किबुत्ज नीर ओज के मलबे से जिंदगी को फिर संवारने की कोशिश, 7 अक्टूबर के खौफनाक हमले के तीन साल बाद वापसी की जद्दोजहद गाजा सीमा से केवल 1.6 किलोमीटर दूर स्थित किबुत्ज नीर ओज में 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के तीन साल बाद बचे हुए लोग अपने तबाह घरों को फिर से बसाने और गहरे मानसिक जख्मों से उबरने के बीच जूझ रहे हैं। किबुत्ज नीर ओज का कभी गुलजार रहने वाला डाइनिंग हॉल आज वीरान पड़ा है और उसकी गिरी हुई छतों के बीच कबूतरों की आवाजें गूंज रही हैं। चार सौ लोगों की यह खुशहाल और आपसी मेलजोल से भरी बस्ती 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए भीषण हमलों में पूरी तरह तबाह हो गई थी। यहां की बाशिंदा दलित राम अहारोन अपने पति अची के साथ इस सन्नाटे में कदम रखते हुए याद करती हैं कि कैसे कभी पूरा समुदाय यहां एक साथ भोजन करने, उत्सव मनाने और विभिन्न आयोजनों में शामिल होने आता था। आज उसी कांच के मुख्य द्वार पर गोलियों के अनगिनत निशान मौजूद हैं, जो उस दिन की भयावहता की गवाही देते हैं। पोस्टमंदिरों पर लगे लाल और काले निशान बयां करते हैं खौफनाक दास्तान प्रवेश द्वार के पास स्थित लेटरबॉक्स पर लगे स्टिकर हर परिवार की बर्बादी का हिसाब बताते हैं। तीन साल पहले हुए हमलों के तुरंत बाद यहां लाल और काले रंग के स्टिकर लगाए गए थे। लाल रंग उन लोगों की याद दिलाता है जिन्हें मौत के घाट उतार दिया गया, जबकि काले रंग के स्टिकर उन लोगों के लिए हैं जिनका अपहरण कर लिया गया था। दलित बताती हैं कि नीर ओज के हर चार में से एक व्यक्ति को या तो मार डाला गया या फिर बंधक बना लिया गया, जिनमें मासूम बच्चे और नवजात शिशु भी शामिल थे। गाजा सीमा से महज 1.6 किलोमीटर (एक मील) की दूरी पर स्थित यह किबुत्ज उस हमले में सबसे ज्यादा तबाह होने वाले इलाकों में से एक था। सिमान तोव परिवार का जला हुआ आशियाना और आखिरी संदेश पास ही सिमान तोव परिवार का जला हुआ मकान आज भी जस का तस खड़ा है, जिसके दरवाजे पर एक विंड चाइम लटक रही है। घर में लगी एक पुरानी तस्वीर में तामार और योनातन अपने तीन मासूम बच्चों—पांच साल की जुड़वां बेटियों शहार और अरबेल, तथा दो साल के बेटे ओमेर—के साथ मुस्कुराते दिखते हैं। हमलावरों ने इस परिवार को उनके सुरक्षित कमरे (बॉम्ब शेल्टर) के दरवाजे से गोलियां दागकर मार डाला था। दरअसल वे सुरक्षित कमरे गाजा से दागे जाने वाले रॉकेटों से बचने के लिए बनाए गए थे, हथियारों से लैस हमलावरों की सीधी गोलीबारी झेलने के लिए नहीं। दलित, जिन्होंने खुद अपने पति अची और तीन बच्चों के साथ सुरक्षित कमरे में करीब 12 घंटे छिपकर जान बचाई थी, तामार द्वारा पड़ोसियों के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे गए आखिरी संदेशों को याद करती हैं। उस सुबह तामार ने पहले पूछा था कि क्या सब ठीक हैं, फिर कुछ देर बाद लिखा कि उन पर गोलियां चलाई जा रही हैं। इसके बाद ढेर सारी गलतियों के साथ उन्होंने अंतिम संदेश भेजा कि वे बहुत गंभीर रूप से घायल हैं। बाद में पता चला कि हमलावरों ने उनके घर को आग लगा दी थी, जिससे दम घुटने के कारण बच्चों की मौत हो गई और पूरा परिवार खत्म हो गया। हमले का दायरा, बंधक और सुरक्षा बलों की विफलता हमास की विशेष नुखबा फोर्स के लड़ाकों की अगुवाई में लगभग 500 फलस्तीनी इस अप्रत्याशित हमले में शामिल हुए थे, जिनमें लूटपाट करने वाले आम नागरिक और बच्चे भी शामिल थे। नीर ओज के 41 स्थानीय निवासियों और विदेशी कामगारों की हत्या कर दी गई, साथ ही पास की एक पार्टी से भागकर किबुत्ज में शरण लेने आए छह अन्य लोग भी मारे गए। किबुत्ज के 76 लोगों का गाजा में अपहरण कर लिया गया, जिनमें 9 शव भी शामिल थे। जिंदा ले जाए गए 14 बंधकों की बाद में कैद में ही मौत हो गई। नीर ओज से जीवित बचे आखिरी बंधकों को 13 अक्टूबर 2025 को इजरायल वापस लाया गया, जबकि आखिरी मृत बंधक अमीराम कूपर के अवशेष इसके दो हफ्ते बाद स्वदेश लाए गए। इजरायली डिफेंस फोर्सेज की आधिकारिक जांच में यह कड़वी सच्चाई सामने आई कि उस दिन सेना का तंत्र पूरी तरह लड़खड़ा गया था। 