गाज़ा में नई रक्षात्मक दीवारें खड़ी कर रहा इज़राइल, विस्थापित परिवारों की बढ़ी मुसीबतें गाज़ा पट्टी में नियंत्रण रेखा पर बने पीले कंक्रीट ब्लॉकों और मिट्टी की ऊंची दीवारों के खिसकने से फ़िलिस्तीनी परिवारों को फिर से पलायन करना पड़ रहा है। सैन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार और सीमांकन बदलावों के कारण तटीय इलाके में मानवीय स्थिति गंभीर बनी हुई है। गाज़ा पट्टी के विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य बुनियादी ढांचे और भौतिक सीमाओं में व्यापक बदलाव देखे जा रहे हैं, जो इस तटीय इलाके में परिचालन स्थिति के एक नए दौर की ओर संकेत करते हैं। भारी मशीनरी, ऊंची मिट्टी की दीवारों और पीले कंक्रीट ब्लॉकों के विस्थापन के माध्यम से नियंत्रण रेखाओं को फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में और अंदर खिसकाया जा रहा है। जैसे-जैसे इन पीले ब्लॉकों को पश्चिम दिशा की ओर बढ़ाया जा रहा है, स्थानीय निवासियों को एक बार फिर से बेघर होना पड़ रहा है। महीनों से चले आ रहे संघर्ष के कारण पहले ही अपने मूल घरों को खो चुके हजारों परिवार अब सीमित और संकुचित होते क्षेत्रों में शरण लेने के लिए मजबूर हैं, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है। सीमांकन रेखाओं का विस्थापन और गाज़ा में नया विस्थापन संकट हाल के हफ़्तों में गाज़ा के भीतर सैन्य नियंत्रण के भौतिक स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है। उत्तरी गाज़ा के अल-तुफ्फाह जैसे इलाकों में सोमवार सुबह नागरिकों ने देखा कि नियंत्रण रेखा को चिन्हित करने वाले भारी पीले कंक्रीट ब्लॉकों को पश्चिम की ओर खिसका दिया गया है। इन विशाल ब्लॉकों को सलाह अल-दीन मार्ग के बिल्कुल मध्य में रख दिया गया है, जो गाज़ा पट्टी को उत्तर से दक्षिण तक जोड़ने वाली सबसे प्रमुख मुख्य सड़क है। इन नए ब्लॉकों के साथ ही लगभग 3 मीटर (10 फीट) ऊंची मिट्टी की दीवारें खड़ी की गई हैं, जिन पर सैन्य मौजूदगी दर्शाने वाले झंडे लगाए गए हैं। भौतिक संकेतकों के इस विस्थापन ने आसपास के इलाकों में रहने वाले परिवारों के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। अल-तुफ्फाह के वे निवासी, जिनके पक्के मकान युद्ध के शुरुआती चरणों में ही ध्वस्त हो गए थे, अस्थायी तंबू गाड़कर रहने को मजबूर थे। उम्म मोहम्मद अल-शाविश के परिवार जैसे कई लोगों के लिए नियंत्रण रेखा खिसकने से सुरक्षा की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई है। बार-बार एक जगह से दूसरी जगह विस्थापित होने वाले इस परिवार का तंबू पास की एक इमारत पर हुए हमले के कारण नष्ट हो गया। अब रहने के लिए नई जगह की तलाश में भटक रहे नागरिक बताते हैं कि सीमांकन चिह्नों का हर बदलाव उनके लिए जीवित रहने की जगह को और छोटा कर देता है। गाज़ा शहर के पूर्व में स्थित ज़ैतून क्षेत्र में भी अचानक विस्थापन की ऐसी ही स्थिति देखने को मिली है। 18 जुलाई को सैन्य प्रशासन द्वारा इलाका खाली करने के आदेश दिए जाने के बाद दर्जनों परिवारों को तुरंत भागना पड़ा। लोग हड़बड़ी में अपनी मोटरसाइकिलों पर गद्दे, घरेलू सामान और जो भी बुनियादी चीजें लाद सके, उन्हें लेकर निकल पड़े, जबकि कई लोग डर के मारे खाली हाथ ही भागने पर मजबूर हुए। