ईरान के खिलाफ अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अभियान, स्कॉट बेसेंट बोले- ढहा देंगे सत्ता व्यवस्था अमेरि का के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव अभियान में शामिल होने की अपील की है। वॉशिंगटन का उद्देश्य नए सैन्य संघर्ष से बचते हुए तेहरान पर अधिकतम वित्तीय नियंत्रण स्थापित करना है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक और कठोर आर्थिक पाबंदियां लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक सहयोगियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि दुनिया भर के देशों को अब यह तय करना होगा कि वे वॉशिंगटन के साथ खड़े हैं या उसके खिलाफ। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक आर्थिक दबाव का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर सैन्य संघर्ष की आवश्यकता को खत्म करना और तेहरान के राजस्व स्रोतों को पूरी तरह ठप करना है। सहयोगियों के सामने अल्टीमेटम और वैश्विक आर्थिक घेराबंदी एक टेलीविजन साक्षात्कार के दौरान वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी विदेशी बैंक, वित्तीय संस्थान या व्यापारिक कंपनियां ईरान के साथ लेन-देन करेंगी या वहां से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेंगी, उनके खिलाफ अमेरिकी वित्त विभाग पूरी सख्ती से कार्रवाई करेगा। वॉशिंगटन इस योजना को वैश्विक इतिहास की सबसे बड़ी और समन्वित आर्थिक घेराबंदी के रूप में देख रहा है। इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश और भावी कदमों की घोषणा 24 अगस्त को एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की जाएगी। फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष और होर्मुज की खाड़ी में संकट अमेरिका और इज़राइल ने फरवरी के महीने में ईरान के संभावित परमाणु हथियार विकास को रोकने के नाम पर सैन्य हमले शुरू किए थे, हालांकि तेहरान ने परमाणु हथियार बनाने के आरोपों को लगातार खारिज किया है। इन हमलों के जवाब में ईरान ने इज़राइल, मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों को निशाना बनाया। इस संघर्ष के दौरान ईरान ने होर्मुज की खाड़ी से होने वाले जहाजों के आवागमन को बड़े पैमाने पर बाधित कर दिया। वैश्विक स्तर पर कुल उपभोग होने वाले कच्चे तेल और तरल प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। विफल संघर्षविराम और ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी कूटनीतिक वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अप्रैल और जून के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच दो बार अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर संघर्षविराम का उल्लंघन होता रहा और बातचीत का दौर अंततः रुक गया। इसके बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन और वित्त विभाग ने मिलकर ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी नाम से एक व्यापक रणनीति तैयार की। इस अभियान का उद्देश्य नौसैनिक नाकेबंदी के जरिए ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह रोकना और उसके युद्ध लड़ने के वित्तीय सामर्थ्य को खत्म करना है। इससे पहले अप्रैल में भी अमेरिका ने उन विदेशी संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे जो तेहरान के साथ व्यापार कर रही थीं, क्योंकि शुरुआती सैन्य कार्रवाइयों से सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य हासिल नहीं हो सके थे। ईरान के नागरिकों की प्रतिक्रिया और जमीनी स्थिति ईरान के भीतर से सामने आ रही प्रतिक्रियाओं में वहां के निवासियों ने नए अमेरिकी आर्थिक दबाव को लेकर मिश्रित विचार व्यक्त किए हैं। मध्य ईरान के खुज़ेस्तान प्रांत के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि ईरान दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करता आ रहा है और देश में इन परिस्थितियों से निपटने का लंबा अनुभव है। उनके अनुसार शुरुआत में अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि देश इस संकट से बाहर नहीं निकल पाएगा। वहीं एक अन्य नागरिक ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी से जमीनी हकीकत तुरंत नहीं बदलती। ईरानी जनता पाबंदियों के बीच जीने की आदी हो चुकी है और व्यापार जारी रखने के लिए नए रास्ते तलाश लिए जाएंगे। इसका आप पर असर • वैश्विक बाजार में: अमेरिका द्वारा ईरान पर सख्त नाकेबंदी और तेल व्यापार पर पाबंदी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ईंधन लागत में उछाल आ सकता है। • भारत में: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से आयातित ईंधन और गैस की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आम नागरिकों के परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च पर असर पड़ने की संभावना है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान को लेकर क्या बयान दिया है? स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक दबाव बनाने जा रहा है ताकि उसकी सत्ता व्यवस्था को ध्वस्त किया जा सके और बड़े सैन्य टकराव से बचा जा सके। 2. ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी का मुख्य उद्देश्य क्या है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय और वित्त विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मकसद नौसैनिक नाकेबंदी के जरिए ईरान के तेल निर्यात को रोकना और उसकी सैन्य गतिविधियों के लिए वित्तीय संसाधनों को खत्म करना है। 3. होर्मुज की खाड़ी क्यों महत्वपूर्ण है? होर्मुज की खाड़ी दुनिया का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है जहां से विश्व के कुल कच्चे तेल और एलएनजी व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। 4. तीसरे देशों की कंपनियों को अमेरिका ने क्या चेतावनी दी है? अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी बैंक या कंपनियां ईरान के साथ वित्तीय लेनदेन करेंगी या वहां से तेल खरीदेंगी, उन पर अमेरिकी वित्त विभाग सख्त कानूनी प्रतिबंध लगाएगा। 5. नए अमेरिकी प्रतिबंधों की विस्तृत घोषणा कब होगी? अमेरिकी प्रशासन 24 अगस्त को आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आर्थिक प्रतिबंधों की विस्तृत रूपरेखा पेश करेगा। https://trendkia.com/middle-east/iran-ke-khilapha-us-ka-aba-taka-ka-sabase-bara-arthika-abhiyana-scott-bessent-bole-dhaha-denge-satta-vyavastha-19382 TrendKia — Har trend, sabse pehle.