20 से अधिक बस्तियों और कई सैन्य चौकियों पर एक साथ हुए अभूतपूर्व हमलों के कारण सेना समय पर नीर ओज नहीं पहुंच सकी। पहले इजरायली सैनिक अंतिम हमलावर के जाने के करीब 40 मिनट बाद वहां पहुंचे। किबुत्ज के लगभग हर घर ने हत्या, लूटपाट, यौन उत्पीड़न और अपहरण की असहनीय पीड़ा झेली। शीरी बिबास और मासूम बच्चों की दर्दनाक यादें वीरान पड़े रास्तों पर चलते हुए दलित उस पेड़ के पास रुकती हैं, जिसे उनके माता-पिता ने दशकों पहले लगाया था। उनके माता-पिता इस किबुत्ज के संस्थापकों में शामिल थे, जो अपनी खेती और शांति पहलों के लिए जाने जाते थे। वे 7 अक्टूबर के हमले में शारीरिक रूप से सुरक्षित बच गए थे, लेकिन इस सदमे के कुछ ही महीनों बाद उनका निधन हो गया। उसी के पास शीरी बिबास का छोटा सा घर है। शीरी और उनके दो लाल बालों वाले बेटे—चार वर्षीय एरियल और नौ महीने का कफिर—गाजा बंधक संकट का सबसे बड़ा मानवीय चेहरा बन गए थे। दलित भारी मन से बताती हैं कि शीरी उनकी सबसे करीबी सहेली और बहन जैसी थीं। दोनों एक ही समय पर गर्भवती हुई थीं, एक तरफ उनकी बेटी और दूसरी तरफ एरियल, जो बाद में गहरे दोस्त बन गए थे। शीरी बेहद खुशमिजाज और सरल जीवन जीने वाली मां थीं, जिन्होंने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा था। शीरी के पति यारदेन बिबास को फरवरी 2025 में हुए संघर्षविराम समझौते के तहत जीवित रिहा कर दिया गया था, लेकिन किसी अन्य हथियारबंद समूह की गिरफ्त में रहीं शीरी और उनके दोनों बच्चों की हत्या कर दी गई। हमास ने इसका दोष युद्ध की शुरुआत में हुए हवाई हमले पर मढ़ा, लेकिन फरवरी में शवों की वापसी के बाद इजरायली फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बंधकों की हत्या उनके कब्जेदारों ने की थी और उनके शवों को क्षत-विक्षत किया गया था। पुनर्निर्माण की चुनौती और सुरक्षित कमरों की कतारें यारदेन बिबास समेत कई पीड़ित परिवार नीर ओज को हमेशा के लिए छोड़कर चले गए हैं। हालांकि 20 घरों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के बाद कुछ पूर्व बंधक यहां वापस लौटे हैं। इनमें किबुत्ज के सह-संस्थापक गादी मोसेस (गाजा युद्ध के दौरान रिहा हुए सबसे उम्रदराज पुरुष बंधक) और याइर हॉर्न शामिल हैं, जो अब धीरे-धीरे अपने जीवन को समेटने की कोशिश कर रहे हैं। दलित और अची भी वापस लौटने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं। दलित का कहना है कि वे शीरी और उन सभी दोस्तों की याद में वापस लौटेंगे जिन्हें जीने का मौका नहीं मिला, अपने माता-पिता की विरासत और अपनी जड़ों को सींचने के लिए लौटेंगे क्योंकि यही उनका असली घर है। लेकिन फिलहाल वे उत्तर के एक शहर में विस्थापितों की तरह रह रहे हैं और नीर ओज के पूरी तरह बसने में अभी करीब दो साल का वक्त बाकी है। पुनर्निर्माण परियोजना की निदेशक एमी पालमोर के अनुसार, हमलावरों ने 97 प्रतिशत घरों में घुसपैठ की थी और लगभग 50 प्रतिशत घरों को पूरी तरह जला दिया था। नीर ओज इजरायल का एकमात्र ऐसा इलाका बन गया है जिसे पूरी तरह से ध्वस्त करके नए सिरे से