने आधिकारिक बयान जारी कर कलंदिया परिसर में बिना अनुमति प्रवेश की कड़ी निंदा की। बयान में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र की पूर्व अनुमति के बिना सशस्त्र बलों का प्रवेश अंतरराष्ट्रीय संधियों का स्पष्ट उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर, फिलिस्तीनी प्राधिकरण के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह यूएन परिसरों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए, कर्मचारियों की वापसी सुनिश्चित करे और इजराइल को इस सैन्य कार्रवाई को स्थायी स्थिति बनाने से रोके।\n\n \n\nमानवीय जनादेश और शरणार्थी मुद्दे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि\n इस मानवीय संस्था की स्थापना 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी, ताकि युद्ध के दौरान विस्थापित हुए सैकड़ों हजार फिलिस्तीनियों को आपातकालीन राहत और सामाजिक सेवाएं दी जा सकें। पिछले सात दशकों में इस संगठन ने अपने दायरे का विस्तार किया और यह पूरे क्षेत्र में मूलभूत नागरिक सुविधाएं देने वाली मुख्य संस्था बन गया। वर्तमान में यह एजेंसी पश्चिम तट में रहने वाले 9,00,000 से अधिक पंजीकृत फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और राहत सेवाएं प्रदान कर रही है।\n\n सेवाओं के ठप होने के अलावा, इस एजेंसी को लेकर चल रहा राजनीतिक संघर्ष इजराइल-फिलिस्तीन विवाद के सबसे संवेदनशील और अनसुलझे पहलुओं को छूता है। फिलिस्तीनी आबादी के लिए यह संस्था विस्थापित लोगों के रूप में उनकी ऐतिहासिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी का एक बड़ा प्रतीक है।\n\n फिलिस्तीनी अधिकारियों का मानना है कि इस संस्था की गतिविधियों को बंद करने का प्रयास वास्तव में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के मुख्य प्रश्न को समाप्त करने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। उनका तर्क है कि इस एजेंसी को खत्म करने का मकसद शरणार्थियों के अपने ऐतिहासिक घरों और संपत्तियों पर लौटने के अधिकार (राइट ऑफ रिटर्न) को मिटाना है, जो मध्य पूर्व शांति वार्ता का एक बेहद बुनियादी और केंद्रीय मुद्दा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nपश्चिम तट में: सैकड़ों युवा फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अपने रोजगार और आजीविका के लिए जरूरी व्यावसायिक प्रशिक्षण से अचानक वंचित होना पड़ा है।\n\nअंतरराष्ट्रीय प्रभाव: संयुक्त राष्ट्र परिसर पर पुलिस कार्रवाई से वैश्विक कानून के तहत अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कानूनी प्रतिरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इजराइली सुरक्षा बलों ने पूर्वी यरूशलम में किस संस्थान को जब्त किया है?\nइजराइली पुलिस और सुरक्षा बलों ने कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर पर कब्जा कर उसे बंद कर दिया है, जो पूर्वी यरूशलम में अनरवा का संचालित होने वाला आखिरी संस्थान था।\n\n2. कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर में किस तरह की ट्रेनिंग दी जाती थी?\n1952 में स्थापित यह सेंटर हर साल लगभग 340 युवाओं को कार मैकेनिक, बढ़ईगीरी और प्लंबिंग जैसे व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण प्रदान करता था।\n\n3. इजराइली सरकार ने इस अनरवा परिसर को बंद करने का आदेश क्यों दिया?\nप्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले साल पारित कानून का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि संस्था के कर्मचारी 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में शामिल थे।\n\n4. संयुक्त राष्ट्र ने इस पुलिस कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी है?\nयूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कार्रवाई की निंदा की, जबकि उनके प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यूएन परिसर पूरी तरह से सुरक्षित और निष्पक्ष होते हैं।\n\n5. इजराइली आरोपों पर संयुक्त राष्ट्र की जांच में क्या सामने आया?\nयूएन जांच में नौ मामलों में संभावित संलिप्तता का साक्ष्य मिलने पर अनुबंध समाप्त किए गए, जबकि अन्य दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए।\n\n6. जब्त किए गए परिसर का उपयोग इजराइली प्रशासन किस काम के लिए करना चाहता है?\nइजराइली अधिकारियों के अनुसार वहां से उपकरण हटाए जा रहे हैं और परिसर के एक हिस्से को सरकारी स्कूल में बदलने की योजना है।",
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  "publishedAt": "2026-08-26",
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