# मिसाइल हमलों के बाद इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की साझा कार्रवाई, सैन्य ठिकाने तबाह

> मध्य पूर्व में सैन्य तनाव तेजी से बढ़ते ही अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित गुटों के खिलाफ साझा हवाई हमले किए हैं, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम उछल गए हैं।

**Type:** article · **Category:** मध्य पूर्व · **Published:** 2026-07-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/middle-east/misaila-hamalon-ke-bada-iraq-men-us-aura-saudi-arabia-ki-sajha-karravai-sainya-thikane-tabaha-11743 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिका, सऊदी अरब, इराक, ईरान, सेंटकॉम, डोनाल्ड ट्रंप, कच्चा तेल, सैन्य हमला

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने उस समय एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया जब अमेरिकी और सऊदी वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने इराक के पूर्वी हिस्से में स्थित ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर साझा हवाई हमले शुरू कर दिए। यह जवाबी कार्रवाई बीते 72 घंटों के दौरान अमेरिकी बलों और सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाकर किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के तुरंत बाद की गई है। इस नए सैन्य टकराव के बाद क्षेत्र में पहले से जारी तनाव अत्यधिक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, वहीं रणनीतिक जलमार्गों में तेल टैंकरों पर हमलों के खतरे को देखते हुए वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी भारी अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

## साझा सैन्य कार्रवाई और सेंटकॉम का रुख
यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस महत्वपूर्ण सैन्य अभियान की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिकी और सऊदी जेट विमानों ने पूर्वी इराक में आतंकवादियों के कई लॉजिस्टिक्स और हथियार भंडारों को निशाना बनाकर सटीक हमले किए हैं। सैन्य कमान का कहना है कि यह कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा निर्देशित उन हमलों का करारा जवाब है जो लगातार अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे थे। सेंटकॉम ने अपने आधिकारिक बयान में इन हमलों को पूरी तरह अनुचित बताया और कहा कि वे अपने मंसूबों में नाकाम रहे हैं। सैन्य कमान ने कड़ा संदेश देते हुए कहा, **"आईआरजीसी और उसके आतंकवादी प्रॉक्सी को आगे की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए इन हमलों को तुरंत रोकना होगा।"**

## इराक में हताहतों का आंकड़ा और पीएमएफ की चेतावनी
इराक में सक्रिय विभिन्न शिया और ईरान समर्थक सशस्त्र गुटों के एकीकृत संगठन Popular Mobilisation Forces (पीएमएफ) ने इन हवाई हमलों की पुष्टि की है। पीएमएफ के अनुसार, अमेरिकी और सऊदी अरब के इस संयुक्त हमले में उसके कम से कम 10 सदस्य मारे गए हैं। संगठन ने जारी बयान में इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे इराक की संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन और एक खतरनाक सैन्य फैलाव करार दिया है। उल्लेखनीय है कि पीएमएफ इराक में सक्रिय कई प्रमुख ईरान समर्थक मिलिशिया गुटों का एक छाता संगठन है, जिसे तेहरान पूरे क्षेत्र में अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत नेटवर्क के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। यह संगठन लंबे समय से इराक में तैनात बाकी बचे अमेरिकी सैनिकों को देश छोड़ने पर मजबूर करने के लिए उन पर हमले करता आया है, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना भी लगातार उनके ठिकानों को निशाना बनाती रही है।

## बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने और समुद्री जहाजों पर हमले की घटनाएं
यह साझा हवाई कार्रवाई मंगलवार को हुए एक बड़े मिसाइल घटनाक्रम के बाद देखने को मिली है। सेंटकॉम के अनुसार, ईरान ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सेना को निशाना बनाते हुए अचानक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। अमेरिकी रक्षा प्रणालियों ने मंगलवार को 17:45 EDT (21:45 GMT) पर हुए इस हमले की सभी मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक मार गिराया। दूसरी ओर, ईरान के आधिकारिक मीडिया के जरिए आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था। इसके अतिरिक्त, तस्नीम न्यूज एजेंसी के जरिए सामने आई जानकारी के अनुसार, आईआरजीसी ने रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर भी सफल हमले करने का दावा किया है।

## सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले
सऊदी अरब ने भी मंगलवार को अपने पूर्वी क्षेत्र में स्थित प्रमुख पेट्रोलियम सुविधाओं की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर हवाई रक्षा अभियान चलाया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने जानकारी दी कि सऊदी सेना ने देश के तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर भेजे गए कई ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर पूरी तरह तबाह कर दिया। रक्षा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इन खतरनाक ड्रोन हमलों को इराकी क्षेत्र के भीतर सक्रिय ईरान से जुड़े मिलिशिया गुटों द्वारा अंजाम दिया गया था।

## कूटनीतिक वार्ता की विफलता और हताहत अमेरिकी सैनिक
सैन्य हमलों का यह नया दौर ऐसे समय में शुरू हुआ है जब महज दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बेहद दोस्ताना बातचीत चलने का जिक्र किया था। उस दौरान दोनों पक्षों के बीच लगातार तीन दिनों तक किसी तरह की गोलाबारी नहीं हुई थी। इस अल्पकालिक शांति से ठीक पहले अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में लगातार 13 रातों तक भीषण बमबारी की थी, जिसमें सुरंगों और पुलों को नष्ट करने का दावा किया गया था और बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबर आई थी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और उसकी सुरक्षा वार्ता का सबसे मुख्य विवादित मुद्दा बना हुआ है, हालांकि तेहरान प्रशासन किसी भी तरह की बातचीत होने से साफ इनकार करता रहा है।

इराक में हुए ताजा हमले उस समय दर्ज किए गए जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन की यात्रा पर थे। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की और साथ ही ईरान के प्रति सख्त नीति के समर्थक रहे प्रमुख अमेरिकी सेनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया। पेंटागन के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों के आदेश दिए जाने के बाद से अब तक कम से कम 624 अमेरिकी सैन्य कर्मी घायल हो चुके हैं। रक्षा विभाग के अनुसार, इनमें से 417 सैनिक अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान जख्मी हुए हैं।

## वैश्विक तेल बाजार में उछाल और आर्थिक प्रभाव
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले वैश्विक ऊर्जा परिवहन में बाधा पड़ने की आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ गई है। बुधवार को एशियाई कारोबारी घंटों की शुरुआत में ही वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 4.3 प्रतिशत बढ़कर 87.70 डॉलर (65.98 पाउंड) प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसी तरह, अमेरिकी बाजार में कारोबार करने वाला कच्चा तेल भी 4.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 82.62 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य संघर्ष इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में ईंधन आपूर्ति शृंखला पर और बुरा असर पड़ सकता है।

## इसका आप पर असर
**भारत और वैश्विक स्तर पर:** मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम (जैसे ब्रेंट क्रूड में 4.3% की वृद्धि) बढ़े हैं, जिससे भारत सहित कई देशों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें महंगी हो सकती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में किस पर सैन्य हमला किया?
अमेरिका और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने इराक के पूर्वी क्षेत्र में स्थित उन ईरान समर्थित आतंकवादियों के लॉजिस्टिक्स और हथियार ठिकानों को निशाना बनाया, जिन पर अमेरिकी बलों और सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हमला करने का आरोप था।

### 2. इस हमले में कितने लोग मारे गए हैं?
इराकी शिया गुटों के संगठन Popular Mobilisation Forces (पीएमएफ) के अनुसार, अमेरिकी और सऊदी अरब के साझा हवाई हमलों में उसके कम से कम 10 सदस्य मारे गए हैं।

### 3. ईरान की ओर से हाल में क्या हमले किए गए?
ईरान ने मंगलवार को अमेरिकी बलों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं जिन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया, और साथ ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाने का दावा किया।

### 4. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?
सैन्य संघर्ष और तेल आपूर्ति में बाधा की आशंका से ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.3 प्रतिशत बढ़कर 87.70 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी तेल 4.2 प्रतिशत बढ़कर 82.62 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

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