योजनाबद्ध तरीके से बनाना पड़ रहा है। यादों को सहेजने और जख्मों को कुरेदने के बीच गहरा द्वंद्व समुदाय के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए गांव का स्वरूप कैसा हो। एमी पालमोर कहती हैं कि यह बेहद संवेदनशील और दर्दनाक बहस है। कुछ लोगों का मानना है कि जब वे लौटें तो पूरा माहौल शांत और सुंदर दिखना चाहिए ताकि उन्हें रोज-रोज उन अपनों की याद का दर्द न सताए जिन्हें वे खो चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ दलित और अची जैसे लोगों का तर्क है कि तबाही के कुछ खंडहरों को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस बर्बरता और नफरत की हकीकत को अपनी आंखों से देख सकें और कोई भी इस त्रासदी को नकार न सके। अची और दलित उस जगह को दिखाते हैं जहां किंडरगार्टन में शिक्षिका माया गोरेन की हत्या की गई थी, और वे स्मारक भी दिखाते हैं जहां किबुत्ज की सात सदस्यीय सुरक्षा टीम के तीन जांबाज हमलावरों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। अब कई जले हुए साधारण घरों को गिरा दिया गया है, जिससे कंक्रीट के सुरक्षित कमरों की कतारें नंगी नजर आ रही हैं। तीन साल बाद का व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजरायल पर लगभग 6,000 फलस्तीनियों के सीमा पार करने के बाद करीब 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बनाया गया था। इसके बाद शुरू हुए युद्ध में गाजा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 74,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिन आंकड़ों को संयुक्त राष्ट्र भी विश्वसनीय मानता है। अमेरिकी मध्यस्थता वाले जिस समझौते के तहत एक साल पहले आखिरी बंधकों की वतन वापसी हुई थी, उसके बावजूद हिंसा पूरी तरह नहीं थमी है और गाजा पर इजरायली हमले जारी हैं। गाजा की 2.1 मिलियन की लगभग पूरी आबादी विस्थापित हो चुकी है और इलाका खंडहर में तब्दील है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना भी गतिरोध में फंसी हुई है। इजरायल के भीतर सुरक्षा बलों की विफलता और जवाबदेही को लेकर आज भी गहरे सवाल कायम हैं। नीर ओज के निवासी एक व्यापक राज्य स्तरीय जांच आयोग की मांग कर रहे हैं और उनके मन में सुरक्षा को लेकर भारी संशय बना हुआ है। जीवित बचे लोग पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से जूझ रहे हैं। दलित याद करती हैं कि उनका सबसे बड़ा बेटा उरी 7 अक्टूबर 2023 को नौ साल का हुआ था, जब उन्होंने पूरा दिन बंकर में बिताया था। उस मासूम ने रोते हुए कहा था कि वह अपने जन्मदिन पर मरना नहीं चाहता। दलित कहती हैं कि बाहर की दुनिया यह नहीं समझ सकती कि वे आज भी उसी खौफनाक दिन को हर पल जी रहे हैं। इस बरसी पर राहत बस इतनी है कि गाजा में अब कोई बंधक नहीं बचा है, और अची मानते हैं कि अब समय अपने भीतर के बिखराव को समेटने और मानसिक रूप से संभलने का है। इसका आप पर असर किबुत्ज नीर ओज का पुनर्निर्माण संघर्षग्रस्त सीमावर्ती क्षेत्रों में विस्थापन, सुरक्षा और ट्रॉमा से जूझ रहे लोगों की वास्तविक चुनौतियों को उजागर करता है। • विस्थापित परिवारों के लिए: बचे हुए परिवारों को अपने घरों में लौटने के लिए कम से कम दो साल का लंबा इंतजार करना होगा। इस दौरान उन्हें विस्थापन शिविरों या अस्थायी अपार्टमेंटों में रहते हुए अपनी जिंदगी पटरी पर लानी होगी। • पुनर्निर्माण और सुरक्षा नियम: सीमावर्ती क्षेत्रों में रिहायशी बंकरों के सुरक्षा मानकों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। अब साधारण रॉकेट शेल्टर की जगह सीधे हथियारों