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सैन्य वाहनों, क्वाडकोप्टर ड्रोन और तोपखाने की गोलाबारी के बीच लोगों ने इलाका छोड़ा। ज़ैतून के विस्थापित नागरिक इस्माइल कश्को ने बताया कि कंक्रीट के मकानों के बजाय तंबुओं में रहने वाले परिवारों के लिए सैन्य गतिविधियों का आगे बढ़ना सीधा जान का खतरा बन जाता है। मिट्टी की विशाल दीवारों से लेकर स्थायी सैन्य ठिकानों तक विस्तार आम नागरिकों के विस्थापन के साथ-साथ उपग्रह तस्वीरों और जमीनी विश्लेषण से पता चलता है कि नियत नियंत्रण गलियारों में व्यवस्थित सैन्य ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। गाज़ा के विभिन्न हिस्सों में मिट्टी के विशाल टीले और गहरी खाइयां बनाई गई हैं। दक्षिणी गाज़ा के अल-मवासी क्षेत्र के पास खुफिया विश्लेषण फर्म एमएआईएआर के संस्थापक टोनी रीव्स द्वारा किए गए उपग्रह चित्रों के अध्ययन से पता चलता है कि मिट्टी के कुछ टीलों की ऊंचाई 7 मीटर तक पहुंच गई है। इन रक्षात्मक दीवारों और टीलों के निर्माण के लिए व्यापक पैमाने पर जमीनों, सड़कों और कृषि क्षेत्रों को समतल कर दिया गया है। यह विस्तार केवल मिट्टी के काम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत पक्के सैन्य ठिकाने और रसद केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि नियत सीमा रेखा के साथ दर्जनों सैन्य बेस, अग्रिम चौकियां और ठहराव स्थल बनाए गए हैं। पिछले साल अक्टूबर में तय हुए संघर्षविराम समझौते के बाद से 14 नए सैन्य ठिकाने स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 2 ठिकानों पर वर्तमान में निर्माण कार्य जारी है। इसके अलावा संघर्षविराम से पहले स्थापित की गई 7 चौकियों का विस्तार किया गया है और उन्हें पक्की सड़कों व भारी सुरक्षा संरचनाओं से सुसज्जित किया गया है। बाधाओं के निर्माण से पहले कई नगर पालिकाओं में व्यवस्थित रूप से भूमि को खाली कराने और इमारतों को गिराने की प्रक्रिया चलाई गई है। जून के महीने में सबसे दक्षिणी शहर रफ़ा के पास सीमा दीवार का निर्माण शुरू होने से पहले, निर्माण पथ में आने वाली कई संरचनाओं और कृषि ग्रीनहाउस की कतारों को पूरी तरह से हटा दिया गया था। पड़ोसी शहर खान यूनिस में ड्रोन फुटेज से पता चलता है कि शुरुआती सीमांकन रेखा से परे इमारतों के समूहों को नियंत्रित विस्फोटों के माध्यम से ध्वस्त किया गया। जुलाई तक उपग्रह तस्वीरों ने खान यूनिस, देइर अल-बलाह, ज़ैतून, जबालिया और बेत लाहिया में दर्जनों अतिरिक्त आवासीय व वाणिज्यिक इमारतों के विनाश की पुष्टि की है। संघर्षविराम समझौते पर विवाद और क्षेत्रीय नियंत्रण के अलग-अलग आंकड़े जमीन पर हो रहे इन भौतिक बदलावों ने पिछले साल अक्टूबर में अमरीकी मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम समझौते के पालन को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इज़राइल और हमास के बीच तय की गई शर्तों के अनुसार, सैन्य बलों को 'येलो लाइन' के नाम से जानी जाने वाली सीमांकन रेखा के पीछे हटना था। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि येलो लाइन के पीछे का क्षेत्र, जो गाज़ा के कुल भूभाग का लगभग 53% हिस्सा है, अस्थायी सैन्य नियंत्रण में रहेगा। हालांकि समय के साथ नियंत्रित क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़ों में बदलाव आया है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया है कि सैन्य बल वर्तमान में गाज़ा के 60% से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। इससे पहले मई में दिए गए अपने एक बयान में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि उनका निर्देश परिचालन नियंत्रण को 70% तक बढ़ाने का था। दूसरी ओर, हमास ने इज़राइल पर येलो लाइन को पश्चिम की ओर खिसकाकर अक्टूबर के संघर्षविराम समझौते का सीधा उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों के जवाब में एक वरिष्ठ इजरायली सरकारी अधिकारी ने हमास के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा रेखाओं पर