# इजरायली एयरस्ट्राइक के तुरंत बाद पाकिस्तान पहुंचे सीरियाई विदेश मंत्री, क्या क्षेत्रीय रक्षा समझौते में शामिल होगा दमिश्क?

> उत्तर-पश्चिमी सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इजरायल के आठ हवाई हमलों के अगले ही दिन सीरियाई विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी इस्लामाबाद पहुंचे। मक्का सुरक्षा समझौते और बदलते रणनीतिक घटनाक्रम के बीच इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** मध्य पूर्व · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/middle-east/israel-airstrike-ke-turnta-bada-pakistan-pahunche-syria-videsha-mntri-kya-kshetriya-raksha-samajhaute-men-shamila-hoga-damascus-18702 · **Language:** Hindi
**Tags:** सीरिया, इजरायल, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब, इस्लामिक नाटो, मध्य पूर्व तनाव, असद हसन अल-शैबानी

उत्तर-पश्चिमी सीरिया में स्थित अबू अल-दुहूर एयरबेस पर 18 अगस्त को हुए इजरायली हवाई हमलों ने मध्य पूर्व में एक नया कूटनीतिक और रणनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है। इजरायल द्वारा दागी गई आठ मिसाइलों ने न केवल सैन्य ठिकाने के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, बल्कि सीरिया के नए शासन की उभरती विदेश नीति को भी चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस घटनाक्रम का सबसे आश्चर्यजनक मोड़ हमले के ठीक अगले दिन देखने को मिला, जब सीरिया के विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी 19 अगस्त को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। इस उच्चस्तरीय दौरे ने उन अटकलों को बेहद तेज कर दिया है कि क्या दमिश्क भी हाल ही में गठित उस क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के करीब जा रहा है, जिसे विश्लेषक इस्लामिक नाटो की संज्ञा दे रहे हैं।

## इस्लामाबाद में कूटनीतिक हलचल और ऐतिहासिक दौरा
सीरियाई विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी 19 और 20 अगस्त को पाकिस्तान की यात्रा पर रहे। उन्हें पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने आमंत्रित किया था। राजनयिक दृष्टिकोण से यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है। वर्ष 2007 के बाद यह पहला मौका है जब सीरिया के किसी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की धरती पर कदम रखा है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद दमिश्क में बनी नई सरकार के किसी कैबिनेट मंत्री का भी यह पहला इस्लामाबाद दौरा है। दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधिमंडलों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, आर्थिक व तकनीकी सहयोग बढ़ाने और तेजी से बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरे के दौरान पाकिस्तान ने इजरायल द्वारा सीरियाई एयरबेस पर किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों व क्षेत्रीय संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन करार दिया।

## अबू अल-दुहूर एयरबेस पर दावे और तुर्की की मौजूदगी
इजरायल की सैन्य कार्रवाई का प्राथमिक केंद्र बना अबू अल-दुहूर एयरबेस तुर्की की सीमा से महज 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इजरायली रक्षा अधिकारियों का तर्क था कि सीरिया इस एयरबेस पर तुर्की के सैनिकों की तैनाती की अनुमति देने की तैयारी कर रहा था, जिससे क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था। हालांकि, तुर्की और सीरिया दोनों ने ही इजरायल के इस दावे का खंडन किया है। मध्य पूर्व मामलों पर नजर रखने वाले प्रकाशन मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीरियाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एयरबेस पर मौजूद तुर्की की टीम किसी लड़ाकू सैन्य तैनाती के लिए नहीं आई थी। वह टीम केवल हवाई पट्टी और कंट्रोल टावर के तकनीकी जीर्णोद्धार व मरम्मत कार्य में लगी हुई थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि तुर्की की तकनीकी टीम इजरायली बमबारी से ठीक दो दिन पहले ही वहां से अपना काम पूरा करके लौट चुकी थी।

