इजरायल ने खारिज किया अमेरिकी शांति प्रस्ताव, बेंजामिन नेतन्याहू बोले हमास के निरस्त्रीकरण तक गाजा से नहीं हटेगी सेना इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भेजे गए शांति मसौदे पर असहमति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमास के पूरी तरह हथियार डालने से पहले इजरायली सेना गाजा की अपनी मौजूदा तैनातियों से पीछे नहीं हटेगी। गाजा में जंगबंदी और शांति स्थापित करने की अमेरिकी कोशिशों के बीच इजरायल के रुख ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए हालिया शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक हमास पूरी तरह अपने हथियार नहीं डाल देता, तब तक इजरायली सेना गाजा में अपनी मौजूदा सैन्य तैनातियों से पीछे नहीं हटेगी। नेतन्याहू के इस बयान से ट्रंप प्रशासन और इजरायल के बीच नीतिगत मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी प्रस्ताव से असहमति और इजरायल की शर्त बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन द्वारा तैयार किए गए शुरुआती मसौदे पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने एक ड्राफ्ट भेजा था, लेकिन इजरायल उससे सहमत नहीं था क्योंकि वह उनका अपना ड्राफ्ट नहीं था। इजरायल ने अपनी विस्तृत राय और शर्तें अमेरिकी पक्ष को सौंप दी हैं और वही उसका अंतिम रुख है। नेतन्याहू का मानना है कि गाजा में किसी भी तरह के समझौते या सैन्य वापसी से पहले हमास का निरस्त्रीकरण प्राथमिक शर्त होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायली सेना अपने नागरिकों और क्षेत्रीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए जो भी कदम जरूरी होंगे, उन्हें उठाना जारी रखेगी। 60 प्रतिशत क्षेत्र से वापसी की योजना पर संशय प्रस्तावित डील के मुख्य खाके के तहत इजरायल को अपने सैन्य हमले रोककर गाजा के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से से अपनी सेना पीछे हटानी थी, जिस पर वर्तमान में उसका नियंत्रण है। इसके बदले में हमास के हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू होनी थी। यह नया प्रस्ताव अक्टूबर में हुए उस ऐतिहासिक सीजफायर समझौते पर आधारित था, जिसने गाजा में बड़े पैमाने पर जारी सैन्य अभियानों को रोका था और बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया था। हालांकि, उस शुरुआती सफलता के बाद राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। सुरक्षा चिंताओं पर प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन का बयान इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने सेना की समयपूर्व वापसी के गंभीर दुष्परिणामों की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि हमास के निरस्त्रीकरण से पहले इजरायली सेना गाजा से हटती है, तो हमास बेहद तेजी से पूरे गाजा पट्टी पर दोबारा अपना नियंत्रण स्थापित कर लेगा। स्पीलमैन के अनुसार, हमास अपने ध्वस्त हो चुके आतंकी नेटवर्क को फिर से खड़ा कर सकता है, जिससे इजरायली बस्तियों के लिए गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने अंदेशा जताया कि ऐसी स्थिति में 7 अक्टूबर 2023 जैसे विनाशकारी हमलों की पुनरावृत्ति हो सकती है, जिसे रोकना इजरायल की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसका आप पर असर विश्व स्तर पर: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और शांति वार्ता में गतिरोध से वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। भारत में: मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता से समुद्री व्यापार मार्गों पर आपूर्ति शृंखला और वैश्विक ऊर्जा दरों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर क्या कहा है? बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रशासन के ड्राफ्ट पर असहमति जताते हुए कहा कि हमास के पूरी तरह हथियार डाले बिना इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। 2. प्रस्तावित शांति डील के तहत इजरायल को कितना क्षेत्र खाली करना था? प्रस्तावित डील के तहत इजरायल को गाजा के उस 60 प्रतिशत हिस्से से अपनी सेना हटानी थी जिस पर उसका नियंत्रण है। 3. डोरोन स्पीलमैन ने सेना हटाने को लेकर क्या चेतावनी दी? डोरोन स्पीलमैन ने चेतावनी दी कि हमास के निरस्त्रीकरण से पहले सेना हटाने पर वह गाजा में फिर से पैर जमा लेगा और 7 अक्टूबर 2023 जैसे हमले दोहरा सकता है। 4. यह प्रस्तावित डील किस पिछले समझौते पर आधारित थी? यह डील अक्टूबर में हुए उस सीजफायर समझौते पर आधारित थी जिसने बड़े सैन्य ऑपरेशंस रोके थे और बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की थी। https://trendkia.com/middle-east/israel-ne-kharija-kiya-us-shanti-prastava-benjamin-netanyahu-bole-hamas-ke-nirastrikarana-taka-gaza-se-nahin-hategi-sena-13960 TrendKia — Har trend, sabse pehle.