सैन्य तैनातियां नागरिकों की सुरक्षा और सशस्त्र समूहों को पुनर्गठित होने से रोकने के लिए आवश्यक परिचालन कदम हैं। सैन्य प्रवक्ताओं का कहना है कि चल रहा इंजीनियरिंग कार्य जमीन पर येलो लाइन की स्थिति को स्पष्ट और दृश्य रूप से चिन्हित करने के लिए किया जा रहा है ताकि किसी भी भ्रम या अप्रिय घटना को रोका जा सके। सैन्य अधिकारियों ने सीमा रेखा को खिसकाए जाने के दावों को खारिज किया है और कहा है कि उनका रक्षात्मक ढांचा सुरक्षा क्षेत्र, भौतिक अवरोधों, तकनीकी निगरानी और खुफिया क्षमताओं पर आधारित है। परिचालन सुरक्षा का हवाला देते हुए सेना ने सीमा रेखा के सटीक मार्ग या बुनियादी ढांचे के विवरण का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह दोहराया कि दक्षिणी कमान के तहत तैनात सैनिक समझौते के अनुसार ही अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। कृषि योग्य भूमि और शरणार्थी शिविरों पर उपग्रह मैपिंग का प्रभाव स्वतंत्र मैपिंग और भौगोलिक विश्लेषण मूल संघर्षविराम रेखाओं और वर्तमान जमीनी सीमाओं के बीच महत्वपूर्ण अंतर दर्शाते हैं। कुछ क्षेत्रों में मिट्टी के टीले और पीले कंक्रीट ब्लॉक उन इलाकों के काफी अंदर तक पहुंच गए हैं जिन्हें पहले फ़िलिस्तीनी नागरिकों के लिए निर्धारित किया गया था। दक्षिणी गाज़ा में अल-मवासी नागरिक क्षेत्र के पास उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि मिट्टी के तटबंध का एक बड़ा हिस्सा येलो लाइन के मूल मानचित्र से 1.5 किमी से अधिक अंदर तक फैला हुआ है। इसी तरह खान यूनिस क्षेत्र में रक्षात्मक दीवार का एक अन्य हिस्सा निर्धारित रेखा से 500 मीटर से अधिक आगे स्थित है। मध्य गाज़ा के शहर देइर अल-बलाह के पूर्व में स्थित कृषि क्षेत्रों और किसान परिवारों पर भी इसका भारी प्रभाव पड़ा है। स्थानीय किसानों के अनुसार, भारी मशीनों द्वारा भूमि को समतल किए जाने से पहले उन्हें केवल 2 दिनों का नोटिस दिया गया था। उपग्रह तस्वीरें क्षेत्र में टैंकों के पटरियों के निशान, ध्वस्त कृषि संरचनाओं और मूल येलो लाइन से 500 मीटर से अधिक दूर स्थित जैतून के बागों के विनाश की पुष्टि करती हैं। वहां से सत्यापित वीडियो में हाल ही में लगाए गए 3 पीले कंक्रीट ब्लॉक दिखाई देते हैं, जिनमें से सबसे दूर का ब्लॉक संघर्षविराम के समय निर्धारित नक्शे से 300 मीटर से अधिक आगे रखा गया है। अल-मवासी और गाज़ा शहर के पास विस्थापितों के शिविरों पर इस सीमा विस्तार के गंभीर मानवीय परिणाम हुए हैं। नागरिकों का कहना है कि पीले ब्लॉक तंबू शिविरों के करीब आते जा रहे हैं, जिसके साथ ही बख्तरबंद वाहनों की हलचल और गोलाबारी भी बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के आंकड़ों के अनुसार, ज़ैतून जिले में हालिया सैन्य गतिविधियों के दौरान लगभग 30 परिवारों के तंबू नष्ट हो गए, जिन्हें आपातकालीन सहायता की आवश्यकता पड़ी। जुलाई की उपग्रह तस्वीरों से स्पष्ट होता है कि ज़ैतून क्षेत्र से बड़ी संख्या में अस्थायी तंबू गायब हो गए क्योंकि लोगों को सुरक्षा की तलाश में फिर से पलायन करना पड़ा। विशेषज्ञों का आकलन और दीर्घकालिक रणनीतिक परिदृश्य सैन्य विश्लेषकों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्य का स्वरूप गाज़ा में दीर्घकालिक नियंत्रण की रणनीति को दर्शाता है। इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज (INSS) के वरिष्ठ शोधकर्ता और सेवानिवृत्त इजरायली ब्रिगेडियर जनरल असाफ ओरियन ने कहा कि पक्के सैन्य बेस, चौकियों और स्थायी मिट्टी के टीलों का निर्माण यह दर्शाता है कि सेना येलो लाइन के साथ लंबी उपस्थिति की तैयारी कर रही है, क्योंकि क्षेत्र में