## मक्का रक्षा समझौता और क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव
इस पूरे मामले की गंभीरता 7 अगस्त को सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हुए एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते से जुड़ी हुई है। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक त्रिपक्षीय संयुक्त सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत तीनों देश रक्षा उत्पादन, साझा सैन्य अभ्यास और सामरिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सहमत हुए हैं। इस समझौते में यह प्रावधान भी शामिल है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यद्यपि तुर्की ने यह स्पष्ट किया है कि यह गठबंधन इजरायल या ईरान जैसे किसी विशिष्ट देश को लक्षित करके नहीं बनाया गया है, फिर भी रणनीतिक जानकार इसे क्षेत्र में एक नए सुरक्षा ब्लॉक के रूप में देख रहे हैं। तुर्की वर्तमान में सीरिया के नए शासन का सबसे बड़ा क्षेत्रीय समर्थक है और वहां के सैन्य ढांचे के पुनर्निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ऐसे में सीरियाई एयरबेस पर हमला सीधे तौर पर तुर्की के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।

## वाशिंगटन की नाराजगी और नाटो से जुड़ी चिंताएं
इजरायल के इस कदम से अमेरिकी प्रशासन में भी गहरी असहजता देखी जा रही है। वाशिंगटन सीरिया की नई सरकार के साथ अपने राजनयिक संबंधों को पटरी पर लाने का प्रयास कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीरिया मामलों के विशेष दूत और तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बराक ने इजरायली कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं। अमेरिका अब इजरायल, तुर्की और सीरिया के बीच एक त्रिपक्षीय सैन्य संवाद तंत्र स्थापित करने की कोशिश कर रहा है ताकि भविष्य में किसी भी आकस्मिक सैन्य टकराव को रोका जा सके। टॉम बराक के अनुसार, हमले के वक्त तुर्की को पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, जिससे ऐसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती थी जहां तुर्की के लड़ाकू विमान आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई के लिए उड़ान भर लेते। चूंकि तुर्की नाटो का एक प्रमुख सदस्य है, इसलिए उसके खिलाफ कोई भी अप्रत्याशित सैन्य घटनाक्रम नाटो संधि के दायरा-ए-इख्तियार को भी प्रभावित कर सकता है।

## क्या 'इस्लामिक नाटो' का हिस्सा बनेगा सीरिया?
मक्का समझौते के बाद से ही इस बात की चर्चाएं गर्म हैं कि मिस्र इस नए त्रिपक्षीय सुरक्षा ब्लॉक का अगला सदस्य बन सकता है। हालांकि, इजरायली हवाई हमलों के बाद बने नए हालात ने सीरिया की संभावित भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है। यद्यपि अभी तक सीरिया के इस समझौते में शामिल होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन घटनाओं के क्रम ने रणनीतिक विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक तरफ जहां तुर्की सीरिया के साथ रक्षा और बुनियादी ढांचे के स्तर पर रिश्ते मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने इजरायल के खिलाफ दमिश्क का खुलकर समर्थन किया है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की का यह नया त्रिगुट मध्य पूर्व में एक शक्तिशाली धड़ा बनकर उभर रहा है। ऐसे में इजरायल की आक्रामक कार्रवाई अनजाने में सीरिया को उसी गुट के और करीब धकेल सकती है, जिसे दूर रखना इजरायल की प्राथमिकता रही है।

## इसका आप पर असर
**वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता:** मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।

**रणनीतिक सैन्य समीकरण:** एशियाई और मध्य पूर्वी देशों के बीच मजबूत होता नया रक्षा ढांचा वैश्विक सुरक्षा प्राथमिकताओं और कूटनीतिक संबंधों में बदलाव ला सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. 18 अगस्त को अबू अल-दुहूर एयरबेस पर क्या हुआ था?
इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में स्थित अबू अल-दुहूर एयरबेस पर आठ हवाई हमले किए, जिससे वहां के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

### 2. सीरिया के विदेश मंत्री ने इजरायली हमले के बाद किस देश का दौरा किया?
हमले के अगले दिन 19 अगस्त को सीरिया के विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे।

### 3. 7 अगस्त को मक्का में किस सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे?
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर दस्तखत किए थे, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।

### 4. इजरायली हमले पर अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया थी?
अमेरिकी राजदूत और विशेष दूत टॉम बराक ने इजरायली हमले को बेवजह का तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया और कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के अनुकूल नहीं है।

### 5. क्या सीरिया आधिकारिक तौर पर 'इस्लामिक नाटो' में शामिल हो गया है?
नहीं, सीरिया के इस रक्षा समझौते में शामिल होने की अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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