के हमलों को झेलने वाले मजबूत ढांचे बनाए जाएंगे। • मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा: बचे हुए लोगों और बच्चों में गहरे पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस के दीर्घकालिक इलाज की सख्त जरूरत है। बिना किसी बंधक के पहली बरसी आने पर अब परिवारों का ध्यान पूरी तरह व्यक्तिगत मानसिक सुधार पर केंद्रित हो रहा है। • क्षेत्रीय शांति और स्थिरता: गाजा सीमा पर स्थायी सुरक्षा गारंटी के अभाव में आम नागरिकों की सुरक्षित वापसी अब भी अनिश्चित है। जब तक सीमा पार तनाव और हमले पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक पूर्ण सामान्य स्थिति बहाल होना मुश्किल है। ऐसा क्यों हुआ किबुत्ज नीर ओज की तबाही 7 अक्टूबर 2023 को सीमा पार से हुए व्यापक हमले और इजरायली सुरक्षा बलों के अप्रत्याशित विफलता तंत्र के कारण हुई। • सीमा से अत्यधिक नजदीकी: नीर ओज गाजा सीमा से केवल 1.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। इस नजदीकी के कारण सीमा बाड़ टूटने के चंद मिनटों के भीतर हमलावर बिना किसी शुरुआती रुकावट के घरों में घुस गए। • सैन्य सहायता का अभाव: इजरायली सेना की आधिकारिक जांच के अनुसार एक साथ 20 से अधिक जगहों पर हमले होने से सेना में भारी अव्यवस्था फैल गई थी। अंतिम हमलावर के निकलने के 40 मिनट बाद तक वहां कोई भी सैनिक बचाव के लिए नहीं पहुंच सका था। • सुरक्षित कमरों की तकनीकी सीमा: घरों में मौजूद सुरक्षित कमरे मुख्य रूप से रॉकेट हमलों और छर्रों से बचाव के लिए बने थे। वे हमलावरों द्वारा दरवाजों पर की गई सीधी गोलीबारी और आगजनी को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। • हमलावरों की भारी तादाद: हमास के नुखबा कमांडो समेत करीब 500 हमलावरों ने इस छोटे से किबुत्ज को घेर लिया था। स्थानीय सात सदस्यीय सुरक्षा दल इतनी भारी संख्या के आगे ज्यादा देर टिक नहीं सका। सवाल-जवाब 1. किबुत्ज नीर ओज पर 7 अक्टूबर 2023 को क्या हुआ था? लगभग 500 फलस्तीनी हमलावरों ने नीर ओज पर हमला किया था, जिसमें 41 स्थानीय लोग और छह अन्य शरणार्थी मारे गए तथा 76 लोगों का अपहरण कर लिया गया था। 2. किबुत्ज के कितने घरों को नुकसान पहुंचा था? हमलावरों ने 97 प्रतिशत घरों में घुसपैठ की थी और लगभग 50 प्रतिशत मकानों को पूरी तरह जला दिया था, जिसके चलते पूरे गांव को नए सिरे से बनाना पड़ रहा है। 3. नीर ओज के सभी बंधक कब वापस लौटे? जीवित बचे आखिरी बंधक 13 अक्टूबर 2025 को इजरायल लौटे, जबकि अंतिम मृतक बंधक अमीराम कूपर के अवशेष उसके दो सप्ताह बाद वापस लाए गए। 4. बचे हुए लोगों को पूरी तरह लौटने में कितना समय लगेगा? पुनर्निर्माण परियोजना के अनुसार पूरे किबुत्ज को दोबारा तैयार होने और सभी निवासियों के वापस लौटने में अभी करीब दो साल का समय लगेगा। 5. शीरी बिबास और उनके बच्चों के साथ क्या हुआ था? शीरी बिबास और उनके दो बेटों की गाजा में कैद के दौरान हत्या कर दी गई थी, जबकि उनके पति यारदेन बिबास को फरवरी 2025 में जीवित रिहा किया गया। 6. गांव के पुनर्निर्माण को लेकर निवासियों में क्या विवाद है? कुछ निवासी चाहते हैं कि तबाही के खंडहरों को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा जाए, जबकि अन्य लोग चाहते हैं कि पुरानी भयावह यादों से बचने के लिए पूरा इलाका शांत और नया दिखे। https://trendkia.com/middle-east/kibbutz-nir-oz-ke-malabe-se-jindagi-ko-phira-snvarane-ki-koshisha-7-aktubara-ke-khauphanaka-hamale-ke-tina-sala-bada-vapasi-ki-jad-44383 TrendKia — Har trend, sabse pehle.