निरस्त्रीकरण की दिशा में बहुत कम प्रगति हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया है कि येलो लाइन एक अस्थायी परिचालन रेखा से बदलकर एक पक्की आंतरिक सीमा का रूप ले रही है। किंग्स कॉलेज लंदन के सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ एंड्रियास क्रीग के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्य दर्शाते हैं कि इज़राइल येलो लाइन को एक अस्थायी वापसी सीमा के बजाय एक वास्तविक आंतरिक सीमा में बदल रहा है। इस संरचनात्मक बदलाव से सुरक्षा बफर ज़ोन का विस्तार हो रहा है और गाज़ा के भीतर आवाजाही की स्वतंत्रता स्थायी रूप से प्रभावित हो रही है। गाज़ा की 20 लाख से अधिक की आबादी के लिए भौतिक सीमाओं का यह विस्तार अत्यधिक संकट पैदा कर रहा है। गाज़ा शहर में विस्थापित नागरिक अबू कामेल हममी ने बताया कि नियंत्रण रेखाओं के लगातार खिसकने के कारण परिवारों को एक भीड़भाड़ वाली सड़क से दूसरी सड़क पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मिट्टी के टीलों और कंक्रीट ब्लॉकों के कारण बड़ी मात्रा में भूमि तक पहुंच बंद होने से 20 लाख से अधिक लोग तेजी से सिमटते हुए क्षेत्र में जीवन यापन करने को मजबूर हैं, जिससे भोजन, पानी और आश्रय का संकट और गहराता जा रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संघर्षविराम रेखाओं पर सैन्य चौकियों के विस्तार से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ रहा है। गाज़ा और स्थानीय क्षेत्र में: सुरक्षा गलियारों के खिसकने और तंबुओं के नष्ट होने से 20 लाख से अधिक आम नागरिकों के लिए रहने की जगह और पानी-भोजन जैसी बुनियादी मानवीय मदद की उपलब्धता बेहद कठिन हो गई है। सवाल-जवाब 1. गाज़ा में 'येलो लाइन' क्या है? अक्टूबर के अमरीकी मध्यस्थता वाले संघर्षविराम समझौते के तहत इज़राइली सेना की वापसी के लिए तय की गई अस्थायी सीमांकन रेखा को 'येलो लाइन' कहा जाता है। 2. इज़राइल ने गाज़ा के कितने प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण का दावा किया है? संघर्षविराम समझौते में 53% हिस्से पर अस्थायी नियंत्रण की बात थी, लेकिन इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनकी सेना 60% से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखती है और इसे 70% करने का निर्देश दिया गया था। 3. येलो लाइन खिसकने से स्थानीय फ़िलिस्तीनियों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? पीले कंक्रीट ब्लॉकों और मिट्टी की दीवारों के पश्चिम की ओर बढ़ने से परिवारों को बार-बार अपने तंबू छोड़कर भागना पड़ रहा है और उनके रहने की जगह लगातार सिकुड़ रही है। 4. उपग्रह तस्वीरों में सैन्य बुनियादी ढांचे को लेकर क्या खुलासा हुआ है? तस्वीरें दर्शाती हैं कि अक्टूबर के समझौते के बाद से 14 नए सैन्य ठिकाने बनाए गए हैं, इमारतों को ध्वस्त किया गया है और 7 मीटर तक ऊंचे मिट्टी के टीले खड़े किए गए हैं। 5. हमास ने इज़राइल पर क्या आरोप लगाए हैं? हमास का आरोप है कि इज़राइल पीले ब्लॉकों को पश्चिम की ओर खिसकाकर अक्टूबर के संघर्षविराम समझौते का सीधा उल्लंघन कर रहा है। 6. सुरक्षा विशेषज्ञों का इस निर्माण कार्य पर क्या कहना है? विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य चौकियों और पक्की बाधाओं का निर्माण यह दर्शाता है कि इज़राइल इस अस्थायी रेखा को एक स्थायी आंतरिक सीमा में बदल रहा है और लंबी उपस्थिति की तैयारी कर रहा है। https://trendkia.com/middle-east/gaza-men-nai-rakshatmaka-divaren-khari-kara-raha-israel-visthapita-parivaron-ki-barhi-musibaten-12144 TrendKia — Har trend, sabse pehle.